Posted in महाभारत - Mahabharat

दो प्रकार के शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं करना चाहि


द्रौपदी का नीति-ज्ञान

दो प्रकार के शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं करना चाहिएः–

महाभारत में जब जयद्रथ ने द्रौपदी से अनाचार किया, तब युधिष्ठिर ने यह कहकर उसे क्षमा कर दिया कि वह हमारा रिश्तेदार है। इस दुष्ट रिश्तेदार ने युधिष्ठिर को ही मजा चखा दिया। कुरुक्षेत्र के मैदान में इस दुष्ट जयद्रथ के कारण ही अभिमन्यु मृत्यु का ग्रास बना।

जब जयद्रथ को युधिष्ठिर ने प्राणदान देने की बात कही तब द्रौपदी ने बहुत दूरदर्शितापूर्ण और नीतिमत्ता का परामर्श देते हुए कहाः—

राजन्, शत्रुओं को क्षमा भी किया जाता है, किन्तु दो प्रकार के शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं करनी चाहिए, वे दो शत्रु कौन है—सुनिएः–

“भार्याभिहर्त्ता वैरी यो यश्च राज्यहरो रिपुः।
याचमानोsपि संग्रामे न मोक्तव्यः कदाचन।।” (म.भा.वनपर्व-85.46)

जो शत्रु स्त्रियों का अपहरण करना चाहे, उसे और जो राज्य को छिनना चाहे, उसे, ये दो प्रकार के शत्रु क्षमा-कोटि में नहीं आते।

किन्तु युधिष्ठिर ने भावुकता में किसी की नहीं सुनी और जयद्रथ को छुडवा दिया। किन्तु द्रौपदी की बात आगे चलकर अक्षरशः ठीक निकली और जयद्रथ का क्षमादान अभिमन्यु के वध का कारण बना।

युद्ध में जिन महारथियों ने मिलकर निहत्थे अभिमन्यु पर आक्रमण किया, उनमें सबसे प्रमुख जयद्रथ ही था। यह सब युधिष्ठिर की अदूरदर्शिता के कारण हुआ।

इतिहास साक्षी है कि अन्तिम हिन्दू सम्राट् महाराज पृथ्वी सिंह चौहान ने राज्य के लोभी मुहम्मद गोरी को एक बार तो क्या, 17 बार क्षमा कर दिया।

यह क्षमादान भारतवर्ष के लिए नासूर बन गया और भारत 1000 वर्षों के लिए गुलाम बन गया ।

आज भी चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश क्षमादान भारत की ओर से पा रहा है।

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एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा


एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा

बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया। प्रेम

भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में

सुलाता।

कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही

करते।

एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक

गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक

ही फल लगा था।

बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को

अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े

किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा

फकीर को दिया।

फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला,

‘बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक

टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल

गया।

फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग

लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा

लिए।

जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने

कहा, ‘यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा

हूं।

मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं

करते।’ और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख

लिया।

मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह

कड़वा था।

राजा बोला,

‘तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?

उस फकीर का उत्तर था,

‘जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक

कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

सब टुकड़े इसलिए

लेता गया ताकि आपको पता न चले।

दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो, आओ

कुछ ऐसे रिश्ते रचे…

कुछ हमसे सीखें , कुछ हमे

सिखाएं

Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

मकर संक्रांति


रोहित कुमार ‘हैप्पी’

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस संक्रांति को मनाया जाता है।
यह त्यौहार अधिकतर जनवरी माह की चौदह तारीख को मनाया जाता है। कभी-कभी यह त्यौहार बारह, तेरह या पंद्रह को भी हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य कब धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है और इसी कारण इसको उत्तरायणी भी कहते हैं।
मकर संक्रांति से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। शनिदेव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था।
इस त्यौहार को अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल के रूप में तो आंध्रप्रदेश, कर्नाटक व केरला में यह पर्व केवल संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी व सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इस प्रकार यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
यशोदा जी ने जब कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था तब सूर्य देवता उत्तरायण काल में पदार्पण कर रहे थे और उस दिन मकर संक्रांति थी। कहा जाता है तभी से मकर संक्रांति व्रत का प्रचलन हुआ।
– रोहित कुमार ‘हैप्पी’

Posted in आओ संस्कृत सीखे.

Learn Sanskrit very easy way….


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Posted in काश्मीर - Kashmir

कश्मीर


एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी।

एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खड़ा हुआ। अपना पक्ष रखने से पहले उसने ऋषि कश्यप की एक बहुत पुरानी कहानी सुनाने की अनुमति माँगी। अनुमति मिलने के बाद भारतीय प्रवक्ता ने अपनी बात शुरू की…

“एक बार महर्षि कश्यप, जिनके नाम पर आज कश्मीर का नाम पड़ा है, घूमते-घूमते कश्मीर पहुंच गए।

वहाँ उन्होंने एक सुन्दर झील देखी तो उस झील में उनका नहाने का मन हुआ।

उन्होंने अपने कपड़े उतारे और झील में नहाने चले गए।

जब वो नहा कर बाहर निकले, तो उनके कपड़े वहाँ से गायब मिले।

दरअसल, उनके कपड़े किसी पाकिस्तानी ने चुरा लिये थे…”

इतने में पाकिस्तानी प्रवक्ता चीख पड़ा और बोला:
“क्या बकवास कर रहे हो? उस समय तो ‘पाकिस्तान’ था ही नहीं!!!”

भारतीय प्रवक्ता मुस्कुराया और बोला:

“और ये पाकिस्तानी कहते हैं कि कश्मीर इनका है!!!” 🇮🇳🇮🇳

इतना सुनते ही… पूरा संयुक्त राष्ट्र सभा ठहाकों की गूंज से भर उठा।।

एक हिन्दुस्तानी होने के नाते यह वाकया मुझे बहुत पसंद आया।

यदि पसंद आए तो आप भी इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें।

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

શિયાળે સૂપ ભૂલો🍵
ઊનાળે ભલી છાશ🍸
ચોમાસે સોડા ભલી🍷
મારી ચા બારેમાસ ☕
શિયાળે સાયકલ ભલી 🚵
ઊનાળે ભલી કાર🚗
ચોમાસે એસટી ભલી 🚌
મારા ટાંટિયા બારેમાસ 🏃
શિયાળે ઉંધીયુ ભલું 🍲
ઊનાળે ભલો આઈસ્ક્રીમ 🍧
ચોમાસે દાળવડા  ભલા🍟
મારો ‘માવો ‘બારેમાસ 🍬
શિયાળે પ્રેયસી ભલી👸
ઊનાળે ભલી પ્રિયતમા 💏
ચોમાસે ગર્લફ્રેંડ ભલી 💑
તો પત્ની?

ઈ બલા બારેમાસ! 👫

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એક નાનુ એવુ રૂડું રૂપાળું પંખી


એક નાનુ એવુ રૂડું રૂપાળું પંખી બગીચામાં ખિલેલા એક સફેદ ફુલ પર જ ઉડ્યા કરતું હતું. ફુલે પંખીને પુછ્યુ કે તું કેમ મારી આસપાસ જ ઉડ્યા કરે છે . પંખીએ હસતા હસતા કહ્યુ કે ખબર નહી કેમ પણ તારાથી દુર જવાની મને ઇચ્છા જ નથી થતી મને બસ એમ જ થાય છે કે હુ તને એક ક્ષણ પણ મારી નજરથી દુર ન કરું.
ફુલને થયુ કે આ તો સાલું માથે પડ્યુ છે અને મારો પીછો મુકે તેમ લાગતું નથી. મારે કોઇ ઉપાય કરીને આને મારાથી દુર કરવું જ પડશે. એણે પંખીને કહ્યુ કે તું કાયમ મારી સાથે રહેવા ઇચ્છે છે ? પંખી આ સાંભળીને એકદમ આનંદમાં આવી ગયુ એવું લાગ્યુ જાણે કે આખી પૃથ્વી પરનું સુખ ભગવાને એને આપી દીધુ. એણે તો તુરંત જ કહ્યુ કે હા હુ કાયમ તારી સાથે જ રહેવા માંગું છું.
ફુલે કહ્યુ કે જો હું અત્યારે સફેદ છુ જ્યારે હું લાલ થઇ જઇશ ત્યારે આપણે બંને કાયમ માટે એક થઇ જઇશું. આ સાંભળીને પેલું પંખી નાચવા લાગ્યુ અને ગાવા લાગ્યુ. ફુલ વિચારમાં પડી ગયુ કે હુ તો સફેદ છુ લાલ તો થવાનું જ નથી આ તો આનો પીછો છોડાવવા માટે મે આમ કહ્યુ પણ આતો એવું માની બેઠુ લાગે છે કે હું લાલ થઇ જઇશ એની બુધ્ધિ કામ કરતી બંધ થઇ ગઇ લાગે છે.
પેલા ફુલની આસપાસ ખુબ કાંટા હતા પંખીએ ગાતા-ગાતા અને નાચતા નાચતા પોતાના શરિરને કાંટા સાથે અથડાવવાનું શરુ કર્યુ પંખીના શરિરમાંથી લોહીના છાંટા ઉડીને ફુલ પર પડવા માંડયા અને ફુલ ધીમે ધીમે લાલ થવા લાગ્યું.
થોડી વારમાં પંખીનું આખુ શરિર વિંધાય ગયુ અને પેલુ સફેદ ફુલ લાલ થઇ ગયુ. ફુલને હવે સમજાયુ કે પંખી એને કેટલો પ્રેમ કરે છે !!!!!!! એ ઘાયલ પંખી પાસે પોતાના પ્રેમનો એકરાર કરવા નીચુ નમ્યુ અને કહ્યુ કે દોસ્ત મને માફ કરજે હું તો તારા પ્રેમને મજાક સમજતો હતો પણ મને હવે તારો પ્રેમ સમજાય છે અને અનુભવાય પણ છે. હુ પણ તને પ્રેમ કરું છું દોસ્ત ……..ફુલ સતત બોલતું જ રહ્યુ પણ સામે કોઇ જ જવાબ ન મળ્યો ત્યારે ફુલને સમજાયુ કે હવે ઘણું મોડું થઇ ગયુ છે.
આપણા જીવનમાં પણ આવું બનતું હોય છે કોઇ આપણને ખરા દીલથી ચાહતું હોય છે અને આપણે માત્ર એને મજાક સમજીએ છીએ …..જાળવજો …..સંભાળજો ………ક્યાંક પ્રેમનો સ્વિકાર કરવામાં મોડું ન થઇ જાય !!!!!!!!!!!!!!!!!!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

माँ


📞हैलो माँ … में👮 रवि बोल रहा हूँ….,कैसी हो 👵माँ….?

👵मैं…. मैं…ठीक हूँ बेटे…..,ये बताओ तुम और 👸बहू दोनों कैसे हो?

हम दोनों ठीक है

👵माँ…आपकी बहुत याद आती है…, ..अच्छा सुनो माँ,में अगले महीने इंडिया आ रहा हूँ…..तुम्हें लेने।

क्या…? हाँ माँ….,अब हम सब साथ ही रहेंगे….,

👸नीतू कह रही थी 👵माज़ी को अमेरिका ले आओ वहाँ अकेली बहुत परेशान हो रही होंगी।

हैलो ….सुनरही हो 👵माँ…?“हाँ…ह ाँ 👮बेटे…“,बूढ़ी आंखो से खुशी की अश्रुधारा बह निकली,बेटे और बहू का प्यार नस नस में दौड़ने लगा।

जीवन के सत्तर साल गुजार चुकी सावित्री ने जल्दी से अपने पल्लू से आँसू पोंछे और बेटे से बात करने लगी।

पूरे दो साल बाद बेटा घर आ रहा था।

👵बूढ़ी सावित्री ने मोहल्ले भरमे दौड़ दौड़ कर ये खबर सबको सुना दी।

सभी खुश थे की चलो बुढ़ापा चैनसे बेटे और बहू के साथ गुजर जाएगा।

👮रवि अकेला आया था,उसने कहा की माँ हमे जल्दी ही वापिस जाना है इसलिए जो भी💴💰💵💷 रुपया पैसा किसी से लेना है वो लेकर रखलों और तब तक मे किसी प्रोपेर्टी डीलर स💒े मकान की बात करता हूँ।

💒“मकान…?”👵, माँ ने पूछा। हाँ माँ,अब ये मकान बेचना पड़ेगा वरना कौन इसकी देखभाल करेगा।

हम सबतो अब अमेरिका मे ही रहेंगे।👵बूढ़ी आंखो न💒े मकान के कोने कोने को ऐसे निहारा जैसे किसी अबोध बच्चे को सहला रही हो।

आनन फानन और औने-पौने दाम मे रवि ने 💒मकान बेच दिया।

सावित्री देवी ने वो जरूरी सामान समेटा जिस से उनको बहुत ज्यादा लगाव था।

👮रवि 🚕टैक्सी मँगवा चुका था। एयरपोर्ट पहुँचकर रवि ने कहा,”माँ तुम यहाँ बैठो मे अंदर जाकर सामान की जांच और बोर्डिंग और विजा का काम निपटा लेता हूँ।

““ठीक है बेटे।“,सावित्री देवी वही पास की बेंच पर बैठ गई।

काफी समय बीत चुका था। बाहर बैठी👵 सावित्री देवी बार बार उस दरवाजे की तरफ देख रही थी जिसमे रवि गया था लेकिन अभी तक बाहर नहीं आया।‘

शायद अंदर बहुत भीड़ होगी…’,सोचकर👵 बूढ़ी आंखे फिर से टकट की लगाए देखने लगती।

अंधेरा हो चुका था। एयरपोर्ट के बाहरगहमागहमी कम हो चुकी थी।

👵माजी…,किस से मिलना है?”,एक💂 कर्मचारी नेवृद्धा से
पूछा ।

“मेरा 👮बेटा अंदर गया था…..📧टिकिट लेने,वो मुझे अमेरिका लेकर जा रहा है ….”,👵सावित्री देबी ने घबराकर कहा।

“लेकिन अंदर तो कोई पैसेंजर नहीं है,अमेरिका जाने वाली फ्लाइट तो दोपहर मे ही चली गई। क्या नाम था आपके बेटे
का?” ,💂कर्मचारी ने सवाल किया।

👮“र….रवि. …”, 👵सावित्री के चेहरे पे चिंता की लकीरें उभर आई।

💂कर्मचारी अंदर गया और कुछ देर बाद बाहर आकर बोला,“माजी….

आपका बेटा 👮रवि तो अमेरिका जाने वाली✈ फ्लाइट से कब का जा चुका…।”“क्या. ? ”

👵वृद्धा कि आखो से💦 आँसुओं का सैलाब फुट पड़ा।

बूढ़ी👵 माँ का रोम रोम कांप उठा। किसी तरह वापिस 💒घर पहुंची जो अब बिक चुका था।

रात में 💒घर के बाहर चबूतरे पर ही ⛺सो गई।🌄सुबह हुई तो 👳दयालु मकान मालिक ने एक कमरा रहने को दे दिया।

👴पति की💴 पेंशन से 💒घर का किराया और खाने का काम चलने
लगा।

समय गुजरने लगा। एक दिन 👳मकान मालिक न👵े वृद्धा से पूछा।

“माजी… क्यों नही आप अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ चली जाए,अब आपकी उम्र भी बहुत हो गई,अकेली कब तक रह पाएँगी।“

“हाँ,चली तो जाऊँ,लेकिन कल को मेरा👮 बेटा आया तो..?,
यहाँ फिर कौन उसका ख्याल रखेगा?“……

😪😪आखँ से आसू आने लग गए दोस्तों ….!!!

Posted in जीवन चरित्र

Lokmanya Tilak Birthplace


Lokmanya Tilak Birthplace – Monsoons are raining surprises in Ratnagiri

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The Tilak-Thibaw Connect

Along with walking the streets of Ratnagiri in the rains, sometimes you take rides in the friendly auto rickshaws here. And one of these short auto rickshaw trips brings you to another Ratnagiri surprise.

And this surprise blows you out of the monsoon waters!

Lokmanya Gangadhar Birthplace in Ratnagiri

Ratnagiri is hometown of Lokmanya Bal Gangadhar (1856 – 1920) Tilak. Tilak was one of the first assertive nationalist leaders of Indian Independence Movement who coined the slogan “Swaraj is my birthright, and I shall have it.” Lokmanya’s house where he was born has now been turned into a good looking museum. For a change there are signs, personnel and the complex looks well maintained and pleasing.

Display depicting the freedom struggle – at Tilak Museum Ratnagiri

The architecture is traditional Konkani with sloping roofs and wooden elements and open spaces all around.

Entrance to the Museum

Inside you can see some of Tilak’s belongings along with his signature turban. Photos and newspaper clippings give an insight into his contribution to the freedom struggle. You walk around the small and pretty looking house where the kitchen is and where the family lived and the open verandahs in the front and rear and this wood stairway going up to the floor above.

Now this house unlike the Thibaw Palace has a nice vibe to it. The little house is cheerful and you can actually imagine sun streaming through the windows even as it rains outside. This house feels like home; your own little refuge in this indifferent world. Who says houses are inert walls and ceilings? Homes, houses or palaces are living beings that watch and feel. They mirror the feelings of people who inhabit them – when the inhabitants are happy they are happy and when they see suffering they suffer themselves. And while the happy and suffering people are long gone to someplace special, the walls and the mantle and the window continue to smile and cry, telling their stories who have seen it all.

The British had named Tilak as the ‘Father of the Indian Unrest’ because of his propensity to write inflammatory articles in newspapers founded by him – ‘Mahratta’ in English and ‘Kesari’ in Marathi. In another instance, Tilak in his paper Kesari, defended the revolutionaries Khudiram Bose and Prafulla Chaki who attempted to kill the Chief Presidency Magistrate of Calcutta and called for immediate self-rule or swaraj.

Rear View

British patience was running low and Tilak was arrested for sedition. In the ensuing trial, Tilak was convicted by a jury and sentenced to a jail term of six years (1908 – 1914) and sent to – hold your breath – to Mandalay! Same Mandalay capital of Burma from where the King of Burma was exiled to Ratnagiri, birth place of Tilak! And in overlapping time frames!

Mahratta announcing Tilak’s return to to India – Teen Murti Museum, New Delhi

Tilak spent six years imprisoned in Mandalay in the company of a fellow Marathi gentleman named Kulkarni who would cook for him. It was here that Tilak composed his famous commentary on Gita called Gitarahasya (Mystery of Gita).

The British after plundering the Mandalay Palace had converted it into a garrison called Fort Dufferin. Was Tilak imprisoned here in the palace – this is something that can be looked into?

The British really had some wicked sense of humour.

Harshringar Flowers paying homage to Lokmanya Tilak – Mimosa

Still recovering from the Mandalay surprise you walk to the rear of the house where an endearing garden is laid out. Coconut trees create a canopy. It is calm and soothing and surreal here. You spend some time soaking it up all.

Thibaw and Tilak – two different lives intertwining inexplicably and unexpectedly in Ratnagiri and Mandalay. This is what makes history so powerful and interesting.

Surprises are coming in fast here in Ratnagiri. It is time to go visit Ratnadurg and the lighthouse.

Yet Another Surprise – Four Bharat Ratna (India’s highest Civilian Award) awardees were born in Ratnagiri: Dr Dondo Keshave Karve or Maharishi Karve – social reformer; Dr Pandurang Vaman Kane – Indologist and Sanskrit Scholar; Acharya Vinoba Bhave – known for Bhoodan Movement; Dr Babasaheb Ambedkar- principal architect of India’s Constitution. Two other Bharat Ratnas Sachin Tendulkar and Govind Ballabh Pant have their ancestral roots in Ratnagiri.

Getting There: Ratnagiri lies on the south west coast of Maharashtra on the Mumbai-Goa highway and is well connected by trains from Mumbai. Ratnagiri is about about 350 kms from Mumbai and 300 kms from Pune. In Ratnagiri you can hire auto rickshaws to take you around the town and to the fort. The Jijamata Garden will offer you spectacular views of Arabian Sea and Bhatye Beach. Other attractions are the Ratnadurg with its Lighthouse and ThibawPalace, now turned into a museum. Take the bus to Ganpatipule Beach to see mist envelope the hills and sun create scintillating light effects on the water.

Photography is not allowed inside the house.

References:

https://en.wikipedia.org/wiki/Bal_Gangadhar_Tilak

http://timesofindia.indiatimes.com/city/pune/Event-to-mark-Tilaks-Mandalay-return/articleshow/36405507.cms

http://www.kamat.com/jyotsna/blog/blog.php?BlogID=1235
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