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IPS Kiran Bedi with Satyendra Singh and 6 others

भारत सरकार द्वारा भारतीय संविधान में निहित समता के अधिकार (अनु- 14-18) के तहत पिछड़े वर्गो अल्पसंख्यको अनुसूचित जातियों एवम जनजातियो को आरक्षण देने का सिर्फ एक उद्देश्य था और वह यह , इनको अन्य ऊँची एवम संपन्न जातियो के लोगो के बराबर का दर्जा दिया जा सके | अन्य सभी उच्च जातियो एवम वर्गों के साथ-साथ इन पिछड़े एवम शोषित लोगो का भी इस देश के विकास में बराबर का योगदान हो |

आरक्षण की व्यवस्था शुरू में 1960 में शुरू की गयी और डॉ अम्बेडकर ने स्वयं कहा था कि- “दस साल में यह समीक्षा हो जिनको आरक्षण दिया जा रहा क्या उनकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ कि नहीं? उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप में कहा यदि आरक्षण से यदि किसी वर्ग का विकास हो जाता है तो उसके आगे कि पीढ़ी को इस व्यवस्था का लाभ नही देना चाहिए क्योकि आरक्षण का मतलब वैसाखी नही है जिसके सहारे आजीवन जिंदगी जिया जाये,यह तो मात्र एक आधार है विकसित होने का |”

आज जब भारत तरक्की की राह पर आगे बढ रहा है तो उसे फिर से पीछे धकेलने की साजिश है ये।समाज को दो हिस्सों मे बाँटने की साजिश है।आजादी के छः दशक बाद भी यदि हम आरक्षण की राजनीति करते रहे तो लानत है हम पर।

निश्चित रूप से जब डॉ अम्बेडकर ने ही यह कहा आरक्षण वैसाखी नही है तो फिर आज दस-दस साल के अन्तराल पर समीक्षा होने के बजाय पुन: आरक्षण की सीमा को आगे बढा दिया जाता है ।

आज देश मे एक व्यक्ति एक संविधान क्यों नही लागू होता?आरक्षण से दलित वर्ग को आज तक कितना लाभ हुआ?हम हर जगह खुली प्रतियोगिता की बात करते है, तो फिर सभी नागरिको समान प्रतियोगिता का अवसर क्यों नही देते?

कब तक हम वर्ग विशेष को आरक्षण प्लेट मे रखकर देते रहेंगे?सामजिक न्याय के नाम पर हम कब तक योग्य प्रतिभा का गला घोंटते रहेंगे? कब तक ये वोट की गन्दी राजनीति चलती रहेगी? आरक्षण के नाम पर लगभग सभी पार्टियाँ एकमत हैं । और अब तो प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए भी संसद में बिल पास करा कर लागू कराये जाने की साजिश चल रही है । जबकि सुप्रीम कोर्ट इस प्रमोशन में रिजर्वेशन की व्यवस्था को पहले ख़ारिज कर चुका था । मगर राजनीतिक दल विशेषकर बसपा की सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही संसद में बदलने के लिए राजनीतिक हथकंडे अपनाया जिसका समर्थन सपा को छोड़कर सभी दलों ने किया था ।राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते हैं की आरक्षण की व्यवस्था ख़त्म हो क्योंकि यही उनका सबसे बड़ा वोट बैंक है ।

शैक्षणिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ही ” पिछड़ा ” शब्द का उपयोग हुआ है —- इन्हीं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी लेकिन जाति के नाम पर आरक्षण का बार बार लाभ लेने वाले समाज के दुश्मनों को सर आँखों पर बिठाने वाले भी कमजोर वर्ग के ही लोग हैं | इन्हें अपनी उन्नति नहीं अपनी जात के ठीकेदारों , लुटेरों की ही उन्नति प्यारी है |

सभी नेता को तो राजनीतिक लाभ से मतलब है देश के कमजोर वर्ग से सिर्फ मत चाहिए |

अपना एक ही सपना आरक्षण मुक्त हो भारत अपना