Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family, भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

 वंदे मातरम्aa


​॥ राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ के स्थान पर टागोर रचित जन गण मन क्यू बना ? ॥ 

******* केंद्र सरकार प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित Indian Broadcasting पुस्तक अनुसार ———-

स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात राज्य संविधान का निर्माण नहीं हुआ था , उस समय जवाहर ने एक All India आकाशवाणी पर अंगत / निजी पत्र लिखा कि जब जब आवश्यकता हो तो राष्ट्रगीत ‘जन गण मन ‘ ही रेडियो पर प्रसारित करे । आकाशवाणी ने पाखंडी जवाहर कि सूचना का पालन करते हुए जन गण मन प्रसारित किया । 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रगीत विषयक कोई निर्णय नहीं हुआ था –मान्यता भी नहीं मिली थी । मात्र स्वमुखी जवाहर के आदेश से बजाया जा रहा था । 

जन गण मन को स्वरबद्ध करने के लिए BBC ने तीन विदेशी संगीतकारो को यह कान दिया , तीन प्रकार कि धुन बनी , जवाहर को एक धुन रुचिकर लगी एवं स्वीकृति भी दी । 

……………. Herbed Mirrill नामक एक ब्रिटिश संगीतकार कि यह धुन है , ब्रिटिश संगीतकार को जवाहर ने अन्य साथियों को विश्वास मे लिए बिना आभार पत्र एवं 500 पाउंड का पुरस्कार दिया । जो कि वंदे मातरम् के समर्थक समग्र प्रजा , सांसद , क्रांतिवीर आदि भी थे एवं यह गीत कि धुन लोकहृदय पर छाई हुई थी तथापि अङ्ग्रेज़ी संस्कृति से प्रभावित जवाहर ने बलपूर्वक जन गण मन हम पर ठोंक दिया । 

सर्वप्रथम जवाहर के ;’प्रियमित्र ‘ जिनहा को दुर्गा एवं मंदिर पर आपत्ति थी किन्तु वह तो पाकिस्तान चला गया था , जवाहर कि हिन्दू विरुद्ध मानसिकता उसके मृत्यु पर्यंत चलती रही । 

[][][] आज हमे अर्थहीन , विदेशी धुन आधारित राष्ट्रगीत बलपूर्वक गाना पड़ता है । जवाहर के आने से देश कि दुर्दशा का प्रारम्भ हुआ उत्तरोत्तर उसके वंशजो ने भी दुर्दशा चालू राखी 2014 मे अंत हुआ । 

——————————–praveen kawa————————-

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