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लक्ष्मीजी की बडी बहन दरीद्रा*


​*लक्ष्मीजी की बडी बहन दरीद्रा*
कार्तिक मास की द्वादशी तिथि को पिता समुद्र ने दरिद्रा देवी का कन्यादान कर दिया। विवाह के बाद दु:सह ऋषि जब दरिद्रा को लेकर अपने आश्रम पर आए तो उनके आश्रम में वेदमन्त्र गुंजायमान हो रहे थे। वहां से ज्येष्ठा दोनों कान बंद कर भागने लगी। यह देखकर दु:सह मुनि उद्विग्न हो गये क्योंकि उन दिनों सब जगह धर्म की चर्चा और पुण्यकार्य हुआ करते थे। सब जगह वेदमन्त्रों और भगवान के गुणगान से बचकर भागते-भागते दरिद्रा थक गई। 
*तब दरिद्रा ने मुनि से कहा–*
’जहां वेदध्वनि, अतिथि-सत्कार, यज्ञ-दान, भस्म लगाए लोग आदि हों, वहां मेरा निवास नहीं हो सकता। अत: आप मुझे किसी ऐसे स्थान पर ले चलिए जहां इन कार्यों के विपरीत कार्य होता हो।
दु:सह मुनि उसे निर्जन वन में ले गए। वन में दु:सह मुनि को मार्कण्डेय ऋषि मिले। दु:सह मुनि ने मार्कण्डेय ऋषि से पूछा कि ‘इस भार्या के साथ मैं कहां रहूं और कहां न रहूं?’
*दरिद्रा के प्रवेश करने के स्थान :-*
मार्कण्डेय ऋषि ने दु:सह मुनि से कहा–जिसके यहां शिवलिंग का पूजन न होता हो तथा जिसके यहां जप आदि न होते हों बल्कि रुद्रभक्ति की निन्दा होती हो, वहीं पर तुम निर्भय होकर घुस जाना।
जहा पति-पत्नी परस्पर झगड़ा करते हों, घर में रात्रि के समय लोग झगड़ा करते हों,  जो लोग बच्चों को न देकर स्वयं भोज्य पदार्थ खा लेते हों,  जो स्नान नहीं करते, दांत-मुख साफ नहीं करते, गंदे कपड़े पहनते, संध्याकाल में सोते व खाते हों, जुआ खेलते हों,  ब्राह्मण के धन का हरण करते हों,  परायी स्त्री से सम्बन्ध रखते हों, 

 हाथ-पैर न धोते हों, उस घर 

   में तुम दोनों घुस जाओ।
*दरिद्रा के प्रवेश न करने के स्थान :-*
मार्कण्डेयजी ने दु:सह मुनि को  कहा–जहां नारायण व रुद्र के भक्त हों, भस्म लगाने वाले लोग हों,  भगवान का कीर्तन होता हो,घर में भगवान की मूर्ति व गाये हों उस घर में तुम दोनों मत घुसना। जो लोग नित्य वेदाभ्यास में संलग्न हों, नित्यकर्म में तत्पर हों तथा वासुदेव की पूजा में रत हों, उन्हें दूर से ही त्याग देना।
तथा  जो लोग वैदिकों, ब्राह्मणों, गौओं, गुरुओं, अतिथियों तथा रुद्रभक्तों की नित्य पूजा करते हैं, उनके पास मत जाना।
यह कहकर मार्कण्डेय ऋषि चले गए। तब दु:सह मुनि ने दरिद्रा को एक पीपल के मूल में बिठाकर कहा कि मैं तुम्हारे लिए रसातल जाकर उपयुक्त आवास की खोज करता हूँ। दरिद्रा ने कहा–’तब तक मैं खाऊंगी क्या?’ मुनि ने कहा–’तुम्हें प्रवेश के स्थान तो मालूम हैं, वहां घुसकर खा-पी लेना। लेकिन जो स्त्री तुम्हारी पुष्प व धूप से पूजा करती हो, उसके घर में मत घुसना।’
यह कहकर मुनि बिल मार्ग से रसातल में चले गए। लेकिन बहुत खोजने पर भी उन्हें कोई स्थान नहीं मिला। कई दिनों तक पीपल के मूल में बैठी रहने से भूख-प्यास से व्याकुल होकर दरिद्रा रोने लगीं। उनके रुदन से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच गया। उनके रोने की आवाज को जब उनकी छोटी बहन लक्ष्मीजी ने सुना तो वे भगवान विष्णु के साथ उनसे मिलने आईं।
 दरिद्रा ने भगवान विष्णु से कहा–’मेरे पति रसातल में चले गए है, मैं अनाथ हो गई हूँ, मेरी जीविका का प्रबन्ध कर दीजिए।’
भगवान विष्णु ने कहा–’हे दरिद्रे! जो माता पार्वती, शंकरजी व मेरे भक्तों की निन्दा करते हैं, शंकरजी की निन्दा कर मेरी पूजा करते हैं, उनके धन पर तुम्हारा अधिकार है। तुम सदा पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष के मूल में निवास करो। तुमसे मिलने के लिए मैं लक्ष्मी के साथ प्रत्येक शनिवार को यहां आऊंगा और उस दिन जो अश्वत्थ वृक्ष का पूजन करेगा, मैं उसके घर लक्ष्मी के साथ निवास करुंगा।’ उस दिन से दरिद्रादेवी पीपल के नीचे निवास 

     करने लगीं।
*देवताओं द्वारा दरिद्रा को दिए गए निवास योग्य स्थान :-*
पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में बताया गया है–जिसके घर में सदा कलह होता हो,  जो झूठ और कड़वे वचन बोलते हैं, जो मलिन बुद्धि वाले हैं व  संध्या के समय सोते व भोजन करते हैं, बहुत भोजन करते हैं, मद्यपान में लगे रहते हैं,  बिना पैर धोये जो आचमन या भोजन करते हैं, बालू, नमक या कोयले से दांत साफ करते हैं,  जिनके घर में कपाल, हड्डी, केश व भूसी की आग जलती हो,  जो छत्राक (कुकुरमुत्ता) तथा सड़ा हुआ बेल खाते हैं, जहां गुरु, देवता, पितर और अतिथियों का पूजन तथा यज्ञदान न होता हो,  ब्राह्मण, सज्जन व वृद्धों की पूजा न होती हो,  जहां द्यूतक्रीडा होती हो,  जो दूसरों के धन व स्त्री का अपहरण करते हों, वहां अशुभ दरिद्रे तुम सदा निवास करना।

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साहिय्य


​पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं 

1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन

4. नकुल।      5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन

की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।
वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..

कौरव कहलाए जिनके नाम हैं 

1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह

4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम

7. सह            8. विंद         9. अनुविंद

10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण

13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण

16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान

19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र

22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन

25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु

28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ

31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण

34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन

37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल

43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध

46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर

49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी

52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा    54. दृढ़क्षत्र

55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक

61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी

64. दुष्पराजय        65. अपराजित 

66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष

68. दुराधर   69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त

71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु

74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी

77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी 

80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु

83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा

86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य

88. कुण्डभेदी।     89. विरवि

90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम

92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा

94. सुवीर्यवान     95. दीर्घबाहु

96. सुजात।         97. कनकध्वज

98. कुण्डाशी        99. विरज

100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम””दुशाला””था,

जिसका विवाह”जयद्रथ”सेहुआ था )
“श्री मद्-भगवत गीता”के बारे में
ॐ . किसको किसने सुनाई?

उ. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। 
ॐ . कब सुनाई?

उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?

उ.- रविवार के दिन।
ॐ. कोनसी तिथि को?

उ.- एकादशी 
ॐ. कहा सुनाई?

उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
ॐ. कितनी देर में सुनाई?

उ.- लगभग 45 मिनट में
ॐ. क्यू सुनाई?

उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
ॐ. कितने अध्याय है?

उ.- कुल 18 अध्याय
ॐ. कितने श्लोक है?

उ.- 700 श्लोक
ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?

उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। 
ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा 

और किन किन लोगो ने सुना?

उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?

उ.- भगवान सूर्यदेव को
ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?

उ.- उपनिषदों में
ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है….?

उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?

उ.- गीतोपनिषद
ॐ. गीता का सार क्या है?

उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?

उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574

अर्जुन ने- 85 

धृतराष्ट्र ने- 1

संजय ने- 40.
अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद
अधूरा ज्ञान खतरना होता है।
33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू

धर्म मेँ।
कोटि = प्रकार। 

देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,
कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।
हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं…
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-
12 प्रकार हैँ

आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,

शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,

सविता, तवास्था, और विष्णु…!
8 प्रकार हे :-

वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार है :- 

रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,

अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,

रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ

दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी 
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है

तो इस जानकारी को अधिक से अधिक

लोगो तक पहुचाएं। ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है
This is very good information for all of us … जय श्रीकृष्ण …
अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ……
अपनी भारत की संस्कृति 

को पहचाने.

ज्यादा से ज्यादा

लोगो तक पहुचाये. 

खासकर अपने बच्चो को बताए 

क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा…
📜😇  दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष , 

शुक्ल पक्ष !
📜😇  तीन ऋण 
देव ऋण , 

पितृ ऋण , 

ऋषि ऋण !
📜😇   चार युग –
सतयुग , 

त्रेतायुग ,

द्वापरयुग , 

कलियुग !
📜😇  चार धाम –
द्वारिका , 

बद्रीनाथ ,

जगन्नाथ पुरी , 

रामेश्वरम धाम !
📜😇   चारपीठ –
शारदा पीठ ( द्वारिका )

ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) 

गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , 

शृंगेरीपीठ !
📜😇 चार वेद
ऋग्वेद , 

अथर्वेद , 

यजुर्वेद , 

सामवेद !
📜😇  चार आश्रम 
ब्रह्मचर्य , 

गृहस्थ , 

वानप्रस्थ , 

संन्यास !
📜😇 चार अंतःकरण –
मन , 

बुद्धि , 

चित्त , 

अहंकार !
📜😇  पञ्च गव्य –
गाय का घी , 

दूध , 

दही ,

गोमूत्र , 

गोबर !
📜😇  पञ्च देव –
गणेश , 

विष्णु , 

शिव , 

देवी ,

सूर्य !
📜😇 पंच तत्त्व –
पृथ्वी ,

जल , 

अग्नि , 

वायु , 

आकाश !
📜😇  छह दर्शन –
वैशेषिक , 

न्याय , 

सांख्य ,

योग , 

पूर्व मिसांसा , 

दक्षिण मिसांसा !
📜😇  सप्त ऋषि –
विश्वामित्र ,

जमदाग्नि ,

भरद्वाज , 

गौतम , 

अत्री , 

वशिष्ठ और कश्यप! 
📜😇  सप्त पुरी –
अयोध्या पुरी ,

मथुरा पुरी , 

माया पुरी ( हरिद्वार ) , 

काशी ,

कांची 

( शिन कांची – विष्णु कांची ) , 

अवंतिका और 

द्वारिका पुरी !
📜😊  आठ योग – 
यम , 

नियम , 

आसन ,

प्राणायाम , 

प्रत्याहार , 

धारणा , 

ध्यान एवं 

समािध !
📜😇 आठ लक्ष्मी –
आग्घ , 

विद्या , 

सौभाग्य ,

अमृत , 

काम , 

सत्य , 

भोग ,एवं 

योग लक्ष्मी !
📜😇 नव दुर्गा –
शैल पुत्री , 

ब्रह्मचारिणी ,

चंद्रघंटा , 

कुष्मांडा , 

स्कंदमाता , 

कात्यायिनी ,

कालरात्रि , 

महागौरी एवं 

सिद्धिदात्री !
📜😇   दस दिशाएं –
पूर्व , 

पश्चिम , 

उत्तर , 

दक्षिण ,

ईशान , 

नैऋत्य , 

वायव्य , 

अग्नि 

आकाश एवं 

पाताल !
📜😇  मुख्य ११ अवतार –
 मत्स्य , 

कच्छप , 

वराह ,

नरसिंह , 

वामन , 

परशुराम ,

श्री राम , 

कृष्ण , 

बलराम , 

बुद्ध , 

एवं कल्कि !
📜😇 बारह मास – 
चैत्र , 

वैशाख , 

ज्येष्ठ ,

अषाढ , 

श्रावण , 

भाद्रपद , 

अश्विन , 

कार्तिक ,

मार्गशीर्ष , 

पौष , 

माघ , 

फागुन !
📜😇  बारह राशी – 
मेष , 

वृषभ , 

मिथुन ,

कर्क , 

सिंह , 

कन्या , 

तुला , 

वृश्चिक , 

धनु , 

मकर , 

कुंभ , 

कन्या !
📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग – 
सोमनाथ ,

मल्लिकार्जुन ,

महाकाल , 

ओमकारेश्वर , 

बैजनाथ , 

रामेश्वरम ,

विश्वनाथ , 

त्र्यंबकेश्वर , 

केदारनाथ , 

घुष्नेश्वर ,

भीमाशंकर ,

नागेश्वर !
📜😇 पंद्रह तिथियाँ – 
प्रतिपदा ,

द्वितीय ,

तृतीय ,

चतुर्थी , 

पंचमी , 

षष्ठी , 

सप्तमी , 

अष्टमी , 

नवमी ,

दशमी , 

एकादशी , 

द्वादशी , 

त्रयोदशी , 

चतुर्दशी , 

पूर्णिमा , 

अमावास्या !
📜😇 स्मृतियां – 
मनु , 

विष्णु , 

अत्री , 

हारीत ,

याज्ञवल्क्य ,

उशना , 

अंगीरा , 

यम , 

आपस्तम्ब , 

सर्वत ,

कात्यायन , 

ब्रहस्पति , 

पराशर , 

व्यास , 

शांख्य ,

लिखित , 

दक्ष , 

शातातप , 

वशिष्ठ !h
************
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​स्वामी विवेकानन्द केशिक्षा दर्शन केआधारभूत सिद्धान्त


​स्वामी विवेकानन्द के

शिक्षा दर्शन के

आधारभूत सिद्धान्त

स्वामी विवेकानन्द के

शिक्षा दर्शन के आधारभूत

सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –

१. शिक्षा ऐसी हो जिससे

बालक का शारीरिक,

मानसिक एवं आत्मिक

विकास हो सके।

२. शिक्षा ऐसी हो जिससे

बालक के चरित्र का निर्माण

हो, मन का विकास हो,

बुद्धि विकसित हो तथा

बालक आत्मनिर्भन बने।

३. बालक एवं बालिकाओं

दोनों को समान शिक्षा

देनी चाहिए।

४. धार्मिक शिक्षा, पुस्तकों

द्वारा न देकर आचरण एवं

संस्कारों द्वारा देनी

चाहिए।

५. पाठ्यक्रम में लौकिक एवं

पारलौकिक दोनों प्रकार के

विषयों को स्थान देना

चाहिए।

६. शिक्षा, गुरू गृह में प्राप्त

की जा सकती है।

७. शिक्षक एवं छात्र का

सम्बन्ध अधिक से अधिक निकट

का होना चाहिए।

८. सर्वसाधारण में शिक्षा

का प्रचार एवं प्रसार किया

जान चाहिये।

९. देश की आर्थिक प्रगति के

लिए तकनीकी शिक्षा की

व्यवस्था की जाय।

१०. मानवीय एवं राष्ट्रीय

शिक्षा परिवार से ही शुरू

करनी चाहिए।

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चरित्रहीन


​स्त्री तब तक ‘चरित्रहीन’ नहीं

हो सकती….

जब तक पुरुष चरित्रहीन न हो

“…… गौतम बुद्ध

===========================

संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने

अनेक क्षेत्रों की यात्रा की…

एक बार वह एक गांव में गए। वहां

एक स्त्री उनके पास आई और

बोली- आप तो कोई

“राजकुमार” लगते हैं। …क्या मैं

जान सकती हूं

कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र

पहनने का क्या कारण है ?

बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर

दिया कि…

“तीन प्रश्नों” के हल ढूंढने के लिए

उन्होंने संन्यास लिया..

.

बुद्ध ने कहा.. हमारा यह शरीर

जो युवा व आकर्षक है, पर जल्दी

ही यह “वृद्ध” होगा, फिर

“बीमार” और ….अंत में “मृत्यु” के

मुंह में चला जाएगा। मुझे

‘वृद्धावस्था’, ‘बीमारी’ व

‘मृत्यु’ के कारण का ज्ञान

प्राप्त करना है …..

बुद्ध के विचारो से प्रभावित

होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के

लिए आमंत्रित किया….

शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल

गई। गांव वासी बुद्ध के पास आए

व आग्रह किया कि वे इस स्त्री

के घर भोजन करने न जाएं….!!!

क्योंकि वह “चरित्रहीन” है…..

बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा ?

…..क्या आप भी मानते हैं कि वह

स्त्री चरित्रहीन है…?

मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर

कहता हूं कि वह बुरे चरित्र

वाली स्त्री है….। आप उसके घर न

जाएं।

बुद्ध ने मुखिया का दायां हाथ

पकड़ा… और उसे ताली बजाने

को कहा… मुखिया ने कहा…मैं

एक हाथ से ताली नहीं बजा

सकता…

“क्योंकि मेरा दूसरा हाथ

आपने पकड़ा हुआ है”…

बुद्ध बोले…इसी प्रकार यह

स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती

है…????

… जब तक इस गांव के “पुरुष

चरित्रहीन” न हों…!!!!अगर गांव

के

सभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत

ऐसी न होती इसलिए इसके

चरित्र के लिए यहां के पुरुष

जिम्मेदार हैं….

यह सुनकर सभी “लज्जित” हो

गए…..

….लेकिन आजकल हमारे समाज के

पुरूष “लज्जित” नही

“गौर्वान्वित” महसूस करते है…..

… क्योकि यही हमारे “पुरूष

प्रधान” समाज की रीति एवं

नीति है..॥

सकारात्मक सोचो

सकारात्मक सोच से ही अपना

और अपने घर समाज देश का

विकास होगा।

जय श्री राधेकृष्णा

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दोस्त


​Good morning all friends

[ दोस्त ]
एक बहुत बड़ा सरोवर था। उसके तट पर मोर रहता था, और वहीं पास एक मोरनी भी रहती थी।

 एक दिन मोर ने मोरनी से प्रस्ताव रखा कि- “हम तुम विवाह कर लें, तो कैसा अच्छा रहे?”
मोरनी ने पूछा- “तुम्हारे मित्र कितने है? ” मोर ने कहा उसका कोई मित्र नहीं है। तो मोरनी ने विवाह से इनकार कर दिया।
मोर सोचने लगा सुखपूर्वक रहने के लिए मित्र बनाना भी आवश्यक है। उसने एक सिंह से.., एक कछुए से.., और सिंह के लिए शिकार का पता लगाने वाली टिटहरी से.., दोस्ती कर लीं।
जब उसने यह समाचार मोरनी को सुनाया, तो वह तुरंत विवाह के लिए तैयार हो गई। पेड़ पर घोंसला बनाया और उसमें अंडे दिए, और भी कितने ही पक्षी उस पेड़ पर रहते थे।
एक दिन शिकारी आए। दिन भर कहीं शिकार न मिला तो वे उसी पेड़ की छाया में ठहर गए और सोचने लगे, पेड़ पर चढ़कर अंडे- बच्चों से भूख बुझाई जाए। मोर दंपत्ति को भारी चिंता हुई, मोर मित्रों के पास सहायता के लिए दौड़ा। बस फिर क्या था.., टिटहरी ने जोर – जोर से चिल्लाना शुरू किया। सिंह समझ गया, कोई शिकार है। वह उसी पेड़ के नीचे चला.., जहाँ शिकारी बैठे थे। इतने में कछुआ भी पानी से निकलकर बाहर आ गया। सिंह से डरकर भागते हुए शिकारियों ने कछुए को ले चलने की बात सोची। जैसे ही हाथ बढ़ाया कछुआ पानी में खिसक गया। शिकारियों के पैर दलदल में फँस गए। इतने में सिंह आ पहुँचा और उन्हें ठिकाने लगा दिया।
मोरनी ने कहा- “मैंने विवाह से पूर्व मित्रों की संख्या पूछी थी, सो बात काम की निकली न, यदि मित्र न होते, तो आज हम सबकी खैर न थी।”

मित्रता सभी रिश्तों में अनोखा और आदर्श रिश्ता होता है। और मित्र किसी भी व्यक्ति की अनमोल पूँजी होते है। अगर गिलास दुध से भरा हुआ है तो आप उसमे और दुध नहीं डाल सकते। लेकिन आप उसमे शक्कर डाले। शक्कर अपनी जगह बना लेती है और अपना होने का अहसास दिलाती है।
जीवन में किसी के दोस्त बनो तो शक्कर की तरह बनों!!

सभी मित्रो को सुप्रभात । 

आपका हर पल मंगलमय हो । 

सकारात्मक रहे व स्वस्थ रहे ।

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​एक बार संख्या 9 ने 8 को थप्पड़ मारा


​एक बार संख्या 9 ने 8 को थप्पड़ मारा

8 रोने लगा…

पूछा मुझे क्यों मारा..?😎

,

9 बोला…

,

मैं बड़ा हु इसीलए मारा..

,

सुनते ही 8 ने 7 को मारा

और 9 वाली बात दोहरा दी

,

7 ने 6 को..

6 ने 5 को..

5 ने 4 को..

4 ने 3 को..

3 ने 2 को..

2 ने 1 को..

,

अब 1 किसको मारे

1 के निचे तो 0 था ! 😝

,

1 ने उसे मारा नहीं

बल्कि प्यार से उठाया

और उसे अपनी बगल में

बैठा लिया

,

जैसे ही बैठाया…

उसकी ताक़त 10 हो गयी..!

और 9 की हालत खराब हो गई.

,

जिन्दगीं में किसी का साथ काफी हैं,

कंधे पर किसी का हाथ काफी हैं,

दूर हो या पास…क्या फर्क पड़ता हैं,

,

“अनमोल रिश्तों”

का तो बस “एहसास” ही काफी हैं !

बहुत ही खूबसूरत लाईनें..

,

किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,

कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!

,

डरिये वक़्त की मार से,

बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!

,

अकल कितनी भी तेज ह़ो,

नसीब के बिना नही जीत सकती..

,

बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,

कभी बादशाह नही बन सका…!!”

,

“ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो,

ना ही तुम अपने कंधे पर सर

रखकर रो सकते हो !

,

एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो

जो

तुम्हे चाहते हों दिल से!

,

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा

नहीं देते पर

जीवन अमीर जरूर बना देते है ”

,

आपके पास मारुति हो या बीएमडब्ल्यू –

सड़क वही रहेगी |

,

आप टाइटन पहने या रोलेक्स –

समय वही रहेगा |

,

आपके पास मोबाइल एप्पल का हो या सेमसंग –

आपको कॉल करने वाले लोग नहीं बदलेंगे |

,

आप इकॉनामी क्लास में सफर करें

या बिज़नस में –

आपका समय तो उतना ही लगेगा |

,

भव्य जीवन की लालसा रखने या जीने में कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन

सावधान रहे क्योंकि आवश्यकताएँ पूरी हो सकती है, तृष्णा नहीं |

,

एक सत्य ये भी है कि धनवानो का आधा धन तो ये जताने में चला

जाता है की वे भी धनवान हैं |

,

कमाई छोटी या बड़ी हो सकती है….

पर रोटी की साईज़ लगभग

सब घर में एक जैसी ही होती है।

,

: शानदार बात

,

बदला लेने में क्या मजा है

मजा तो तब है जब तुम

सामने वाले को बदल डालो..||

,

इन्सान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,

और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले…!!

Posted in संस्कृत साहित्य

पति के लिए पत्नी


​आखिर पति के लिए पत्नी क्यों जरूरी है?
मानो न मानो –
(१) जब तुम दुःखी हो, तो वह तुम्हें

कभी अकेला नहीं छोड़ेगी।
(२) हर वक्त, हर दिन, तुम्हें तुम्हारे अन्दर की बुरी आदतें छोड़ने को कहेगी।
(३) हर छोटी-छोटी बात पर तुमसे

झगड़ा करेगी, परंतु ज्यादा देर

गुस्सा नहीं रह पाएगी।
(४)तुम्हें आर्थिक मजबूती देगी।
(५) कुछ भी अच्छा न हो, फिर

भी, तुम्हें यही कहेगी; चिन्ता मत

करो, सब ठीक हो जाएगा।
(६) तुम्हें समय का पाबन्द बनाएगी।
(७) यह जानने के लिए कि तुम क्या कर रहे हो, दिन में 15 बार फोन करके हाल पूछेगी। कभी कभी तुम्हें खीझ भी आएगी, पर सच यह है कि तुम कुछ कर नहीं पाओगे।
(८) चूँकि, पत्नी ईश्वर का दिया एक

विशेष उपहार है, इसलिए उसकी उपयोगिता जानो और उसकी देखभाल करो।
(९) यह सन्देश हर विवाहित पुरुष के

मोबाइल पर होना चाहिए, ताकि उन्हें

अपनी पत्नी के महत्व का अंदाजा हो।
(१०) अंत में हम दोनों ही होंगे।
(११) भले ही झगड़ें, गुस्सा करें,

एक दूसरे पर टूट पड़ें, एक दूसरे पर दादागीरी करने के

लिए; अंत में हम दोनों ही होंगे।
(१२) जो कहना है, वह कह लें,  जो करना है, वह कर लें; एक दूसरे के चश्मे और  लकड़ी ढूंढने में, अंत में हम दोनों ही होंगे।
(13) मैं रूठूँ तो तुम मना लेना,

तुम रूठो तो मैं मना लूंगा,

एक दूसरे को लाड़ लड़ाने के लिए;

अंत में हम दोनों ही होंगे।
(१४) आंखें जब धुंधली होंगी,

याददाश्त जब कमजोर होगी,

तब एक दूसरे को, एक दूसरे

में ढूंढने के लिए, अंत में हम दोनों ही होंगे।
(१५) घुटने जब दुखने लगेंगे,

कमर भी झुकना बंद करेगी, तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए, अन्त में हम दोनों ही होंगे।
(१६) “अरे मुुझे कुछ नहीं हुआ,

बिल्कुल नॉर्मल हूं” ऐसा कह कर एक दूसरे को बहकाने के लिए, अंत में हम दोनों ही होंगे।
(१७) साथ जब छूट जाएगा,

विदाई की घड़ी जब आ जाएगी,

तब एक दूसरे को माफ करने के लिए

अंत में हम दोनों ही होंगे।
टिप्पणी : पति-पत्नी पर व्यंग्य कितने भी हों, किन्तु तथ्य यही है।

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

Bharat


​*🎯भारत देश की जनसंख्या 1 अरब 25 करोड़ है।*
*🛡Active Military की संख्या 13 लाख 25 हज़ार है।*
*🛡इस देश में 2 सैनिकों की हत्या होने की कीमत लगभग 2000 नागरिकों के जीवन पर संकट होने के बराबर है।*
*🛡सोचिये इस देश के 1 परमाणु वैज्ञानिक की हत्या की क्या कीमत चुकानी पड़ेगी???*
*🛡लेकिन हम चुका रहे हैं।*
*🛡हम में से अनेक व्यक्ति इस बात से अनजान हैं।*
*🛡हमें ये पता है की आज सलमान ने क्या किया ?* 

*मोदीजी ने क्या पहना ?* 

*या केजरीवाल ने कितनी बार खाँसा ?*
*🛡लेकिन क्या हमें ये पता है की वर्ष 2009 से 2016 के बीच इस देश के 10 सीनियर परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या कर दी गई ???* 
*🛡ये सभी वैज्ञानिक देश के अनेक projects से जुड़े हुए थे। नहीं पता है ना !!!* 
*🛡क्योंकि अभी हम व्यस्त हैं क्रिकेट वर्ल्ड कप में,IPL में हम busy हैं दिल्ली के ड्रामे में, U.P के होने वाले चुनाव में, और मोदी के फॉरेन टूर में, हम व्यस्त हैं उन टी.वी. चैंनलो पर चलने वाले प्रोग्रामो और बानवटी दुनिया में, जरा सोचिये ! क्या इन सब चीज़ो में उलझ कर हम अपनी आंतरिक सुरक्षा को खतरे में नही डाल रहे है ? क्योंकि हमारी सरकार के मंत्रियो, M.P, MLA और सरकारी अधिकारी, बाबुओं को रिश्वत, भ्रष्टाचार और घोटाले करने की आदत जो पड गई है, इन्हें देश की चिंता थोड़े ही है।*  
*🛡1995 से लेकर 2015 तक इस देश के 32 केंन्द्रों के 197 परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय मृत्यु हुई है। हमें पता ही नहीं।*
*🛡BARC के वैज्ञानिक M. Padmnabhan (48) की लाश उनके ही फ्लैट में मिली।* 
*🛡सप्ताह-भर से लापता CAG परमाणु-संयन्त्र से जुड़े Senior Engineer L.N. Mahalingam की लाश काली नदी में तैरती पाई जाती है।*
*🛡वर्ष 2013 में विशाखापत्तनम में Railway track के किनारे 2 वैज्ञानिकों KK Josh & Abhish Shivam की लाश मिलती है, ये दोनों वैज्ञानिक देश की पहली स्वदेशी पनडुब्बी “अरिहन्त” के निर्माण से जुड़े थे।*
*🛡क्या हमें पता चला इन सबकी हत्या कैसे हुई ???* 

*🛡क्यों News Channels ने हमें इन घटनाओं से बेख़बर रखा ??? इन्हें तो बस हीरो हीरोइन के अफेयर की न्यूज़ और विज्ञापनो की पड़ी है*
*🛡इन सबकी हत्याओं में जो तरीके अपनाये गए वे दुनिया की कुछ चुनिंदा खुफिया एजेन्सी ही अपनाती हैं, जिनमें ISI, CIA, KGB, MI6, Mossad और ISI जैसी एजेंसियाँ शामिल हैं।*
*🛡🇮🇳भारत देश के परमाणु कार्यक्रम के जनक Dr.* *Homi Jahangir Bhabha की हत्या CIA ने की थी।*
*🛡हम ना जाने कहाँ खोये हैं, और देश पर गम्भीर संकट मंडरा रहा है।*

*🛡दूसरी और पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की संख्या हमसे दुगनी कर चूका है।*

*🛡1 भारतीय होने के नाते इस महत्वपूर्ण जानकारी को अवश्य शेयर करें।*     

      *🔴✍🏻टी.एस.सुब्रमण्यम. रिटायर्ड,अध्यक्ष-विज्ञान एवम प्रौघोगिकी विभाग, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान*    plzzzzzz share  this🇮🇳

Posted in श्री कृष्णा

GOD


​I read this today morning and Salute the writer….
👉You relax in an aeroplane though you do not know the pilot, 
👉You relax in a ship though you do not know the captain, 
👉You relax in the train without knowing the motorman,
👉You relax in the bus not knowing the driver,
👉 *Why don’t you relax in your life while you know that God is its controller?*
*Trust your lord!*🙏😇

*He is the best planner!*👌🙂

*Wishing you a Beautiful Life!* 💙👍

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

टालस्टाय ने एक छोटी सी कहानी लिखी है।


टालस्टाय ने एक छोटी सी कहानी लिखी है। मृत्यु के देवता ने अपने एक दूत को भेजा पृथ्वी पर। एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया। क्योंकि तीन छोटी-छोटी लड़कियां जुड़वां–एक अभी भी उस मृत स्त्री के स्तन से लगी है। एक चीख रही है, पुकार रही है। एक रोते-रोते सो गयी है, उसके आंसू उसकी आंखों के पास सूख गए हैं–तीन छोटी जुड़वां बच्चियां और स्त्री मर गयी है, और कोई देखने वाला नहीं है। पति पहले मर चुका है। परिवार में और कोई भी नहीं है। इन तीन छोटी बच्चियों का क्या होगा?
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उस देवदूत को यह खयाल आ गया, तो वह खाली हाथ वापस लौट गया। उसने जा कर अपने प्रधान को कहा कि मैं न ला सका, मुझे क्षमा करें, लेकिन आपको स्थिति का पता ही नहीं है। तीन जुड़वां बच्चियां हैं–छोटी-छोटी, दूध पीती। एक अभी भी मृत स्तन से लगी है, एक रोते-रोते सो गयी है, दूसरी अभी चीख-पुकार रही है। हृदय मेरा ला न सका। क्या यह नहीं हो सकता कि इस स्त्री को कुछ दिन और जीवन के दे दिए जाएं? कम से कम लड़कियां थोड़ी बड़ी हो जाएं। और कोई देखने वाला नहीं है।
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मृत्यु के देवता ने कहा, तो तू फिर समझदार हो गया; उससे ज्यादा, जिसकी मर्जी से मौत होती है, जिसकी मर्जी से जीवन होता है! तो तूने पहला पाप कर दिया, और इसकी तुझे सजा मिलेगी। और सजा यह है कि तुझे पृथ्वी पर चले जाना पड़ेगा। और जब तक तू तीन बार न हंस लेगा अपनी मूर्खता पर, तब तक वापस न आ सकेगा।
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इसे थोड़ा समझना। तीन बार न हंस लेगा अपनी मूर्खता पर–क्योंकि दूसरे की मूर्खता पर तो अहंकार हंसता है। जब तुम अपनी मूर्खता पर हंसते हो तब अहंकार टूटता है।
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देवदूत को लगा नहीं। वह राजी हो गया दंड भोगने को, लेकिन फिर भी उसे लगा कि सही तो मैं ही हूं। और हंसने का मौका कैसे आएगा?
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उसे जमीन पर फेंक दिया गया। एक मोची, सर्दियों के दिन करीब आ रहे थे और बच्चों के लिए कोट और कंबल खरीदने शहर गया था, कुछ रुपए इकट्ठे कर के। जब वह शहर जा रहा था तो उसने राह के किनारे एक नंगे आदमी को पड़े हुए, ठिठुरते हुए देखा। यह नंगा आदमी वही देवदूत है जो पृथ्वी पर फेंक दिया गया था। उस को दया आ गयी। और बजाय अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदने के, उसने इस आदमी के लिए कंबल और कपड़े खरीद लिए। इस आदमी को कुछ खाने-पीने को भी न था, घर भी न था, छप्पर भी न था जहां रुक सके। तो मोची ने कहा कि अब तुम मेरे साथ ही आ जाओ। लेकिन अगर मेरी पत्नी नाराज हो–जो कि वह निश्चित होगी, क्योंकि बच्चों के लिए कपड़े खरीदने लाया था, वह पैसे तो खर्च हो गए–वह अगर नाराज हो, चिल्लाए, तो तुम परेशान मत होना। थोड़े दिन में सब ठीक हो जाएगा।
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उस देवदूत को ले कर मोची घर लौटा। न तो मोची को पता है कि देवदूत घर में आ रहा है, न पत्नी को पता है। जैसे ही देवदूत को ले कर मोची घर में पहुंचा, पत्नी एकदम पागल हो गयी। बहुत नाराज हुई, बहुत चीखी-चिल्लायी।
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और देवदूत पहली दफा हंसा। मोची ने उससे कहा, हंसते हो, बात क्या है? उसने कहा, मैं जब तीन बार हंस लूंगा तब बता दूंगा।
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देवदूत हंसा पहली बार, क्योंकि उसने देखा कि इस पत्नी को पता ही नहीं है कि मोची देवदूत को घर में ले आया है, जिसके आते ही घर में हजारों खुशियां आ जाएंगी। लेकिन आदमी देख ही कितनी दूर तक सकता है! पत्नी तो इतना ही देख पा रही है कि एक कंबल और बच्चों के कपड़े नहीं बचे। जो खो गया है वह देख पा रही है, जो मिला है उसका उसे अंदाज ही नहीं है–मुफ्त! घर में देवदूत आ गया है। जिसके आते ही हजारों खुशियों के द्वार खुल जाएंगे। तो देवदूत हंसा। उसे लगा, अपनी मूर्खता–क्योंकि यह पत्नी भी नहीं देख पा रही है कि क्या घट रहा है!
.
जल्दी ही, क्योंकि वह देवदूत था, सात दिन में ही उसने मोची का सब काम सीख लिया। और उसके जूते इतने प्रसिद्ध हो गए कि मोची महीनों के भीतर धनी होने लगा। आधा साल होते-होते तो उसकी ख्याति सारे लोक में पहुंच गयी कि उस जैसा जूते बनाने वाला कोई भी नहीं, क्योंकि वह जूते देवदूत बनाता था। सम्राटों के जूते वहां बनने लगे। धन अपरंपार बरसने लगा।
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एक दिन सम्राट का आदमी आया। और उसने कहा कि यह चमड़ा बहुत कीमती है, आसानी से मिलता नहीं, कोई भूल-चूक नहीं करना। जूते ठीक इस तरह के बनने हैं। और ध्यान रखना जूते बनाने हैं, स्लीपर नहीं। क्योंकि रूस में जब कोई आदमी मर जाता है तब उसको स्लीपर पहना कर मरघट तक ले जाते हैं। मोची ने भी देवदूत को कहा कि स्लीपर मत बना देना। जूते बनाने हैं, स्पष्ट आज्ञा है, और चमड़ा इतना ही है। अगर गड़बड़ हो गयी तो हम मुसीबत में फंसेंगे।
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लेकिन फिर भी देवदूत ने स्लीपर ही बनाए। जब मोची ने देखे कि स्लीपर बने हैं तो वह क्रोध से आगबबूला हो गया। वह लकड़ी उठा कर उसको मारने को तैयार हो गया कि तू हमारी फांसी लगवा देगा! और तुझे बार-बार कहा था कि स्लीपर बनाने ही नहीं हैं, फिर स्लीपर किसलिए?
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देवदूत फिर खिलखिला कर हंसा। तभी आदमी सम्राट के घर से भागा हुआ आया। उसने कहा, जूते मत बनाना, स्लीपर बनाना। क्योंकि सम्राट की मृत्यु हो गयी है।
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भविष्य अज्ञात है। सिवाय उसके और किसी को ज्ञात नहीं। और आदमी तो अतीत के आधार पर निर्णय लेता है। सम्राट जिंदा था तो जूते चाहिए थे, मर गया तो स्लीपर चाहिए। तब वह मोची उसके पैर पकड़ कर माफी मांगने लगा कि मुझे माफ कर दे, मैंने तुझे मारा। पर उसने कहा, कोई हर्ज नहीं। मैं अपना दंड भोग रहा हूं।
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लेकिन वह हंसा आज दुबारा। मोची ने फिर पूछा कि हंसी का कारण? उसने कहा कि जब मैं तीन बार हंस लूं…।
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दुबारा हंसा इसलिए कि भविष्य हमें ज्ञात नहीं है। इसलिए हम आकांक्षाएं करते हैं जो कि व्यर्थ हैं। हम अभीप्साएं करते हैं जो कि कभी पूरी न होंगी। हम मांगते हैं जो कभी नहीं घटेगा। क्योंकि कुछ और ही घटना तय है। हमसे बिना पूछे हमारी नियति घूम रही है। और हम व्यर्थ ही बीच में शोरगुल मचाते हैं। चाहिए स्लीपर और हम जूते बनवाते हैं। मरने का वक्त करीब आ रहा है और जिंदगी का हम आयोजन करते हैं।
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तो देवदूत को लगा कि वे बच्चियां! मुझे क्या पता, भविष्य उनका क्या होने वाला है? मैं नाहक बीच में आया।
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और तीसरी घटना घटी कि एक दिन तीन लड़कियां आयीं जवान। उन तीनों की शादी हो रही थी। और उन तीनों ने जूतों के आर्डर दिए कि उनके लिए जूते बनाए जाएं। एक बूढ़ी महिला उनके साथ आयी थी जो बड़ी धनी थी। देवदूत पहचान गया, ये वे ही तीन लड़कियां हैं, जिनको वह मृत मां के पास छोड़ गया था और जिनकी वजह से वह दंड भोग रहा है। वे सब स्वस्थ हैं, सुंदर हैं। उसने पूछा कि क्या हुआ? यह बूढ़ी औरत कौन है? उस बूढ़ी औरत ने कहा कि ये मेरी पड़ोसिन की लड़कियां हैं। गरीब औरत थी, उसके शरीर में दूध भी न था। उसके पास पैसे-लत्ते भी नहीं थे। और तीन बच्चे जुड़वां। वह इन्हीं को दूध पिलाते-पिलाते मर गयी। लेकिन मुझे दया आ गयी, मेरे कोई बच्चे नहीं हैं, और मैंने इन तीनों बच्चियों को पाल लिया।
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अगर मां जिंदा रहती तो ये तीनों बच्चियां गरीबी, भूख और दीनता और दरिद्रता में बड़ी होतीं। मां मर गयी, इसलिए ये बच्चियां तीनों बहुत बड़े धन-वैभव में, संपदा में पलीं। और अब उस बूढ़ी की सारी संपदा की ये ही तीन मालिक हैं। और इनका सम्राट के परिवार में विवाह हो रहा है।
.
देवदूत तीसरी बार हंसा। और मोची को उसने कहा कि ये तीन कारण हैं। भूल मेरी थी। नियति बड़ी है। और हम उतना ही देख पाते हैं, जितना देख पाते हैं। जो नहीं देख पाते, बहुत विस्तार है उसका। और हम जो देख पाते हैं उससे हम कोई अंदाज नहीं लगा सकते, जो होने वाला है, जो होगा। मैं अपनी मूर्खता पर तीन बार हंस लिया हूं। अब मेरा दंड पूरा हो गया और अब मैं जाता हूं।
.
नानक जो कह रहे हैं, वह यह कह रहे हैं कि तुम अगर अपने को बीच में लाना बंद कर दो, तो तुम्हें मार्गों का मार्ग मिल गया। फिर असंख्य मार्गों की चिंता न करनी पड़ेगी। छोड़ दो उस पर। वह जो करवा रहा है, जो उसने अब तक करवाया है, उसके लिए धन्यवाद। जो अभी करवा रहा है, उसके लिए धन्यवाद। जो वह कल करवाएगा, उसके लिए धन्यवाद। तुम बिना लिखा चेक धन्यवाद का उसे दे दो। वह जो भी हो, तुम्हारे धन्यवाद में कोई फर्क न पड़ेगा। अच्छा लगे, बुरा लगे, लोग भला कहें, बुरा कहें, लोगों को दिखायी पड़े दुर्भाग्य या सौभाग्य, यह सब चिंता तुम मत करना
.