Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

दादी की दोहावली


*”दादी की दोहावली”*

पानी में गुड़ डालिए,
बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए,
अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल,
बूँद नैन में डार!
दुःखती अँखियाँ ठीक हों,
पल लागें दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत,
पिएँ गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की,
मिट जाएँ सब पीर!!

दूषित पानी जो पिए,
बिगडे उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए,
सौ रोगों का गेट!!

रोज मुलहठी चूसिए,
कफ बाहर आ जाए!
बने सुरीला कंठ भी,
सबको लगत सुहाए!!

भोजन करके खाईए,
सौंफ, गुड़, अजवान!
पत्थर भी पच जाएगा,
जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए,
चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड़, सैंधा नमक,
हृदय-रोग निदान!!

हृदय-रोग, खाँसी और
आँव करें परेशान!
दो अनार खाएँ सदा,
बनवैं बिगड़े काम!!

चैत्र माह में नीम की,
पत्ती हर दिन खाएँ!
ज्वर, डेंगू या मलेरिया,
बारह मील भगाएँ!!

सौ वर्षों तक वह जिए,
जो लेत नाक से श्वास!
अल्पकाल जीवें, करें,
मुँह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी,
करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल,
नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको,
बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक,
का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल,
तन-मन हो कमजोर!
नयन-ज्योति कमजोर हो,
शक्ति घटे चहुँ ओर!!

तुलसी का पत्ता करें,
यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,
तन के सारे रोग!!

प्रातः काल पानी पिएँ,
घूँट-घूँट कर आप!
एक-दो-तीन गिलास ही,
हर औषधि का बाप!!

ठँडा पानी पियो मत,
करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा,
ये तो बँटाढार!!

भोजन करें धरती पर,
अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाईए,
वैद्य न झाँकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो,
दुपहर लस्सी-छांस!
दूध पिएँ तो रात में,
हो सभी रोगों का नाश!!

दही उड़द की दाल सँग,
पपीता दूध के संग!
जो खाएँ इक साथ में,
जीवन हो बदरंग!!

प्रातः-दोपहर लीजिए,
नित नियमित आहार!
तीस मिनट की नींद लें,
रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में,
घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का ,
लुट जाए व्यापार !!

देश, भेष, मौसम यथा,
हो जैसा परिवेश!
वैसा भोजन कीजिए,
कहते सखा रमेश!!

इन बातों को मान कर,
जो करता उत्कर्ष!
जीवन में पग-पग मिले,
उस प्राणी को हर्ष!!

घूँट-घूँट पानी पियो,
रहो तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा,
होवें चकनाचूर!!

जोड़दर्द या हार्निया,
अपेंडिक्स के त्रास!
पानी पीजै बैठकर,
कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे,
तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाई के,
तुरत छोड़ दो चाय!!

सुबह खाईए कुँअर-सा,
दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में,
जैसे रंक रमेश!!

देर रात तक जागना,
रोगों का जँजाल!
अपच, आँख के रोग सँग,
तन भी रहे निढाल!!

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर,
हर दिन दोनो जून!
दाँत करें मजबूत यदि,
करिएगा दातून!!

हल्दी तुरत लगाईए,
अगर काट ले श्वान!
खतम करे ये जहर को,
कह गए कवि महान!!

मिश्री, गुड़, खांड,
ये हैं गुण की खान!
पर सफेद शक्कर सखा,
समझो जहर समान!!

चुंबक का उपयोग कर,
ये है दवा सटीक!
हड्डी टूटी हो अगर,
अल्प समय में ठीक!!

दर्द, घाव, फोड़ा, चुभन,
सूजन, चोट पिराई!
बीस मिनट चुंबक धरौ,
पिरवा जाई हेराई!!

हँसना, रोना, छींकना,
भूख, प्यास या प्यार!
क्रोध, जम्हाई रोकना,
समझो बंटाढार!!

सत्तर रोगों कोे करे,
चूना तन से दूर!
दूर करे ये बाँझपन,
सुस्ती अपच हुजूर!!

यदि सरसों के तेल में,
पग नाखून डुबाय!
खुजली, लाली, जलन सब,
नैनों से गुमि जाय!!

भोजन करके जोहिए,
केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पिएँ,
ये औषधि का पेड़!!

जो भोजन के साथ ही,
पीता रहता नीर!
रोग एक सौ तीन हों,
फ़ूट जाए तकदीर!!

पानी करके गुनगुना,
मैथी देय भिगाय!
सुबह चबाकर नीर पी,
रक्तचाप सुधराय!!

घी देशी हो या वनस्पति,
या हो वनस्पति तेल!
इन्हें खाईएगा अगर,
हार्ट समझिए फेल!!

पहला स्थान सैंधा नमक,
पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी,
ये है जहर समान!!

तेल वनस्पति खाईके,
चर्बी लियो बढाई!
घेरा कोलेस्टरॉल तो,
अब रहई चिल्लाई!!

अल्यूमिनियम के पात्र का,
करता जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा ,
वह अड़तालीस रोग!!

फल या मीठा खाईके,
तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आँत में,
बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा,
बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए,
दिल में बढे विरक्ति!!

नींबू पानी का सदा,
करता जो उपयोग!
पास नहीं आते कभी,
यकृत-आँत के रोग!!

दूषित पानी जो पिए,
बिगड़े उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए,
सौ रोगों का गेट!!

रोज मुलहठी चूसिए,
कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी,
सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाईए,
सौंफ, गुड़, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा,
जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए,
चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सैंधा नमक,
हृदय रोग निदान!!

हृदय रोग, ख़ाँसी और
आंव करें परेशान!
दो अनार खाएँ सदा,
बन जाएँ बिगड़े काम!!

चैत्र माह में नीम की,
पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया,
बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वे जिएँ,
लेत नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें,
मुँह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी,
करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल,
नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको,
बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक,
का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल,
तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो,
शक्ति घटे चहुँ ओर!!

तुलसी का पत्ता करें,
यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,
तन के सारे रोग!!
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