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ग़ुलामी की निशानी अंग्रेजी भाषा।


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राजेश हिन्दूस्तानी

ग़ुलामी की निशानी अंग्रेजी भाषा।

जब भारत अंग्रेजों का ग़ुलाम था तब अंग्रेजी सीखना अंग्रेजी बोलना भारतियों की मज़बूरी थी
लेकिन आज तो हम आज़ाद हैं। अब कौन सी मज़बूरी है हमारी की हम इस ग़ुलामी की निशानी को ढोएं । आजकल ब्होत से पढ़े लिखे भारतीय इस झूठन को चाटना अपना स्टेट्स समझते हैं।
शायद ये भी इस भृम में जी रहे हैं की इंग्लिश एक वैज्ञानिक भाषा है, या इंग्लिश अंतरास्ट्रीय भाषा ,इसके बिना वो तरक्की नही कर सकते । जबकि ये सारे ही तर्क खोखले और झूठे हैं। ये पढ़े लिखे मुर्ख इतना भी नही जानते की ये भाषा उनके पूर्वजों की ग़ुलामी की निशानी है उनके स्वाभिमान पर एक बदनुमा दाग है जो आज तक नही मिटा
भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में अंग्रेजी भाषा का अनिवार्य होना इस बात का सबूत है की हम शारीरिक रूप से तो आज़ाद हो चुके हैं किन्तु मानसिक रूप से हम आज भी ग़ुलाम हैं । और भारत कोई आज़ाद देश नही बल्कि एक ग़ुलाम देश है जो अपनी ग़ुलामी की निशानी को आज तक ढो रहा है। कोई भी आज़ाद देश अपनी ग़ुलामी की निशानी को साथ लेकर नही चलता दुनिया में ब्होत से देश ब्रिटेन के ग़ुलाम रहे हैं। किन्तु आज़ाद होते ही सबसे पहले उन्होंने अपनी मातृभाषा को अपनाया और ग़ुलामी की निशानियों को मिटाया।

यदि आप जानना चाहते हैं की इस गरीब , लाचार और अवैज्ञानिक भाषा का सच क्या है । तो आज ही youtube पर राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान सुने आपको पता चल जाएगा की इस भाषा में कितना दम है।

भाई राजीव दीक्षित अमर रहें। वन्देमातरम।

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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