Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक हंस और हंसिनी


एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??

यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !

भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।

वह जोर से चिल्लाने लगा।

हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।

ये उल्लू चिल्ला रहा है।

हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??

ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।

पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।

सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।

हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!

यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा

पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।

हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??

अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!

उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।

कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।

पंचलोग भी आ गये!

बोले- भाई किस बात का विवाद है ??

लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!

लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।

हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।

इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!

फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।

उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!

रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई – ऐ मित्र हंस, रुको!

हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??

पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?

उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!

लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!

मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।

यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!

शायद 65 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!

“कहानी” अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें…

Posted in Tejomahal

Was the Taj Mahal a Vedic Temple? The Photographic Evidence


http://www.krishnapath.org/photographic-evidence-taj-mahal-a-vedic-temple/

Posted in आरक्षण

नोट:- पता नहीं इस पोस्ट को किसने लिखा है लेकिन सभी मित्रों से निवेदन है कि इसे पढ़ें अवश्य और संभव हो सके तो फॉरवर्ड भी करें

एक सज्जन से एक सवाल पूछा गया कि भारत में जनरल कैटेगरी वाला होने पर आपका क्या अनुभव है तो उन्होंने जो जबाब दिया, उसे पढ़िए……..(हिंदी में अनुवाद)
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प्रवेश परीक्षा:
मेरा स्कोर :192
उसका स्कोर :92
जी हाँ हम एक ही कॉलेज में पढ़े…..
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College Fees,
मेरी हर सेमिस्टर की फी 30200. (मेरे परिवार की आय 5 lacs से कम है..)
उसकी हर सेमिस्टर की फी 6600. (उसके माता और पिता दोनों अच्छा कमा रहे हैं……)
जी हाँ हम दोनों एक ही होस्टल में रहते थे…
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Mess Fees,
मैंन 15000/- हर सेमिस्टर के देता था….
वो भी 15000 हर सेमिस्टर के देता था लेकिन सेमिस्टर के अंत में वो उसे रिफंड होते थे…..
जी हाँ हम एक ही मेस में खाते थे….
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Pocket Money,
मेरा खर्चा 5000 था जो कि मैं ट्यूशन और थोड़ा बहुत अपने पिता से लेता था…
वो10000 खर्चा करता था जो कि उसे स्कॉलरशिप के मिलते थे…
जी हाँ हम एक साथ पार्टी करते थे….
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CAT 2015,
मेरा स्कोर : 99 percentile. (किसी IIM से एक मिसकॉल का इंतज़ार रहा.)
उसका स्कोर : 63 percentile. ( IIM Ahemedabad के लिए सलेक्ट हुआ)
जी हाँ ऐप्टीट्यूड और रीजनिंग उसे मैंने पढ़ाया था….
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OIL Campus recruitement,
मैं : Rejected. (My OGPA 8.1)
वो : selected. (His OGPA 6.9)
जी हाँ हमने एक ही कोर्स पढ़ा था…
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GATE Score,
मेरा स्कोर : 39.66 (डिसक्वालीफाईड सो INR 1,68,000 की स्कॉलरशिप भी हाथ से गई )
उसका स्कोर : 26 (क्वालीफाईड और INR 1,68,000 के साथ-साथ अतिरिक्त स्कॉलरशिप भी)
जी हाँ हमने एक जैसे नोट्स शेयर किये थे…
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कौन हूँ मैं ????
मैं भारत में एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ…
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दिमाग में बस कुछ सवाल हैं…..

क्या उसके पास चलने के लिए दो पैर नहीं हैं ??
क्या उसके पास लिखने या काम करने के लिए दो हाथ नहीं हैं ??
क्या उसके पास बोलने के लिए मुंह नहीं है ??
क्या उसके पास सोचने के लिए दिमाग नहीं है ??
अगर हैं तो फिर हम दोनों को एक जैसा ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता ???

ये बात राजनितिक पार्टीयो के बजाय देश के सम्माननीय. न्यायालय के सभी  महानुभावों तक पहुंचे
तब तक forward करे

ताकि देश आरक्षण की दीमक से बरबाद होने से बच जाये