Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

​बेवक़ूफ़ : एक गृहणी


​बेवक़ूफ़ : एक गृहणी
वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी । 
किचन में आई और चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ाया। 
फिर बच्चों को नींद से जगाया ताकि वे स्कूल के लिए तैयार हो सकें ।

 

कुछ ही पलों मे वो अपने  सास ससुर को चाय देकर आयी फिर बच्चों का नाश्ता तैयार किया और इस बीच उसने बच्चों को ड्रेस भी पहनाई। 
फिर बच्चों को नाश्ता कराया। 
पति के लिए दोपहर का टिफीन बनाना भी जरूरी था।     
इस बीच स्कूल की बस आ गयी और  वो बच्चों को बस तक छोड़ने चली गई । 
वापस आकर पति का टिफीन बनाया और फिर  मेज़ से जूठे बर्तन इकठ्ठा किये ।
इस बीच पतिदेव की आवाज़ आई की मेरे कपङे निकाल दो ।  
उनको ऑफिस जाने लिए कपङे निकाल कर दिए।
अभी पति के लिए उनकी पसंद का नाश्ता तैयार करके टेबिल पर लगाया ही था की छोटी ननद आई और ये कहकर ये कहकर गई की भाभी आज मुझे भी कॉलेज जल्दी जाना, मेरा भी नाश्ता लगा देना। 
तभी देवर की भी आवाज़ आई की भाभी नाश्ता तैयार हो गया क्या?

 

अभी लीजिये नाश्ता तैयार है।
पति और देवर ने नाश्ता किया और अखबार पढ़कर अपने अपने ऑफिस के लिए निकल चले ।
उसने मेज़ से खाली बर्तन समेटे और सास ससुर के लिए उनका परहेज़ का नाश्ता तैयार करने लगी ।

    

दोनों को नाश्ता कराने के बाद फिर बर्तन इकट्ठे किये और उनको भी किचिन में लाकर धोने लगी ।
फिर उसने  सारे बर्तन धोये अब बेड की चादरें वगेरा इकट्ठा करने पहुँच गयी और फिर  सफाई में जुट गयी ।

 

अब तक 11 बज चुके थे, अभी वो पूरी तरह काम समेट भी ना पायी थी  कि दरवाजे पर खट खट आवाज आयी । 
दरवाज़ा खोला तो सामने बड़ी ननद और उसके पति व बच्चे सामने खड़े थे । 
उसने ख़ुशी ख़ुशी सभी को आदर के साथ घर में बुलाया और उनसे बाते करते करते  उनके आने से हुई ख़ुशी का इज़हार करती रही ।

  

ननद की फ़रमाईश के मुताबिक़ नाश्ता तैयार करने के बाद अभी वो नन्द के पास बेठी ही थी की सास की आवाज़ आई की बहु  आज खाने का क्या प्रोग्राम हे । 
उसने घडी पर नज़र डाली तो 12 बज रहे थे ।

     

उसकी फ़िक्र बढ़ गयी वो जल्दी से फ्रिज की तरफ लपकी और सब्ज़ी निकाली  और फिर से दोपहर के खाने की तैयारी में जुट गयी ।

      

खाना बनाते बनाते अब दोपहर का दो बज चुके थे ।
बच्चे स्कूल से आने वाले थे,  लो बच्चे आ गये ।
उसने जल्दी जल्दी बच्चों की ड्रेस उतारी और उनका मुंह हाथ धुलवाकर उनको खाना खिलाया ।

     

इस बीच छोटी नन्द भी कॉलेज से आगयी और देवर भी आ चुके थे । 
उसने सभी के लिए मेज़ पर खाना लगाया और खुद रोटी बनाने में लग गयी ।

    

खाना खाकर सब लोग फ्री हुवे तो उसने मेज़ से फिर बर्तन जमा करने शुरू करदिये । 
इस वक़्त तीन बज रहे थे ।

    

अब उसको खुदको भी भूख का एहसास होने लगा था ।
उसने हॉट पॉट देखा तो उसमे कोई रोटी नहीं बची थी । 
उसने फिर से किचन की और रुख किया तभी पतिदेव घर में दाखिल होते हुये बोले की आज देर हो गयी भूख बहुत लगी हे जल्दी से खाना लगादो ।

  

उसने जल्दी जल्दी पति के लिए खाना बनाया और मेज़ पर खाना लगा कर पति को किचन से गर्म रोटी बनाकर ला ला कर देने लगी ।

    

अब तक चार बज चुके थे ।

     

अभी वो खाना खिला ही रही थी की पतिदेव ने कहा की आजाओ तुमभी खालो ।

    

उसने हैरत से पति की तरफ देखा तो उसे ख्याल आया की आज मैंने सुबह से कुछ खाया ही नहीं ।

   

इस ख्याल के आते ही वो पति के साथ खाना खाने बैठ गयी ।  
अभी पहला निवाला उसने मुंह में डाला ही था की आँख से आंसू निकल आये 

    

पति देव ने उसके आंसू देखे तो फ़ौरन पूछा की तुम क्यों रो रही हो  ।

  

वो खामोश रही और सोचने लगी की इन्हें कैसे बताऊँ की ससुराल में कितनी मेहनत के बाद ये रोटी का निवाला नसीब होता हे और लोग इसे मुफ़्त की रोटी कहते हैं ।

    

पति के बार बार पूछने पर उसने सिर्फ इतना कहा की कुछ नहीं बस ऐसे ही आंसू आगये ।

     

पति मुस्कुराये और बोले कि तुम औरते भी बड़ी “बेवक़ूफ़” होती हो, बिना वजह रोना शुरू करदेती हो।
अच्छा लगे तो आप इसे शेयर करना। सभी ग्रहणीयों को नमन जिनकी वजह से हमारे घरों में प्यार ममता वात्सल्य की गंगा बहती है,और उनका समर्पण अतुलनीय है। धन्यवाद..

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

क्या आप जानते हैं विश्व की सबसे मंहंगी जगह ( ज़मीन ) ‘सरहिंद’ (पंजाब) में है , जो मात्र 4 स्क्वेयर मीटर है।


राजकुमार शर्मा : भाइयो सिख इतिहास को अगर आप पढ़ेगे तो आप कभी भी चुटकले ना बनाकर उन्हें अपना रखवाला ही कहेंगे उतर भारत में जो मुग़ल शाशन काल में  अत्याचार हो रहे थे जबरदस्ती हिन्दुओ को जोर जबदस्ती मुस्लमान बनाया जा रहा था अगर सिख गुरु आगे न आते और अपनी एवं अपने बच्चो कि कुरबानी ना देते तो यह उतर भारत का बहुत बड़ा हिस्सा आज पाकिस्तान में होता आज मैं आपको भाई गुरमीत सिंह होरा के फेस बुक पोस्ट को द इंडिया पोस्ट के माध्यम से आप तक पंहुचा रहा हूँ जिसे पढ़ आप कभी भी किसी सिख भाई का चुटकला नहीं बनाएगे

क्यों हुई ये छोटी सी ज़मीन सबसे महंगी जरूर जानिये – रोंगटे खड़े कर देनें वाली ऐतिहासिक घटना।
यहां पर श्री गुरुगोबिंद सिंह जी के छोटे, साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था।
सेठ दीवान टोंडर मल ने यह जगह 78000 सोने की मोहरे (सिक्के) जमीन पर फैला कर मुस्लिम बादशाह से ज़मीन खरीदी थी। सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास करोड़) बनती है। दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड आज सिख धर्म के इतिहास में दर्ज करवाया गया है। आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी मंहंगी जगह कही नही खरीदी गयी।
दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख
की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था और जीत किसकी होती है..??
उन 42 सूरमो की ! यह युद्ध ‘चमकौर युद्ध’ (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42 सिखों के सामने 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो की गुरु गोबिंद सिंह जी की अगवाई में तैयार हुए थे ! नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीर की जीत होती है जो की मुग़ल हुकूमत की नीव जो की बाबर ने रखी थी , उसे जड़ से उखाड़ दिया और भारत को आज़ाद भारत का दर्ज़ा दिया। औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोबिंद सिंह जी के आगे घुटने टेके और मुग़ल राज का अंत हुआ हिन्दुस्तान से । तभी औरंगजेब ने एक प्रश्न किया गुरुगोबिंद सिंह जी के सामने। कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने जवाब दिया “चिड़ियों से मैं बाज लडाऊं , गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ।”
“सवा लाख से एक लडाऊं तभी गोबिंद सिंह नाम कहाउँ !!” गुरु गोबिंद सिंह जी ने जो कहा वो किया, जिन्हे आज हर कोई शीश झुकता है , यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे हमने कभी पढ़ा ही नहीं !
अगर आपको यकीन नहीं होता तो एक बार जरूर गूगल में लिखे ‘बैटल ऑफ़ चमकौर’ और सच आपको पता लगेगा , आपको अगर थोड़ा सा भी अच्छा लगा और आपको भारतीय होने का गर्व है तो जरूर इसे आगे शेयर करे जिससे की हमारे भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में दुनिया को पता लगे !
***कुछ आगे ***चमकौर साहिब की जमीन आगे चलकर एक सिख परिवार ने खरीदी उनको इसके इतिहास का कुछ पता नहीं था ।
इस परिवार में आगे चलकर जब उनको पता चला के यहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी के दो बेटे शहीद हुए है तो उन्हों ने यह जमीन गुरु जी के बेटो की यादगार ( गुरुद्वारा साहिब) के लिए देने का मन बनाया ….
जब अरदास करने के समय उस सिख से पूछा गया के अरदास में उनके लिए गुरु साहिब से क्या बेनती करनी है ….तो उस सिख ने कहा के गुरु जी से बेनती करनी है के मेरे घर कोई औलाद ना हो ताकि मेरे वंश में कोई भी यह कहने वाला ना हो के यह जमीन मेरे बाप दादा ने दी है।
वाहेगुरु….और यही अरदास हुई और बिलकुल ऐसा ही हुआ उन सिख के घर कोई औलाद नहीं हुई……अब हम अपने बारे में सोचे 50….100 रु. दे कर क्या माँगते है ।
वाहे गुरु….
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह जी