Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान


जरूर पढ़ें आपकी दिल को छु जायेगी 😊
,
रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान
बन्द ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया ..
,
उसके मुॅंह में एक थैली थी, जिसमें सामान की
लिस्ट और पैसे थे …
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दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस
थैली में भर दिया …
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कुत्ते ने थैली मुॅंह मे उठा ली और चला गया …
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दुकानदार आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे
पीछे गया ये देखने की इतने समझदार
कुत्ते का मालिक कौन है ….
,
कुत्ता बस स्टाॅप पर खडा रहा, थोडी देर बाद
एक बस आई जिसमें
चढ गया ..
,
कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे
कर दी, उस के गले के बेल्ट में पैसे और
उसका पता भी था ..
,
कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के
बेल्ट मे रख दिया ..
,
अपना स्टाॅप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे
चला गया और पूॅंछ हिलाकर कंडक्टर
को इशारा कर दिया
और बस के रुकते ही उतरकर चल दिया …
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दुकानदार भी पीछे पीछे चल रहा था …
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कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरोंसे
२-३ बार खटखटाया …
,
अन्दर से उसका मालिक आया और लाठी से
उसकी पिटाई कर दी ..
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दुकानदार ने मालिक से इसका कारण पूछा .. ??
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मालिक बोला .. “साले ने मेरी नींद खराब कर दी,
चाबी साथ लेके नहीं जा सकता था गधा”
,
,
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जीवन की भी यही सच्चाई है ..
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आपसे लोगों की अपेक्षाओं का
कोई अन्त नहीं है ..
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जहाँ आप चूके वहीं पर लोग बुराई निकाल लेते हैं और पिछली सारी अच्छाईयों को भूल जाते हैं ..
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इसलिए अपने कर्म करते चलो, लोग
आपसे कभी संतुष्ट नहीं होएँगे।।
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अगर दिल को छुआ हो तो शेयर जरूर कीजियेगा

Posted in संस्कृत साहित्य

जनेऊ


“जनेऊ”

जनेऊ क्यों पहनते हैं, जानिए-

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

1) जनेऊ क्या है? :
आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएँ कांधे से दाएँ बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ कहते हैं। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। जनेऊ को संस्कृत भाषा में ‘यज्ञोपवीत’ कहा जाता है। यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएँ कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएँ कंधे के ऊपर रहे।

2) तीन सूत्र क्यों? : जनेऊ में मुख्‍यरूप से तीन धागे होते हैं। ये तीन सूत्र त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। ये तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं। ये तीन सूत्र सत्व, रज एवं तम के प्रतीक हैं। ये तीन सूत्र गायत्री मंत्र के तीन चरणों का प्रतीक हैं। ये तीन सूत्र तीन आश्रमों का प्रतीक हैं। सन्यास आश्रम में यज्ञोपवीत को उतार दिया जाता है।

3) ब्रह्मसूत्र क्या है? :

जनेऊ (यज्ञोपवीत) को ब्रह्मसूत्र, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध और बलबन्ध भी कहते हैं। वेदों में भी जनेऊ धारण करने की हिदायत दी गई है। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं। ‘उपनयन’ का अर्थ है, पास या निकट ले जाना। जनेऊ धारण करने वाला व्यक्ति ब्रह्मा (रचियता) के प्रति समर्पित हो जाता है। जनेऊ धारण करने के बाद व्यक्ति को विशेष नियम आचरणों का पालन करना पड़ता है।

4) नौ तार : यज्ञोपवीत के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। इस तरह कुल तारों की संख्‍या नौ होती है। एक मुख, दो नासिका, दो आँख, दो कान, मल और मूत्र के दो द्वारा मिलाकर कुल नौ होते हैं। हम मुख से अच्छा बोलें और सात्विक खाएँ, आँखों से अच्छा देखें और कानों से अच्छा सुनें।

5) पाँच गांठ :
यज्ञोपवीत में पाँच गांठ लगाई जाती हैं जो ब्रह्म, धर्म, अर्ध, काम और मोक्ष की प्रतीक हैं। ये पाँच यज्ञों, पाँच ज्ञानेद्रियों और पंचकर्मों का प्रतीक भी हैं।

6) जनेऊ की लंबाई :
यज्ञोपवीत की लंबाई 96 अंगुल होती है। इसका अभिप्राय यह है कि जनेऊ धारण करने वाले को 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए। चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक मिलाकर कुल 32 विद्याएँ होती हैं। 64 कलाओं में जैसे- वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी, साहित्य कला, दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण, कृषि ज्ञान आदि।

7) जनेऊ धारण वस्त्र :
जनेऊ धारण करते वक्त बालक के हाथ में एक दंड होता है। वह बगैर सिला एक ही वस्त्र पहनता है। गले में पीले रंग का दुपट्टा होता है। मुंडन करके उसके शिखा रखी जाती है। पैर में खड़ाऊ होती है। मेखला और कोपीन पहनी जाती है।

8) कब पहनें जनेऊ? :
१/ जिस दिन गर्भ धारण किया हो उसके आठवें वर्ष में बालक का उपनयन संस्कार किया जाता है।
२/ जनेऊ पहनने के बाद ही विद्यारंभ होती है, लेकिन आजकल गुरु परंपरा के समाप्त होने के बाद अधिकतर लोग जनेऊ नहीं पहनते हैं तो उनको विवाह के पूर्व जनेऊ पहनाई जाती है। लेकिन वह सिर्फ रस्म अदायिगी से ज्यादा कुछ नहीं, क्योंकि वे जनेऊ का महत्व नहीं समझते हैं।

३/ “यथा-निवीनी दक्षिण कर्णे यज्ञोपवीतं कृत्वा मूत्रपुरीषे विसृजेत”
अर्थात : अशौच एवं मूत्र विसर्जन के समय दाएँ कान पर जनेऊ रखना आवश्यक है। हाथ-पैर धोकर और कुल्ला करके ही इसे उतारें।

४/ किसी भी धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, यज्ञ आदि करने के पूर्व जनेऊ धारण करना जरूरी है।
५/ विवाह तबतक नहीं होता जबतक कि जनेऊ धारण नहीं किया जाता है।
6/ जब जितनी बार भी मूत्र या शौच विसर्जन करना हो, करते वक्त जनेऊ धारण किया जाता है।

9) जनेऊ संस्कार का समय : माघ से लेकर अगले छ: मास, उपनयन के लिए उपयुक्त हैं। प्रथम, चौथी, सातवीं, आठवीं, नवीं, तेरहवीं, चौदहवीं, पूर्णमासी एवं अमावस की तिथियाँ बहुधा छोड़ दी जाती हैं। सप्ताह में बुध, बृहस्पति एवं शुक्र सर्वोत्तम दिन हैं। रविवार मध्यम तथा सोमवार बहुत कम योग्य है। किन्तु मंगल एवं शनिवार निषिद्ध माने जाते हैं।

१/ मुहूर्त :
नक्षत्रों में हस्त, चित्रा, स्वाति, पुष्य, घनिष्ठा, अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, श्रवण एवं रवती अच्छे माने जाते हैं। एक नियम यह है कि भरणी, कृत्तिका, मघा, विशाखा, ज्येष्ठा, शततारका को छोड़कर सभी अन्य नक्षत्र सबके लिए अच्छे हैं।

२/ पुनश्च: : पूर्वाषाढ, अश्विनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, ज्येष्ठा, पूर्वाफाल्गुनी, मृगशिरा, पुष्य, रेवती। तीनों उत्तरा नक्षत्र।द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी, एकादशी, तथा द्वादशी तिथियाँ। रवि, शुक्र, गुरु और सोमवार दिन। शुक्ल पक्ष, सिंह, धनु, वृष, कन्या और मिथुन राशियाँ। उत्तरायण में सूर्य के समय में उपनयन (यज्ञोपवीत/जनेऊ) संस्कार शुभ होता है।

10) जनेऊ के नियम :
१/ यज्ञोपवीत को मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व दाहिने कान पर चढ़ा लेना चाहिए और हाथ स्वच्छ करके ही उतारना चाहिए। इसका स्थूल भाव यह है कि यज्ञोपवीत कमर से ऊँचा हो जाए और अपवित्र न हो। अपने व्रतशीलता के संकल्प का ध्यान इसी बहाने बार-बार किया जाए।
२/ यज्ञोपवीत का कोई तार टूट जाए या 6 माह से अधिक समय हो जाए, तो बदल देना चाहिए। खंडित प्रतिमा शरीर पर नहीं रखते। धागे कच्चे और गंदे होने लगें, तो पहले ही बदल देना उचित है।
३/ जन्म-मरण के सूतक के बाद इसे बदल देने की परम्परा है। जिनके गोद में छोटे बच्चे नहीं हैं, वे महिलाएँ भी यज्ञोपवीत सँभाल सकती हैं; किन्तु उन्हें हर मास मासिक धर्म के बाद उसे बदलना है।
४/ यज्ञोपवीत शरीर से बाहर नहीं निकाला जाता। साफ करने के लिए उसे कण्ठ में पहने रहकर ही घुमा-घुमा कर धो लेते हैं। भूल से उतर जाए, तो प्रायश्चित की एक माला जप करने या बदल लेने का नियम है।
५/ देव प्रतिमा की मर्यादा बनाये रखने के लिए उसमें चाबी के गुच्छे आदि न बाँधें। इसके लिए भिन्न व्यवस्था रखें। बालक जब इन नियमों के पालन करने योग्य हो जाएँ, तभी उनका यज्ञोपवीत करना चाहिए।

11) जनेऊ का वैज्ञानिक महत्व :
वैज्ञानिक दृष्टि से जनेऊ पहनना बहुत ही लाभदायक है। यह केवल धर्माज्ञा ही नहीं, बल्कि आरोग्य का पोषक भी है, अत: इसको सदैव धारण करना चाहिए।

१/ चिकित्सकों के अनुसार ‘जनेऊ’ हृदय के पास से गुजरने से यह हृदय रोग की संभावना को कम करता है, क्योंकि इससे रक्त संचार सुचारू रूप से संचालित होने लगता है।

२/ जनेऊ पहनने वाला व्यक्ति नियमों में बँधा होता है। वह मल विसर्जन के पश्चात अपनी जनेऊ उतार नहीं सकता। जब तक वह हाथ पैर धोकर कुल्ला न कर ले। अत: वह अच्छी तरह से अपनी सफाई करके ही जनेऊ कान से उतारता है। यह सफाई उसे दाँत, मुँह और पेट को कृमि, जीवाणुओं के रोगों से बचाती है। जनेऊ का सबसे ज्यादा लाभ हृदय रोगियों को होता है।

३/ मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व जनेऊ को कानों पर कस कर दो बार लपेटना पड़ता है। इससे कान के पीछे की दो नसें, जिनका सँबंध पेट की आँतों से होता है। ये लपेटन आँतों पर दबाव डालकर उनको पूरा खोल देती हैं, जिससे मल-विसर्जन आसानी से हो जाता है तथा कान के पास ही एक नस से मल-मूत्र विसर्जन के समय कुछ द्रव्य विसर्जित होता है। जनेऊ उसके वेग को रोक देती है, जिससे कब्ज, एसीडिटी, पेट रोग, मूत्रन्द्रीय रोग, रक्तचाप, हृदय के रोगों सहित अन्य संक्रामक रोग नहीं होते।

४/ चिकित्सा विज्ञान के अनुसार दाएँ कान की नस अंडकोष और गुप्तेन्द्रियों से जुड़ी होती है। मूत्र विसर्जन के समय दाएँ कान पर जनेऊ लपेटने से शुक्राणुओं की रक्षा होती है।

५/ वैज्ञानिकों के अनुसार बार-बार बुरे स्वप्न आने की स्थिति में जनेऊ धारण करने से इस समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

६/ कान में जनेऊ लपेटने से मनुष्य में सूर्य नाड़ी का जागरण होता है।

७/ कान पर जनेऊ लपेटने से पेट सँबंधी रोग एवं रक्तचाप की समस्या से भी बचाव होता है।

८/ माना जाता है कि शरीर के पृष्ठभाग में पीठ पर जाने वाली एक प्राकृतिक रेखा है जो विद्युत प्रवाह की तरह काम करती है। यह रेखा दाएँ कंधे से लेकर कमर तक स्थित होती है। जनेऊ धारण करने से विद्युत प्रवाह नियंत्रित रहता है जिससे काम-क्रोध पर नियंत्रण रखने में आसानी होती है।

9) जनेऊ से पवित्रता का अहसास होता है। यह मन को बुरे कार्यों से बचाती है। कंधे पर जनेऊ है, इसका मात्र अहसास होने से ही मनुष्य भ्रष्टाचार से दूर रहने लगता है।

१०/ विद्यालयों में बच्चों के कान खींचने के मूल में एक यह भी तथ्य छिपा हुआ है कि उससे कान की वह नस दबती है, जिससे मस्तिष्क की कोई सोई हुई तंद्रा कार्य करती है। इसलिए भी यज्ञोपवीत को दाएँ कान पर धारण करने का उद्देश्य बताया गया है।
प्रणाम।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी…


योगिअंश रमेश चन्द्र भार्गव

“कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी…”

नदी में हाथी की लाश बहे जा रही थी। एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट माँस खाया। नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहाँ भोजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूँ?

कौआ नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा। भूख लगने पर वह लाश को नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। ‘अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहारी दृश्य’… इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा।

नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। नदी मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई। चार दिन की मौज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहाँ उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय! सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हो रही थी।

कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानों से झूठा रौब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छोर उसे कहीं नजर नहीं आया। आखिरकार थककर, दुख से कातर होकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहरों में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया।

शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्यों की भी गति उसी कौए की तरह होती है, जो आहार और आश्रय को ही परम गति मानते हैं और अंत में अनन्त संसार रूपी सागर में समा जाते हैं।

जीत किसके लिए, हार किसके लिए
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए…?

जो भी आया है वो जाएगा एक दिन
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए…???

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

बस एक. ही. चीज. है. जो नहीं. बदलती… और वो हैं “हम खुद”….


👉 *इस संदेश को पढिये मन प्रसन्न हो जायेगा*👈

रोज तारीख बदलती. है,
रोज. दिन. बदलते. हैं….
रोज. अपनी. उमर. भी बदलती. है…..
रोज. समय. भी बदलता. है…
हमारे नजरिये. भी. वक्त. के साथ. बदलते. हैं…..
बस एक. ही. चीज. है. जो नहीं. बदलती…
और वो हैं “हम खुद”….

और बस ईसी. वजह से हमें लगता है. कि. अब “जमाना” बदल गया. है……..

किसी शायर ने खूब कहा है,,

रहने दे आसमा. ज़मीन कि तलाश. ना कर,,
सबकुछ। यही। है, कही और तलाश ना कर.,

हर आरज़ू पूरी हो, तो जीने का। क्या। मज़ा,,,
जीने के लिए बस। एक खूबसूरत वजह। कि तलाश कर,,,

ना तुम दूर जाना ना हम दूर जायेंगे,,
अपने अपने हिस्से कि। “दोस्ती” निभाएंगे,,,

बहुत अच्छा लगेगा ज़िन्दगी का ये सफ़र,,,
आप वहा से याद करना, हम यहाँ से मुस्कुराएंगे,,,

क्या भरोसा है. जिंदगी का ,
इंसान. बुलबुला. है पानी का ,

जी रहे है कपडे बदल बदल कर ,,
*एक दिन एक ” कपडे ” में ले जायेंगे ” कंधे ” बदल बदल कर*

Posted in काश्मीर - Kashmir

कश्मीर का खूनी इतिहास


भाग 1: कश्मीर का खूनी इतिहास

कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर पड़ा था। कश्मीर के मूल निवासी सारे हिन्दू थे। कश्मीरी
पंडितो की संस्कृति 5000 साल पुरानी है और वो कश्मीर के मूल निवासी हैं। इसलिए अगर कोई
कहता है कि भारत ने कश्मीर पर कब्ज़ा कर
लिया है ।।

यह बिलकुल गलत है। 14वीं शताब्दी में तुर्किस्तान
से आये एक क्रूर आतंकी मुस्लिम दुलुचा ने 60,000 लोगो की सेना के साथ कश्मीर में आक्रमण किया
और कश्मीर में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की। दुलुचा ने नगरों और गाँव को नष्ट कर दिया और हजारों हिन्दुओ का नरसंघार किया। बहुत सारे
हिन्दुओ को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया। बहुत
सारे हिन्दुओ ने जो इस्लाम नहीं कबूल करना चाहते थे, उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली और
बाकि भाग गए या क़त्ल कर दिए गए या इस्लाम
कबूल करवा लिए गए। आज जो भी कश्मीरी मुस्लिम
है उन सभी के पूर्वजो को इन अत्याचारों के कारण जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया था।

भाग 2: 1947 के समय कश्मीर

1947 में ब्रिटिश संसद के “इंडियन इंडीपेनडेंस
इ एक्ट” के अनुसार ब्रिटेन ने तय किया की मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को पाकिस्तान बनाया जायेगा। 150 राजाओं ने पाकिस्तान चुना और बाकी 450 राजाओ ने भारत। केवल एक जम्मू और कश्मीर के राजा बच गए थे जो फैसला नहीं कर पा रहे थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज भेजकर कश्मीर पर आक्रमण
किया तो कश्मीर के राजा ने भी हिंदुस्तान में कश्मीर
के विलय के लिए दस्तख़त कर दिए। ब्रिटिशो ने यह कहा था की राजा अगर एक बार दस्तखत कर दिया तो वो बदल नहीं सकता और जनता की आम राय पूछने की जरुरत नहीं है। तो जिन कानूनों के आधार पर भारत और पाकिस्तान बने थे उन नियमो के अनुसार कश्मीर पूरी तरह से भारत का अंग बन
गया था। इसलिए कोई भी कहता है की कश्मीर पर भारत ने जबरदस्ती कब्ज़ा कर रहे है वो बिलकुल
झूठ है।

भाग 3: सितम्बर 14, 1989

बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य और जाने माने वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल तप्लू का JKLF ने क़त्ल कर दिया। उसके बाद जस्टिस नील कान्त गंजू को गोली मार दिया गया। सारे कश्मीरी नेताओ की हत्या एक एक करके कर दी गयी। उसके बाद 300 से ज्यादा हिन्दू महिलाओ और पुरुषो की निर्संश हत्या की गयी। कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी। यह खुनी खेल चलता रहा और अपने सेकुलर राज्य और केंद्र सरकार, मीडिया ने कुछ भी नहीं किया।

भाग 4: जनवरी 4, 1990

आफताब, एक स्थानीय उर्दू अखबार ने हिज्ब -उल -मुजाहिदीन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, सभी हिन्दू अपना सामन पैक करें और कश्मीर छोड़ कर चले जाएँ। एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा ने इस निष्कासन आदेश को दोहराया। मस्जिदों में भारत और हिन्दू विरोधी भाषण दिए जाने लगे। सभी कश्मीरी हिन्दू/मुस्लिमो को कहा गया की इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाये। सिनेमा और विडियो पार्लर वगैरह बंद कर दिए गए। लोगो को मजबूर किया गया की वो अपनी घड़ी पाकिस्तान के समय के अनुसार करे लें।

भाग 5: जनवरी 19, 1990

सारे कश्मीरी पंडितो के घर के दरवाजो पर नोट लगा दिया जिसमे लिखा था “या तो मुस्लिम बन जाओ या कश्मीर छोड़ कर भाग जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ”। पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने टीवी पर कश्मीरी मुस्लिमो को भारत से आजादी के लिए भड़काना शुरू कर दिया। सारे कश्मीर के मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमे मुस्लिमो को कहा गया की वो हिन्दुओ को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद सारे कश्मीरी मुस्लिम सडको पर उतर आये। उन्होंने कश्मीरी पंडितो के घरो को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया। कुछ महिलाओ को जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया। बच्चो को स्टील के तार से गला घोटकर मार दिया गया। कश्मीरी महिलाये ऊंचे मकानों की छतो से कूद कूद कर जान देने लगी। कश्मीरी मुस्लिम, कश्मीरी हिन्दुओ के हत्या करते चले गए और नारा लगते चले गए की उन पर अत्याचार हुआ है और उनको भारत से आजादी चाहिए।

भाग 6: कश्मीरी पंडितो का पलायन

3,50,000 कश्मीरी पंडित अपनी जान बचा कर कश्मीर से भाग गए। कश्मीरी पंडित जो कश्मीर के मूल निवासी है उन्हें कश्मीर छोड़ना पड़ा और तब कश्मीरी मुस्लिम कहते है की उन्हें आजादी चाहिए। यह सब कुछ चलता रहा लेकिन सेकुलर मीडिया चुप रही उन्होंने देश के लोगो तक यह बात कभी नहीं पहुचाई इसलिए देश के लोगो को आज तक नहीं पता चल पाया की क्या हुआ था कश्मीर में। देश- विदेश के लेखक चुप रहे, भारत का संसद चुप रहा, देश के सारे हिन्दू, मुस्लिम, सेकुलर चुप रहे। किसी ने भी 3,50,000 कश्मीरी पंडितो के बारे में कुछ नहीं कहा। आज भी अपने देश के मीडिया 2002 के दंगो के रिपोर्टिंग में व्यस्त है। वो कहते है की गुजरात में मुस्लिम विरोधी दंगे हुए थे लेकिन यह कभी नहीं बताते की 750 मुस्लिमों के साथ साथ 310 हिन्दू भी मरे थे और यह भी कभी नहीं बताते की दंगो की शुरुआत मुस्लिमो ने की थी, जब उन्होंने 59 हिन्दुओं को ट्रेन में गोधरा में जिन्दा जला दिया था। हिन्दुओं पर अत्याचार के बात की रिपोर्टिंग से कहते है की अशांति फैलेगी, लेकिन मुस्लिमो पर हुए अत्याचार की रिपोर्टिंग से अशांति नहीं फैलती। इसे कहते है सेकुलर (धर्मनिरपेक्ष) पत्रकारिता।

भाग 8: कश्मीरी पंडितो और भारतीय सेना के खिलाफ भारतीय मीडिया का षड्यंत्र

आज देश के लोगो को कश्मीरी पंडितो के मानवाधिकारों के बारे में भारतीय मीडिया नहीं बताती है लेकिन आंतकवादियों के मानवाधिकारों के बारे में जरुर बताती है। आज सभी को यह बताया जा रहा था है की ASFA नाम का किसी कानून का भारतीय सेना काफी ज्यादा दुरूपयोग किया है। कश्मीर में अलगावादी संगठन मासूम लोगो की हत्या करवाते है और भारतीय सेना के जवान जब उन आतंकियों के खिलाफ कोई करवाई करते है तो यह अलगावादी नेता अपने बिकीहुए मीडिया के सहायता से चीखना चिल्लाना शुरू कर देते है की देखो हमारे ऊपर कितना अत्याचार हो रहा है।
मित्रों, बात यहाँ तक नहीं रुकी है। अश्विन कुमार जैसे कुछ डाइरेक्टर इंशाल्लाह कश्मीर नामक पिक्चर बना रहे है और यह पुरे विश्व की लोगो को यह दिखा रहे है की कश्मीर के भोले भाले मुस्लिम युवाओ पर भारतीय सेना के जवानों ने अत्याचार किया है। अश्विन कुमार अपने वृत्तचित्र पूरे विश्व के पटल पर रख रहे है। हर तरह से देश और विदेश में लोगो को दिखा रहे है की गलती भारतीय सेना की है..लेकिन जो सच्चाई है वो बिलकुल यह छिपा दे रहे है।

आज़ाद सेना

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एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे


एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर
तट पर गाड़ दिए जब वे स्नान करके
बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की
उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा
हुआ था!
उन्होंने भगवान राम से कहा –
” भ्राता ! लगता है कि अनजाने में कोई हिंसा हो गई ।” दोनों ने मिट्टी हटाकर देखा तो पता चला कि वहां एक मेढ़क मरणासन्न पड़ा है
भगवान राम ने करुणावश मेंढक से
कहा- “तुमने आवाज क्यों नहीं दी ?
कुछ हलचल, छटपटाहट तो करनी
थी। हम लोग तुम्हें बचा लेते जब सांप पकड़ता है तब तुम खूब आवाज लगाते हो। धनुष लगा तो क्यों नहीं बोले ?
मेंढक बोला – प्रभु! जब सांप पकड़ता है तब मैं ‘राम- राम’ चिल्लाता हूं एक आशा और विश्वास रहता है, प्रभु अवश्य पुकार सुनेंगे। पर आज देखा कि साक्षात भगवान श्री राम स्वयं धनुष लगा रहे है तो किसे पुकारता? आपके सिवा किसी का नाम याद नहीं आया बस इसे अपना सौभाग्य मानकर चुपचाप सहता रहा..!!

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कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?


जानकारी——
कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 – ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 – मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 – कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 – विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 – वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 – इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 – कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 – विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 – बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | शेयर करे ताकि हर हिंदू इस जानकारी को जाने..

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कुसुमसरोवर


((( कुसुमसरोवर ))))))))))
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एक दिन श्री किशोरी जी सखियों के साथ कुसुम वन में फूल चयन कर रही थीं।
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श्री श्यामसुंदर ने माली के रूप में दूर से खड़े होकर आवाज़ लगाई,” कौन तुम फुलवा बीनन हारी ?”
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साथ की सखियां भयभीत होकर इधर-उधर भाग खड़ी हुईं।
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श्री किशोरी जी का नीलाम्बर एक झाड़ी में उलझ गया, भाग न सकीं। इस हड़बड़ाहट में एक-दो फूल भी उनके हाथ से गिर गए।
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इतने में माली का रूप छोड़ कर सामने श्री श्याम सुंदर आकर उपस्थित हुए।
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उन्होंने नीलाम्बर को झाड़ी से छुड़ा दिया।
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श्री राधा के द्वारा पृथ्वी पर गिरे फूल श्री श्यामसुंदर ने उठा लिए।
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श्री किशोरी जी ने कहा, ”प्रियतम ! पृथ्वी पर गिरे फूल पूजा के योग्य तो रहे नहीं अब क्या करोगे इनका ?”
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श्री श्यामसुंदर ने उन फूलों को सरोवर के जल से धो लिया और बोले प्राणवल्लभे ! अब ये फूल शुद्ध हो गए हैं। इतना कह कर श्री श्यामसुंदर ने वे कुसुम श्री किशोरी जी की बेनी में लगा दिए।
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श्री युगल किशोर के आनन्द की सीमा न रही।
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तभी से यह सरोवर ‘कुसुमसरोवर’ नाम से प्रसिद्ध हो गया।
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कहते हैं श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती इस पुष्पवन मेंआकर एकान्त लीला-चिन्तन करते थे।
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प्रकट-वृन्दावन की प्रकिया भावमयी लीला के तत्त्व को न जानने वाले लोग श्री चक्रवर्ती से शास्त्रार्थ में पार न पा सकते थे।
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उनके मन में एक दिन यहां एकान्त में आकर श्री चक्रवर्ती का अनिष्ट करने की सूझी।
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चार व्यक्ति पुष्प वन में घुसे ही थे कि श्री राधा की सखियों ने प्रत्यक्ष होकर उन्हें डांटा और कहा,” तुरन्त यहां से भाग जाओ हमारी स्वामिनी श्री राधा यहां पुष्प चयन करने को आई हुई हैं श्री श्याम सुंदर के लिए।”
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इतना सुनते ही चारों व्यक्ति वहां से भाग खड़े हुए। उनके मन में पूर्ण विश्वास हो गया कि श्री गोविन्द लीलामृत में जो लीलाएं वर्णित हैं, वे अक्षरशः सत्य हैं।
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अपनी कुचेष्टा की निन्दा करते हुए लज्जित हो गए।
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उन्हें श्री किशोरी जी की सखियों के दर्शन एवं वचनामृत पान का सौभाग्य तो प्राप्त हो गया। उनका अंतः करण शुद्ध हो गया एवं प्रकट-वृन्दावन की लीला का सार जान गए कि यहां प्रकीया-भावमयी लीला है।
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(((((((((( जय जय श्री राधे ))))))))))

Posted in PM Narendra Modi

मोदी का विरोध क्यों ???


मोदी का विरोध क्यों ???
● क्या मोदी कोई विदेशी है जो बाहर से आकर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जबरदस्ती बैठ गए हैं ?
● क्या मोदी का चरित्र दागदार है ?
● क्या मोदी ने कोई भ्रष्टाचार किया है ?
● क्या मोदी अपनी तिजोरी भर रहे हैं नेहरू-गांधी परिवार की तरह ?
● क्या मोदी का कोई बेटे-भतीजे-भाई-भौजाई को लाभ देने में लगे हैं ?
● क्या मोदी की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है ?
● क्या मोदी राष्ट्रविरोधी कार्य कर रहे हैं ?
● क्या मोदी कामचोर है ?

स्वयं से ये सवाल करने पर हर बार अंतर्मन जवाब देगा – “नहीं-नहीं”.
तब मोदी से एलर्जी क्यों ??

अल्पज्ञानी आरोप लगाते हैं कि-
(1) राम मंदिर नहीं बनवाया
(2) धारा 370 नहीं हटाया
(3) PDP से गठबंधन किया
(4) 15 लाख नहीं दिये
(5) अच्छे दिन नहीं आए

तो ये बताओ कि –
1. तुम्हें सभी विषय में 100% नंबर मिले थे ?
2. पहली नौकरी लगते ही घर खरीद लिया ?
3. पांचवा तल्ला पहले बनाया या मजबूत नींव पहले बनाई ?
4. पांचवा गियर पहले लगता है कि या पहला ?

उदाहरण और भी जोड़ सकते हैं…….

कोई नहीं बताता कि अगर मोदी नहीं तो कौन ??

कौन बना सकता है स्थायी सरकार ?
कौन बनवा सकता है राम मंदिर ?
कौन हटवा सकता है धारा 370 ?
कौन करवा सकता है किसानों की सुरक्षा ?
कौन कर सकता है भारत की रक्षा ?

एक साजिश है लुटेरों की, ताकि आप फंस जाएं, और इनको लूटने को मिले…

मई 2014 से आज तक सारे चोर चुहार, देशद्रोही, आतंकी टाईप के लोग क्यों पगलाए हैं ?

जरा सोचिए !

अगर आपने आज मोदी का साथ नहीं दिया तो जैसे वाजपेयी सरकार के जाने के बाद सोनिया की ग़ुलामी 10 साल करनी पड़ी थी अबकी बार शायद 100 साल से भी ज्यादा करनी पड़ेगी। खून के आँसू रोना पड़ेगा। सोचें…

हमने अपने देश की बागडोर मोदी जी जैसे एक ऐसे मजबूत और ताकतवर व्यक्ति के हाथ में दी है जो देश के 125 करोड़ हिन्दुस्तानियों के भविष्य के बारे में 24 घंटे सोचते हैं और उनके भविष्य को संवारने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

मीडिया और लोगों का विरोध सुन कर भी वो देश के भविष्य के लिए कार्य कर रहे हैं ।

अपने लिए नहीं ;
हमारे भारत के स्वर्णिम भविष्य के लिए जी रहे हैं।

गर्व करें कि आप मोदी समर्थक हैं, कोई इटली की टीम के गुलाम नहीं, या चीन का साथ देने वाले वामपंथी नहीं, न ही अन्ना हजारे के साथ भारत माता की जय बोलकर सीएम बनने वाले, और आज भारत माता की जय नहीं बोलने को जायज ठहराने वाले किसी के चेले नहीं।

दस लोगों को शेयर करें, दुष्प्रचार करने वालों को तो पैसा मिलता है, देश से उनको कोई मतलब नहीं, पर आप सुप्रचार करें, आप सुप्रचार करें तो हमारा-आपका देश सुरक्षित रहेगा, और आनेवाली आपकी पीढियाँ एक जगद्गुरु भारत की संताने होंगी।

🙊जब देश का बंटवारा हुआ तब सरकार किसकी थी ??
🙊जब पाक अधिकृत कश्मीर बना तब सरकार किसकी थी ??
🙊जब मुंबई पर हमला हुआ तब सरकार किसकी थी ??
🙊जब चाइना ने जमींन हड़पी तब सरकार किसकी थी ??
🙊जब वीर सैनिकों के सर काट के पाकिस्तानी ले गए तब सरकार किसकी थी ??
🙊 बोफर्स का घोटाला हुआ तब सरकार किसकी थी ??
🙊सैनिकों की वर्दी का पैसा खा गए वो सरकार किसकी थी ??
🙊सरदारों का कत्ले आम किया वो सरकार किसकी थी ??
🙊शिमला का समझौता कर देश की बेशकीमती जमीन पाक को दे दी तब सरकार किसकी थी ??
🙊आसाम में हिदुओ का खून बहा तब सरकार किसकी थी ??
🙊 कश्मीरी पंडितो को मारा गया तब सरकार किसकी थी ??
🙊 कॉमनवेल्थ घोटाला, कोल घोटाला, 2G घोटाला हुआ तब सरकार किसकी थी??
🙊 दूरदर्शन के मोनो से “सत्यम् शिवम् सुन्दरम्” हटाने वाली सरकार कीसकी थी??

🙊भारतीय मुद्रा से “सत्यमेव जयते”
हटाने वाली सरकार किसकी थी??
🙊 वन्दे मातरम का अपमान किया वो सरकार किसकी थी??
🙊 इंदिरा गाँधी के रास्ते में आने वाले लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में रहस्यमय हालत में मौत हो गयी…
🙊 नेहरु के लिए खतरा बन रहे श्यामा प्रशाद मुखर्जी और दीन दयाल उपाध्याय की हत्या कर दी गयी और पुलिस ने आज तक इस साजिश से पर्दा नहीं उठाया ?
🙊 राजीव गाँधी के लिए चुनौती बन रहे बीर बहादुर सिंह की पेरिस में मौत हो गयी जबकि उनको ह्रदय की कोई समस्या नही थी ?
🙊 सोनिया गाँधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की दो लोगों ने हिम्मत की राजेश पाइलट और जितेन्द्र प्रशाद।
राजेश पाइलट की कार को एक रहस्यमय ट्रक टक्कर मारकर गायब हो गया और जितेन्द्र प्रशाद बरेली के सर्किट हॉउस में मर गए ??
🙊 इसके पहले सोनिया को चुनौती देने वाले सीताराम केसरी को पार्टी से भगा दिया गया?
🙊 राहुल गाँधी के लिए खतरा साबित हो रहे माधवराव सिंधिया एक प्लेन एक्सीडेंट में मारे गए जबकि उनका प्लेन ब्रांड न्यू था और उसमें कोई समस्या नहीं थी और किसी भी मौसम में उड़ने वाला सिस्टम लगा था।
🙊 काँग्रेस और विदेशी कम्पनियों के लिये खतरा बन चुके “राजीव दीक्षित” की मौत हो गई। राजीव भाई की मृत्यु की खबर किसी भी मीडिया चैनल ने नहीँ दिखाई।

मित्रो, जो भी इस परिवार अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाता है उसकी रहस्यमय हालात में मौत हो जाती है ?? शशि थरूर की पत्नी भी इस बात का उदाहरण है।
Sirf padho mat SHARE karo
संविधान की धारा 30(A) के तहत विद्यालयों में गीता रामायण पढ़ाना क्यों प्रतिबंधित है, और मदरसों में कुरान और ईसाइयों को बाइबिल पढ़ाने की छूट ||
हिन्दू मंदिरों और तीर्थ स्थानों के चढ़ावे पर 70% सरकार का हक, मस्जिदों और मजारों पर चढावे का पूरा हक उन्हीं का, साथ ही सरकारी अनुदान||
बाबा अमरनाथ और कैलाश पर्वत की यात्रा पर सरकार को टैक्स, लेकिन हज यात्रा पर सब्सिडी !!
इच्छा है तो इस मैसेज को आगे बढाएं, वरना स्वयं को भारतीय कैसे कहेंगे…
जय हिन्द…

पूरा पढ़ना मित्रो…

# China मोदी के खिलाफ !
# America मोदी के खिलाफ !
# CIA मोदी के खिलाफ !
# CBI मोदी के खिलाफ !
# IB मोदी के खिलाफ !
# ISI मोदी के खिलाफ !
# PAK मोदी के खिलाफ !
# Congress मोदी के खिलाफ !
# JDU मोदी के खिलाफ !
# BSP मोदी के खिलाफ !
# SP मोदी के खिलाफ !
# CPI मोदी के खिलाफ !
# CPIM मोदी के खिलाफ !
# AAP मोदी के खिलाफ !
# लालू, मालू, भालू, कालू, राहु, माया, कजरी, सब मोदी के खिलाफ !

सारी कायनात लगी है एक शख्स को झुकाने में…
जाने किस मिटटी का इस्तेमाल किया रब्ब ने “मोदी” को बनाने में!!

“मैं मुफ्त भोजन दूंगा” – राहुल गांधी
“मैं मुफ्त पानी दूंगा” – केजरीवाल

“न तो मैं मुफ्त पानी दूँगा , ना ही मुफ्त भोजनकि बात करूंगा ,
बल्कि मैं
इतने रोजगार पैदा करूँगा,

भारत के युवाओं को इतना सक्षम कर दूंगा,

की मेरे देश का हरेक व्यक्ति स्वाभिमान से अपना भी पेट भरेगा और दूसरों की भी प्यास बुझाएगा”
– नरेंद्र मोदी

अगर देश के लिए कुछ करना है तो यह सन्देश 3 लोगो को भेजें, बस एक कड़ी जोड़ कर देखें, पूरा देश जुड़ जायेगा।

जरा सा forward…
सिर्फ 1-2 पल ही लगेंगे…
🌷🌷Jai Ho🌷🌷

Forwarded as received…

Sent from Samsung Mobile.




શ્રધ્ધામાં ભય જોડાય છે ત્યારે તે અંધશ્રધ્ધામાં ફેરવાય છે!
 
અથવા ભયથી ઉત્પન થયેલી શ્રધ્ધા, અંધશ્રધ્ધામાં પરિણમે છે!

भय से जुड़ी हुवी श्रद्धा का परिणाम अंधश्रद्धा में प्रवेश कराता हैं !