Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

फैट कम


1- सोने से पहले खाने में मिर्च का सेवन करें, मिर्च फैट कम करने में काफी फायदेमंद होता है।
2- रात को सोने से पहले ग्रीन टी पीने पर शरीर का मैटाबॉलिज्मं बढ़ता है, जिससे रातभर आपका वजन कम होता रहता है।
3- नींद पूरी ना होना भी आपके वजन को बढ़ा सकता है, इसलिए कोशिश करें कि आप अपनी नींद पूरी करें।
4- सोने से पहले खुद को रिलैक्स रखने का काम करें, जैसे ध्यािन, सुकून भरा संगीत सुने, नहाए, इससे आपको अच्छी नींद आएगी।
5- रात का खाना 7 बजे तक खा लें, देर में खाना खाने से आपके मेटाबोलिज्म पर असर पड़ता है।

Bhardwaj Rahul's photo.
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रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल झलकारी बाई से जुड़ी खास बातें


रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल झलकारी बाई से जुड़ी खास बातें ……

[इतिहास] झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में आप सभी ने पढ़ा होगा, लेकिन क्या कभी झलकारी बाई का इतिहास जानने की कोशिश की!
खैर उनके बारे में सबसे रोचक बात यह है कि वो लक्ष्मीबाई की हमशक्ल थीं, जिस कारण अंग्रेज सैनिक धोखा खा जाते थे।
और तो और कई बार उन्होंने लक्ष्मीबाई के वेश में युद्ध किये और शत्रुओं को पराजित किया।

22 नवम्बर यानि को भारत की इसी वीरांगना का जन्मदिवस है। चलिये पढ़ते हैं झलकारी बाई के जीवन के बारे में: ……

झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी के भोजला गाँव में एक निर्धन कोली परिवार में हुआ था। जब वो छोटी सी थीं तभी उनकी मां जमुना देवी का निधन हो गया। उनके पिता सदोवर सिंह एक सैनिक थे। उन्होंने झलकारी को एक सैनिक की तरह ही पाल-पोस कर बड़ा किया। घुड़सवारी, तल्वारबाजी, भाला चलाने से लेकर कई प्रकार के हथियार चलाने सिखाये। इन सबके बीच झलकारी ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सकीं। हां एक अच्छी योद्धा जरूर बनीं।

जंगल में तेंदुए से लड़ी थीं…

झलकारी घर के काम के अलावा पशुओं के रखरखाव और जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने का काम भी करती थीं। एक बार जंगल में उसकी मुठभेड़ एक तेंदुए से हो गई। झलकारी के पास उस वक्त हथियार के नाम पर सिर्फ एक कुल्हाड़ी थी। झलकारी ने उसी कुल्हाड़ी से तेंदुए को मार गिराया।

डकैतों का अकेले किया सामना……

एक बार हथियारों से लैस डकैतों ने गाँव के एक व्यवसायी पर हमला किया। साहसी झलकारी ने उनको गांव से बाहर खदेड़ दिया।

विवाह के बाद शामिल हुईं लक्ष्मीबाई की सेना में….

उसका विवाह रानी लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक पूरन कोरी से हुआ। पूरन भी बहुत बहादुर था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा मानती थी। एक बार गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गाँव की अन्य महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने झाँसी के किले में गयीं, वहाँ रानी लक्ष्मीबाई उन्हें देख कर अवाक रह गईं, क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखतीं थीं।

रानी लक्ष्मीबाई झलकारी की बहादुरी के बारे में जानकर प्रभावित हुईं और दुर्गा सेना में शामिल कर लिया। झलकारी ने यहाँ अन्य महिलाओं के साथ बंदूक चलाना, तोप चलाना और अन्य हथियारों का प्रशिक्षण लिया। और आगे चलकर झलकारी दुर्गा सेना की सेनापति बनीं।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झलकारी
प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झाँसी की रानी के साथ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अद्भुत वीरता से लड़ते हुए ब्रिटिश सेना के कई हमलों को विफल किया था। एक बार वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया। यदि लक्ष्मीबाई के सेनानायकों में से एक ने उनके साथ विश्वासघात न किया होता तो झांसी का किला ब्रिटिश सेना के लिए प्राय: अभेद्य था।

भारत का वर्तमान और झलकारी बाई
झलकारी बाई की गाथा आज भी बुंदेलखंड की लोकगाथाओं और लोकगीतों में सुनी जाती है।

भारत सरकार ने 22 जुलाई 2001 में झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया।

उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेर, राजस्थान में निर्माणाधीन है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की।

लखनऊ में सिविल अस्पताल की महिला शाखा झलकारी बाई के नाम से ही है।

अफसोस है कि मुख्यधारा के इतिहासकारों ने झलकारी बाई के योगदान को बहुत विस्तार नहीं दिया।

लेकिन आधुनिक स्थानीय लेखकों ने उन्हें गुमनामी से उभारा है।
( Ancient History Bharat )

লীলা সুন্দরী's photo.
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आर्य


क्या सच में आर्य कोई जाति थी जो बाहर से आई थी ? किसी देश को गुलाम बनाने के लिए उस से उसका गौरवमयी इतिहास छुपाना जरूरी होता है, वरना बार बार विद्रोह होते हैं. अंग्रेजों द्वारा भारत के इतिहास के बारे में फैलाए गये इस झूठ का अब पूरा पर्दाफाश हो चुका है. आर्य भारत के ही मूल निवासी है!”
शायद मेरी बात को आप में से कुछ लोग स्वीकार नही करेंगे तो मैं यहाँ उनके लिये कुछ ब्रिटेनिका एनसाईक्लोपीडिया से प्राप्त कुछ तथ्य प्रस्तुत करता हूँ. –
१) आर्यों में कोई गुलाम बनाने का कोई रिवाज़ नही था।
समीक्षा – जबकि मध्य एशिया अरब देशो में ये रिवाज़ बहुत रहा है।
२) आर्य प्रारम्भ से ही कृषि करके शाकाहार भोजन ग्रहण करते आ रहें है।
समीक्षा – मध्य एशिया में मासांहार का बहुत सेवन होता है जबकि भारत में अधिकतम सभी आर्य या हिंदू लोग शाकाहारी हैं ।
३) आर्यों ने किसी देश पर आक्रमण नहीं किया
समीक्षा- अधिकतम अपनी सुरक्षा के लिये किया है या फ़िर अधर्मियो और राक्षसों (बुरे लोगो) का संहार करने के लिये और लोगो को अन्याय से बचाने के लिये और शिक्षित करने के लिये किया है। इतिहास साक्षी है अरब देशो ने कितने आक्रमण और लौट-खसोट अकारण ही मचाई है।
४) आर्यों में कभी परदा प्रथा नही रही बल्कि वैदिक काल में स्त्रियाँ स्नातक और भी पढी लिखी होती थी उनका आर्य समाज में अपना काफी आदर्श और उच् स्थान था ( मुगलों के आक्रमण के साथ भारत के काले युग में इसका प्रसार हुआ था)
समीक्षा- जबकि उस समय मध्य एशिया या विश्व के किसी भी देश में स्त्रियों को इतना सम्मान प्राप्त नही था।
५)आर्य लोग शवो का दाह संस्कार या जलाते हैं जबकि विश्व में और बाकी सभी और तरीका अपनाते हैं।
समीक्षा – ना की केवल मध्य एशिया में वरन पूरे विश्व में भारतीयों के अलावा आज भी शवो को जलाया नही जाता।
६) आर्यों की भाषा लिपि बाएं से दायें की ओर है।
समीक्षा – जबकि मध्य एशिया और इरानियो की लिपि दायें से बाईं ओरहै
७)आर्यों के अपने लोकतांत्रिक गाँव होते थे कोई राजा मध्य एशिया या मंगोलियो की तरह से नही होता था।
समीक्षा – मध्य एशिया में उस समय इन सब बातो का पता या अनुमान भी नही था
८)आर्यों का कोई अपना संकीर्ण सिद्दांत या कानून नही था वरन उनका एक वैश्विक अध्यात्मिक सिद्दांत रहा है जैसे की अहिंसा, सम्पूर्ण विश्व को परिवार की तरह मानना।
समीक्षा -मध्य एशिया या शेष विश्व में ऐसा कोई सिद्दांत या अवधारणा नही है।
९)वैदिक या सनातन धर्म को कोई प्रवर्तक या बनाने वाला नहीं है जैसे की मोहम्मद मुस्लिमों का, अब्राहम ज्युष का या क्राईस्ट क्रिश्चियन का और भी सब इसी तरीको से।
समीक्षा – मध्य एशिया या शेष विश्व में भारतीयों या हिन्दुओं के अतिरिक्त सभी के अपने मत हैं और सभी में और मतों की बुराई और अपनी तारीफ़ लिखी गई है जबकि हिन्दुओं या आर्यों ने हमेशा समस्त विश्व को साथ लेकर चलने की बात कही गई है।
१०) वेदों में या किसी भी संस्कृत साहित्य में कहीं भी ये वर्णन नहीं है की आर्य जाती सूचक शब्द है और कोई मध्य एशिया से आक्रमणकारी यहाँ आ कर बसे हैं जिन्होंने वेदों की रचना की है।
समीक्षा -जबकि इस बात को विश्व में सभी सर्वसहमति से स्वीकारते हैं की वेद विश्व की सबसे पुराने ग्रन्थ हैंऔर किसी भी भारतीय उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत या अन्य किसी में भी कहीं भी ये एक शब्द भी नही मिलता की आर्य बाहर से आए हैं जबकि आर्य कोई जातिसूचक शब्द ना हो कर के उसका अर्थ श्रेष्ट है।

अध्यापक भारत's photo.
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Gita Chauhan
18 hrs
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વાળ માથા પર એમજ નથી સફેદ
એ તો જુવાની નો બાધેલ કફન છે
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જિંદગી ના તો ભવિષ્યમા છે, ના તો ભૂતકાળમા, જિંદગી તો માત્ર ઍ પળ મા છે અને ઍ પળ નો અનુભવ ઍટલે જ જિંદગી.
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જિંદગી ની મજા માણતા સીખી લ્યો, સમય તો તમારી મજા લેતો જ રેહશે.!!
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સમય વિતાવો નહિ દુશ્મનોની ચર્ચામાં,
કે દોસ્તોનું મિલન આ ફરી મળે ન મળે.
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વાળને સફેદ કરવામા આખી જિંદગી વીતી જાય, જ્યારે ઍજ વાળ અડધી કલાક મા કાળા થઈ જાય છે.!!
# #
આટલુ પણ ખરાબ વર્તન ના કર જિંદગી, અમે ક્યા તારી દુનિયામા વારંવાર આવવાના છીઍ.!!
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અજવાળું ઉધાર લઇને દિવસ ઉગાડયો,
બે છેડા ભેગા કરતાં તો સાંજ પડી ગઇ.
#
રફતાર તો આ જિંદગી ની ઍવી બનાવી છે, કે દુશ્મન ભલે આગળ નીકળી જાય, પણ કોઈ મિત્ર પાછળ નહી છૂટે!!!!!
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[ હું તારી સાથે જ છું, હું આવુ છું..
શબ્દો તો ઓછા છે પણ એ શબ્દોમાં ગજબની તાકાત ને શક્તિ છે

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

स्वामी विवेकानन्द.


Gita Chauhan
18 hrs
1902 में,
एक professor ने अपने छात्र से पुछा ।
क्या वह भगवान था, जिसने इस संसार की हर वस्तु को बनाया?
छात्र का जवाब : हां ।
उन्होंने फिर पुछा:- शैतान क्या हैं?
क्या भगवान ने इसे भी बनाया ?
छात्र चुप हो गया… …..!
फिर छात्र ने आग्रह किया कि-
क्या वह उनसे कुछ सवाल पुछ सकता हैं?
Professor ने इजाजत दी.
उसने पुछा-क्या ठण्ड होती हैं ?
Professor ने कहा: हां, बिल्कुल
क्या तुम्हे यह महसुस नहीं होती?
Student ने कहा:
मैं माफी चाहता हुं सर, लेकिन आप गलत हो ।
गर्मी का पुर्ण रुप से लुप्त होना ही ठण्ड कहलाता हैं, जबकि इसका अस्तित्व नहीं होता ।
ठण्ड होती ही नहीं ?
Student ने फिर पुछा: क्या अन्धकार होता हैं ?
Professor ने कहा: हां,होता हैं
Student ने कहा:आप फिर गलत है सर ।
अन्धकार जैसी कोई चीज
नहीं होती,
वास्तव में इसका कारण रोशनी का पुर्ण रुप से लुप्त होना हैं .
सर हमने हमेशा गर्मी और रोशनी के बारे में पढा और सुना हैं ।
ठण्ड और अन्धकार के बारे में नहीं ।
वैसे ही भगवान हैं
.
.
.
.
और
.
.
.
.
बस इसी तरह शैतान भी नहीं होता,
वास्तव में,
पुर्ण रुप से भगवान में विश्वास, सत्य और आस्था का ना होना
ही शैतान का होना हैं।
वह छात्र थे… स्वामी विवेकानन्द..!
.
.
..
मित्रो,
जीवन में न दुख: होता हैं ना तकलीफ
वास्तव में हममें जो खासियत, काबिलियत ,खुद में विश्वास और
सकारात्मक रवैये की कमी को ही हम दुख: और तकलीफ बना देते हैं ।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा


विष्णु अरोङा
Yesterday at 08:44 ·
इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा
दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया ….
क्लास मैं हमेशा से अव्वल
आता रहा है !
पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो
मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और
जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !
बेटे ने जूते लेने से ये कह कर
मना कर दिया की पुराने जूतों
को बस थोड़ी-सी मरम्मत की
जरुरत है वो अभी इस साल
काम दे सकते हैं!
अपने जूतों की बजाये उसने
मुझे अपने दादा की कमजोर हो
चुकी नज़र के लिए नया चश्मा
बनवाने को कहा !
मैंने सोचा बेटा अपने दादा से
शायद बहुत प्यार करता है
इसलिए अपने जूतों की बजाय
उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी
समझ रहा है !
खैर मैंने कुछ कहना जरुरी
नहीं समझा और उसे लेकर
ड्रेस की दुकान पर पहुंचा…..
दुकानदार ने बेटे के साइज़
की सफ़ेद शर्ट निकाली …
डाल कर देखने पर शर्ट एक दम
फिट थी…..
फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट
दिखाने को कहा !!!!
मैंने बेटे से कहा :
बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है
तो फिर और लम्बी क्यों ?
बेटे ने कहा :पिता जी मुझे शर्ट
निक्कर के अंदर ही डालनी होती है
इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो
कोई फर्क नहीं पड़ेगा…….
लेकिन यही शर्ट मुझे अगली
क्लास में भी काम आ जाएगी ……
पिछली वाली शर्ट भी अभी
नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन
छोटी होने की वजह से मैं उसे
पहन नहीं पा रहा !
मैं खामोश रहा !!
घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा :
तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है
बेटा ?
बेटे ने कहा:
पिता जी मैं अक्सर देखता था
कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर
तो कभी आप अपने जूतों को
छोडकर हमेशा मेरी किताबों
और कपड़ो पैर पैसे खर्च कर
दिया करते हैं !
गली- मोहल्ले में सब लोग कहते
हैं के आप बहुत ईमानदार
आदमी हैं और हमारे साथ वाले
राजू के पापा को सब लोग
चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर
और जाने क्या क्या कहते हैं,
जबकि आप दोनों एक ही
ऑफिस में काम करते हैं…..
जब सब लोग आपकी तारीफ
करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा
लगता है…..
मम्मी और दादा जी भी आपकी
तारीफ करते हैं !
पिता जी मैं चाहता हूँ कि मुझे
कभी जीवन में नए कपडे,
नए जूते मिले या न मिले
लेकिन कोई आपको
चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या
कुत्ता न कहे !!!!!
मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ
पिता जी,
आपकी कमजोरी नहीं !
बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था!
आज मुझे पहली बार मुझे
मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!
आज बहुत दिनों बाद आँखों में
ख़ुशी, गर्व और सम्मान के
आंसू थे…
राधे राधे

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अच्छे फल


U 🍏🍋🍒🍇🍑🍈🍌🍐🍍🍠🌽

1 दिन एक राजा ने अपने 3 मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं ..,
और
वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें .  🍏🍋🍒🍇🍑🍈🍌
वो  तीनो  अलग  अलग  बाग़  में प्रविष्ट  हो  गए ,
पहले  मन्त्री  ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ,

दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ,🍏

तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया .
🍋
दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  ३  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .
🍒

अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के ,
तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए ,
🍇
फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी .

और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया .

**** अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  कि  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हो  ??
🍑
आप  इस समय जीवन के  बाग़  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  अच्छे कर्म जमा  करें ..
चाहें  तो बुरे कर्म ,
मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा  क्योंकि दुनिया क़ा राजा आपको चारों ओर से देख रहा है  । 👍🌺:)🌹

Nice story must read.