Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

ALEXANDER WAS DEFEATED BY PORUS …….TRUTH


ALEXANDER WAS DEFEATED BY PORUS …….TRUTH

Ambhi accepted Alexander as the conqueror of the world – or was Alexander ‘persuading’ Ambhi to seal an alliance – at a huge price? Portrayed as traitor, a sell out, by Colonial historians, Ambhi’s case was a simple case of providing neutrality and supplies (at a fabulous price) to a travelling army, which was securing its own borders.

Western Colonial historians implied that after the Battle at Hydaspes, India became a Greek colony, due to the the loss in that one battle! The story of defeat of Porus was written by Greek Historian, was a cooked up story. If so why Alexander will change his route after the war without doing any harm to Porus.. The writer was sponsored by Alexander. Porus surrendering to Alexender,Alexender returning everything to Porus….This portion is completely made up !

Alexander destroyed Takshashila and two more centres of learning called Persepolis and Later the place which afterwards came to be called “Alexandria”!!!

IF SO ….GREEKS ….. WHY they LEFT “NEVER TO COME BACK” ?

WHITE HISTORIANS LIES …Alexander’s halo gave bragging rights – first to the Greco-Romans and then to the Euro-colonialists. Conspiratorial Historians sponsored by Bible wielding priests modified and presented the world history in which Greeks were glorified into great heights while presenting and almost justifying destruction of the Persians !! So sad.

Rayvi Kumar's photo.
Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

नेहरू


Durgesh Kaushal's photo.
Durgesh Kaushal to Mini Parliament

गद्दार नेहरू

Posted in जीवन चरित्र

राममूर्ति नायडू


भारत का नव निर्माण's photo.
भारत का नव निर्माण with रघुविरसिंह जाडेजा and 4 others

आपने फिल्म बाहुबली में जब देखा कि राजा अपने हाथों से विशालकाय भैंसे के सींगों को पकड़ कर जमीन पर पटक देता हैं तो …आप सबने यही तो सोचा होगा कि फिल्म की बातें हैं . कुछ भी दिखा सकते हैं लेकिन .. भारत की धरती पर ऐसे बाहुबली हुए हैं .. जो इसी तरह भैंसे को पटक दिया करते थे … इनमे से एक थे .. राममूर्ति नायडू ….

सांड को उसकी सींग से पकड़कर उसे पटक देना हर किसी के बस की बात नहीं। लेकिन कोडी राममूर्ति नायडू उर्फ प्रफेसर राममू्र्ति के लिए यह मामूली काम था।

मौजूदा आंध्र प्रदेश के वीरघट्टम गांव में पैदा (अप्रैल, 1882) हुए राममू्र्ति पढ़ने में जीरो थे और लड़ने में हीरो। मां की मौत हुई और पिता ने उन्हें पढ़ाई के लिए उनके अंकल के पास विजयनगरम भेज दिया। वहां राममूर्ति को कुश्ती के बारे में पता चला और वह उसके इतने शौकीन हो गए कि उसमें ही पूरी तरह रम गए। कुछ ही वक्त में उस इलाके में राममूर्ति के बल और साहस के कसीदे पढ़े जाने लगे। राममूर्ति के अंकल ने उन्हें प्रफेशनल ट्रेनिंग के लिए मद्रास भेज दिया। राममूर्ति प्रफेशनल पहलवान बनकर लौटे और एक स्थानीय कॉलेज में इंस्ट्रक्टर की नौकरी करने लगे। नौकरी के साथ राममूर्ति ने अपना शक्ति प्रदर्शन जारी रखना। उनकी वायु स्तंभन और जल स्तंभन की कला ने उन्हें पूरे राज्य में मशहूर कर दिया।

1911 में उन्होंने अपना पहला पब्लिक शो किया। जब उन्होंने अपना हुनर दिखाया तो सरकारी महकमे के लोगों के साथ वहां मौजूद दर्शक अवाक रह गए। राममूर्ति ने अपने हाथों की मसल कड़ी करके ही उनपर बंधी लोहे की चेन तोड़ दी। इतना ही नहीं, एक बार उन्होंने अपने सीने पर लकड़ी का पटरा बांधा और लेट गए। उस पर से हाथी गुजरा और राममूर्ति का बाल भी बांका नहीं हुआ। इसके बाद वह पूरे देश में मशहूर हो गए। तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड मिंटो ने उन्हें चुनौती दी। राममूर्ति ने लॉर्ड मिंटो की कार को पीछे से चेन बांधकर पकड़ा और मिंटो ने पूरी स्पीड से कार को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहे। राममूर्ति की ताकत के सामने कार एक भी इंच आगे नहीं बढ़ सकी। राममूर्ति की ताकत का पूरे देश ने लोहा मान लिया। एक बार कांग्रेस की मीटिंग में राममूर्ति ने परफॉर्म किया तो पं. मदन मोहन मालवीय ने उन्हें ब्रिटेन के राजा और महारानी के सामने अपनी शक्ति दिखाने को कहा था।

राममूर्ति ब्रिटेन गए और वहां राजा-रानी के सामने अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया। राजा और महारानी राममूर्ति से इतना खुश हुए कि उन्हें ‘इंडियन हर्क्युलीज़’ की उपाधि दे डाली। उन्हें ‘कलयुगी भीम’ भी कहा गया। राममूर्ति एक सर्कस कंपनी के मालिक बने और देश-विदेश में सर्कस लगाकर दुनियाभर में विख्यात हो गए। हालांकि, आपको जानकर हैरानी होगी कि राममूर्ति ने कमाई हुई बेपनाह दौलत का ज्यादातर हिस्सा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए दान कर दी।

ये भारत है .. हिन्दुओं का देश .. यहाँ सब असंभव कार्य जिसे सिर्फ किस्से कहानियों की बातें कह के छोड़ दी जाती है वो सब संभव हुए हैं ..
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यदि आप इससे अभी तक अनभिज्ञ थे तो
कृपया शेयर द्वारा अपने अन्य मित्रों
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जय हिंदुत्व …
जय हिन्द … वन्देमातरम ….
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Posted in आरक्षण

जो भी आरक्षण लए होंगे वो दलितों के मसीहा नहीं बल्कि देश के दुश्मन थे।


जो भी आरक्षण लए होंगे वो दलितों के मसीहा नहीं बल्कि देश के दुश्मन थे।
अगर उनको दलितों से इतना ही प्रेम होता तो वो उन्हें आरक्षण नहीं बल्कि उन्हें शिक्षा देने में पूरा जान झोंक देते और सबके लिए फ्री और अच्छी शिक्षा देते।
आरक्षण से तो कमजोर टीचर, कर्मचारी और अधिकारीयों की भरमार हो गयी है।
एक कमजोर शिक्षक अपने विद्यार्थियों को क्या पढ़ायेगा?

Amit P Srivastava's photo.
Posted in रामायण - Ramayan

राम नहीं, तो मोतियोंकी माला भी मिट्टीके मोलकी !


राम नहीं, तो मोतियोंकी माला भी मिट्टीके मोलकी !

http://www.hindujagruti.org/hinduism-for-kids-hindi/84.html

एक बार हनुमानजी माता सीतासे मिलने के लिए गए थे । उन्होंने उनको आदरपूर्वक उनका वंदन किया । तभी माता सीताके मनमें विचार आया, ‘हनुमान मेरे स्वामीके भक्त हैं । वह सदैव उनकी सेवा करते हैं । उन्हें कुछ देना चाहिए ।’ ऐसा विचार कर उन्होंने अपने गले से माला उतारकर हनुमानजी के हाथोंमें सौंप दी और कहा, ‘‘मैं तुमपर प्रसन्न हूं । मेरी ओरसे यह मोतियोंकी यह माला तुम्हें दे रही हूं ।’’

हनुमानजी वह माला हाथोंमें पकडे सामने जा बैठे । उन्होंने मालाके प्रत्येक मोतीको निकालकर सूंघा, फोडा तथा देखकर फेंक दिया । ऐसा करते- करते उन्होंने मालाके समस्त मोतियोंको फोडकर फेंक दिया । लंबे समय तक उन्हें निहारती माता सीता क्रोधित हो गई। माताने पूछा, ‘‘आपको बडे प्रेमसे दी हुई मालाका यह क्या किया ? आपने सारे मोती तोड दिए । आपने ऐसा क्यों किया ?’’

तब हनुमानजीने कहा , ‘‘हमे ढूंढनेपर भी इस मालामें तथा मालाके किसी भी मोतीमें हमें राम दिखाई नहीं दिए। हम हमारे रामको ढूंढ रहे थे । जिसमें राम नहीं, वह सब मैंने फेंक दिया !’’

हनुमानजी की बातसुन कर माता सीता समझगई कि, जो माला उन्होंनेदी थी, वह श्रीरामके स्मरणके बिना दी थी । उन्हें इसका भान हुआ कि, वास्तवमें श्रीरामही सबकुछ करते हैं । माताने हनुमानजी से क्षमा मांगी । तदुपरांत श्रीरामजीका स्मरणकर उन्होंने हनुमानजीको दूसरी माला दी । हनुमानजीने वह माला तुरंत अपने गलेमें डाल दी!

बच्चों, जो कृत्य भगवान का स्मरण कर किया जाता है, वह हनुमानजीको लुभाता है । हमेमें भी प्रत्येक कृत्यको अपने कुलदेवताको स्मरण कर एवं उन्हें प्रार्थना करने के  उपरांत ही प्रारंभ करना चाहिए ।

Posted in PM Narendra Modi

मोदीजी की छबि


Bharat Popat shared his photo to the group: Vote for BJP.
Bharat Popat's photo.
Bharat Popat to WE SUPPORT NARENDRA MODI

कुछ जूठे सेक्युलर कुत्तो, दलाल मिडिया, और मुस्लिम धर्म के ठेकेदारो ने अपनी मुस्लिम वोट बैंक के लिए मुस्लिम को मोदी का जूठा डर दिखाके मोदीजी की छबि मुस्लिम विरोधी बनाने के भरपूर कोशिश की हे.

Posted in रामायण - Ramayan

रामराज्यमें शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?


रामराज्यमें शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?

http://www.hindujagruti.org/hinduism-for-kids-hindi/6474.html

shriram350प्रभु श्रीरामने स्वतन्त्र शिक्षा देकर घरघरमें श्रीराम निर्माण किए थे !
रामराज्यमें आर्थिक योजनाके साथ ही उच्च राष्ट्रीय चरित्रका निर्माण किया गया था । तत्कालिन लोक निर्लाेभी, सत्यवादी, अलंपट, आाqस्तक और सक्रिय थे; क्रियाशून्य नहीं थे । जब बेकारभत्ता मिलता है तब मनुष्य क्रियाशून्य बनता है । तत्कालिन लोग स्वतन्त्र थे; कारण शिक्षा स्वतन्त्र थी । शिक्षा राज्याश्रित अथवा वित्ताश्रित नहीं थी । शिक्षार्थी और शिक्षा प्रदान करनेवाले दोनों यदि पराधीन (गुलाम) होंगे, तो उस शिक्षासे क्या निर्माण होगा ? जो बोया जाता है वही उपजता है । अन्य कुछ नहीं उपजेगा ।

प्रभु श्रीरामने स्वतन्त्र शिक्षा देकर घरघरमें श्रीराम निर्माण किए थे । जहां शिक्षा राज्याश्रित अथवा वित्ताश्रित होती है, वहां कभी भी स्वतन्त्र विचारधारा नहीं होगी; राष्ट्रीय चरित्रका पुनरुत्थान नहीं हो सकेगा !

जनताको विशेष शिक्षा प्राप्त होनेसे ‘राष्ट्रीय चरित्र’ निर्माण हुआ !
‘मनुष्यको केवल कर्तव्यपरायण ही नहीं, अपितु लोभसे दूर भी रखा गया था । हम कर्तव्य केवल उद्घोष करते है, किन्तु कर्तव्यपरायण नहीं होते । इसीलिए प्रभु श्रीरामने लोगोंको विशेष शिक्षा देकर ‘राष्ट्रीय चरित्र’का निर्माण किया था ।’

समाज अपने सुख और हितकी पूर्तिका प्रयास करता है । परन्तु यह वैâसे सम्भव होता है, इसका उसे भान नहीं होता । प्रभु श्रीरामको इसका सम्पूर्णरूपसे भान होनेके कारण उन्होंने जनताको साधना बताकर धर्माधिाqष्ठत विशेष शिक्षा देकर उनमें ब्राह्मतेज और क्षात्रतेजका निर्माण किया । जिससे ‘राष्ट्रीय चरित्र’का निर्माण हुआ । – प.पू. पांडे महाराज, सनातन आश्रम, देवद, पनवेल.

(सन्दर्भ : व्यासविचार, नवम स्कन्ध)

Posted in AAP, राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

AAP


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हमारी पार्टी के सब कैंडिडेट की पूरी तरह जाँच करके ही उसे मेन्डेट दिया हे जी, दिल्ही में फर्जीलाल का एक के बाद एक जूठ सामने आरहा है,और मुर्ख आपिये इसके पीएम बनने के सपने देख रहे हे.

Posted in आरक्षण

आरक्षण


आरक्षण अंग्रेजौं और काँग्रेस की देश के खिलाफ सजिश है। जो देश के पिछड़ने की वजह भी है।
‪#‎amitks‬

Amit P Srivastava's photo.
Posted in आरक्षण

आरक्षण


अगर आरक्षण इतना ही अच्छा सुझाव था तो ६५ सालों में स्थिति सुधरी क्यों नहीं? और क्या गारंटी है की आने वाले दिनों में सुधर जाएगी?
‪#‎amitks‬

Amit P Srivastava's photo.