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Urjit Patel

​My take as below :
I am getting many forwarded message engineered to create doubts in mind of innocent people. 
I will try to equip you to counter it with researched reply.
Some common disinformation as below :
Urjit Patel became Governor two months back then how come preparation started 6 months back as he has put sign on currency ?
First preparation for currency began 6 months ago. Preparation means concept, design & prototype & several round of approvals and corrections. It’s no different from what we do to produce garment. Only in last month it goes into production. It’s easy to understand for you and me. Those who circulate this are novice and don’t know subject well. 
BJP has helped Ambanis & Adanis ?
The allegation of give and take with Ambanis are only a rumour no proof. Tomorrow I can say Arvind Kejriwal or Rahul is also funded by Ambanis and Adanis. You know corporate houses fund both parties as they are not fools to promote one against other. Ask yourselves One question how come Modi Govt imposed Rs 10000 Cr penalty on Reliance Oil of Mukesh Ambani which successive Congress govt couldn’t do despite courts had indicted them, if Modi was favouring them out of way ? Think….
Reliance converted black money through Jio launch ?
If Jio was launched free it wasn’t free at all if you do reverse costing. They Also sold phones with connection and if you calculate the price of handset in China you will know they made cool profits overall ! They are not fools as we think about them. I had to pay Rs. 7000/- handset ( a handset not costing more than Rs. 1000/- in china ) so I don’t know how this can be free ?
Urjit Patel related to Reliance ?
There is a system to elect RBI governor and the new governor belonged to the senior most team of Rajan. When Rajan or new governor joined RBI then it was not BJP who brought them into system. Urjit Patel was promoted as Dy. Governor of RBI on 11th Jan 2013 by CONG-UPA govt and Dy. governor succeeds Governor after retirement was not the system made by Modi. They must have chosen him on some sound background so now to say Urjit Patel is related to Reliance doesn’t cut ice. 
Infact had Modi dismissed him the opposition had accused him for favouritism and conspiracy. Infact we should thank PM that he retained many high ranking officers appointed by UPA in his govt !!!
As you see these kind of vague and motivated accusations are circulated by Dirty trick department of Congress & AAP to create doubt and divert attention, and pressurise govt to rollback a historic, gutsy step in right direction.
Reality is Narendra Modi has done so much of work in last two years that they are afraid that he will come back. It’s all dirty politics rather than genuine politics in service of country. I can go on and on but I would like you to use your own wisdom to decide. 
Give me example of any harder working prime minister any where in world then I will stop supporting Narendra Modi !! Can anyone tell me ?
If Modi is wrong then criticise him but if he is right then support him. That’s the only thing we should be doing as Indian. 
Let me say, it was not easy to take such a huge decision to demonetise currency which is biggest since independence. No govt apart from him took such a big risk which if things had gone wrong his Govt would have collapsed. 
Pls send this reply to person who forwards you wrong information & SHARE this in your group as far as possible.

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Think abt tht…..

आप लोगो को *नायक* मूवी याद है। एक ईमानदार अनिल कपूर को रोकने के लिए कैसे सारी आपसी विरोधी पार्टी आपस में एक हो गयी थी।

आज भी ऐसा ही हो रहा है। *एक नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए सारी विरोधी पार्टी आज एक हो गयी है*। ताकि काले धन को रोकने के फैसले को गलत साबित कर इसे वापिस लेने के लिए वो सरकार पर दबाब डाल सके।

*आज ममता और लेफ्ट एक हो गए जो कलकत्ता में विरोधी है। आज मुलायम और मायावती एक हो गए जो यूपी में विरोधी है। आज कांग्रेस, केजरीवाल, शरद यादव, लालू सब एक हो गए है। यहाँ तक की शिवसेना जो इनका साथ देती है वो भी विरोध कर रही है*। क्योकि उन्हें पता है इस अभियान के सफल होने पर ब्लैक मनी के खत्म होने से *उनकी राजनीती पर गहरा आघात* होगा।

क्यूंकि काले धन के ख़तम होने *गरीब और आम इंसान को कई फायदे होंगे*। जो की सबसे ज्यादा वोट डालते है। *और वो सब सड़क पर आ जायँगे जो काली कमाई करने के चक्कर में कभी वोट डालने ही नहीं जाते है*।

पर आपको पता है नायक में अनिल कपूर *क्यों जीत पाया*। क्योकि राज्य की जनता उनके साथ थी।
*आज हमारे देश के प्रधानमंत्री को हमारे साथ की जरुरत है*।

अगर आपको लगता है जो प्रधानमंत्री कर रहे है *वो सही है*। तो ज्यादा से ज्यादा इस मेसेज को *फॉरवर्ड करे(। और लोगो से *अपील करे की वो धीरज रखे*। लोगो की मदद करे। लोगो को समझाये। *ताकि ये सब विरोधी अपने प्रयास में सफल ना हो पाये*।

*जय हिन्द*।🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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घोड़े लग गए नेपाल के

घोड़े लग गए नेपाल के—-
RBI ने नेपाल को साफ़ कह दिया की 500 – 1000 के नोट नहीं बदले जायेंगे ।
जब भारत सरकार ने नेपाल को 3.5 करोड़ ही लेन देन के लिए दिए थे तो 10 हजार करोड़ + नेपाल के बैंक के 3.5 करोड़ रुपिया कहाँ से आया।।
इनमें से ज्यादातर रूपया ISI का और यहाँ के भ्रस्ट नेताओं के हैं ।।
सबसे खतरनाक और अच्छी बात की इन्ही पैसों से चीन से हवाला के जरिये स्मगल होकर माल यहाँ भारत में आता था जो की अब बंद हो गया है यानी चीन की हालत खराब ।
यानी मोदी ने सिर्फ यहाँ देशद्रोहियों को ठिकाने नहीं लगाया बल्कि एक ही वार से पकिस्तान , चीन , नेपाल तक को ठिकाने लगा दिया ।।

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नमस्ते बनाम नमस्कार

*🍃🌷नमस्ते बनाम नमस्कार🌷🍃*

कुछ समय से नमस्ते के स्थान पर नमस्कार का प्रयोग प्रारम्भ हुआ है और अब धीरे-धीरे यह पर्याप्त विस्तृत हो चुका है, विस्तार भी हो रहा है। पढ़े-लिखे तथा शिक्षित कहलाने वाले लोगों में। अब तो नमस्कार भी नमश्कार बनने लगा है। किन्तु यह कोई नहीं सोचता कि हम कह क्या रहे हैं। यदि अभिवादन का अर्थ आपस में मिलते समय एक दूसरे को बिना विचारे चाहे जो कुछ कह देना है
तो कोई भी शब्द-चाहे सार्थक से सार्थक हो या निरर्थक से निरर्थक-निश्चित करने की क्या आवश्यकता है? जिस के जो मन में आया कह दिया।

बिना पढ़े-लिखे लोगों से कुछ शिकायत नहीं। वह तो अर्थ विचार की योग्यता से रहित हैं, किन्तु खेद तो इस बात का है कि जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त कहा जाता है, यह गड़बड़ उन्हीं से प्रारम्भ हुई और उन्हीं में बढ़ती जा रही है।

यदि शिक्षा का इतना लाभ भी नहीं कि उससे विचार की योग्यता भी आ सके तो इस प्रकार की पढ़ाई का क्या लाभ? इतने पर भी गर्व यह कि हम इतने शिक्षित हैं और शिक्षा दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। किन्तु वास्तविकता यह है कि जो शिक्षा विचार शक्ति नहीं बढ़ा सकती, वह तो निरर्थक ही है।

बात हम कह रहे थे नमस्ते की। नमस्ते का अर्थ है *”मैं आपका मान करता हूँ।”* यह शब्द अत्यन्त सार्थक तथा सारगर्भित है। एक दूसरे से मिलने पर इसी भाव की अभिव्यक्ति होनी चाहिए। नमस्कार में इस भाव की अभिव्यक्ति के लिए कोई स्थान नहीं।

नमस्कार का अर्थ है *नमः + कार* और *”नमः”* का अर्थ है मान करना―
*”कार”* शब्द तो शब्द की पूर्ति के लिए लगाया जाता है, उससे यहाँ और क्या अर्थ लिया जा सकता है? *”ते”* का अर्थ आपके लिए अथवा आप को है। *”कार”* से *”ते”* का अर्थ प्रगट नहीं होता। *”कार”* शब्द तो शब्द अर्थात् पद-पूर्ति के लिए प्रयुक्त होता है जैसे ओ३म् का ओंकार―अर्थ केवल ओ३म्। *”अ”* का *”अकार”* अर्थ केवल―
*”अ”* वर्ण। *”क”* का *”ककार”* अर्थ केवल *”क”* वर्ण। ठीक इसी प्रकार से नमस्कार का अर्थ है *”नमः”*―
*”कार”* शब्द अलग से कोई अर्थ प्रगट नहीं करता। इस प्रकार अकेले *नमः* से ―जिससे मिलने पर उसके प्रति मान की भावना प्रगट करनी होती है―वह नहीं हो पाती। *”ते”* शब्द को *”नमः”* के साथ लगाने से वह स्पष्ट हो जाती है―यही कारण है कि प्राचीन इतिहास और अन्य समस्त वैदिक तथा भारतीय वाङ्मय में नमस्ते का प्रयोग मिलता है।

यदि नमस्कार से किसी भाव की अभिव्यक्ति हो सकती है तो केवल यह कि *”नमस्ते किया करो”* अथवा *”नमस्ते करना चाहिए।”* किसी को अभिवादन करते सभय उसके प्रति मान प्रगट न करके उसे यह आदेश देना कि *”नमस्ते किया करो”* अथवा यह कहना कि *”नमस्ते करना चाहिए”* कहाँ की बुद्धिमानी है? इससे तो शिक्षित व्यक्ति अशिक्षित ही नहीं अपितु अनपढ़ सिद्ध हो जाता है। विज्ञ पाठकों से यह आशा की जा सकती है कि वह इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करके सुधार कर लेंगे।

*(साभार―स्वामी वेदमुनि परिव्राजक)*