Posted in संस्कृत साहित्य

नासा के वैज्ञानिको ने अनेक अनुसंधानो के बाद यह Deep Space मे यंत्रो द्वारा सूर्य मे हर क्षण होने वाली एक ध्वनि को Record किया है |


Sanjay Dwivedy's photo.
Sanjay Dwivedy with Pawan Diwana

नासा के वैज्ञानिको ने अनेक अनुसंधानो के बाद यह Deep Space मे यंत्रो द्वारा सूर्य मे हर क्षण होने वाली एक ध्वनि को Record किया है |उस ध्वनि को सुना तो तो वैज्ञानिक चकित रह गए क्यूंकि ये कुछ और नहीं अपितु भारतीय संस्कृति की वैदिक ध्वनि *ॐ* थी |

आश्चर्य इस बात का था कि जो ध्वनि मनुष्य अपने कानो से नहीं सुन सकता उसको ऋषियों ने सुना | सामान्य मनुष्य 20-20000 Hz की ध्वनियों को ही सुन सकता है |इतनी ही हमारे कान की श्रवण शक्ति है |इंद्रियो की एक सीमा होती है उससे कम या अधिक मे वह कोई जानकारी नहीं दे सकती है |

वैज्ञानिको का आश्चर्य वास्तव मे *समाधि* की उच्च अवस्था का चमत्कार था जिससे ऋषियों ने वह ध्वनि सुनी अनुभव की और वेदो के हर मंत्र से पहले उसे लिखा और महामंत्र बताया |

ऋषि कहते है ये ॐ ध्वनि परमात्मा तक पहुचने का माध्यम है उसका नाम है |महर्षि पतंजलि कहते है *तस्य वाचक ? प्रणव * अर्थात परमात्मा का नाम प्रणव है , प्रणव यानि कि ॐ |

प्रश्न यह उठता है कि सूर्य मे ही ये ध्वनि क्यूँ हो रही है ? इसका उत्तर *गीता * मे दिया गया है | भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है -*जो योग का ज्ञान मैंने तुझे दिया ,यह मैंने आदिकाल मे सूर्य को दिया था |* देखा जाए तो तभी से सूर्य नित्य-निरन्तर मात्र ॐ का ही जाप करता हुआ अनादिकाल से चमक रहा है |या जाप सूर्य ही नहीं , सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड कर रहा है

Author:

Buy, sell, exchange old books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s