Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

सैंधा नमक


“सैंधा नमक” :
सैंधा नमक भारत से कैसे गायब कर दिया गया…!!!???
सैंधा नमक रोगजन्य वात, पित्त और कफ को दूर करता है।
एक होता है समुद्री नमक (sea salt) और दूसरा होता है सैंधा नमक (rock slat) !!
सैंधा नमक बनाया नहीं जाता बल्कि पहले से ही बना बनाया होता है !! पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सैंधा नमक’ ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि-आदि नाम से जाना जाता है, जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। सिंध और लाहौर में सैंधा नमक के बड़े-बड़े प्राकृतिक पहाड़ एवं सुरंगे हैं !! वहाँ से ये नमक मोटे मोटे टुकड़ो में आता है। आजकल पिसा हुआ भी आने लगा है।
यह ह्रदय के लिये उत्तम, पाचक, त्रिदोष शामक, ठंडी तासीर वाला व पचने मे हल्का होता है। इससे पाचक रस बढ़ते हैं।बेहतरी इसी में है कि समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकलकर सैंधा नमक का प्रयोग ही आरँभ किया जाए।

आयोडीन के नाम पर हम जो नमक खाते हैं उसमें आयोडीन और फ्रीफ्लो नमक बनाते समय नमक से सारे तत्व निकाल लिए जाते हैं और बाज़ार में जो नमक उपलब्ध होता है उसमें अन्य पोषक तत्व नहीं होते, सिर्फ सोडियम ही होता है। आयोडीन की कमी के नाम पर यह नमक पूरे देश में बेचा जाता है, जबकि आयोडीन की कमी सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही पार्इ जाती है इसलिए सही मायनों में देखा जाए तो आयोडीन युक्त नमक की ज़रूरत केवल पहाड़ी क्षेत्रों के लिए होती है, ना कि सारे देश के लिए।

भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था।
विदेशी कंपनियाँ भारत में नमक के व्यापार में आज़ादी के पहले से ही उतरी हुई हैं। उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी शासन द्वारा सँपूर्ण भारत की भोली-भाली जनता को आयोडीन मिलाकर समुद्री नमक खिलाना आरँभ कर दिया गया।

हमारे देश में यह सिलसिला इस प्रकार आरँभ हुआ- ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियों (अन्नपूर्णा, कैपटन कुक) ने नमक बेचना शुरू किया, यहीं से ये सारा खेल शुरू हुआ!
अब समझिए खेल क्या था ??
खेल यह था कि विदेशी कंपनियों को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आयोडीन युक्त नामक खाओ… आयोडीन युक्त नमक खाओ!
सादा नमक सेहत के लिए बहुत नुक्सान दायक है और ये आयोडीन वाला नमक सेहत के लिए बहुत अच्छा है… आदि-आदि बातें पूरे देश में प्रायोजित ढंग से फैलाई गईं !! इस प्रकार जो सादा नमक किसी जमाने में 25 से 50 पैसे प्रति किलो बिकता था, उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो ! और आज तो इसकी कीमत 20-25 रूपये प्रति कलो को भी पार कर गई है !

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन से युक्त नमक को 40-50 साल पहले ही ban कर दिया। अमेरिका में नहीं है जर्मनी में नहीं है फ़्राँस में नहीं है, डेन्मार्क मे नहीं है, बस भारत में यह धड़ल्ले से बेचा जा रहा है!!!डेन्मार्क की सरकार ने 1956 में आयोडीन युक्त नमक प्रतिबंधित कर दिया, उनकी सरकार ने कहा- “आयोडीन युक्त नमक खाने से (1940 से 1956 तक ) हमारे यहाँ अधिकांश लोग नपुंसक हो गए और जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया! तब वैज्ञानिको ने आयोडीन युक्त नमक बंद करवाया!”
लेकिन शुरू के दिनों में हमारे देश में जब ये आयोडीन युक्त नमक का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन वाला सादा नमक देश के अंदर बिक ही नहीं सकता!!!
अभी-अभी कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।

जैसा कि सर्वविदित है, हमारे दर्श में कुछ दशक पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सैंधा नमक ही खाते थे !

सैंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है, क्योंकि यह अम्लीय नहीं अपितु क्षारीय (alkaline) प्रकृति का होता है। इस प्रकार क्षारीय चीज पेट एवं रक्त के अम्ल में मिलकर न्यूटल हो जाती है और इस प्रकार रक्त-अम्लता खत्म होते ही शरीर के पचासों रोग ठीक हो जाते हैं।
सैंधा नामक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है। शुद्धता के कारण ही उपवास, व्रत में सब सैंधा नमक ही खाते हैं ! ज़रा सोचिए… जो समुंद्री नमक उपवास को अपवित्र कर सकता है वो मानव शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??
सैंधा नमक शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। इन पोषक तत्वों की कमी के कारण ही लकवे (paralysis ) के अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है।
सैंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बताया गया है कि सैंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है। यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में… जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

समुद्री नमक :-
आयुर्वेद के अनुसार ये नमक अपने आप में ही बहुत खतरनाक है ! कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डालती हैं!! आयोडीन दो तरह का होता है एक प्राकृतिक जो पहले से नमक में होता है यानि सैंधा नमक तथा दूसरा industrial iodine जोकि बहुत ही खतरनाक होता है।
समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमें अतिरिक्त industrial iodine डालकर ये कंपनियाँ को पूरे देश को बेच रही है ! जिससे बहुत सी गँभीर बीमरियाँ हम लोगों को आ रही हैं! ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों में निर्मित है !

आमतौर से उपयोग में लाए जाने वाले समुद्री नमक से उच्च-रक्तचाप (high BP), डाईबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियों का भी कारण बनता है। इसका मुख्य कारण ये है कि यह नमक अम्लीय (acidic) होता है ! जिससे रक्त-अम्लता बढ़ती है और ये नमक पानी में भी कभी पूरी तरह तेजी से नहीं घुलता बल्कि हीरे (diamond) की तरह चमकता रहता है। इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर ना तो घुलता है और ना ही अंत में यह शरीर से बाहर ही निकल पाता है बल्कि किडनी आदि अन्य स्थानों में deposit हो हो कर पथरी, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि अनेकानेक रोगों का कारण बनता है ! ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis) का बहुत बड़ा कारण होता है।

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नहीं है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
विज्ञान के अनुसार ये रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं जिससे blockage की संभावना बढ़ती है व आक्सीजन के प्रवहन में परेशानी होती है, जोड़-दर्द,गठिया, प्रोस्टेट आदि की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। आयोडीन नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओं के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

निवेदन :-
05 हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सैंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था। यहाँ तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था। सैंधा नमक स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था। समुद्री नमक के बजाय सैंधा नमक का प्रयोग ही होना चाहिए। आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, सैंधा नमक में काफी आयोडीन होता है और वह भी प्रकृति द्वारा बनाया आयोडीन होता है।इसके अलावा आयोडीन हमें सिंघाड़ा, कमल ककड़ी, आलू, अरबी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।

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