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गांधी परिवार


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Rss Kailash Sharma

jai hind….

19 दिसंबर से है गांधी फैमिली का संयोग, जानिए कैसे


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नई दिल्ली : गांधी परिवार के साथ 19 दिसंबर का खास संयोग है। 19 दिसंबर, 1978 को ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और संजय को तिहाड़ जेल भेजा गया था। सोनिया और राहुल भी हेराल्ड केस की सुनवाई के लिए 19 दिसंबर को कोर्ट में पेश हुए। सोनिया-राहुल को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिली।

साल 1978 में इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जेल जाना पड़ा था। 19 दिसंबर, 1978 को संसद की कार्यवाही से इंदिरा गांधी को निलंबित कर दिया गया था।

तत्कालीन मोरारजी देसाई की सरकार ने इसके बाद उन्हें संसद के सत्र जारी रहने तक के लिए जेल भेज दिया गया था। उन पर संसदीय विशेषाधिकार के हनन का आरोप था। इंदिरा संसद भवन में गिरफ्तारी के आदेश मिलने तक टिकी रहीं। आखिरकार रात के आठ बजकर 47 मिनट पर उन्हें स्पीकर के दस्तखत वाला अरेस्ट ऑर्डर दिया गया। गिरफ्तारी के बाद वह संसद के उसी दरवाजे से बाहर निकलीं जहां से वह प्रधानमंत्री की हैसियत से बाहर निकला करती थीं।

उन्हें तिहाड़ जेल के वार्ड नंबर 19 में रखा गया था। इस गिरफ्तारी के बाद तकरीबन हफ्ते भर तक इंदिरा गांधी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रही थीं। कहा जाता है कि इस दौरान सोनिया गांधी खुद खाना लेकर इंदिरा के लिए तिहाड़ जेल जाती थी। ऐसे में 19 दिसंबर एक बार फिर से कांग्रेस के लिए मुश्किल की घड़ी लेकर आया है।

हालांकि इससे पहले जनता सरकार के समय इंदिरा गांधी की तीन अक्टूबर, 1977 को भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें तकनीकी आधार पर रिहा कर दिया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में शनिवार को पटियाला हाउस अदालत में पेशी के लिए पहुंचे थे। कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को 50-50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख तय की है।

वहीं, नेशनल हेराल्‍ड केस में पटियाला हाउस अदालत से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस मुख्‍यालय में पत्रकारों से कहा कि मैं आज अदालत में साफ मन से पेश हुई, जैसा कि कानून का पालन करने वाले किसी भी शख्‍स को करना चाहिए। देश का कानून बिना किसी भय और पक्षपात के लिए सभी पर लागू होता है।

अदालत में साफ मन से पेश हुई : सोनिया
उन्‍होंने कहा कि मुझे जरा भी संदेह नहीं की सच्‍चाई सामने आएगी। हम राजनीतिक विरोधियों के हमलों से वाकिफ है। यह सिलसिला पीढि़यों से चला आ रहा है। यह और बात है कि ये लोग हमें कभी भी अपने रास्‍ते से हटा नहीं पाए। केंद्र सरकार अपने विरोधियों को जान- बूझकर निशाना बना रही है और इसके लिए सरकारी एजेंसी का पूरा इस्‍तेमाल कर रही है। हम डरने वाले नहीं हैं। इनके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस के सिद्धांतो और गरीबों के हितों के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

मोदी जी झूठे इल्‍जाम लगवाते हैं : राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि मैं कानून का आदर करता हूं। मोदी जी झूठे इल्‍जाम लगवाते हैं और वो सोचते हैं कि विपक्ष झुक जाएगा। देश के सभी नागरिकों को बता देना चाहता हूं कि हम नहीं झुके हैं। हम गरीबों के लिए लड़ते रहेंगे और विपक्ष का काम करते रहेंगे। एक इंच भी पीछे नहीं जाएंगे।

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हनुमान जी का पैर का निशान और थाईलैण्ड में भक्त करते हैं पूजा…..


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Narinder Galhotra to कृष्ण प्रेम-Srimad Bhagwad Gita-Bhajans-Divine love towards Lord Krishna

हनुमान जी का पैर का निशान और थाईलैण्ड में भक्त करते हैं पूजा……

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Loksabha Varanasi-लोकसभा वाराणसी

कांग्रेस और केजरीवाल की करतूत के चलते अब तो आतंकी और देशद्रोही भी नाबालिग कानून की आड़ में छूटेगे ?
18 साल में 2 महीने कम का आदमी चाहे कितना भी जघन्य अपराध करे..गिरफ्तार होगा..केजरीवाल की पार्टी उसको नाबालिग सिद्ध करके ”’बाल सुधार गृह” में भिजवा देगे..3 साल बाद जेल से छूटने पर 10 हजार रुपये और सिलाई मशीन इनाम देकर दुकान खुलवा देगे ….पहचान गुप्त रहेगी …
बीजेपी ने ऐसे जघन्य अपराध करने वालो केलिए ”कठोर सजा ” के लिए बिल पास कर चुकी है…किन्तु कांग्रेस ने राज्यसभा में रुकवा दिया है ..
कांग्रेस और केजरीवाल के कारण बाल अपराधी बढ़ेगे ?

निर्भया की मां कहती हैं ”देश चलाने वाले चाहते तो अब तक बिल पास हो गया होता।” बता दें कि मौजूदा कानून के मुताबिक हाईकोर्ट ने नाबालिग दोषी की रिहाई पर रोक लगाने से इनकार कर चुका है।
क्या है बिल और कहां अटका है?
– जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन) अमेंडमेंट बिल राज्यसभा में अटका है। लोकसभा में यह बिल मई 2015 में पास कर दिया था।
– राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास है। क्योंकि राज्यसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है। राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के चलते रुकी हुई है।
क्या कहता है नया जुवेनाइल जस्टिस बिल?
– मोदी सरकार की तरफ से साल 2002 के पुराने बिल में 42 बदलाव किए गए हैं।
– नया जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2014 साल 2002 के पुराने बिल की जगह लेगा।
– नए बिल में कहा गया है कि रेप, मर्डर और एसिड अटैक जैसे खतरनाक अपराधों में शामिल नाबालिगों के खिलाफ भी एडल्ट अपराधियों की तरह केस चलाया जा सकेगा।
– अभी 16 से 18 साल के अपराधियों के केस में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड फैसला करता है। सजा होने पर उन्हें करेक्शन होम में रखा जाता है।
इन बातों पर है एतराज
– एडल्ट क्रिमिनल्स के साथ जेल भेजे जाने से नाबालिगों पर गलत असर पड़ेगा।
– कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस बिल का विरोध किया।
– हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि रेयरेस्ट केस में जुवेनाइल क्रिमिनल की उम्र घटाने से आदिवासी और ट्राइबल कम्युनिटी के लोग ज्यादा परेशान होंगे।
क्यों राज्यसभा में अटका पड़ा है बिल?
– राज्यसभा में कुल 241 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए सरकार को 160 सांसदों की जरूरत होगी।
– राज्यसभा में बीजेपी के 48 सांसद हैं (एसपी और शिवसेना) मिलाकर।
– हालांकि कई मुद्दों पर शिवसेना और एसपी का सरकार को समर्थन करने या विरोध करने को लेकर रुख साफ नहीं है।
– इसके अलावा टीएमसी के 12, बीजेडी के 6, जेडीयू के 12, कांग्रेस के 67, सीपीआई-सीपीएम के 10, मनोनीत 8, एआईडीएमके के 12 और डीएमके के 4 सदस्यों के साथ 101 सदस्यों को कांग्रेस का साथ मिला हुआ है।
निर्भया की मां ने उठाए नेताओं पर सवाल?
– निर्भया गैंगरेप मामले में जुवेनाइल क्रिमिनल को रिलीज किए जाने से पीड़ित की मां आशा सिंह दुखी हैं। उन्होंने ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ा कानून होने और उसे पास ना होने देने को लेकर पॉलिटीशियन को दोषी ठहराया है।
– उन्होंने कहा- कुछ तो करिए, बिल पास करिए, कानून बनाइए और हमें इंसाफ दिलाइए।
– उन्होंने कहा कि नेता लोग चाहते तो अब तक बिल पास हो जाता और हमें इंसाफ मिल जाता। लेकिन ना जाने ऐसे अपराधियों को रोकने के लिए बने कड़े कानून को पास करने में कितने साल लगेंगे और तब ना जाने कितनी महिलाएं ऐसे क्राइम की शिकार होंगी।
– इन मोदी विरोधी लोगों की पॉलिटिक्स में गरीब जनता मारी जा रही है।

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सोनिया गाँधी


जळु भूपत यादव's photo.
जळु भूपत यादव to जय जवान जय किशान

क्या आप जानते है की जब सोनिया गाँधी का
जन्म हुआ था तब उसके पिता पिछले 4 साल से जेल
में थे ?

हैं न अस्चर्या वाली बात ?

आज हम आपको सोनिया गांधी के जीवन से जुड़े
कई रहस्यों को उजागर करेंगे | और सही मायने में
कैसे इन्होने हवा बना कर हमारे भोले-भले
देशवाशियो को ठगने का कम किया हैं |

सोनिया गाँधी कौन है ?

सरकारी या अधिकारिक रूप से कोई भी
सोनिया गाँधी नही है |

मोहतरमा जी का
वाश्ताविक नाम अन्तोनिया अल्बीना
माइनो (antonia albina maino ) हैं | जैसा की हमें
नाम से ही पता चलता हैं की सोनिया
इटालियन है और उनका पासपोर्ट भी
इटालियन हैं | जबकि इनका शादी राजीव
गाँधी के साथ हुआ था | इसीलिए इन्होने कभी
भी अधिकारिक रूप से आपना टाइटल नही
बदला | वैसे आपको बता दे की राजिव गाँधी
और सोनिया गाँधी के मिलने की कहानी भी
काफी विवादश्पद हैं आखिर काम्ब्रिज
यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की हुई स्टूडेंट
की क्या मजबूरी हो सकती है की वो एक बार
डांसर का कम करे और वासना को खुलेयाम
परोसे |

जरा सोचिये भारत जैसी पवित्र
संस्कृति आज किन लोगो के हाथ में हैं और ऐसा
सिर्फ और सिर्फ हमारी उदासीनता के कारन
ही हैं |

राजिव गाँधी : वाश्त्विक नाम राजिव खान
,आप फ़िरोज़ खान और इंद्रा प्रियदर्शनी के बेटे
हैं जन्म से आप मुस्लिम हैं और भारतीय जनता
को भावुकता पूर्ण रूप से लालच देने के लिए खान
की जगह गाँधी का उपयोग किया है
सोनिया गाँधी के सामाजिक या फिर
अधिकारिक पिता का नाम स्तेफानो यूजीने
मैनो (Stefano Eugene Maino) हैं | सोनिया के
पिता जर्मन थे | और हिटलर की आर्मी के मेम्बर
भी थे |

जब ज़र्मन सेना रूस गई तो वह वो
रौस्सियन आर्मी द्वारा पकड़ी गई और उन्हें २०
साल की सजा सुनाई गई थी | लेकिन कुछ ही
समय में सोनिया के पिता KGB के लिए काम
करने लगे फिर उनकी सजा २० साल से कम करके 4
साल कर दी गई | और जब उसने आपनी सजा खत्म
करके घर लोटा तो उसने अन्तोनिया albina
maino का नाम जो इटालियन था बदल कर
सोनिया रख दिया जो की एक रुस्सियन नाम
है |

सोनिया गाँधी दावा करती है की उनका
जन्म बेसनो (besano) इटली में हुआ है | जहाँ तक
सोनिया गाँधी के जन्म प्रमाण पत्र की बात
माने तो सोनिया का जन्म लुसिआना में हुआ
था जो की इटली और स्विट्ज़रलैंड के बॉर्डर पे
स्थित हैं | ये शहर जर्मन आर्मी के लिए सैर –
सपाटा और मजे करने के लिए उस समय प्रसिद्ध
था |

शिक्षा : सोनिया गाँधी ने तो शुरुआती दौर
में indian govt को ये बताया की वो कैम्ब्रिज
यूनिवर्सिटी से शिक्षा ली है जो की बाद में
गलत साबित हो गया | उसने एक और दावा
किया था की वो बेल एजुकेशन ट्रस्ट से इंग्लिश
की स्टडी की है जो की ये भी बाद में गलत
साबित हो गया.

जहा तक सोनिया गाँधी के शिक्षा की बात
है ऐसा कोई भी दस्तावेज़ नही मिला है जिसके
अधार पर ये कहा जा सके की वो ५ वि पास है |

नागरिकता : अधिकारिक रूप से सोनिया
गाँधी के पास भारतीय नागरिक होने का
अधिकार नही है | इंदिरा गाँधी ने अपने power
का उपयोग किया और गैरकानूनी तरीके से
सोनिया गाँधी को भारत के राजनीती में
पूर्ण भागीदारी का रास्ता बनाया | सारे
दस्तावेज़ , प्रमाण होने का बावजूद भी क्या गृह
मंत्रालय ने कभी इस बात पर ध्यान भी दिया ?

क्या आज़ादी का मतलब यही है ?

धर्म : क्रिस्तियानिती ,इटली में सोनिया
गाँधी की बहन alexandria ( अनुष्का ) की अपनी
दो दुकाने है जिनमे भारत से चुराई गई मुर्तिया
बेचीं जाती है | सोनिया गाँधी अपने ताकत के
बलबूते पर अवैध रूप से इन मूर्तियों का हवाई
मार्गो से तस्करी कराती हैं |

BY SUBRAMANIAM SWAMI

ये बात तो हो गयी उनके इतिहास की राजीव
गाँधी के शादी तक की लेकिन उसके बाद से
राजिव गाँधी के मौत के बाद भारत की सारी
राजनीतिक ताकत सोनिया गाँधी या कहे
तो अप्र्ताय्क्ष रूप से विदेशी शासको के हाथ में
चली गई उसके बाद सोनिया गाँधी के साथ जैसे
समझो विवादों से रिश्ता सा जुड़ गया हो |
उनके कई गैर रिस्तो को अभी आज हम पूरी
इन्टरनेट पे पढ़ सकते है | इटली के बहुत बड़े बिज़नस मैन
Ottavio Quattrocchi के साथ भी उनका रिश्ता
और इस बात को विकिपीडिया भी दबे जुबान
में स्वीकार करता है |

http://en.wikipedia.org/wiki/Sonia_Gandhi
http://truthaboutsoniagandhi.wordpress.com/

https://www.youtube.com/watch?v=3bWtCkTt
CCE

भ्रस्टाचार की जननी सोनिया गाँधी के
कारनामे तो अनगिनत है जिनको शब्दों में बयाँ
करना बहुत ही मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है
सिर्फ लोगो के अन्दर जागरूकता लाने से ऐसा
संभव हो सकता हैं |

कृपया इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा
शेयर करे क्युकी सिर्फ सामाजिक जागरूकता
ही इस देश के भविष्य को बुर्के में रहने वाले लोगो
से भ्रष्ट सरकार से बचा सकती हैं |

Preview YouTube video Dr. Swamy on Sonia
Gandhi’s birth and birth certificate
Dr. Swamy on Sonia Gandhi’s birth and birth
certificate
Sonia Gandhi – Wikipedia, the free
encyclopedia
en.wikipedia.org
18 hrs ·
Sonia Gandhi – Wikipedia, the free
encyclopedia
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जागो भारतीय जागो !

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Sanjay Dwivedy

‪#‎_मुस्लिम_तुष्टीकरण_की_पराकाष्ढा‬

वहशी दरिंदे का भी धर्म होता है, मौ० अफरोज को रिहा होने पर दस हजार रूपये नगद व एक सिलाई मशीन देने की घोषणा करने की घोषणा करने वाले केजरीवाल से मेरा सवाल पिछले आठ महिनो मे कितने रिहा हुये जुवेनाईलो को आप की सरकार ने इस तरह का उपहार दिया है.?

केजरीवाल को पता है, जो मुस्लिम हिन्दूओ के साथ बहुत अधिक निर्दयता दिखाता है वह मुस्लिमो का उतना अधिक बडा हीरो होता है, और उनके हीरो को पुरस्कृत करेगे तो वे, उसके साथ रहेंगे।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

विधाता


विधाता ने अपने सेवकों को बुलाकर धरती से एक-एक उपहार लाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा- “जिसका उपहार सर्वश्रेष्ठ होगा, उसी को प्रधान सेवक के पद पर नियुक्त किया जायेगा।”

आज्ञा मिलने की देर थी। सभी सेवक अच्छे उपहारों की तलाश में पृथ्वी की ओर दौड़ने लगे। सब इस प्रयत्न में थे कि ऐसा उपहार ले जाया जाये, जो मेरी पदोन्नति शीघ्र ही हो जाये। एक से एक बहुमूल्य उपहार सेवकों ने लाकर सामने रखे, पर विधाता के चेहरे पर कहीं प्रसन्नता और सन्तोष की रेखा तक न थी। हिसाब लगाया गया, तो एक सेवक आना शेष था। उसकी प्रतीक्षा बड़ी आतुरता से की जा रही थी।

आखिर प्रतीक्षा की घड़ियां पूरी हुईं और वह सेवक भी आ गया। वह कागज की एक एक पुड़िया विधाता को देकर नीचे डरते-डरते बैठ गया। वह सोच रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि देर से आने के कारण डाँट पड़े। उस सेवक की पुड़िया देखकर अन्य कितने ही सेवक मन में हँसने लगे, कोई उसकी मूर्खता पर प्रसन्न हो रहे थे।

विधाता ने पुड़िया खोली- ‘अरे यह क्या इस पुड़िया में मिट्टी बाँध लाये?’

वो बोला- “‘हाँ भगवन्! मैंने पृथ्वी का चप्पा-चप्पा छान मारा। शायद ही कोई स्थान रह गया हो, जहाँ मैं नहीं गया। मैंने इस बात की बड़ी कोशिश की कि ऐसा उपहार ले चलूँ, जो आपके पसन्द आ जाये, पर कुछ समझ ही नहीं पड़ा। प्रभु! है तो यह मिट्टी ही, पर किसी साधारण स्थान की नहीं है। यह वह मिट्टी है जहाँ के लोगों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए खुशी-खुशी अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।” सेवक ने हाथ जोड़कर कहा।

विधाता ने वह मिट्टी बड़ी श्रद्धा से अपने मस्तक पर लगा ली और कहा-“सेवकों! जब तक पृथ्वी पर ऐसे सन्त और सज्जन पुरुष बने रहेंगे तब तक धरती पर सुख-शान्ति की सम्भावनाएँ भी कम न होंगी।”

Posted in रामायण - Ramayan

इस देश में भगवान श्री राम से इतना नफरत करने वाले लोग भी हैं


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Loksabha Varanasi-लोकसभा वाराणसी

इस देश में भगवान श्री राम से इतना नफरत करने वाले लोग भी हैं, और दुर्भाग्य हिन्दू इनकी सच्चाई पहचान भी नहीं पाते, ऐसी पार्टी को जो हिन्दू वोट देता है क्या वो अपने आराध्य देव भगवान श्री राम के साथ गद्दारी नहीं करता है??
वैसे इस अखिलेश की इतनी तारीफ करनी तो बनती है की ये अपने अल्पसंख्यक वोटरों को खुश कर ने केलिए किसी हद तक जा सकते हैं, वहीँ हमारे हिन्दुओं के बन बैठे ठेकेदार सत्ता में आने के बाद राम मंदिर का नाम लेना भी पाप समझते हैं, और राजयसभा में बहुमति की दुहाई देकर टालमटोल करते दिखाई देते हैं,
हिन्दू अब भगवान भरोसे ही हैं इस देश में

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम की कथा


सुहेल देव पाठक's photo.
सुहेल देव पाठक with Sanjay Tendulkar and 96 others.

महमूद गजनवी के उत्तरी भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर चढ़ आया
——-
ह पंजाब ,सिंध, आज के उत्तर प्रदेश को रोंद्ता हुआ बहराइच तक जा पंहुचा। रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम कराया,लाखों हिंदू औरतों के बलात्कार हुए, हजारों मन्दिर तोड़ डाले। राह में उसे एक भी ऐसा हिन्दू वीर नही मिला जो उसका मान मर्दन कर सके,इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके। बहराइच अयोध्या के पास है के राजा सुहेल देव पासी अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे
महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला, सलार गाजी मारा गया। उसकी भागती सेना के एक एक हत्यारे को काट डाला गया। हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव पासी ने अपने धर्म का पालन करते हुए,सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया
——-
कुछ समय पश्चात् तुगलक वंश के आने पर फीरोज तुगलक ने सलारगाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।
आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे,हिंदू औरतों के बलातकारी ,मूर्ती भंजन दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है,आज वहा बहराइच में उसकी मजार पर हर साल उर्स लगता हँ और उस हिन्दुओ के हत्यारे की मजार पर सबसे ज्यादा हिन्दू ही जाते है
——-
महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम की कथा कुछ इस प्रकार से है –
1001 ई0 से लेकर 1025 ई0 तक महमूद गजनवी ने भारतवर्ष को लूटने की दृष्टि से 17 बार आक्रमण किया तथा मथुरा, थानेसर, कन्नौज व सोमनाथ के अति समृद्ध मंदिरों को लूटने में सफल रहा। सोमनाथ की लड़ाई में उसके साथ उसके भान्जे सैयद सालार मसूद गाजी ने भी भाग लिया था। 1030 ई. में महमूद गजनबी की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में इस्लाम का विस्तार करने की जिम्मेदारी मसूद ने अपने कंधो पर ली लेकिन 10 जून, 1034 ई0 को बहराइच की लड़ाई में वहां के शासक महाराजा सुहेलदेव के हाथों वह डेढ़ लाख जेहादी सेना के साथ मारा गया। इस्लामी सेना की इस पराजय के बाद भारतीय शूरवीरों का ऐसा आतंक विश्व में व्याप्त हो गया कि उसके बाद आने वाले 150 वर्षों तक किसी भी आक्रमणकारी को भारत वर्ष पर आक्रमण करने का साहस ही नहीं हुआ।
ऐतिहासिक सूत्रों के अनुसार श्रावस्ती नरेश राजा प्रसेनजित ने बहराइच राज्य की स्थापना की थी जिसका प्रारंभिक नाम भरवाइच था।
इसी कारण इन्हे बहराइच नरेश के नाम से भी संबोधित किया जाता था। इन्हीं महाराजा प्रसेनजित को माघ मांह की बसंत पंचमी के दिन 990 ई. को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम सुहेलदेव रखा गया। अवध गजेटीयर के अनुसार इनका शासन काल 1027 ई. से 1077 तक स्वीकार किया गया है।
महाराजा सुहेलदेव का साम्राज्य पूर्व में गोरखपुर तथा पश्चिम में सीतापुर तक फैला हुआ था। गोंडा बहराइच, लखनऊ, बाराबंकी,उन्नाव व लखीमपुर इस राज्य की सीमा के अंतर्गत समाहित थे। इन सभी जिलों में राजा सुहेल देव के सहयोगी पासी राजा राज्य करते थे जिनकी संख्या 21 थी। ये थे -1. रायसायब 2.रायरायब 3. अर्जुन 4. भग्गन 5. गंग 6. मकरन 7.शंकर 8. करन 9. बीरबल 10. जयपाल 11. श्रीपाल 12. हरपाल 13. हरकरन 14. हरखू 15. नरहर 16. भल्लर 17. जुधारी 18. नारायण 19. भल्ला 20. नरसिंह तथा 21. कल्याण ये सभी वीर राजा महाराजा सुहेल देव के आदेश पर धर्म एवं राष्ट्ररक्षा हेतु सदैव आत्म बलिदान देने के लिए तत्पर रहते थे। इनके अतिरिक्त राजा सुहेल देव के दो भाई बहरदेव व मल्लदेव भी थे जो अपने भाई के ही समान वीर थे। तथा पिता की भांति उनका सम्मान करते थे। महमूद गजनवी की मृत्य के पश्चात् पिता सैयद सालार साहू गाजी के साथ एक बड़ी जेहादी सेना लेकर सैयद सालार मसूद गाजी भारत की ओर बढ़ा। उसने दिल्ली पर आक्रमण किया। एक माह तक चले इस युद्व ने सालार मसूद के मनोबल को तोड़कर रख दिया वह हारने ही वाला था कि गजनी से बख्तियार साहू, सालार सैफुद्ीन, अमीर सैयद एजाजुद्वीन, मलिक दौलत मिया, रजव सालार और अमीर सैयद नसरूल्लाह आदि एक बड़ी धुड़सवार सेना के साथ मसूद की सहायता को आ गए। पुनः भयंकर युद्व प्रारंभ हो गया जिसमें
दोनों ही पक्षों के अनेक योद्धा हताहत हुए। इस लड़ाई के दौरान राय महीपाल व राय हरगोपाल ने अपने धोड़े दौड़ाकर मसूद पर गदे से प्रहार किया जिससे उसकी आंख पर गंभीर चोट आई तथा उसके दो दाँत टूट गए। हालांकि ये दोनों ही वीर इस युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गए लेकिन उनकी वीरता व असीम साहस अद्वितीय थी। मेरठ का राजा हरिदत्त मुसलमान हो गया तथा उसने मसूद से संधि कर ली यही स्थिति बुलंदशहर व बदायूं के शासकों की भी हुई। कन्नौज का शासक भी मसूद का साथी बन गया। अतः सालार मसूद ने कन्नौज को अपना केंद्र बनाकर हिंदुओं के तीर्थ स्थलों को नष्ट करने हेतु अपनी सेनाएं भेजना प्रारंभ किया। इसी क्रम में मलिक फैसल को वाराणसी भेजा गया तथा स्वयं सालार मसूद सप्तॠषि (सतरिख) की ओर बढ़ा। मिरआते मसूदी के विवरण के अनुसार सतरिख (बाराबंकी) हिंदुओं का एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थल था। एक किवदंती के अनुसार इस स्थान पर भगवान राम व लक्ष्मण ने शिक्षा प्राप्त की थी। यह सात ॠषियों का स्थान था, इसीलिए इस स्थान का सप्तऋर्षि पड़ा था, जो धीरे-धीरे सतरिख हो गया।
सालार मसूद विलग्राम, मल्लावा, हरदोई,संडीला, मलिहाबाद, अमेठी व लखनऊ होते हुए सतरिख पहुंचा। उसने अपने गुरू सैयद इब्राहीम बारा हजारी को धुंधगढ़ भेजा क्योंकि धुंधगढ क़े किले में उसके मित्र दोस्त मोहम्मद सरदार को राजा रायदीन दयाल व अजय पाल ने घेर रखा था। इब्राहिम बाराहजारी जिधर से गुजरते गैर मुसलमानों का बचना मुस्किल था। बचता वही था जो इस्लाम स्वीकार कर लेता था। आइनये मसूदी के अनुसार – निशान सतरिख से लहराता हुआ बाराहजारी का। चला है धुंधगढ़ को काकिला बाराहजारी का मिला जो राह में मुनकिर उसे दे उसे दोजख में पहुचाया। बचा वह जिसने कलमा पढ़ लिया बारा हजारी का।
इस लड़ाई में राजा दीनदयाल व तेजसिंह बड़ी ही बीरता से लड़े लेकिन वीरगति को प्राप्त हुए। परंतु दीनदयाल के भाई राय करनपाल के हाथों इब्राहीम बाराहजारी मारा गया। कडे क़े राजा देव नारायन और मानिकपुर के राजा भोजपात्र ने एक नाई को सैयद सालार मसूद के पास भेजा कि वह विष से बुझी नहन्नी से उसके नाखून काटे, ताकि सैयद सालार मसूद की इहलीला समाप्त हो जायें लेकिन इलाज से वह बच गया। इस सदमें से उसकी माँ खुतुर मुअल्ला चल बसी। इस प्रयास के असफल होने के बाद कडे मानिकपुर के राजाओं ने बहराइच के राजाओं को संदेश भेजा कि हम अपनी ओर से इस्लामी सेना पर आक्रमण करें और तुम अपनी ओर से। इस प्रकार हम इस्लामी सेना का सफाया कर देगें,परंतु संदेशवाहक सैयद सालार के गुप्तचरों द्वारा बंदी बना लिए गए, इस भेद के खुल जाने पर मसूद के पिता सालार साहु ने एक बडी सेना के साथ कड़े मानिकपुर पर धावा बोल दिया। दोनों राजा देवनारायण व भोजपत्र बडी वीरता से लड़ें लेकिन परास्त हुए। इन राजाओं को बंदी बनाकर सतरिख भेज दिया गया। वहॉ से सैयद सालार मसूद के आदेश पर इन राजाओं को सालार सैफुद्दीन के पास बहराइच भेज दिया गया। जब बहराइज के राजाओं को इस बात का पता चला तो उन लोगो ने सैफुद्दीन को धेर लिया। इस पर सालार मसूद उसकी सहायता हेतु बहराइच की ओर आगें बढे। इसी बीच अनके पिता सालार साहू का निधन हो गया।
बहराइच के पासी राजा भगवान सूर्य के उपासक थे। बहराइच में सूर्यकुंड पर स्थित भगवान सूर्य के मूर्ति की वे पूजा करते थे। उस स्थान पर प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास मे प्रथम रविवार को, जो बृहस्पतिवार के बाद पड़ता था एक बड़ा मेला लगता था यह मेला सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण तथा प्रत्येक रविवार को भी लगता था। वहां यह परंपरा काफी प्राचीन थी। बालार्क ऋषि व भगवान सूर्य के प्रताप से इस कुंड मे स्नान करने वाले कुष्ठ रोग से मुक्त हो जाया करते थे।
बहराइच को पहले ब्रह्माइच के नाम से जाना जाता था। सालार मसूद के बहराइच आने के समाचार पाते ही बहराइच के राजा गण –राजा रायब, राजा सायब, अर्जुन भीखन गंग,शंकर, करन, बीरबर, जयपाल, श्रीपाल, हरपाल,हरख्, जोधारी व नरसिंह महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में लामबंद हो गये। ये राजा गण बहराइच शहर के उत्तर की ओर लगभग आठ मील की दूरी पर भकला नदी के किनारे अपनी सेना सहित उपस्थित हुए। अभी ये युद्व की तैयारी कर ही रहे थे कि सालार मसूद ने उन पर रात्रि आक्रमण(शबखून) कर दिया। मगरिब की नमाज के बाद अपनी विशाल सेना के साथ वह भकला नदी की ओर बढ़ा और उसने सोती हुई हिंदु सेना पर आक्रमण कर दिया। इस अप्रत्याशित आक्रमण में दोनों ओर के अनेक सैनिक मारे गए लेकिन बहराइच की इस पहली लड़ाई मे सालार मसूद बिजयी रहा। पहली लड़ार्ऌ मे परास्त होने के पश्चात पुनः अगली लडार्ऌ हेतु हिंदू सेना संगठित होने लगी उन्होने रात्रि आक्रमण की संभावना पर ध्यान नही दिया। उन्होने राजा सुहेलदेव के परामर्श पर आक्रमण के मार्ग में हजारो विषबुझी कीले अवश्य धरती में छिपा कर गाड़ दी। ऐसा रातों रात किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जब मसूद की धुडसवार सेना ने पुनः रात्रि आक्रमण किया तो वे इनकी चपेट मे आ गए। हालाकि हिंदू सेना इस युद्व मे भी परास्त हो गई लेकिन इस्लामी सेना के एक तिहायी सैनिक इस युक्ति प्रधान युद्व मे मारे गए। भारतीय इतिहास मे इस प्रकार युक्तिपूर्वक लड़ी गई यह एक अनूठी लड़ाई थी। दो बार धोखे का शिकार होने के बाद हिंदू सेना सचेत हो गई तथा महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में निर्णायक लड़ार्ऌ हेतु तैयार हो गई। कहते है इस युद्ध में प्रत्येक हिंदू परिवार से युवा हिंदू इस लड़ार्ऌ मे सम्मिलित हुए। महाराजा सुहेलदेव के शामिल होने से हिंदूओं का मनोबल बढ़ा हुआ था। लड़ाई का क्षेत्र चिंतौरा झील से हठीला और अनारकली झील तक फैला हुआ था। जुन, 1034 ई. को हुई इस लड़ाई में सालार मसूद ने दाहिने पार्श्व (मैमना) की कमान मीरनसरूल्ला को तथा बाये पार्श्व (मैसरा) की कमान सालार रज्जब को सौपा तथा स्वयं केंद्र (कल्ब) की कमान संभाली तथा भारतीय सेना पर आक्रमण करने का आदेश दिया। इससे पहले इस्लामी सेना के सामने हजारो गायों व बैलो को छोड़ा गया ताकि हिंदू सेना प्रभावी आक्रमण न कर सके लेकिन महाराजा सुहेलदेव की सेना पर इसका कोई भी प्रभाव न पड़ा। वे भूखे सिंहों की भाति इस्लामी सेना पर टूट पडे मीर नसरूल्लाह बहराइच के उत्तर बारह मील की दूरी पर स्थित ग्राम दिकोली के पास मारे गए। सैयर सालार समूद के भांजे सालार मिया रज्जब बहराइच के पूर्व तीन कि. मी. की दूरी पर स्थित ग्राम शाहपुर जोत यूसुफ के पास मार दिये गए। इनकी मृत्य 8 जून, 1034 ई 0 को हुई। अब भारतीय सेना ने राजा करण के नेतृत्व में इस्लामी सेना के केंद्र पर आक्रमण किया जिसका नेतृत्व सालार मसूद स्वंय कर कहा था। उसने सालार मसूद को धेर लिया। इस पर सालार सैफुद्दीन अपनी सेना के साथ उनकी सहायता को आगे बढे भयकर युद्व हुआ जिसमें हजारों लोग मारे गए। स्वयं सालार सैफुद्दीन भी मारा गया उसकी समाधि बहराइच-नानपारा रेलवे लाइन के उत्तर बहराइच शहर के पास ही है। शाम हो जाने के कारण युद्व बंद हो गया और सेनाएं अपने शिविरों में लौट गई। 10 जून, 1034 को महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदू सेना ने सालार मसूद गाजी की फौज पर तूफानी गति से आक्रमण किया। इस युद्ध में सालार मसूद अपनी धोड़ी पर सवार होकर बड़ी वीरता के साथ लड़ा लेकिन अधिक देर तक ठहर न सका। राजा सुहेलदेव ने शीध्र ही उसे अपने बाण का निशाना बना लिया और उनके धनुष द्वारा छोड़ा गया एक विष बुझा बाण सालार मसूद के गले में आ लगा जिससे उसका प्राणांत हो गया। इसके दूसरे हीं दिन शिविर की देखभाल करने वाला सालार इब्राहीम भी बचे हुए सैनिको के साथ मारा गया। सैयद सालार मसूद गाजी को उसकी डेढ़ लाख इस्लामी सेना के साथ समाप्त करने के बाद महाराजा सुहेल देव ने विजय पर्व मनाया और इस महान विजय के उपलक्ष्य में कई पोखरे भी खुदवाए। वे विशाल ”विजय स्तंभ” का भी निर्माण कराना चाहते थे लेकिन वे इसे पूरा न कर सके। संभवतः यह वही स्थान है जिसे एक टीले के रूप मे श्रावस्ती से कुछ दूरी पर इकोना-बलरामपुर राजमार्ग पर देखा जा सकता है।

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Tulsi Pujan


कृष्णा शर्मा's photo.
कृष्णा शर्मा to 100 करोड़ हिंदुओं का ग्रुप रक्त रक्त में भगवा 󾬢

जितने रुपयों का पेड़ और क्रिसमस ट्री के श्रृंगार का सामान आएगा, केक एवं शराब आएगी उतने पैसे में आप बहुत से गरीब बच्चों को दूध,भोजन एवं कंबल वितरित कर सकते हैं !!

करके देखिये, अच्छा लगता है। तुलसी पूजन की शुभकामनायें !!