Posted in कविता - Kavita - કવિતા

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ?


मैं रूठा, तुम भी रूठ गए

फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है, कल खाई होगी

फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप, तुम भी चुप

इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से,

तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और  तुम भी बिछड़कर,

सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी, न तुम राजी,

फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,

तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?

एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,

इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?

फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें….

तो कल इस बात पर फिर

पछतायेगा कौन ?

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