Posted in सुभाषित - Subhasit

कौन नीरोग रहता है ?


प्रश्न – “कोऽ‍रुक्, कोऽरुक्, कोऽरुक्”

उत्तर – “ऋतभुक्, हितभुक्, मितभुक्”

कौन नीरोग रहता है ? कौन नीरोग रहता है ? कौन नीरोग रहता है ?

उत्तर (१) जो धर्मानुसार भोजन करता है, (२) हितकारी भोजन करता है, (३) और जो मितभोजन – भूख रखकर अल्पाहार करता है, वह सर्वथा रोगरहित और पूर्ण स्वस्थ वा सुखी रहता है ।

मांसाहार कभी धर्मानुसार मनुष्य का भोजन नहीं हो सकता । मांसाहारी ऋतभुक् नहीं हो सकता क्योंकि बिना किसी प्राणी के प्राण लिये मांस की प्राप्ति नहीं होती और किसी निरपराध प्राणी को सताना, मारना, उसके प्राण लेना ही हिंसा है और हिंसा से प्राप्त हुई भोग की सामग्री भक्ष्य नहीं होती । महर्षि दयानन्द जी लिखते हैं – “जितना हिंसा और चोरी, विश्वासघात, छलकपट आदि से पदार्थों को प्राप्त होकर भोग करना है, वह अभक्ष्य और अहिंसा, धर्मादि कर्मों से प्राप्त होकर भोजनादि करना भक्ष्य है ।”
(मांस मनुष्य का भोजन नहीं- स्वामी ओमानंद सरस्वती)

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