Posted in आरक्षण

​आरक्षण एक संवैधानिक बाध्यता है। सवर्ण समाज को आरक्षण विरोध के लिए नहीं बल्कि स्वयं के अधिकारों के लिए,आरक्षण की मांग करना होगा:—-(ध्यान से पढ़ें)

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श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय,

आप एक ईमानदार व्यक्ति हैं, ऐसा मेरा विश्वास है।

क्या इस देश के सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज )को, सामूहिक आत्महत्या के लिए विवश नहीं किया जा रहा है ??

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विषय:– सवर्ण आयोग का गठन

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(सन्दर्भ, समाचार, 10 फ़रवरी, दैनिक अमर उजाला )

महोदय,

     राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को 27% आरक्षण देने की सिफारिश की है।

   सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन गठित, संवैधानिक निकाय (NCBC) ने कहा है कि केंद्र सरकार ऐसा कानून बनाये जिससे उद्योग, कारोबार,अस्पताल, स्कूलों, ट्रस्टों समेत निजी संगठनों में भी, अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 27% आरक्षण की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी पड़े।

    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के एक सदस्य ने कहा कि सरकारी सेक्टर में अब बहुत कम मौके रह गए हैं, इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को नौकरी देने के लिए अब निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की जरुरत है।

प्रधानमंत्री महोदय,

इस सम्बन्ध में कृपया निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार की आवश्यकता है:—–

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(1)भारत के संविधान में इस देश के सभी नागरिकों में, धर्म, वर्ग, सम्प्रदाय, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी प्रकार के भेद भाव का निषेध किया गया है। देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं।संविधान की मूल भावना की रक्षा करना आप का कर्तव्य और उत्तरदायित्व हैं।

(2) किसी भी प्रकार के भेद भाव को दूर करने के लिए, समय समय पर केंद्र और राज्य सरकारें आयोग का गठन करती रही हैं, और उनकी सिफारिशों को लागू करती रही हैं।उन आयोगों में जैसे:–

(3)अल्पसंख्यक आयोग:–

मुस्लिम,ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी आदि समुदायों के लिए बना है, जिसके अध्यक्ष आम तौर पर मुस्लिम ही बनाये जाते हैं, जो केवल मुस्लिम हितों की ही बात करते हैं।

(4)अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी उसी जाति के होते हैं।

(5)अन्य पिछड़ा आयोग (OBC) का अध्यक्ष भी कोई पिछड़ा ही होता है।

(6) महिला आयोग का अध्यक्ष भी कोई महिला ही होगी, पुरुष नहीं हो सकता।

   ये सभी आयोग अपने अपने धर्म, जाति, वर्ग, समुदाय  की उन्नति के लिए ही कार्य करते हैं।

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हम सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ऐसा कोई संवैधानिक आयोग नहीं है जो हमारी गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि का वास्तविक मूल्याङ्कन कर केंद्र सरकार को उचित जानकारी दे सके।

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जबकि उपरोक्त आयोग, सरकारी सुविधाओं और अन्य संसाधनों का अधिक से अधिक लाभ अपने समुदाय को देने के लिए, राजनैतिक दलों और सरकार पर दबाव डालते रहते हैं और उसमें सफल भी रहते हैं।

ये कुछ ऐसा ही है कि ” अँधा बाँटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को देय।”

(अभी अभी अन्य पिछड़ा आयोग ने क्रीमी लेयर की सीमा 15 लाख रूपये प्रतिवर्ष करने की सिफारिश की है–इसका मतलब है 1,25000₹ मासिक आय वालों को भी आरक्षण दिया जाये)

**जैसे दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने विधायकों की सैलरी 400% बढ़ा दिया, और उधर तेलंगाना सरकार ने भी उसी का अनुकरण किया।

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ये तो कुछ ऐसा ही हो रहा है जैसे न्यायालय में न्यायाधीश की कुर्सी पर किसी दुर्दांत अपराधी को बैठाकर, उसे अपने ही गैंग के अपराधियों की लूट, डकैती, बलात्कार, हत्या आदि जघन्य अपराधों पर न्याय करने का अधिकार दे दिया जाये।

 आप अनुमान लगा सकते हैं कि फिर न्याय कैसा होगा ??

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सामान्य वर्ग (सवर्णों ) के लिए ऐसा कोई आयोग (सवर्ण आयोग ) नहीं है जो उनके आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पिछड़ेपन का मूल्यांकन कर सके तथा केंद्र व राज्य सरकारों को उनकी उन्नति के लिए उचित सुझाव दे सके।

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   इन सब से सनातनी हिन्दू (सवर्ण सामान्य वर्ग ) इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है, और उन्हें सरकारी नौकरियों, सरकारी सुविधाओं जैसे– शिक्षा, क्षात्रवृत्ति, इंदिरा आवास, बीपीएल आदि से वंचित कर दिया गया है।

अब अन्य पिछड़ा आयोग(NCBC) ने सरकारी क्षेत्र में पूर्णतया कब्ज़ा जमाने के बाद अब प्राइवेट सेक्टर में भी, सभी क्षेत्र में 27% आरक्षण का कानून बनाने की सिफारिश सरकार से कर दी है।

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वर्तमान स्थिति में हम सनातनी हिन्दू (सवर्ण,सामान्य वर्ग) आधिकारिक रूप से, अपने ही देश में,पाकिस्तान, बांग्लादेश के पददलित हिंदुओं की ही तरह उपेक्षित और सरकारी संसाधनों, सुविधाओं, नौकरियों आदि से क़ानूनी रूप से, वंचित और अपमानित, और प्रताड़ित किये जा रहे हैं। जैसे कि उत्तर प्रदेश में दयाशंकर सिंह की बेटी और पत्नी स्वाति सिंह के सार्वजनिक अपमान के रूप में हुआ।

    अतः श्रीमान से विनम्र निवेदन है कि भारत में, सनातनी हिंदुओं (सवर्ण,सामान्य वर्ग) की गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, सामाजिक स्थिति आदि का वास्तविक मूल्यांकन करने के लिए, हमारे नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए, अविलंब एक सवर्ण आयोग का गठन सुनिश्चित करें।

   और जब तक यह सवर्ण आयोग का सर्वेक्षण,वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट केंद्र सरकार को न दे, तब तक अन्य सभी जाति, वर्ग,धर्म, लिंग के आधार पर बने आयोगों की सभी सिफारिशों को स्थगित रखा जाये। आप से हम उचित न्याय की उम्मीद रखते हैं।

आप हमारी एक मात्र आशा की किरण हैं।

निवेदक:– हम हैं इस देश के राष्ट्रवादी किन्तु भारत सरकार द्वारा उपेक्षित नागरिक।

#PMOINDIA

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वंदे मातरम्

मित्रों ! यदि सहमत हैं तो शेयर करें और इस आवेदन को PMO को फैक्स निम्न पते पर करें:–

Shri Narendra modi,

The honourable Prime Minister of India.

152, south block,

Raisina Hill 

New Delhi-110011

Phone +91–11–23012312, 23018939

FAX +91–11–23016857

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आवाज उठाओ, चुप्पी तोड़ो !

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Library in the shape of a book


Library in the shape of a book

A  library in the shape of an open book is expected to open next year in Dubai. The Mohammed bin Rashid Library in Al Jaddaf will hold more than 1.5 million volumes, 1 million audio books and 2 million e-books, making it the world’s largest electronic collection and the biggest library in the Arab world.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

पर्स में फोटो


पर्स में फोटो

 

यात्रियों से खचाखच भरी ट्रेन में टी.टी.ई.
को एक पुराना फटा सा पर्स मिला। उसने
पर्स को खोलकर यह पता लगाने की कोशिश
की कि वह किसका है। लेकिन पर्स में
ऐसा कुछ नहीं था जिससे कोई सुराग मिल
सके। पर्स में कुछ पैसे और भगवान श्रीकृष्ण
की फोटो थी। फिर उस टी.टी.ई. ने हवा में
पर्स हिलाते हुए पूछा “यह किसका पर्स है?”
एक बूढ़ा यात्री बोला -“यह मेरा पर्स है। इसे
कृपया मुझे दे दें।”टी.टी.ई. ने कहा -“तुम्हें यह
साबित करना होगा कि यह पर्स
तुम्हारा ही है। केवल तभी मैं यह पर्स तुम्हें
लौटा सकता हूं।”उस बूढ़े व्यक्ति ने दंतविहीन
मुस्कान के साथ उत्तर दिया -“इसमें भगवान
श्रीकृष्ण की फोटो है।”टी.टी.ई. ने
कहा -“यह कोई ठोस सबूत नहीं है।
किसी भी व्यक्ति के पर्स में भगवान
श्रीकृष्ण की फोटो हो सकती है। इसमें
क्या खास बात है? पर्स में
तुम्हारी फोटो क्यों नहीं है?”
बूढ़ा व्यक्ति ठंडी गहरी सांस भरते हुए
बोला -“मैं तुम्हें बताता हूं कि मेरा फोटो इस
पर्स में क्यों नहीं है। जब मैं स्कूल में पढ़
रहा था, तब ये पर्स मेरे पिता ने मुझे
दिया था। उस समय मुझे जेबखर्च के रूप में
कुछ पैसे मिलते थे। मैंने पर्स में अपने माता
पिता की फोटो रखी हुयी थी।
जब मैं किशोर अवस्था में पहुंचा, मैं
अपनी कद-काठी पर मोहित था। मैंने पर्स में
से माता-पिता की फोटो हटाकर
अपनी फोटो लगा ली। मैं अपने सुंदर चेहरे और
काले घने बालों को देखकर खुश हुआ
करता था। कुछ साल बाद
मेरी शादी हो गयी। मेरी पत्नी बहुत सुंदर
थी और मैं उससे बहुत प्रेम करता था। मैंने
पर्स में से अपनी फोटो हटाकर
उसकी लगा ली। मैं घंटों उसके सुंदर चेहरे
को निहारा करता।
जब मेरी पहली संतान का जन्म हुआ, तब मेरे
जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। मैं अपने
बच्चे के साथ खेलने के लिए काम पर कम समय
खर्च करने लगा। मैं देर से काम पर जाता ओर
जल्दी लौट आता। कहने की बात नहीं, अब
मेरे पर्स में मेरे बच्चे की फोटो आ गयी थी।”
बूढ़े व्यक्ति ने डबडबाती आँखों के साथ
बोलना जारी रखा -“कई वर्ष पहले मेरे
माता-पिता का स्वर्गवास हो गया। पिछले
वर्ष मेरी पत्नी भी मेरा साथ छोड़ गयी।
मेरा इकलौता पुत्र अपने परिवार में व्यस्त है।
उसके पास मेरी देखभाल का क्त नहीं है।
जिसे मैंने अपने जिगर के टुकड़े की तरह
पाला था, वह अब मुझसे बहुत दूर हो चुका है।
अब मैंने भगवान कृष्ण की फोटो पर्स में
लगा ली है। अब जाकर मुझे एहसास हुआ है
कि श्रीकृष्ण ही मेरे शाश्वत साथी हैं। वे
हमेशा मेरे साथ रहेंगे। काश मुझे पहले ही यह
एहसास हो गया होता। जैसा प्रेम मैंने अपने
परिवार से किया, वैसा प्रेम यदि मैंने ईश्वर के
साथ किया होता तो आज मैं
इतना अकेला नहीं होता।”
टी.टी.ई. ने उस बूढ़े व्यक्ति को पर्स
लौटा दिया। अगले स्टेशन पर ट्रेन के रुकते
ही वह टी.टी.ई. प्लेटफार्म पर बने बुकस्टाल
पर पहुंचा और विक्रेता से
बोला -“क्या तुम्हारे पास भगवान की कोई
फोटो है? मुझे अपने पर्स में रखने के लिए
चाहिए।”

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