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संविधान


Mukesh Sharma

डा• भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता नहीं कारण पूर्ण स्पष्टीकरण के साथ संलग्न कर रहा • भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता नहीं ( 2012 में आदरणीय अग्रज श्री कुणाल शुक्ला द्वारा आरटीआई के जबाब में हुआ खुलासा)

2-: संविधान को लिखने का कार्य उस समय दिल्ली के निवासी श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा( सक्सेना) ने किया
जिसमें 254 पेन होल्डर और 303 निब खर्च हुईं।
Cabinet Mission Plan of 1946 के अन्तर्गत देश में संविधान सभा की स्थापना हुई। कुल सदस्यों की संख्या 389 members representing provinces (292), states (93), the Chief Commissioner Provinces (3) and Baluchistan (1).

सभा की पहली बैठक दिसम्बर 9, 1946 को हुई , जिसमें Dr. Sachhidanand Sinha, the oldest member of the Assembly को Provisional President बनाया गया।
दिसम्बर 11, 1946, को डा• राजेन्द्र प्रसाद को स्थाई चेयर मैन सभा ने चुना। विभाजन के बाद सदस्य संख्या घट कर 299 रह गयी।
3-: संविधान बनाने के लिये बहुत सारी समितियों का निर्माण हुआ जिसमें 8 मुख्य समितियाँ एवं 15 अन्य समितियाँ थी।
Major Committees
1. Union Powers Committee – Jawaharlal Nehru
2. Union Constitution Committee – Jawaharlal Nehru
3. Provincial Constitution Committee – Sardar Patel
4. Drafting Committee – Dr. B.R. Ambedkar
5. Advisory Committee on Fundamental Rights and Minorities
Sardar Patel. This committee had two sub-committes:
(a) Fundamental Rights Sub-Committee – J.B. Kripalani
(b) Minorities Sub-Committee – H.C. Mukherjee
6. Rules of Procedure Committee – Dr. Rajendra Prasad
7. States Committee (Committee for Negotiating with States) – Jawaharlal Nehru
8. Steering Committee – Dr. Rajendra Prasad

Minor Committees
1. Committee on the Functions of the Constituent Assembly – G.V. Mavalankar
2. Order of Business Committee – Dr. K.M. Munshi
3. House Committee – B. Pattabhi Sitaramayya
4. Ad-hoc Committee on the National Flag – Dr. Rajendra Prasad
5. Special Committee to Examine the Draft Constitution – Alladi Krishnaswamy Ayyar
6. Credentials Committee – Alladi Krishnaswamy Ayyar
7. Finance and Staff Committee Sinha
8. Hindi Translation Committee
9. Urdu Translation Committee
10. Press Gallery Committee
11. Committee to Examine the Effect of Indian Independence Act of 1947
12. Committee on Chief Commissioners’ Provinces
13. Commission on Linguistic Provinces
14. Expert Committee on Financial Provisions
15. Ad-hoc Committee on the Supreme Court

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जिस समिति को अभी तक हमें सबसे अधिक महत्व पूर्ण बताया गया ड्राफ्टिंग कमेटी ये थी वो कमेटी 1. Dr B R Ambedkar (Chairman)
2. N Gopalaswamy Ayyangar
3. Alladi KrishnaswamyAyyer
4. Dr K M Munshi
5. Syed Mohammad Saadullah
6. N Madhava Rau (He replaced B L Miner who resigned due to ill-health)
7. T T Krishnamachari (He replaced D P Khaitan who died in 1948)
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यहाँ पर अब मैं आपका ध्यान खींचना चाहूँगा कि संविधान को ड्राफ्ट करने में उसके credentials और ड्राफ्ट को परफेक्ट करने में सबसे बड़ा योगदान रहा
श्री अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर का (Alladi Krishnaswamy Ayyar)
ना कि भीम राव अम्बेडकर का।
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उसके बाद अब उसी विरोध पर आता हूँ from article 330 से 340 तक special provisions relating to certain classes. इस वैकल्पिक व्यवस्था को 70 साल तक बनाये रखने के पीछे कब किसने क्या समीक्षा की उसका आज तक कुछ पता नहीं चला। संविधान में schedule castes/schedule tribes की और backward classes की बात की गयी पर सामान्य की कहीं कोई सुनवाई नहीं आखिर क्यों? फिर संविधान की सपथ में क्यों लिखा गया
“Equality of status and opportunity.”
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इसके अतिरिक्त उल्लेख मिलता है कि संविधान कोई original document नहीं है। बस cut- paste है।
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जब तक देश के संविधान में 21 वीं सदी के भारत के निर्माण हेतु पर्याप्त संशोधन नहीं हो जाते to kya yae savarno ka hath pe hath rakh ke baithne ka samay he kya?

UTHO ek ho zao aur apni awaz buland karo aur poocho kio 70 saal tak ye vote bank ka natak chal raha hae iske peechae kis kis dal ka selfish interest chuupa hua he?

उठो सवर्णो एक हो जाओ इन खुद गरज नेताओं से पूछो क्यों ये 70 सालो से नाटक Conspiracy चल रही हे गरीब सवर्णो के खिलाफ? बाकि जात के गरीब बच्चे क्या इस देश के नागरिक नहीं हे क्या, बार बार हाई और सुप्रीम कोर्ट्स के कहने पर भी क्यों कान पे जु नहीं रेग रही

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सबसे बड़ा संगठन होते हुये भी आर एस एस आरक्षण पर मौन है,प्रतिभाओं की हत्यायें और आत्म हत्यायें विचलित नहीं करती आर एस एस को।
मोहन भागवत जी ने डरते डरते समीक्षा की बात बोली बाद में बैक फ़ुट पर आ गये।
अब संघ को भी वोटवैंक की चिंता है भाजपा के लिए।
सवर्ण जाएँ भाड़ में।

आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति's photo.
Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक राजा था


एक राजा था। उसने दस खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे।

उसके दरबारियों और मंत्रियों से जब कोई मामूली सी भी गलती हो जाती तो वह उन्हें उन कुत्तों को ही खिला देता।

एक बार उसके एक विश्वासपात्र सेवक से एक छोटी सी भूल हो गयी,

राजा ने उसे भी उन्हीं कुत्तों के सामने डालने का हुक्म सुना दिया।

उस सेवक ने उसे अपने दस साल की सेवा का वास्ता दिया,

मगर राजा ने उसकी एक न सुनी।

फिर उसने अपने लिए दस दिन की मोहलत माँगी जो उसे मिल गयी।

अब वह आदमी उन कुत्तों के रखवाले और सेवक के पास गया

और उससे विनती की कि वह उसे दस दिन के लिए अपने साथ काम करने का अवसर दे।

किस्मत उसके साथ थी, उस रखवाले ने उसे अपने साथ रख लिया।

दस दिनों तक उसने उन कुत्तों को खिलाया, पिलाया, नहलाया, सहलाया और खूब सेवा की।

आखिर फैसले वाले दिन राजा ने जब उसे उन कुत्तों के सामने फेंकवा दिया तो वे उसे चाटने लगे, उसके सामने दुम हिलाने और लोटने लगे।

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ।

उसके पूछने पर उस आदमी ने बताया कि महाराज इन कुत्तों ने मेरी मात्र दस दिन की सेवा का इतना मान दिया

बस महाराज ने वर्षों की सेवा को एक छोटी सी भूल पर भुला दिया।

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया।

और उसने उस आदमी को तुरंत

.. .

भूखे मगरमच्छों के सामने डलवा दिया।

सीख:- आखिरी फैसला मैनेजमेंट का ही होता है उसपर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता…

प्राइवेट कर्मचारियों को समर्पित…

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