Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

बेटी को सही रास्ता दिखाये


​बहु द्वारा सास को ठिकाने लगाने का आसान तरिका , सभी बहुए जरूर पढे और अनुसरण करे
“एक चुटकी ज़हर रोजाना”
आरती नामक एक युवती का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास के साथ अपने ससुराल में रहने लगी। कुछ ही दिनों बाद आरती को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। सास पुराने ख़यालों की थी और बहू नए विचारों वाली।

आरती और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।

दिन बीते, महीने बीते. साल भी बीत गया. न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती और न आरती जवाब देना। हालात बद से बदतर होने लगे। आरती को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी. आरती के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता। अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी.

एक दिन जब आरती का अपनी सास से झगडा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई।

आरती के पिता आयुर्वेद के डॉक्टर थे. उसने रो-रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और बोली – “आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…”

बेटी का दुःख समझते हुए पिता ने आरती के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा – “बेटी, अगर तुम अपनी सास को ज़हर खिला कर मार दोगी तो तुम्हें पुलिस पकड़ ले जाएगी और साथ ही मुझे भी क्योंकि वो ज़हर मैं तुम्हें दूंगा. इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा.”

लेकिन आरती जिद पर अड़ गई – “आपको मुझे ज़हर देना ही होगा ….

अब मैं किसी भी कीमत पर उसका मुँह देखना नहीं चाहती !”

कुछ सोचकर पिता बोले – “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी। लेकिन मैं तुम्हें जेल जाते हुए भी नहीं देख सकता इसलिए जैसे मैं कहूँ वैसे तुम्हें करना होगा ! मंजूर हो तो बोलो ?”

“क्या करना होगा ?”, आरती ने पूछा.

पिता ने एक पुडिया में ज़हर का पाउडर बाँधकर आरती के हाथ में देते हुए कहा – “तुम्हें इस पुडिया में से सिर्फ एक चुटकी ज़हर रोज़ अपनी सास के भोजन में मिलाना है।

कम मात्रा होने से वह एकदम से नहीं मरेगी बल्कि धीरे-धीरे आंतरिक रूप से कमजोर होकर 5 से 6 महीनों में मर जाएगी. लोग समझेंगे कि वह स्वाभाविक मौत मर गई.”

पिता ने आगे कहा -“लेकिन तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा ताकि तुम्हारे पति को बिलकुल भी शक न होने पाए वरना हम दोनों को जेल जाना पड़ेगा ! इसके लिए तुम आज के बाद अपनी सास से बिलकुल भी झगडा नहीं करोगी बल्कि उसकी सेवा करोगी।

यदि वह तुम पर कोई टीका टिप्पणी करती है तो तुम चुपचाप सुन लोगी, बिलकुल भी प्रत्युत्तर नहीं दोगी ! बोलो कर पाओगी ये सब ?”

आरती ने सोचा, छ: महीनों की ही तो बात है, फिर तो छुटकारा मिल ही जाएगा. उसने पिता की बात मान ली और ज़हर की पुडिया लेकर ससुराल चली आई.

ससुराल आते ही अगले ही दिन से आरती ने सास के भोजन में एक चुटकी ज़हर रोजाना मिलाना शुरू कर दिया।

साथ ही उसके प्रति अपना बर्ताव भी बदल लिया. अब वह सास के किसी भी ताने का जवाब नहीं देती बल्कि क्रोध को पीकर मुस्कुराते हुए सुन लेती।

रोज़ उसके पैर दबाती और उसकी हर बात का ख़याल रखती।

सास से पूछ-पूछ कर उसकी पसंद का खाना बनाती, उसकी हर आज्ञा का पालन करती।

#दीपकतँवर पूजा तँवर

कुछ हफ्ते बीतते बीतते सास के स्वभाव में भी परिवर्तन आना शुरू हो गया. बहू की ओर से अपने तानों का प्रत्युत्तर न पाकर उसके ताने अब कम हो चले थे बल्कि वह कभी कभी बहू की सेवा के बदले आशीष भी देने लगी थी।

धीरे-धीरे चार महीने बीत गए. आरती नियमित रूप से सास को रोज़ एक चुटकी ज़हर देती आ रही थी।

किन्तु उस घर का माहौल अब एकदम से बदल चुका था. सास बहू का झगडा पुरानी बात हो चुकी थी. पहले जो सास आरती को गालियाँ देते नहीं थकती थी, अब वही आस-पड़ोस वालों के आगे आरती की तारीफों के पुल बाँधने लगी थी।

बहू को साथ बिठाकर खाना खिलाती और सोने से पहले भी जब तक बहू से चार प्यार भरी बातें न कर ले, उसे नींद नही आती थी।

छठा महीना आते आते आरती को लगने लगा कि उसकी सास उसे बिलकुल अपनी बेटी की तरह मानने लगी हैं। उसे भी अपनी सास में माँ की छवि नज़र आने लगी थी।

जब वह सोचती कि उसके दिए ज़हर से उसकी सास कुछ ही दिनों में मर जाएगी तो वह परेशान हो जाती थी।

इसी ऊहापोह में एक दिन वह अपने पिता के घर दोबारा जा पहुंची और बोली – “पिताजी, मुझे उस ज़हर के असर को ख़त्म करने की दवा दीजिये क्योंकि अब मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती … !

वो बहुत अच्छी हैं और अब मैं उन्हें अपनी माँ की तरह चाहने लगी हूँ!”

पिता ठठाकर हँस पड़े और बोले – “ज़हर ? कैसा ज़हर ? मैंने तो तुम्हें ज़हर के नाम पर हाजमे का चूर्ण दिया था … हा हा हा !!!”

“बेटी को सही रास्ता दिखाये,

माँ बाप का पूर्ण फर्ज अदा करे”
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Ndtv


​Pronoy Roy (head of NDTV) is married to Radhika Roy. Radhika Roy is the sister of Brinda Karat of CPI(M). Brinda Karat is the wife of Prakash Karat , ex-head of CPI(M).
Barkha Dutt of NDTV is currently married to Haseeb Ahmed Drabu, who is a PDP politician from J&K

Nidhi Razdan of NDTV is live-in partner of Omar Abdullah, former CM of J&K

Sonia Singh of NDTV is married to RPN Singh of Cong and a former minister in UPA govt.
Rajdeep Sardesai of India Today (formerly CNN-IBN and NDTV before that) is married to Sagarika Ghose who is currently with ToI and ET Now (formerly CNN-IBN). Sagarika Ghose is the daughter of Bhaskar Ghose, who was appointed as Director General of Doordarshan by Cong govt. Bhaskar Ghose has been accused of doing financial favours to NDTV, his son in law’s employer.
Vishnu Som of NDTV is the son of Himachal Som. Himachal Som was then made Indian ambassador to ‘Italy’ by Cong govt. Reba Som is the mother of Vishnu Som. She is an ’eminent intellectual’. She has written books about Nehru and Congress.
Vikram Chandra is an anchor and the CEO of NDTV. He has been accused of money laundering to the tune of 5500 Cr for P Chidambaram from the 2G scam loot.
Sitaram Yechuri is the current head of CPI(M). He is married to Seema Chishti. Seema Chishti is the resident editor of Indian Express , Delhi.

Sanjay Jha is the spokesperson of Cong and a frequent face on TV. Rajkamal Jha is his cousin. Rajkamal is the Managing Editor of Indian Express.
I hope now you realise why English language media paints Modi/BJP/RSS as a monster. I would encourage you to google and verify the correctness of each of these facts.
Forward this message to every Indian so that the real evil face of media is exposed. Our media is wolf in sheep’s clothes. Now you understand why some channels are vomitting venom continuosly.

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सुप्रीम


​करोड़ों जिंदगियां – आज दिन भी – इस न्याय व्यवस्था के आगे – लाचार है…

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{1} – सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केसों की संख्या- – 61,436

{2} – देश के हाईकोर्टों में पेंडिंग केसों की संख्या- – 38,91,076

 {3} – देश में निचली अदालतों में पेंडिंग केसों की संख्या- 2,30,79,723

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आज दिन देश की अदालतों में चल रहे इन सारे मुकदमों की संख्या – तीन करोड़ –  के करीब है;

इस का पूरा अर्थ भी जान लीजिये :–– 

{1} – तीन करोड़ मुकदमों में – सीधे सीधे – मुदकमा दर्ज करने वाले – तीन करोड़ – भारतीय नागरिक – जुड़े हुए है…

{2} – तीन करोड़ मुकदमों में – तकरीबन हर मुकदमें – कम से कम 3 लोगों को दोषी मान ले क्योकि हर मुकदमें में 1 और 2 आदमी नही कई कई मुकदमों में दोषी माने जाने वाले लोगों की संख्या ज्यादा ही होती है – तो – ये संख्य हो गई – 3 गुणा 3 = नो करोड़ …

मुकदमा करने वाले तीन करोड़ – जिन पर मुकदमें चल रहे है वो नो करोड़ यानि कुल – 12 बराहा करोड़ लोग देश के विभिन्न कोर्टों में फसे हुए है…

इस सारे प्रकरण में – दुसरे लोग भी – जुड़े होते है जैसे – यार दोस्त, मिलने वाले, जानकार, रिश्तेदार – ऐसा करके – अदालतों के चक्कर काटने वाले लोगों की संख्या – 12 करोड़ से 15 करोड़ हो जाती है..{कोई शक}..

असली अपराधियों से “कई गुणा” ज्यादा “निर्दोष फसे या फसाये गये” लोगों की पैरवी करते पाए जाते है..

तो बन्धुओं – इस खेल में 12 या 15 करोड़ लोगों के साथ साथ उन के – परिवारों पर भी गौर कर लीजिये,

ये संख्या भी – 12 या 15 करोड़ ही हुई अब एक एक परिवार में कम से कम 6 आदमी भी माने {क्योकि हम 2 हमारे 2 से भी 4 हो जाते है}.. 

15 गुणा 6 = 90 – तब भी ये संक्या 12 करोड़ परिवारों 72 करोड़ और अगर 15 करोड़ माने तो 90 करोड़ हो जाती है..

देश में 24 हाई कोर्ट है – और – 600 जिला अदालतें है – और- वहां पहुंचने वाले लोग 90 करोड़ हो तो- ??- कितनी भीड़ होती होगी –??–

अब आप – भारतीय अदालतों में लगने वाली भीड़ का कुछ अंदाजा कर ही सकते है – या – आप भी – मेरी तरह मुर्ख ही है –??—

ये – “अंग्रेजों”- का “हम भारतीय लोगों” को – “उलझाये और दबाये” – रखने का एक “हथकंडा” था – जो नेहरु और तात्कालीन कोंग्रेसियों से – “अक्षर अक्षर” – “पूरा का पूरा” देश पर लागू कर दिया…       

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उसी बिरादरी के लोग कह रहे है बैंको में भीड़ बहुत और देश में दंगो की सम्भावना है –??–

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“कौन थे वो लोग” 

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“किस ने लाद दिया – देश पर ऐसा सिस्टम”

देश की जनता को गर्त में धकेलने वाले वो लोग,

ऐसा सिस्टम देश पर लादने वाले वो लोग “अपनी मौत” क्यों मरे,

कुत्ते की मौत “मारे” क्यों नही गये –??– 

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जिन लोगों के “जीवन” में “कभी गर्म” हवा भी नही लगी,

जो इन बातो से “अनभिज्ञ” है उन्हें क्या “अहसास” होगा,
कि :— 

कानून के इस खेल में “घर,परिवार, पैसा और जिन्दगी” और इज्जत “

कैसे “बर्बाद” हो जाती है।

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सर्वोच्च न्यायालय के :—

पूर्व मुख्य न्यायाधीश महोदय श्रीमान “काटजू साहब” जब 90% भारतीयों को मुर्ख कहते है, तो “मिर्ची”–“मेरे” को भी –“आप” को भी — और “सभी” को भी लगती है।

फिर हम सभी लोग — उन्हें “पागल” करार दे देते है।

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अगर देश “समझदारों” का होता तो ऐसे “सिस्टम” कतई “स्वीकार्य” नही होते।

दिल से मानिये कि ये देश 90%मूर्खों का नही,
अपितु 100% चूतियों का देश है। 

तभी तो आज तक इस “सिस्टम” को ढो रहे है। 

तभी तो — हर कोई हमे इंसान नही मान कर “गधों” की तरह “हांक” रहा है।

क्योकि :— हम है ही इसी “सलूक” के “काबिल”..।

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आज देश में लागू — “लोकतंत्र” के “चारों स्तंभ” सदा से ही “हिन्दुओं” के विरुद्ध काम करते रहे है।

“इन चारो” को “संचालित” करने वाला “संविधान” भी घोर “हिन्दू विरोधी”, 

और “राष्ट्र विरोधी” बनाया हुआ है।

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क्यों कि :– इन सब का “निर्माण” -“देश और हिन्दू विरोधी”,

“अंग्रेजों और उन की “नाजायज औलादों कोंग्रेसियों” ने किया था।

नेहरु और तत्कालीन “पूरी कोंग्रेसी लोबी” इस “कुकर्म” में शामिल थी।

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उन लोगों को सिर्फ देश की “दौलत” और अपने “ऐसो आराम” से मतलब था।

उन्हें पिछले 70 साल से “आम जनता” से कभी कोई “मतलब” ही नही था।

देश चलाने के लिये सभी “एक गिरोह” की तरह काम कर रहे थे।

आज तक जितने भी काम हुए है सभी इस “गिरोह” की खुद की “भलाई” के लिये ही हुए है।

इन के किये कामो में “जनहित और राष्ट्रहित” का दूर दूर तक कोई वास्ता नही था। 

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मै “हिंसक” हूँ और “हिंसा” में “विश्वास” करता हूँ,

आज इस देश में “कोंग्रेस” का “नाम लेवा” का “चुनाव जीतना” तो बहुत दूर की बात है,

आज तो ऐसे लोग तो “जीने” का “अधिकार” भी “खो” चुके है।

ऐसे लोगों को “जिन्दा” रहने का भी — कोई “हक” ही नही है।

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सन 1947 के बाद पुरे “देश में और हर जाति” में “देश और धर्म” पर मर मिटने वाले “जवामर्दों” का “भयंकर अकाल” हो गया था। 

मै भी “हिंजड़ा” और आप भी “हिंजड़े” तो अब देश मे से “गंदगी” साफ़ करे कौन –??–

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गिरधारी भार्गव 22.11.2016

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કોગ્રેસના


​*તમને યાદ છે ? કોગ્રેસના ના સમયમાં 400 ગ્રામ ખાંડ માટે બપોર સુધી લાઈન માં ઉભા રહેતા ! 5 લીટર કેરોસીન માટે 5 કલાક લાઇન મા ઉભા રહેતા ! ઘંઉ – ચોખા લેવા 5 કલાક લાઇન મા ઉભા રહેતા ! અને એ પણ દર મહિને અને 10 લીટર પાણી માટે રોજ લાઈન માં ઉભા રહેતા ! આ બધું ભુલી ગયા ? કોઈ 40 વરસ થી ઉપર ના હોય તેમને પુછી તો જુઓ કે કોગ્રેસના સમયમાં દર મહિને કેટલા દિવસ ઉભા રહેતા હતા ? ખોટી વાતો કરે છે .*

*વિપક્ષે તા. ૨૮/૧૧/૨૦૧૬ ના રોજ ભારત બંધનુ જે એલાન કરેલુ છે.* જેને અમે ભારતના એક સાચા નાગરીક તરીકે એ એલાનની અવગણના કરીએ છીએ અને *દેશ હિત માટે જે નિણઁય મોદીજી એ કરેલ છે તેને અમે સમથઁન કરીએ છીએ,*
*વંદેમાતરમ*

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कोयला


​*”देश को लुटने वालों का सरगना मनमोहन.”*                                  👉🏿हवा-पानी से लेकर कोयला तक लूटने वाले मनमोहन सिंह को नोटबंदी बता रहा है व्यवस्थित लुट ! 
👉🏿सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह के जमाने में हुए 2जी व कोयला खदान आवंटन को पूरी तरह से रद्द कर यह स्पष्ट कर दिया कि मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार व्यवस्थित तरीके से सरकारी खजाने को लूटने में जुटी हुई थी।.                                                                                             👉🏿आज वही मनमोहन सिंह राज्यसभा में कह रहे हैं कि ‘नोटबंदी कानून न चलाई जा रही व्यवस्थित लूट है।’.    जो खुद व्यवस्थित लूटपाट का सरगना हो, वह लूट की बात करे, देश ऐसे रोबोट पर कितना भरोसा करेगा ?

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राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते है


​*राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते है??*

(आर्य विचार)
नितिशील का गुण बहुत कम राजाओ में होता हैं होता भी हैं तो धृति (सुख दुःख,लाभ-हानि,मान-अपमान इत्यादि में धैर्य रखना) टूट ही जाती हैं | पर राम धर्म पर ही रहे इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया | ये कौन सी मर्यादाये थी जिन्हें आर्य राजा राम ने पालन किया? वे ऋग्वेद के दसवे मंडल में वर्णित सप्त मर्यादाये हैं |
🔥 ओ३म् 🔥
*आज का वेद मन्त्र*#87

सप्त मर्यादाः _कवयस्ततकक्षुस्तासामेकामिदभ्यहुरो-गात् |_

_आयोर्ह स्कम्भ उपमस्य निव्वे पथां विसर्गे धरु धरुणेषु तस्थौ ||_

*ऋ० १०|१५|०६*
अर्थात् हिंसा, चोरी, व्यभिचार, मद्यपान, जुआ, असत्य-भाषण और इन पापों के करने वाले दुष्टों के सहयोग का नाम सप्त्मर्यादा हैं | जो एक भी मर्यादा का उल्लघंन  करता हैं वो पापी कहलाता हैं और जो धैर्य से इन हिंसादी पापों को छोड़ देता हैं, वह निसंदेह जीवन का स्तंभ और मोक्ष प्राप्ती के योग्य होता हैं |
*वेद में परमात्मा के इन सात मर्यादाओ के आदेश का पालन रघुकुल नन्दक श्री राम ने जीवन पर्यंत किया |*आओ हम सभी भी श्री राम का अनुसरण करे।

नीरज

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शर्मिंदा


​🌷🙏🏾🙏🏾🌷

“मोदी जी” हम आप से बहुत “शर्मिंदा” हैं क्योंकि आप की “भतीजी” यानि आपके छोटे भाई “प्रह्लाद मोदी” जी की बेटी का “41 वर्ष” की उम्र में “दिल की बीमारी” से निधन हो गया वो अपनी “जीविका” चलाने के लिए “कपडे सिलने” का काम करती थी
“मोदी जी” आप को “शर्म” आनी चाहिए कि आपने “अपने परिवार” और अपने भाइयों को अपनी “कैबिनेट” में या “राजनीति” में लाने का ज़रा भी “प्रयास नहीं किया” आप को इस बात के लिए भी “शर्म” आनी चाहिए कि आप के “भाई” साधारण नागरिक का जीवन जी रहे हैं और आप की “भतीजी गरीबी” में “मर गई”
“मोदी जी” आप को “शासन चलाने” की कला “मुलायम सिंह” से “सीखनी” चाहिए जहा “सैफई” के उसके परिवार के करीब “36 सदस्य” आज “उत्तर प्रदेश” में “ब्लाक प्रमुख” के पदों पर सुशोभित हैं वही “मुलायम सिंह” जिन्हें “दो वक़्त की रोटी” भी मुश्किल से नसीब होती थी आज “करोडपति” ही नहीं “अरबपति” हैं
“30 वर्ष” पहले “बहन मायावती” (BMW) का “पूरा परिवार” दिल्ली में “एक कमरे” में रहा करता था आज “मायावती के भाई” का “बंगला” सुन्दरता में “ताज महल” को भी “मात” दे रहा है
“देवगोडा” अपने “पोते” को “100 करोड़” की “बहु भाषाई फिल्म” में बतौर “सुपर हीरो” उतार रहे हैं “कर्नाटक” के “हासन जिले” में “आधी से ज्यादा” खेती की ज़मीन “देवगोडा परिवार” की है
“कर्नाटक” के मुख्यमंत्री “सिद्धारमैया” का “बेटा” जो  “सरकारी अस्पताल” में “मुख्य चिकित्सक” है और “छोटा पुत्र” जिसका अभी हाल में “निधन” हुआ है, उसका “ब्रुसेल्स” में बड़ा कारोबार है और उसके बच्चे “जर्मनी” में “पढ़” रहे हैं
“सोनिया का दामाद” जो कि “मुरादाबाद” में “पुराने पीतल” के आइटम “बेचा” करता था, आज “पांच सितारा होटल” का “मालिक” है, उसका “शिमला” में एक “महल” है और “लक्ज़री कारों” का “मालिक” है जबकि “आप की माँ” आज भी “ऑटोरिक्शा” में चलती है और आप के “भाई ब्लू कालर जॉब” यानि मेंहनत “मजदूरी” कर रहे हैं और आप की एक “भतीजी” शिक्षामित्र है (आप उसे टीचर की नौकरी भी नहीं दिलवा पाए ) जो कि दूसरो के “कपडे सिलती” है तथा “ट्यूशन पढ़ा” कर अपनी “जीविका” चला रही है
“मोदी जी” देश बहुत “शर्मिंदा” है कि आप “प्रधानमंत्री” होते हुए भी अपने “भाइयों” को “MLA या MP” का “टिकट नहीं दिलवा पाए” आप “चाहते” तो अपनी “बहनों” को “राज्य सभा” में “MP” बनवा सकते थे और आप के “जीजा”, “जिला स्तर” के “चुनाव लड़” कर “ब्लाक प्रमुख” तो बन ही सकते थे आप “सीखने” में बहुत “सुस्त” हैं “15 वर्ष” तक “गुजरात” में और “प्रधानमंत्री” का “आधा कार्यकाल”, “दिल्ली” में बिताने के बाद भी आप “लालू, मुलायम, सोनिया गाँधी, बहन मायावती” से कुछ भी “नहीं सीखे” और अपनी “रसोई का खर्च” भी “खुद वहन” कर रहे हैं!!
उपरोक्त बातो से हमे “शर्मिंदा” तो होना पड़ा लेकिन उतना ही “गर्व” भी है कि हमने “2014” में एक बहुत ही “ईमानदार और देशभक्त इंसान” को वोट दिया!!

“हम सभी गर्व” करते है की हमे अपने जीवन में आप जैसे देशभक्त का मार्गदर्शन मिला!!!

 सच में “ईमानदारी और कर्तब्यनिष्ठा” की “पराकाष्ठा” है आप ! 🙏🏽🙏🏽 🙏🏽🙏🏽

– डाक्टर वैद्य पंडित विनय कुमार उपाध्याय

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समोसे


​एक बहुत बडी कंपनी के गेट के सामने एक प्रसिद समोसे की दुकान थी। 

Lunch time मे अक्सर कंपनी के कर्मचारी वहां आकर समोसे खाया करते थे। 

एक दिन कंपनी के एक Manager समोसे खाते-खाते समोसे वाले से मजाक के mood मे आ गए।

मैनेजर साहब ने समोसे वाले से कहा, “यार गोपाल, तुम्हारी दुकान तुमने बहुत अच्छे से maintain की है यह बहुत ही अच्छी बात हैं लेकिन क्या तुम्हे नही लगता कि तुम अपना समय और talent समोसे बेचकर बर्बाद कर रहे हो? सोचो अगर तुम मेरी तरह इस कंपनी मे काम कर रहे होते तो आज कहाँ होते? हो सकता है शायद तुम भी आज मैनेजर होते मेरी तरह।”
इस बात पर समोसे वाले गोपाल ने बडा सोचा, और बोला – “सर ये मेरा काम आपके काम से कही बेहतर है”। 

लगभग 10 साल पहले जब मैं टोकरी मे समोसे बेचता था तभी आपकी जॉब लगी थी। तब मै महीना हजार रुपये कमाता था और आपकी पगार थी 10 हजार महिना।

इन 10 सालो मे हम दोनो ने खूब मेहनत की – आप सुपरवाइजर से मैनेजर बन गये और मैं टोकरी से इस प्रसिद दुकान तक पहुंच गया। आज आप महीना 40, 000 रुपये कमाते है, और मै महीना 2, 00, 000 रुपये। लेकिन इस बात के लिए, मैं मेरे काम को आपके काम से बेहतर नही कह रहा हूँ। ये तो मैं बच्चो के कारण कह रहा हूँ।

जरा सोचिए सर, मैने तो बहुत कम कमाई पर धंधा शुरू किया था, मगर मेरे बेटे को यह सब नही झेलना पडेगा और जो संघर्ष मैंने किया हैं वो उसको नहीं करना पड़ेगा। मेरी दुकान मेरे बेटे को मिलेगी। मैने जिंदगी में जो मेहनत की है, वो उसका लाभ मेरे बच्चे उठाएंगे।

जबकि आपकी जिंदगी भर की मेहनत का लाभ आपके मालिक के बच्चे उठाएंगे..अब आपके बेटे को आप direct अपनी पोस्ट पर तो नही बिठा सकते ना। उसे भी आपकी ही तरह जीरो से शुरूआत करनी पडेगी और अपने कार्यकाल के अंत मे वही पहुच जाएगा जहा अभी आप हो। जबकी मेरा बेटा बिजनेस को यहा से और आगे ले जाएगा और अपने कार्यकाल में हम सबसे बहुत आगे निकल जाएगा। अब आपही बताइये कि किसका समय और talent बर्बाद हो रहा है ?” 

मैनेजर साहब ने समोसे वाले को 2 समोसे के 30 रुपये दिये और बिना कुछ बोले वहा से खिसक लिए।
कार्य आप जो करते हैं वह महत्व नहीं करता बल्कि वह अधिक महत्व करता हैं की आप उस कार्य को कितना मन लगाकर कर रहे हैं 

इसलिए सदैव याद रखें -जो कर्म करने से आपको अंदर से ख़ुशीऔर आनंद महसूस हो वही कर्म आपके लिए Perfect हैं और उसी में आप सफलता के आयामों को छू सकते हो।

Sanjay Dhiman

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चतुर आदमी


​एक पेड़ का डंठल अचानक टूट कर गिरता है। जिसके कारण पेड़ के नीचे सोया हुआ एक बूढ़े व्यक्ति की मौत हो जाती है। आस-पास के चतुर लोग इस घटना का विश्लेषण करते हुए बूढ़े व्यक्ति के मौत के लिए पेड़ को दोषी ठहरा देते है। इस पर दूसरा चतुर आदमी बोलता है की पेड़ का क्या दोष, दोषी तो वो है, जो इस कमजोर मिटटी में पेड़ लगाया था। अब पेड़ लगाने वाले को बुलाकर उससे बूढ़े का मौत का जिम्मेदार ठहराया जाता है। पेड़ लगाने वाला भी चतुर था वो बोला- इसमें मेरा क्या दोष, इस पेड़ की डाली में बगुलों का झुण्ड आकर बैठ गया, जिसके वजन से डाली टूट गई और बूढ़े के ऊपर गिर गई।इसलिए दोषी बगुले है। दूसरा चतुर आदमी बोला- इन बेजुबान बगुलों का कोई दोष नहीं, ये बगुले पहले स्टेट बैंक के पास वाले पेड़ पर बैठते थे। लेकिन आज-कल वहाँ लम्बी-लम्बी लाइन लगी है और बहुत शोर होता है, जिसके कारण बगुले वहा से यहाँ शिप्ट हो गए। दोषी तो स्टेट बैंक है। इस पर एक और चतुर आदमी बोलता है- स्टेट बैंक का क्या दोष, *दोषी तो नरेंद्र मोदी है*, जिसने नोट बंदी लगा दिया और उसी के कारण इस बूढ़े की मौत हो गई। अंत में सभी चतुर लोग एक मत से फैसला करते है की स्टेट बैंक से कोसो दूर एक पेड़ की डाली के नीचे सोये हुए बूढ़े की मौत नरेंद्र मोदी के कारण हुआ है। विश्वास न हो तो  संसद की बहस  में सुन लेना..।………………………….😂😂

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शिवसेना


​खरोखर शिवसेना मराठ्यांची आहे का? 

१९६६ ला शिवसेनेची स्थापना झाली. असे म्हणले जाते की मुंबईत मराठी माणूस शिवसेनेमुळे आहे. खरेतर १९६६ पूर्वी मुंबईत मराठी माणसाची टक्केवारी ही ७९% होती तर मारवाडी, परप्रांतीय व इतर यांची संख्या ही २१% होती. सध्या २०११ चा जनगनना टक्केवारी नुसार मुंबईतील मराठी

 टक्का हा ६१ टक्के इतका खाली आला म्हणजे मागील ५० वर्षात मराठी टक्का हा तब्बल १८ टक्क्यांनी कमी आला मग मुंबईत मराठी माणूस उत्तरोत्तर कसा कमी झाला? आणि मग शिवसेनेमुळे मराठी माणूस मुंबईत आहे हे कसे सिद्ध होईल?

यानिमित्ताने बरेच प्रश्न उपस्थित होतात

 १ शिवसेनेतील शिव या शब्दाचा अर्थ शंकर कि शिवाजी महाराज ?

२ जर शिव या शब्दाचा अर्थ शिवाजी महाराज असेल तर शिवसेना भवन वर शिवाजी महाराजांचा फोटो का नाही?

३ जर शिव या शब्दाचा अर्थ शिवाजी महाराज असेल तर शिवसेना प्रचार पत्रकात महाराजांचा फोटो का नाही?

४ जर शिव या शब्दाचा अर्थ शिवाजी महाराज असेल तर दसरा मेळाव्यात महाराजांचा फ्लेक्स का नसतो?

५ शासकीय शिवजयंती ला सामना पेपर मध्ये महाराजांना अभिवादन का केले जात नाही.

६ वडापाव सारख्या क्षुल्लक पदार्थास शिवाजी महाराजांचे नाव का दिले (शिव वडा). तुमच्या नावाने का काढत नाही उदा. बाळ वडा, उद्धव भजी, आदित्य पापडी , सामोसा इत्यादी.

७ बाळासाहेब यांची जयंती तारखेनुसार करत आहेत तर महाराजांची तिथीनुसार का?

८ यांच्या घरात कोणाचाही नावात शिव हा शब्द का नाही?

९ शिवजयंती ला उद्धव कधी शिवनेरीवर का जात नाहीत?

१० शिवसेनेचा इतिहासात विधान परिषदेवर किती मराठा आमदार घेतलेत?

११ शिवसेनेने आजपर्यंत केलेल्या आंदोलनात किती ब्राह्मण आणि किती मराठे तुरुंगात गेलेत याची गुणोत्तर व प्रमाण काय?

१२ शिवसेने चे मराठा आमदार किती? मग त्या पटीमध्ये मंत्रीपदे का नाहीत?

१३ मुख्यमंत्री पदावर सर्व प्रथम जोशीच कसे?

१४ जेम्स लेन प्रकरणात बहूलकराची माफी का मागितली?

१५ वादग्रस्त लेखन असताना पुरंदरचे च्या पुरस्काराचे समर्थन का केले?

१६ काँग्रेस व राष्ट्रवादीच्या घराणेशाही वर आगपाखड करताना स्वतःच्या आदित्य ला कसे काय पुढे करतात? ही घराणेशाही नाही काय?

१७ कोंडदेव पुतळा लाल महालातून काढला त्या वेळेस पुणे महापालिकेच्या अखत्यारीतील छत्रपती शिवाजी सभागृहातील महाराजांची प्रतिमा कोणी फोडली?

१८ भगवा झेंडा हा शिवसेनेने आधी वापरला की महाराजांनी?

१९ शिवसेनेने आता पर्यंत किती गडकोटांवर स्वच्छता मोहीम अथवा जीर्णोद्धार केला आहे?

२० शिवसेना संभाजी महाराजांची जयंती का साजरी करत नाही?

२१ शिवसेनेला अरबी समुद्रातील छत्रपती शिवरायांचे की शिवाजी पार्क वरील बाळासाहेब ठाकरे यांचे स्मारक महत्वाचे आहे?

२२ शिवसेना मराठा व्यक्तीस विधान परिषदेवर का घेत नाही?

२३ बेळगाव प्रश्नावर उद्धव बेळगावात जाऊन किती वेळा बोलले?

२४ मुंबई महापौर जागा खुल्या प्रवर्गासाठी ज्या वेळेस आली आहे त्यावेळेस मराठा जातीतील माहापौर का नाही?

२५ ठाकरे कुटुंबीयांनी किती शाळा, ग्रंथालये, महाविद्यालये, क्रीडा संकुले काढली?

२६ शिवाजी महाराजांच्या नावाने एखादा पुरस्कार का काढला नाही?

२७ आदिवासी विकास, बहुजजन समाज या विषयी भूमिका काय?

२८ जैतापूर अनु ऊर्जा प्रकल्पा बद्दल अनिल काकोडकर यांच्या पेक्षा जास्त माहिती तुम्हास आहे का? नासेल तर प्रकल्पास विरोध का?

२९ जैतापूर प्रकल्पामुळे लोड शेडिंग बंद झालास आणि आमच्या बळीराजास २४ तास वीज मिळेल त्यामुळे आपण दुःखी आहात काय?

३० कार्टून प्रकरणात अजून मराठा समाजाची माफी का मागितली नाही? 

या प्रश्नांची उत्तरे तथाकथित शिव सैनिकांनी द्यावीत आणि थोडा विचार करावा.

Sandip Ahire