Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

An elephant and a dog became pregnant at same time


An elephant and a dog became pregnant at same time. Three months down the line the dog gave birth to six puppies. Six months later the dog was pregnant again, and nine months on it gave birth to another dozen puppies. The pattern continued.

On the eighteenth month the dog approached the elephant questioning, _”Are you sure that you are pregnant? We became pregnant on the same date, I have given birth three times to a dozen puppies and they are now grown to become big dogs, yet you are still pregnant. Whats going on?”._

The elephant replied, _”There is something I want you to understand. What I am carrying is not a puppy but an elephant. I only give birth to one in two years. When my baby hits the ground, the earth feels it. When my baby crosses the road, human beings stop and watch in admiration, what I carry draws attention. So what I’m carrying is mighty and great.”._

Don’t lose faith when you see others receive answers to their prayers.

Don’t be envious of others testimony. If you haven’t received your own blessings, don’t despair. Say to yourself “My time is coming, and when it hits the surface of the earth, people shall yield in admiration.”

Posted in श्री कृष्णा

कृष्ण_शब्द_का_अर्थ


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#कृष्ण_शब्द_का_अर्थ
कृष्ण शब्द के अनेक अर्थ हैं। कृष् धातु का एक अर्थ है खेत जोतना, दूसरा अर्थ है आकर्षित करना। वे जो खींच लेते हैं, वे जो प्रत्येक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जो सम्पूर्ण संसार के प्राण हैं- वही हैं कृष्ण। कृष्ण का अर्थ है विश्व का प्राण, उसकी आत्मा। कृष्ण का तीसरा अर्थ है वह तत्व जो सबके ‘मैं-पन’ में रहता है। मैं हूँ, क्योंकि कृष्ण है। मेरा अस्तित्व है, क्योंकि कृष्ण का अस्तित्व है। अर्थात यदि कृष्ण नहीं हो तो मेरा अस्तित्व भी नहीं होगा। मेरा अस्तित्व पूर्णत: कृष्ण पर निर्भर करता है। मेरा होना ही कृष्ण के लक्षण या प्रमाण है।
➡ अगर आप भी अपने बाल गोपाल,अपने घर मंदिर की झांकी,सजावट पेज पर भेजना व् देखना चाह रहे तो नि:संकोच पेज पे पोस्ट कर सकते है
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवा..
💐👣 #ԶเधेԶเधे 👣💐

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एक गिद्ध का बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था। 


​👇👇अपना कीमती समय निकाल कर जरूर पढ़े 👇👇
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🌿🌾एक गिद्ध का बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था। 
🌿🌾एक दिन गिद्ध का बच्चा अपने पिता से बोला- “पिताजी, मुझे भूख लगी है।”
🌿🌾”ठीक है, तू थोड़ी देर प्रतीक्षा कर। मैं अभी भोजन लेकर आता

हूूं।” कहते हुए गिद्ध उड़ने को उद्धत होने लगा। 
🌿🌾तभी उसके बच्चे ने उसे टोक दिया, “रूकिए पिताजी, आज मेरा मन इन्सान का गोश्त खाने का कर रहा है।”
🌿🌾”ठीक है, मैं देखता हूं।” कहते हुए गिद्ध ने चोंच से अपने पुत्र का सिर सहलाया और बस्ती की ओर उड़ गया।
🌿🌾बस्ती के पास पहुंच कर गिद्ध काफी देर तक इधर-उधर मंडराता रहा, पर उसे कामयाबी नहीं मिली। 
🌿🌾थक-हार का वह सुअर का गोश्त लेकर अपने घोंसले में पहुंचा। 
🌿🌾उसे देख कर गिद्ध का बच्चा बोला, “पिताजी, मैं तो आपसे इन्सान का गोश्त लाने को कहा था, और आप तो सुअर का गोश्त ले आए?”
🌿🌾पुत्र की बात सुनकर गिद्ध झेंप गया। 
🌿🌾वह बोला, “ठीक है, तू

थोड़ी देर प्रतीक्षा कर।” कहते हुए गिद्ध पुन: उड़ गया। 
🌿🌾उसने इधर-उधर बहुत खोजा, पर उसे कामयाबी नहीं मिली। 
🌿🌾अपने घोंसले की ओर लौटते समय उसकी नजर एक मरी हुई गाय पर पड़ी। 
🌿🌾उसने अपनी पैनी चोंच से गाय के मांस का एक टुकड़ा तोड़ा और उसे लेकर घोंसले पर जा पहुंचा।
🌿🌾यह देखकर गिद्ध का बच्चा  एकदम से बिगड़ उठा, “पिताजी, ये

तो गाय का गोश्त है।
🌿🌾 मुझे तो इन्सान का गोश्त खाना है। क्या आप मेरी इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर सकते?”
🌿🌾यह सुनकर गिद्ध बहुत शर्मिंदा हुआ।
🌿🌾 उसने मन ही मन एक

योजना बनाई और अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए निकल पड़ा।
🌿👤गिद्ध ने सुअर के गोश्त एक बड़ा सा टुकड़ा उठाया और उसे

मस्जिद की बाउंड्रीवाल के अंदर डाल दिया।
🌿👤 उसके बाद उसने गाय का गोश्त उठाया और उसे मंदिर के पास फेंक दिया। 
🌿👤मांस के छोटे-छोटे टुकड़ों ने अपना काम किया और देखते ही पूरे शहर में आग लग गयी।
🌿👤 रात होते-होते चारों ओर इंसानों की लाशें बिछ गयी।
🌿👤यह देखकर गिद्ध बहुत प्रसन्न हुआ। 
🌿👤उसने एक इन्सान के

शरीर से गोश्त का बड़ा का टुकड़ा काटा और उसे लेकर अपने

घोंसले में जा पहुंचा। 
🌿🌾यह देखकर गिद्ध का पुत्र बहुत प्रसन्न हुआ।
🌿🌾 वह बोला, “पापा ये कैसे हुआ? इन्सानों का इतना ढेर

सारा गोश्त आपको कहां से मिला?”
🌿👤गिद्ध बोला, “बेटा ये इन्सान कहने को तो खुद को बुद्धि के

मामले में सबसे श्रेष्ठ समझता है, 
🌿👤पर जरा-जरा सी बात पर

‘जानवर’ से भी बदतर बन जाता है और बिना सोचे-समझे मरने-

मारने पर उतारू हो जाता है।
🌿👤 इन्सानों के वेश में बैठे हुए अनेक गिद्ध ये काम सदियों से कर रहे हैं। 
🌿👤मैंने उसी का लाभ उठाया

और इन्सान को जानवर के गोश्त से जानवर से भी बद्तर बना दियाा।”
🌿👥साथियो, क्या हमारे बीच बैठे हुए गिद्ध हमें कब तक अपनी

उंगली पर नचाते रहेंगे? 
🌿👥और कब तक हम जरा-जरा सी बात पर अपनी इन्सानियत भूल कर मानवता का खून बहाते रहेंगे?
🌿👥अगर आपको यह कहानी सोचने के लिए विवश कर दे, तो प्लीज़ इसे दूसरों तक भी पहुंचाए। 
🌿👥क्या पता आपका यह छोटा सा प्रयास इंसानों के बीच छिपे हुए किसी गिद्ध को इन्सान बनाने

का कारण बन जाए।””
👥👥आपका शुक्रिया👥👥

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​एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी.


​एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी… 

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मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ …

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बड़ी मिनतो के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया…

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मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से सनी एक कपड़े की कातर थी …

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मैंने मईया से पूछा, मईया ये क्या है…

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मईया बोली मैं वृंदावन बिहारी जी के मंदिर गई थी, मैंने गुलक में 200 रूपये डाले और दर्शन के लिऐ आगे बिहारी जी के पास चली गई …

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वहाँ गोस्वामी जी ने मेरे हाथ मे एक पेड़ा रख दिया, मेने गोस्वामी जी को कहा मुझे दो पेड़े दे दो पर गोस्वामी जी ने मना कर दिया.. 

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मैंने उससे गुस्से मे कहा मैंने 200 रूपये डाले है मुझे पेड़े भी दो चाहिए पर गोस्वामी जी नहीं माने …

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मैंने गुस्से मे वो एक पेड़ा भी उन्हे वापिस दे दिया और बिहारी जी को कोसते हुए बाहर आ कर बैठ गई …

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मैं जैसे ही बाहर आई तभी एक बालक मेरे पास आया और बोला मईया मेरा प्रसाद पकड़ लो मेने जूते पहनने है… 

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वो मुझे प्रसाद पकड़ा कर खुद जूते पहनने लगा और फिर हाथ धोने चला गया …

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फिर वो नही आया .. मै पागलो की तरह उसका इंतजार करती रही …

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काफी देर के बाद मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा …

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उसमें 200 रूपये, चार पेड़े और एक कागज़ पर लिख रखा था ……

( मईया अपने लाला से नाराज ना होया करो)

ये ही वो लिफाफा है …

HAPPY JANAMASHTMI 

‪#‎भगवान_किस_रुप__में_आ_जाये_कोई_नही_जानता‬