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धन तेरस, सोमवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 9 नवम्बर, 2015


धन तेरस, सोमवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 9 नवम्बर, 2015

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धन तेरस, सोमवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 9 नवम्बर, 2015
उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है. देव धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है. इस दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है. इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है. धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.
धनतेरस का महत्व
Significance of Dhanteras
साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है. साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.
धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था. धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव है. यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बडी-बडी योजनाएं प्रारम्भ की जाती है. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है.
धन तेरस पूजा मुहूर्त
Auspicious Time for Dhanteras Puja
1. प्रदोष काल:-
सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है.
दिल्ली में 9 नवम्बर 2015 सूर्यास्त समय सायं 17:28 तक रहेगा. इस समय अवधि में स्थिर लग्न 17:51 से लेकर 19.47 के मध्य वृषभ काल रहेगा. मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.
2. चौघाडिया मुहूर्त:-
9 नवंबर 2015, सोमवार
अमृ्त काल मुहूर्त 04:30 से 18:00 तक
चर काल 18:00 से लेकर 19:30 तक
लाभ काल 22:30 से 24:00 तक
उपरोक्त में लाभ समय में पूजन करना लाभों में वृ्द्धि करता है. शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में शुभता आती है. सबसे अधिक शुभ अमृ्त काल में पूजा करने का होता है.
सांय काल में शुभ महूर्त
Auspicious Time During the Evening
17:24 से 20:07 तक का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा.
धनतेरस में क्या खरीदें
What to Buy During Dhanteras
लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.
इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है. इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है. इसके साथ ही इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है. दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.
धन तेरस पूजन
Dhanteras Puja
धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान करते हुए, भगवान कुबेर को फूल चढाएं और ध्यान करें, और कहें, कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ.
इसके बाद धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें. और निम्न मंत्र का जाप करें.
‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।’
धनतेरस की कथा
Story of Dhanteras
एक किवदन्ती के अनुसार एक राज्य में एक राजा था, कई वर्षों तक प्रतिक्षा करने के बाद, उसके यहां पुत्र संतान कि प्राप्ति हुई. राजा के पुत्र के बारे में किसी ज्योतिषी ने यह कहा कि, बालक का विवाह जिस दिन भी होगा, उसके चार दिन बाद ही इसकी मृ्त्यु हो जायेगी.
ज्योतिषी की यह बात सुनकर राजा को बेहद दु:ख हुआ, ओर ऎसी घटना से बचने के लिये उसने राजकुमार को ऎसी जगह पर भेज दिया, जहां आस-पास कोई स्त्री न रहती हो, एक दिन वहां से एक राजकुमारी गुजरी, राजकुमार और राजकुमारी दोनों ने एक दूसरे को देखा, दोनों एक दूसरे को देख कर मोहित हो गये, और उन्होने आपस में विवाह कर लिया.
ज्योतिषी की भविष्यवाणी के अनुसार ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचें. यमदूत को देख कर राजकुमार की पत्नी विलाप करने लगी. यह देख यमदूत ने यमराज से विनती की और कहा की इसके प्राण बचाने का कोई उपाय बताईयें. इस पर यमराज ने कहा की जो प्राणी कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात में जो प्राणी मेरा पूजन करके दीप माला से दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाला दीपक जलायेगा, उसे कभी अकाल मृ्त्यु का भय नहीं रहेगा. तभी से इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाये जाते है.

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दिवाली पूजन में सामग्री का महत्व


दिवाली पूजन में सामग्री का महत्व

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माता लक्ष्मी जी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मी जी को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए। वस्त्र में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है।

माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं। सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में चावल तथा मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है।

प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है। अन्य सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना चाहिए।

तैयारी
चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है।

दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अतिरिक्त एक दीपक गणेशजी के पास रखें।

मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचोंबीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।

इन थालियों के सामने यजमान बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।

चौकी
(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें, वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और दवात, (11) नकदी की संदूकची, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र, (14) यजमान, (15) पुजारी, (16) परिवार के सदस्य, (17) आगंतुक।

पूजा की संक्षिप्त विधि
सबसे पहले पवित्रीकरण करें।

आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।

ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए पवित्र हो जाता है।
आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है।
संकल्प – आप हाथ में अक्षत लें, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों। सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए।
हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए।
सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।

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દિવાળીએ કરો આ 1 ઉપાય, લક્ષ્મી તમારા દ્વારે ખોલશે ધનનો પટારો !


દિવાળીએ કરો આ 1 ઉપાય, લક્ષ્મી તમારા દ્વારે ખોલશે ધનનો પટારો !

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દિવાળીએ કરો 1 ઉપાય, લક્ષ્મી તમારા દ્વારે ખોલશે ધનનો પટારો !

11 નવેમ્બરથી હિન્દુઓનું નવું વર્ષ શરૂ થઇ રહ્યું છે. આ નવા વર્ષમાં બધા જ લોકો માતા લક્ષ્મી સામે ઘણાં ઉપાય કરે છે જેનાથી આવનારું આખું વર્ષ તેમની માટે સુખદાયી રહે. વર્તમાન સમયમાં પૈસા કે ધન આજે બધાની સૌથી મોટી જરૂરીયાત બની ગઈ છે. તેની પ્રાપ્તિ માટે ઘણાં પ્રકારના પ્રયત્નો કરવામાં આવે છે. પછી પણ ઘણાં લોકોની સાથે એવું થાય છે કે વધારે મહેનત પછી પણ તેને જરૂરીયાત પૂરતાં પણ પૈસા નથી મળી શકતાં. કેટલાંક લોકોની આવક તો સારી હોય છે, પણ બચત નથી થઈ શકતી. જ્યોતિષ અને શાસ્ત્રો અનુસાર એવું થવાની પાછળ ઘણાં કારણો રહેલા છે.

 

ધનની પ્રાપ્તિ અને બચત માટે જરૂરી છે કે આપના પર મહાલક્ષ્મી દેવી હંમેશા પ્રસન્ન રહે. મહાલક્ષ્મીની કૃપા વગર કોઈ પણ વ્યક્તિ ધન સંબંધમાં સંતુષ્ટ થઈ શકતો નથી. જેથી આજે અમે તેમના એવા ખાસ મંત્ર વિશે જણાવીશું જેનાથી ધનને આવતા કોઈ રોકી શકશે નહીં.

 

મંત્રઃ

 

 वं श्रीं वं ऐं लीं श्रीं क्लीं कनकधारयै स्वाहा।

 

આ મંત્ર તથા કનકધારા સ્તોત્ર સહિત કનકધારા યંત્રની પૂજા-અર્ચનાથી દરિદ્રતા દૂર થાય છે, ઋણથી મુક્તિ મળે છે. નોકરી અને વેપારમાં લાભ પ્રાપ્ત થાય છે, આકસ્મિક ધન પ્રાપ્ત થાય છે. પ્રસિદ્ધ ગ્રંથ શંકર દિગ્વિજયના ચોથા સર્ગમાં ઉલ્લેખિત ઘટના મુજબ જગતગુરૂ શંકરાચાર્યે એક દરિદ્ર બ્રાહ્મણના ઘરે આ સ્તોત્રના પાઠથી સોનાની વર્ષા કરાવી હતી.

કેટલીકવાર ઈશ્વર ધન આપવા માટે મજબૂર થઈ જાય છે–  

 

જો તમે ધનવાન બનવાનો સ્વપ્ન જોઈ રહ્યા હોવ તો તેને હકીકતમાં પણ બદલવાની કોશિશ કરો. આવું કરવું એટલું અઘરું પણ નથી. તમારી મહેનતની સાથે ઈશ્વરની કૃપા પણ પ્રાપ્ત થઈ જાય તો તમને ધનવાન બનવાથી કોઈ રોકી શકશે નહીં. શાસ્ત્રોમાં કેટલાક એવા ચમત્કારી મંત્ર બતાવવામાં આવ્યા છે જેનાથી આકર્ષિત થઈને ઈશ્વર ધન આપવા પર મજબૂર થઈ જાય છે.

 

 મંત્રથી થવા લાગશે ધનની વર્ષા–  

 

આદિ શંકરાચાર્ય દ્વારા રચિત કનકધારા સ્તોત્ર મંત્ર એવું સિદ્ધ મંત્ર માનવામાં આવે છે જેના નિયમિત પાઠથી દેવી લક્ષ્મી હમેશાં ઘરમાં અને વ્યક્તિની પાસે નિવાસ કરે છે. આ મંત્રથી શંકરાચાર્યએ સોનાની વર્ષા કરાવી દીધી હતી. આ જ કારણે આ મંત્રને કમકધારા સ્તોત્ર પણ કહેવાય છે. તમે પણ ધનમાં વૃદ્ધિ અને ધન સંબંધી પરેશાનીઓને દૂર કરવા માટે આ સ્તોત્રનું જાપ કરો.

૧. ભમરી, કળીઓમાંથી શોભતા તમાલવૃક્ષનો આશ્રય કરે છે. તેની જેમ શ્રી હરિના પુલકિત શરીરનો આશ્રય કરનાર મંગલ કરનાર, મંગલદેવતા શ્રી લક્ષ્મીજીના સૌંદર્યનો વૈભવ મારું મંગળ કરો.

 

૨. જેમ ભમરી, કમળ પર વારંવાર દ્રષ્ટિ કરે છે તે જ રીતે પ્રેમમાં મુગ્ધ લક્ષ્મીજીની શ્રી વિષ્ણુના વદન કમલ પર પ્રેમ અને લજ્જાયુક્ત દ્રષ્ટિ જતી આવતી રહે છે. તે શ્રી લક્ષ્મીજીના નેત્રની દ્રષ્ટિરૂપ માળા અમને ધન સંપત્તિ પ્રદાન કરો.

 

૩. સમગ્ર વિશ્વને ઇન્દ્ર જેવા વૈભવનું દાન આપનાર, મુરારિ માટે આનંદરૂપ લક્ષ્મીજીની અર્ધમીલિત દ્રષ્ટિ મારી પર ક્ષણવાર માટે પણ પડો.

 

૪. આનંદ રૂપ, અનિમેષ અને પ્રેમના ભંડાર શ્રી મુકુંદને આંખો મીંચીને સૂતેલા જોઈને, આનંદથી અર્ધમીલિત નેત્રો દ્વારા જોનાર, શેષશાયી વિષ્ણુના પત્ની શ્રી લક્ષ્મીજીની તે અર્ધમીલિત દ્રષ્ટિ અમને સમૃદ્ધિનું દાન કરો.

૫. મઘુરાક્ષસને જીતનાર, કૌસ્તૂભ મણિને છાતી પર ધારણ કરનાર શ્રી વિષ્ણુના ઉર પર દ્રષ્ટિની લીલી અને શ્યામરંગની દ્રષ્ટિ રૂપી માળા શોભે છે. ભગવાનમાં પણ પ્રેમ જગાડનાર, શ્રી લક્ષ્મીજીની નેત્રોની કટાક્ષમાલા મારૂં કલ્યાણ કરો.

 

૬. જેમ કાળા વાદળોમાં વિજળી ચમકે છે, તે રીતે મેઘ શ્યામ શ્રી વિષ્ણુની છાતી પર શ્રી લક્ષ્મીજી પૂજનીય મૂર્તિ ચળકે છે. તે સમસ્ત જગતને પૂજ્ય અને ભાર્ગવપુત્રીની મૂર્તિ અમને કલ્યાણનું પ્રદાન કરો.

 

૭. જેના પ્રભાવથી કામદેવે મંગલકારી, મઘુ દૈત્યનો નાશ કરનાર વિષ્ણુના હૃદયમાં સ્થાન જમાવ્યું છે. તે સમુદ્રપુત્રીની મદભરેલી અને અર્ધમીલિત દર્ષ્ટિ ધીરે ધીરે મારી પર પડો. (તેમની કૃપાદ્રષ્ટિ થાઓ.

૮. શ્રી નારાયણની પ્રિયતમાના નેત્રોમાંથી નિકળતો કરૂણાજળનો પ્રવાહ, આ દરિદ્ર, દરિદ્રતાથી ખિન્ન, નિઃસહાય પક્ષી જેવા બાળક પર, દયારૂપી પવનથી વરસી રહો અને દુષ્કર્મરૂપ તાપને કાયમ માટે દૂર કરી દો.

 

૯. વિશિષ્ટ બુદ્ધિ ધરાવતા, લક્ષ્મીજીને પ્રિય એવા લોકો જેમની દયાર્ક દ્રષ્ટિને લઇને સ્વર્ગપદને સરળતાથી પ્રાપ્ત કરે છે. એવી ખીલેલા કમળની શોભા ધરાવતી શ્રી લક્ષ્મીજીની ઇષ્ટ દ્રષ્ટિ, મને પુષ્ટ કરો.

 

૧૦. સૃષ્ટિના સર્જન, પાલન અને સંહારની રમતમાં જે સરસ્વતી, ગરૂડઘ્વજ વિષ્ણુની પત્ની, શાકંભરી કે ભગવાન શંકરની વલ્લભા એવા સ્વરૂપને સ્થિત છે. તે ત્રણ લોકના ગુરૂ (શ્રી વિષ્ણુજીની ભાર્યા, લક્ષ્મીજીને નમસ્કાર.

૧૧. શુભકર્મોનું ફલ આપનાર શ્રુતિને નમસ્કાર. સૌંદર્યના ગુણોની ભંડાર રતિને નમસ્કાર. કમળમાં વાસ કરનાર શક્તિને નમસ્કાર. પુરૂષોત્તમને પ્રિય એવી પુષ્ટિને નમસ્કાર.

 

૧૨. કમળની નાળ જેવા સુંદર મુખને ધારણ કરનારને વંદન. ક્ષીર સાગરમાંથી પ્રગટ થયેલ (લક્ષ્મી)ને વંદન. ચંદ્ર અને અમૃતની ભગિનીને વંદન. નારાયણ વલ્લભાને વંદન.

 

૧૩. હે કમળ જેવું મુખ ધારણ કરનાર લક્ષ્મીજી, આપને વંદન કરવાથી સુખ-સમૃઘ્ધિ મળે છે. સામ્રાજ્ય જેવા વૈભવ મળે છે. સમસ્ત પાપકર્મો નાશ પામે છે. હે માન્યે, મારા પર નિસદિન કૃપા બની રહે.

 

૧૪. જેમના કટાક્ષ (દ્રષ્ટિ)ની ઉપાસના કરનાર સેવકને બધી જ સુખ સમૃદ્ધિ લક્ષ્મીજી આપે છે તે સુરારિની હૃદયેશ્વરીને મન, વચન, કાયાથી હું ભજુ છું.

૧૫. કમળમાં રહેનાર, જેના હાથમાં કમળ છે તેવો દેવી, સફેદ વરપ્ર, સુગંધ અને માળાથી ઓપતા, ભગવતિ, હરિને પ્રિય અને મનને જાણનાર લક્ષ્મીજી, મારા પર પ્રસન્ન થાઓ.

 

૧૬. દિગ્ગજો દ્વારા સુવર્ણના કુંભમાંથી છોડાયેલ, સ્વર્ગંગાના સ્વચ્છ અને પવિત્રજળથી સ્નાન કરનાર, જગતની માતા અને સંપૂર્ણ ત્રિલોકના નાથની ગૃહિણી, અમૃત સાગરની પુત્રી શ્રી લક્ષ્મીને હું રોજ સવારે નમસ્કાર કરૂં છું.

 

૧૭. હે કમલા, હે કમલાક્ષ વિષ્ણુને પ્રિય, તમારી કરૂણાથી ભરપુર દ્રષ્ટિથી, દરિદ્રોના અગ્રણી, આપની દયાને પાત્ર એવા મારા પર જોવાની કૃપા કરો.

 

૧૮. જે લોકો દરરોજ આ સ્તુતિથી, વેદસ્વરૂપ, ત્રણેય લોકોની માતા રમાની સ્તુતિ કરે છે તે લોકો જગતમાં અધિક ભાગ્યશાળી, અધિક ગુણવાન અને બુદ્ધિમાન પુરૂષોના આદરપાત્ર બને છે.

 નાનકડા મંત્રથી કુબેર વર્ષાવશે ધન–  

 

કુબેર મહારાજ ભગવાનના કોશાધ્યક્ષ છે. તેમની પાસે જ ભગવાનના ખજાનાની ચાવી છે. કહેવાય છે કે લક્ષ્મી ધનનું આશીર્વાદ આપે છે પરંતુ કુબેર ધનની વર્ષા કરે છે. જો કુબેરને આકર્ષી ધન પ્રાપ્ત કરવું હોય તો દ્વિપુષ્કર, ત્રિપુષ્કર યોગ અથવા દીવાળીની રાતે સંકલ્પ લઈને નિયમિત આ નીચે આપેલાં મંત્રનું ત્રણવાર અથવા ઓછામાં ઓછી એક માળા જાપ કરવી. જાપ સમયે મોઢું ઉત્તર દિશા તરફ રાખવું.

મંત્રઃ

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये। धनधान्यसमृद्घिं में देहि दापाय स्वाहा।।

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टोटके


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1-आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।
2- कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाए ।
3- सरसो के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।
4- हनुमान जी के आगे चमेली के तेल से दीपक जलाए । कर्ज से मुक्ति मिलेगी ।
5- गुरूवार को दो लड्डू विष्णु जी की मूर्ति के आगे रखे जल्द ही रुके हुए काम बने लगेंगे ।
6- शनिवार को शाम को पीपल के नीचे दिया जलाए । व्यपार में तरक्की होने लगेगी ।
7- मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी
8- अगर काम में रुकावट आ रही है तो मंगलवार के दिन अपने ऊपर से सात बार नारियल उतारकर किसी बहते पानी में डाल दे ।
9- लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

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दीपावली की रात


दीपावली की रात

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दीपावली की रात कुछ ऐसे संकेत मिलते हैं
दीवारों पर दिख जाए छिपकली
दीवारों पर दौड़ती हुई छिपकली आपको यूं तो
अक्सर दिख जाएगी। लेकिन दीपावली की रात
छिपकली का दिखना बड़ा ही दुर्लभ होता है। इस
रात अगर आपको छिपकली दिख जाए तो यह बड़ा
ही अच्छा शगुन होता है। यह लक्ष्मी की कृपा का
सूचक माना गया है।
बिल्ली घर में आए तो किस्मत खुल जाए
घर में घुसकर बिल्ली अक्सर दूध पी जाती है और आप
इससे दुःखी हो जाते हैं। लेकिन दीपावली की रात
अगर बिल्ली घर में आ जाए तो जश्न मनाना चाहिए।
यह धन वृद्घि का सूचक होता है।
बिल्ली को नकारात्मक उर्जा का संचार करने वाला
जीव माना गया है लेकिन दीपावली की रात घर
की छत पर बिल्ली आकर मल त्याग करे तो इसे
स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति का संकेत मानना
चाहिए।
प्रार्थना करें उल्लू दिख जाए
देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू माना गया है। माना
जाता है कि दीपावली की काली अमावस रात में
देवी लक्ष्मी अपने वाहन पर बैठकर भ्रमण करती हैं।
इसलिए इस दिन उल्लू का दिखना बहुत ही शुभ माना
जाता है। माना जाता है कि इस दिन उल्लू का
दिखना देवी लक्ष्मी की कृपा से ही संभव होता है।
साल भर धनागमन बना रहता है
छछुंदर जमीन के अंदर बिल बनाकर रहता है। यह रात के
समय घरों में घुसकर बिखरे अनाज और दूसरे खाद्य
पदार्थों को खाकर पेट भरता है।
दीपावली की रात अगर छछुंदर घर में आ जाए तो इसे
भी शुभ संकेत समझना चाहिए इससे साल भर धनागमन
बना रहता है।
दीपावली के दिन गिरा हुआ अथवा कहीं से अटका
हुआ धन का मिलना भी शुभ शगुन माना गया है। इस
दिन उपहार मिलना भी शुभ शगुन माना गया है।
इसलिए दीपावली के दिन एक दूसरे को उपहार देने
का रिवाज है।

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एक संन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर पहुंच गए ।


एक संन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर पहुंच गए ।

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एक संन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर पहुंच गए । दुकान में अनेक छोटे-बडे डिब्बे रखे हुए थे । एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए संन्यासी ने दुकानदार से पूछा – इसमें क्या है ? दुकानदार ने कहा – इसमें नमक है ।
संन्यासी ने फिर पूछा इसके पास वाले में क्या है ? दुकानदार ने कहा इसमें हल्दी है । संन्यासी – इसके बाद वाले में ? दुकानदार ने कहा – जीरा है । संन्यासी ने फिर पूछा – आगे वाले में ? दुकानदार – उसमें हींग है ।
इस प्रकार संन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा । आखिर पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया । संन्यासी ने पूछा – उस अंतिम डिब्बे में क्या है ? दुकानदार ने कहा -उसमें राम-राम है । संन्यासी चौंक पडे यह राम-राम किस वस्तु का नाम है । दुकानदार ने कहा – महात्मन ! और डिब्बों में तो भिन्न-भिन्न वस्तुएं डाली हुई हैं । पर यह डिब्बा खाली है । ह्म खाली को खाली नहीं कहते, इसमें राम-राम है ।
संन्यासी की आंखें खुली की खुली रह गई , खाली में राम-राम ! ओह ! तो खाली में राम-राम रहता है , भरे हुए में राम को स्थान कहां ? लोभ,लालच,ईर्ष्या,द्वेष और भली-बुरी बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा ? उसमें राम यानी ईश्वर तो साफ-सुथरे मन में निवास करता है । दुकानदार की बात से संन्यासी के ज्ञान चक्षु खुल गए ।

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एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,, परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं ।


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एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,, परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं ।

एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,,
परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं ।
1– तू पेशाब हमेशा दीवार पे ही करता है ।
2– तू फकीर को देखकर बिना बात के ही भौंकता है ।
3– तू रात को भौंक भौंक के लोगों की नींद खराब करता
है ।
💥💥💥💥💥💥💥💥
इस पर कुत्ते ने बहुत ही बढिया जवाब दिया,,, कुत्ता बोला
ऐ बंदे सुन
🔪🔪🔪🔪🔪🔪🔪🔪
1– जमीन पर पेशाब इस लिए नहीं करता की कही किसी
रब्ब के बंदे ने वहां बैठकर रब्ब को सज्जदा न किया हो ।
2– फकीर पर इस लिए भौंकता हूँ कि वोह भगवान को
छोड कर लोगों से क्यों मांगता है,, जोकि खुद भीखारी हैं
। भगवान से क्यों नहीं मांगता ।
3– और रात को इस लिए भौंकता हूँ कि हे पापी इंसान तू
गफलत की नींद में क्यों सोया हुआ है।
उठ अपने उस प्रभू को याद कर जिसने तुझे इतना सब कुछ
दिया है ।
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पति-पत्नी के मध्य गृह कलह दूर करने हेतु उपाय !


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पति-पत्नी के मध्य गृह कलह दूर करने हेतु उपाय !

1.यदि पति-पत्नी के माध्य वाक् युद्ध होता रहता है तो दोनों पति-पत्नी को बुधवार के दिन दो घण्टे का मौन व्रत धारण करें।
2. पति को चाहिए की शुक्रवार को अपनी पत्नी को सुन्दर सुगन्ध युक्त पुष्प एवं इत्र भेंट करें एवं चाँदी की कटोरी चम्मच से दही शक्कर पत्नी को खिलाऐं।
3. पति को चाहिए की पत्नी की माँग में सिन्दूर भरें एवं पत्नी पति के मस्तक पर पीला तिलक लगाऐं।
4. स्त्री को चाहिए की अपने शयन कक्ष में 100 ग्राम सौंफ प्रातःकाल स्नान के बाद लाल कपडे में बांधकर रखें।
5. पति-पत्नी दोनों को फिरोज रत्न चाँदी में अनामिका आगुँली में धारण करें।
6. प्रतिदिन पति-पत्नी लक्ष्मी-नारायण या गौरी-शंकर के मन्दिर में जाऐं, सुगन्धित पुष्प चढ़ाऐं और दाम्पत्य सुख हेतु प्रार्थना करें।
7. पति-पत्नी सोमवार को दो-मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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जींदगी


endrasinh parmar

“तु ही बता ​ए ज़िंदगी;
इस ज़िंदगी का क्या होगा;
कि हर पल मरने वालों को;
जीने के लिए भी वक़्त नहीं।”