Posted in मंत्र और स्तोत्र

गायत्री


​गणेश गायत्री
ॐ एकदंताय विद्महे

वक्रतुंडाय धीमहि ।

तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ब्रह्मा गायत्री
ॐ चतुर्मुखाय विद्महे

हंसारूढाय धीमहि ।

तन्नो ब्रह्म: प्रचोदयात् ।।
विष्णु गायत्री
ॐ नारायणाय विद्महे

वासुदेवाय धीमहि ।

तन्नो विष्णु: प्रचोदयात् ।।
श्रीलक्ष्मी गायत्री
ॐ महालक्ष्मीच विद्महे

विष्णुपत्नीच धीमहि ।

तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात् ।।
महादेव गायत्री
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे

महादेवाय धीमहि ।

तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् ।।
गौरी गायत्री
ॐ सुभागयैच विद्महे

काममालिन्यैच धीमहि ।

तन्नो गौरी प्रचोदयात् ।।
दुर्गा गायत्री
ॐ गिरिजायैच विद्महे

शिवप्रियायैच धीमहि ।

तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।
राम गायत्री
ॐ भरताग्रजाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि ।

तन्नो राम: प्रचोदयात् ।।
सीता गायत्री
ॐ जनक नन्दिन्यै विद्महे भूमिजायैच धीमहि ।

तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।
हनुमान गायत्री
ॐ अंजनीसुताय विद्महे

वायुपुत्राय धीमहि ।

तन्नो हनुमंत: प्रचोदयात् ।।
राधा गायत्री
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि ।

तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।
कृष्ण गायत्री
ॐ देवकी नंदनाय विद्महे

वासुदेवाय धीमहि ।

तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात् ।।
अग्नि गायत्री
ॐ सप्तजिव्हाय विद्महे

अग्निदेवाय धीमहि ।

तन्नो अग्नि: प्रचोदयात् ।।
इंद्र गायत्री
ॐ सहस्रनेत्राय विद्महे वङ्काहस्ताय धीमहि ।

तन्नो इंद्र: प्रचोदयात् ।।
सूर्य गायत्री
ॐ तत्सविर्तुवरेण्यम्

भर्गो देवस्य धीमहि ।

धीयोयोन: प्रचोदयात् ।|
चन्द्र गायत्री
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे

अमृततत्त्वाय धीमहि ।

तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात् ।।
यम गायत्री
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे

महाकालाय धीमहि ।

तन्नो यम: प्रचोदयात् ।।
वरुण गायत्री
ॐ जलबिम्बाय विद्महे

नीलपुरुषाय धीमहि ।

तन्नो वरुण: प्रचोदयात् ।।
पृथ्वी गायत्री
ॐ पृथ्वदेव्यै विद्महे

सहस्रमत्र्यैच धीमहि ।

तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ।।
षण्मुख गायत्री
ॐ षण्मुखाय विद्महे

महासेनाय धीमहि ।

तन्नो षण्मुख: प्रचोदयात् ।।
वैश्वानर गायत्री
ॐ पावकाय विद्महे

सप्तजिव्हाय धीमहि ।

तन्नो वैश्वानर: प्रचोदयात् ।।
आदित्य गायत्री
ॐ भास्कराय विद्महे

महद्युतिकराय धीमहि ।

तन्नो आदित्य प्रचोदयात् ।।
पांडुरंग गायत्री
ॐ भक्तवरदाय विद्महे

पांडुरंगाय धीमहि ।

तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात् ।।
नृसिंह गायत्री
ॐ नृसिंहाय विद्महे

वङ्कानखाय धीमहि ।

तन्नो नृसिह: प्रचोदयात् ।।
ॐ शांति शांति शांति

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

કારણ કે હું માણસ છું…


કારણ કે હું માણસ છું…

પથ્થર સાથે રહી રહી પણ

નથી થયો પથ્થરનો –

કારણ કે હું માણસ છું.

 

પાછળથી એ ઘાત કરે, આઘાત કરે, પ્રતિઘાત કરે

પણ સામે મોઢે લળીલળીને વાત કરે છે –

કારણ કે હું માણસ છું.

 

હોવું જાણે તડકો તીખો,

ઉનાળાનો ઉનો ઉનો,

છતાય જાણે લાગે છે કે

સ્હેજ બચી છે ભીતરમાં ભીનાશ –

કારણ કે હું માણસ છું.

 

સદીઓથી જે ચાલ્યું આવે, ચાલે છે, ને ચાલ્યાં કરશે,

સાચ જૂઠની ભેળસેળની

સમીપ રહીને શોધું મારી જાત –

કારણ કે હું માણસ છું.

 

ઉંઘ વગરની આંખો બળતી મોડી રાતે

નથી કોઈ આજુબાજુ કે સાથે સાથે

કોક વાર હું ફુલ, પાંદડા, પતંગિયા

ને પંખીઓની વાત કરું છું –

કારણ કે હું માણસ છું.

 

 

 

–  ધૈવત શુક્લ

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

તમારી કિડની બચાવો


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Posted in मातृदेवो भव:

45 वर्ष से अधिक उम्र वाले इस सन्देश को सावधानी पूर्वक पढ़ें, क्योंकि यह उनके आने वाले जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है


*45 वर्ष से अधिक उम्र वाले इस सन्देश को सावधानी पूर्वक पढ़ें, क्योंकि यह उनके आने वाले जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है।*👏👏👏

🌹🌹🌹🌹🌹 *सुखमय वृद्धावस्था के लिए*
🌹🌹🌹🌹🌹

*1* 🏠 *अपने स्वयं के स्थायी स्थान पर रहें ताकि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद ले सकें!*

*2*💵 *अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें! अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें।*

*3* *अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकता भी बदल जाती है और कभी कभी चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते* 👬

*4*👥 *उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं , यानी सच्चे हितैषी हों।* 🙏

*5* 🙌 *किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें!*

*6* 👫 *अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करें, उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जीएँ!*

*7* 👳 *अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास कभी ना करें।*

*8* 🖐 *लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें।*

*9*👏 *प्रार्थना करें लेकिन भीख ना मांगे, यहाँ तक कि भगवान से भी नहीं। अगर भगवान से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत!*

*10* 💪 *अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें! छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं।*

*11* 😎 *अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें।*

*12* 💏 *प्रति वर्ष अपने जीवन साथी केे साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं, इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा!*

*13* 😖 *किसी भी टकराव को टालें एवं तनाव रहित जीवन जिऐं!*

*14* 😫 *जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें !*

*15* 😃 *अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं!*

😀 *खुशनुमा जीवन की शुभकामनाओं के साथ*

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ईश्वर का घर


*ईश्वर का घर*

एक बार भगवान दुविधा में पड़ गए, लोगों की बढ़ती साधना वृत्ति से वह प्रसन्न तो थे पर इससे उन्हें व्यवहारिक मुश्किलें आ रही थीं । कोई भी मनुष्य जब मुसीबत में पड़ता, तो भगवान के पास भागा-भागा आता और उन्हें अपनी परेशानियां बताता । उनसे कुछ न कुछ मांगने लगता । भगवान इससे दु:खी हो गए थे ।

अंतत: उन्होंने इस समस्या के निराकरण के लिए देवताओं की बैठक बुलाई और बोले – “देवताओं, मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूं । कोई न कोई मनुष्य हर समय शिकायत ही करता रहता हैं, जिससे न तो मैं कहीं शांति पूर्वक रह सकता हूं, न ही तपस्या कर सकता हूं । आप लोग मुझे कृपया ऐसा स्थान बताएं, जहां मनुष्य नाम का प्राणी कदापि न पहुंच सके ।“

प्रभू के विचारों का आदर करते हुए देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट किए ।

*गणेश जी* बोले – “आप हिमालय पर्वत की चोटी पर चले जाएं ।“

*भगवान ने कहा* – “यह स्थान तो मनुष्य की पहुंच में हैं । उसे वहां पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा ।“

*इंद्रदेव* ने सलाह दी कि “वह किसी महासागर में चले जाएं ।

*वरुण देव* बोले -“आप अंतरिक्ष में चले जाइए ।“

*भगवान ने कहा* – “एक दिन मनुष्यवहां भी अवश्य पहुंच जाएगा ।“ भगवान निराश होने लगे थे । वह मन ही मन सोचने लगे- “क्या मेरे लिए
कोई भी ऐसा गुप्त स्थान नहीं हैं, जहां मैं शांतिपूर्वक रह सकूं ।“

अंत में *सूर्य देव* बोले- “ प्रभू ! आप ऐसा करें कि मनुष्य के हृदय में बैठ जाएं । मनुष्य अनेक स्थान पर आपको ढूंढने में सदा उलझा रहेगा, पर वह यहाँ आपको कदापि न तलाश करेगा ।“

*ईश्वर को सूर्य देव की बात पसंद आ गई* । उन्होंने ऐसा ही किया और वह मनुष्य के हृदय में जाकर बैठ गए ।

उस दिन से मनुष्य अपना दुख व्यक्त करने के लिए *ईश्वर* को *ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं, आकाश, पाताल में ढूंढ रहा है पर वह मिल नहीं रहें* ।

मनुष्य अपने भीतर बैठे हुए ईश्वर को नहीं देख पा रहा हैं

2.

(((( बाँके बिहारी जी का प्रेम ))))
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एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी…
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मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ …
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बड़ी मिनतो के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया…
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मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से सनी एक कपड़े की कातर थी …
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मैंने मईया से पूछा, मईया ये क्या है…
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मईया बोली मैं वृंदावन बिहारी जी के मंदिर गई थी, मैंने गुलक में 200 रूपये डाले और दर्शन के लिऐ आगे बिहारी जी के पास चली गई …
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वहाँ गोस्वामी जी ने मेरे हाथ मे एक पेड़ा रख दिया, मेने गोस्वामी जी को कहा मुझे दो पेड़े दे दो पर गोस्वामी जी ने मना कर दिया..
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मैंने उससे गुस्से मे कहा मैंने 200 रूपये डाले है मुझे पेड़े भी दो चाहिए पर गोस्वामी जी नहीं माने …
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मैंने गुस्से मे वो एक पेड़ा भी उन्हे वापिस दे दिया और बिहारी जी को कोसते हुए बाहर आ कर बैठ गई …
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मैं जैसे ही बाहर आई तभी एक बालक मेरे पास आया और बोला मईया मेरा प्रसाद पकड़ लो मेने जूते पहनने है…
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वो मुझे प्रसाद पकड़ा कर खुद जूते पहनने लगा और फिर हाथ धोने चला गया …
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फिर वो नही आया .. मै पागलो की तरह उसका इंतजार करती रही …
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काफी देर के बाद मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा …
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उसमें 200 रूपये, चार पेड़े और एक कागज़ पर लिख रखा था ( मईया अपने लाला से नाराज ना होया करो ) ये ही वो लिफाफा है …

Posted in मातृदेवो भव:

स्वर्ग से मिट्टी


एक टीचर ने मजाक में
बच्चो से कहा
जो बच्चा कल स्वर्ग से
मिट्टी लायेगा, मैं
उसे इनाम दूँगी..!
अगले दिन टीचर
क्लास में सब बच्चों से
पूछती है…..
क्या कोई बच्चा मिट्टी लाया?
सारे बच्चे खामोश रहते हैं…
एक बच्चा उठकर
टीचर के पास जाता है
और कहता है,
लीजिये मैडम,
मैं लाया हूँ स्वर्ग से
मिट्टी..!
टीचर उस बच्चे को
डांटते हुए कहती है;
मुझे बेवकूफ़ समझता है..
कहाँ से लाया है ये
मिट्टी..?




रोते रोते बच्चा बोला –
“मेरी माँ के
पैर के नीचे से……….
fir Vo teacher ro padi aur us bache ko gale lga lia
💕 love u माँ 💕

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

किरपा


​”किरपा” बाबा का दरबार लगा था और भक्त अपनी दुःख भरी कहानियाँ सुनाकर बाबा से सलाह मांग रहे थे।

भक्त: बाबा की जय हो। बाबा मुझे कोई रास्ता दिखाओ, मेरी शादी तय नहीं हो रही, आपकी शरण में आया हूँ।

बाबा: आप काम क्या करते हो?

भक्त: शादी होने के लिए कौन सा काम करना उचित रहेगा?

बाबा: तुम मिठाई की दूकान खोल लो।

भक्त: बाबा, वो तो 30 सालों से खुली हुई है, मेरे पिताजी की मिठाई की ही दुकान है।

बाबा: शनिवार को सुबह 11 बजे दुकान खोला करो।

भक्त: शनि मंदिर के बगल में ही मेरी दूकान है और मैं रोज 11 बजे ही खोलता हूँ।

बाबा: काले रंग के कुत्ते को मिठाई खिलाया करो।

भक्त: मेरे घर दो काले कुत्ते ही है और मैं सुबह शाम उन्हें मिठाई खिलाता हूँ।

बाबा: मंगलवार को मंदिर जाया करो।भक्त: मैं केवल मंगलवार ही नहीं, हर रोज मंदिर जाता हूँ। 

दर्शन के बगैर मैं खाने को छूता तक नहीं।

बाबा: कितने भाई बहन हो?

भक्त: बाबा आपके हिसाब से शादी तय होने के लिए कितने भाई बहन होने चाहिए?

बाबा: दो भाई एक बहन होनी चाहिए।

भक्त: बाबा, मेरे असल में दो भाई एक बहन ही है।

बाबा: दान किया करो।

भक्त: बाबा मैंने अनाथ आश्रम खोल रखा है, रोज दान करता हूँ।

बाबा: एक बार किसी तीर्थ स्थान हो आओ।

भक्त: बाबा आप के हिसाब से शादी होने के लिए कितने बार तीर्थ जाना जरुरी है?

बाबा: जिंदगी में एक बार तो जाना ही चाहिए।

भक्त: मैं तीन बार जा चूका हूँ।

बाबा: नीले रंग की शर्ट पहना करो।

भक्त: बाबा मेरे पास सिर्फ नीले रंग के ही कुर्ते हैं, कल सारे धोने के लिए दिए हैं, वापिस मिलेंगे तो सिर्फ वही पहनूंगा।

बाबा को सर में खुजली होने लगी .?.

भक्त: बाबा, एक बात कहूँ?

बाबा: हां जरूर, बोलो बेटा जो बोलना है।

भक्त: मैं पहले से ही शादी-शुदा हूँ और तीन बच्चों का बाप भी हूँ इधर से गुजर रहा था, सोचा कुछ आपकी “किरपा” लेता चलूँ.?.

लगता है आज “किरपा” तो बाबा पर ही हो गयी .?

..R.K.Neekhara

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

गणतंत्र का इतिहास


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Prasad Davrani

गणतंत्र का इतिहास —
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– पूरी दुनिया को गणतंत्र का पाठ इसी भारत की धरा से पढ़ाया गया था। हमारे ही देश में प्रथम गणतंत्र स्थापित हुआ जिसकी सफलता पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया।
– राम राज्य में जब श्रीराम अयोध्या से वन को गए तो मार्ग में आने वाले अनेक छोटे छोटे राज्यों को अपने अधीन करने की जगह सशक्त स्थानीय नेतृत्त्व चुनकर उन्हें अत्याचार का प्रतिकार करने की प्रेरणा देते गए.
– गण यह मूल में वैदिक शब्द था। वहाँ ‘गणपति’ और ‘गणनांगणपति’ ये प्रयोग आए हैं। इस शब्द का सीधा अर्थ समूह था।
– सृष्टिरचना के लिए गणतत्व की अनिवार्य आवश्यकता है। नानात्व से ही जगत् बनता है।वैदिक सृष्टिविद्या के अनुसार मूलभूत एक प्राण सर्वप्रथम था, वह गणपति कहा गया। उसी से प्राणों के अनेक रूप प्रवृत्त हुए जो ऋषि, पितर, देव कहे गए। ये ही कई प्रकार के गण है। जो मूलभूत गणपति था वही पुराण की भाषा में गणेश कहा जाता है।
– “गणपति” का अभिप्राय भी गणतंत्र के शासक से है.
– गणों के स्वामी गणेश हैं और उनके प्रधान वीरभद्र जो सप्तमातृका मूर्तियों की पंक्ति के अंत में दंड धारण कर खड़े होते हैं। शिव के अनंत गण हैं जिनके वामन तथा विचित्र स्वरूपों का गुप्तकालीन कला में पर्याप्त आकलन हुआ है।
– हजारों वर्ष पहले भी भारतवर्ष में अनेक गणराज्य थे, जहाँ शासन व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ थी और जनता सुखी थी। गण शब्द का अर्थ संख्या या समूह से है। गणराज्य या गणतंत्र का शाब्दिक अर्थ संख्या अर्थात बहुसंख्यक का शासन है।
– इस शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में चालीस बार, अथर्व वेद में नौ बार और ब्राह्मण ग्रंथों में अनेक बार किया गया है। वहां यह प्रयोग जनतंत्र तथा गणराज्य के आधुनिक अर्थों में ही किया गया है।
– वैदिक साहित्य में, विभिन्न स्थानों पर किए गए उल्लेखों से यह जानकारी मिलती है कि उस काल में अधिकांश स्थानों पर हमारे यहां गणतंत्रीय व्यवस्था ही थी।
– कालांतर में, उनमें कुछ दोष उत्पन्न हुए और राजनीतिक व्यवस्था का झुकाव राजतंत्र की तरफ होने लगा। ऋग्वेद के एक सूक्त में प्रार्थना की गई है कि समिति की मंत्रणा एकमुख हो, सदस्यों के मत परंपरानुकूल हों और निर्णय भी सर्वसम्मत हों। – कुछ स्थानों पर मूलतः राजतंत्र था, जो बाद में गणतंत्र में परिवर्तित हुआ।
– महाभारत के सभा पर्व में अर्जुन द्वारा अनेक गणराज्यों को जीतकर उन्हें कर देने वाले राज्य बनाने की बात आई है। महाभारत में गणराज्यों की व्यवस्था की भी विशद विवेचना है। – कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी लिच्छवी, बृजक, मल्लक, मदक और कम्बोज आदि जैसे गणराज्यों का उल्लेख मिलता है।
– उनसे भी पहले पाणिनी ने कुछ गणराज्यों का वर्णन अपने व्याकरण में किया है।
– आगे चलकर यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने भी क्षुदक, मालव और शिवि आदि गणराज्यों का वर्णन किया।
– स्वयं राजा या राजवंश भी नहीं बच सकता था। राजा सागर को अपने अत्याचारी पुत्र को निष्कासित करना पड़ा था। – महाभारत के अनुशासन पर्व में स्पष्ट कहा गया कि जो राजा जनता की रक्षा करने का अपना कर्त्तव्य पूरा नहीं करता, वह पागल कुत्ते की तरह मार देने योग्य है। राजा का कर्त्तव्य अपनी जनता को सुख पहुंचाना है।
– एक बार महात्मा बुद्ध से पूछा गया कि गणराज्य की सफलता के क्या कारण हैं? इस पर बुद्ध ने सात कारण बतलाए थे-
1. जल्दी- जल्दी सभाएं करना और उनमें अधिक से अधिक सदस्यों का भाग लेना।
2. राज्य के कामों को मिलजुल कर पूरा करना।
3. कानूनों का पालन करना तथा समाज विरोधी कानूनों का निर्माण न करना।
4. वृद्ध व्यक्तियों के विचारों का सम्मान करना।
5. महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार न करना।
6 स्वधर्म में दृढ़ विश्वास रखना।
7. अपने कर्तव्य का पालन करना।
अब यह फैसला गण को ही करना है कि हमारा आज का गणतंत्र कितना सफल है।

Posted in भारतीय शिक्षा पद्धति

अपूज्या; यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादर त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षँ,मरणँ भयम


आर्य पुष्पेन्द्र सिंह

अपूज्या; यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादर
त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षँ,मरणँ भयम

अर्थात::
जहा पर अयोग्यों को पूजा जाता है और विद्वानो का निरादर किया जाता है
वहा तीन चीजे प्रवेश कर जाती है-१.भुखमरी २. मृत्यु ३. भय

गुरुकुल शिक्षा पद्धति नस्ट होने पर आज भारत वर्ष में सच्चे सन्यासी और देशभक्तो का अनादर होता आ रहा है और उनके स्थान पर पाखंडी दुस्टो की पूजा होंने से राष्ट्र व धर्म की दुर्गति हो रही है ।

विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर , गांधी , नेहरू जैसे अंग्रेज़ो के एजेंटो ने बहुत मुर्ख बनाया हिन्दू समाज को नपुंसकता , माँसाहार , शराब और भी जाने क्या क्या अवगुण महान शिक्षाओ के रूप में दे दिए ।

नियमित रूप से मांस खाने वाले , सिगरेट पीने वाले, पशुबलि करने वाले, गौमांस का समर्थन करने वाले, मोहमद और ईसा जैसे आतंकी व्याभिचारी को महान संत कहने वाले विवेकानन्द को आदर्श हिन्दू संत कहना कितना बड़ा अभिशाप है

आधुनिक काल में चक्रपाणि महाराज, प्रमोद कृष्णन जैसे काग्रेसी के पालतू साधू मुल्लो के तलवे चाटते है , हिन्दुओ को कल्कि अवतार के भृम में कर्तव्य हीन बना रहे है , कैराना में जाकर मात्र 2 दिनों में एक झूठी जांच रिपोर्ट इन्होंने दी और कहा की किसी हिन्दू का पलायन नहीं हुआ है ।

आशाराम, निर्मल बाबा, राधास्वामी, निरंकारी, ब्रह्मकुमारी , आशुतोष महाराज , रामपाल , रामदेव जैसे तथाकथित संत अरबो खरबो के मालिक है , हेलीकाप्टर में घूमते है और अपने को सन्यासी कहते है , ये कभी हिन्दू समाज को इस्लाम का सच नहीं बताते , उन्हें पाखंडो में फंसा कर रखते है और खूब लुटते है । कुरान को ईश्वरीय ग्रन्थ कहते है।
अकबर की आरतीयां अपनी किताबो में छापते है
अयोध्या में हिन्दुओ के दान के पैसो से इन संतो ने मस्जिद बनवा दी।
ये बापू संत , हमारे दान के पैसो से मुल्लो को हज पर भेजते है।

अपने आपको ईश्वर का अवतार बताने को होड़ लगी है

आज अनेको हिन्दू संघठनो में भी इन्ही अधर्मी संघठनो का सम्मान होता है जो मुल्लो को भी अपना भाई मानते है , उन्हें राष्ट्रवादी मानते है , उन्हें अपने संघठनो में सदस्यता देते है।

जब तक समाज धर्मात्माओं की जगह इन दुस्ट लोगो की पूजा करता रहेगा ,
जब तक वेद विज्ञान की जगह जादू टोनों चमत्कारो को महत्त्व दिया जाएगा

जब तक हिन्दू समाज सत्य असत्य को जाने बिना , सुनी सुनाई बातो को धर्म मानता रहेगा तब तक गुलाम ही बनकर रहेगा ।

अपना विवेक जगाओ , बुद्धि खोलो और अधर्मियों की पहचान करो, तभी धर्म की रक्षा हो पाएगी।

गुरुकुल के विद्वान राष्ट्रवादी आचार्यो द्वारा आयोजित 2 दिवीसीए लघु गुरुकुल की कक्षा को कीजिये और धर्म के वैज्ञानिक स्वरुप को जानिये

Posted in હાસ્ય કવિતા

બૈરી લાવ્યો છે


બૈરી લાવ્યો છે
તો હરખાતો નઇ,
હવે પરણ્યો છે તો પસ્તાતો નઈ.

શરુ માં લાગશે
એ રૂપ નો અમ્બાર,
ડાકણ જેવી બને તો ગભરાતો નઇ.

અણિયારી
આંખો ના ભલે કર વખાણ,
પાછળથી ભાલા જેમ ખૂંચે તો ચિડાતો નઇ.

ઝુલ્ફો ને કહે છે ને
ઘનઘોર ઘટા જેવી,
દાળ-શાક માં રોજ આવે તો ખિજાતો નઇ.

કોયલ કન્ઠી કહી
પ્રશંસા બહુ કરે છે,
ગાળો નો સુર છેડે તો ડઘાતો નઈ.

નાજૂક નમણી
નાગરવેલ જેવા લાગતા હાથ,
વેલણ ના છૂટાં ઘા કરે તો બિતો નઇ.

પગ લાગે છે ને
કોમલ પન્ખુડી જેવા,
પાછળથી લાતો મારે તો હેબતાતો નઇ.

બે ચાર દા’ડા લગી
લાગશે આ નવું નવું,
રોજ નુ થ્યુ એમ બોલી ને તુ ચિલ્લાતો નઇ.

પરણ્યો જ છે
તો ભોગવજે ચુપચાપ,
લડી લડી એની સાથે હાડકાં ને તોડાવ તો નઇ…

(બધા પરણેલા ને સમર્પિત)

આમાં કવિ નું બૈરું માથા ભારે લાગે છે…