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भगत सिंह – जेल में टॉर्चर किया गया और फाँसी पे लटका दिया गया ।


भगत सिंह – जेल में टॉर्चर किया गया और फाँसी पे लटका दिया गया ।

वीर सावरकर – सारी जिंदगी बेहिसाब टॉर्चर और काला पानी की सजा ।

लाला लाजपत राय – इतना मारा गया क़ि मौत हो गयी ?

चंद्र शेखर आजाद – नेहरु द्वारा मुखबरी करवाकर घेरकर मार दिया गया ?

सुभाष चंद्र बोस – देश से बाहर फेंक दिया गया और आजाद भारत में घुसने नही दिया गया ?

दूसरी और

महात्मा गांधी – जेल में सुविधाएँ – गोली तो क्या कभी गाली भी नही खायी ?

जवाहर लाल नेहरू – मजे लुटे आयाशि की – गुलाम भारत में भी साहब मिनरल वाटर पिते थे ?

और कुछ वेवकूफों ने हमारी सारी पीढ़ी को सिखा दिया क़ि गांधी और नेहरू भारतीयों के बाप और चाचा हैं और भगत सिंह आतंकवादी।

और लोग कहते है सच बिकता है देखो 70 साल से झूठ कैसे सोने के भाव बिक रहा है ।

जिस देश की जनसंख्या 135 करोड हो और टैक्स देने
वालो की संख्या “”3 करोड””

उस देश के लोगो को विकास के लिए चिल्लाने
का कोई हक नही है ।


अमेरिका में अगर कोई 100 रूपये कमाता है
तो वो 40 रूपये टैक्स देता है , मतलब उसकी इन हैण्ड
इनकम 60 तब कही जाकर उनको इतना विकास
मिला है ।

–यहा भारत के लोग 100 रूपये कमाते हैं तो 8 रूपये
टैक्स देते हैं। और सुविधाऐ हमें सारी दुनिया से
ज्यादा चाहिए ।


बजट आने पर सब लोग एक ही चीज सोचते हैं
किसी तरह टैक्स लिमिट को बढा दिया जाऐ
बस मजा आ जाऐगा ।
—–
कुल मिलाकर सबको बुलेट ट्रेन जैसी सुविधाएं
भी चाहिए लेकिन टैक्स देने मे
हमारी ऐसी तैसी हो जाती है ।


भारत का हर नागरिक कह रहा है बजट खराब
आया ये नही किया वो नही किया ।
——-
जब पाकिस्तान की बात होती है तो सब लोग
कहते हैं भारत पाकिस्तान पर हमला करके उसे सबक
क्यो नही सिखाता
—–
लेकिन हम बेवकूफो को ये नही पता युद्ध में
कितना खर्च आता है ।

अमेरिका अपने बजट का 47 % अपनी सुरक्षा पर
खर्च करता है ।

इस बार भारत ने भी 40 % से ज्यादा अपने
सुरक्षा के लिए बजट से रखा है।

लेकिन हमे तो अपना फायदा चाहिए देश के लिए
हम फेसबुक पर लड लेते हैं इससे
ज्यादा देशभक्ती नही दिखा सकते ।


बजट में साफ साफ तौर पर — देश मे निर्मित
प्रोडक्ट्स को सस्ता किया गया है।


लेकिन भारत के देशभक्तो को तो –इम्पोर्टेड
चीजे अच्छी लगती है।–

अब कोई भी स्वदेशी चीजे
नही खरीदेगा ।


एक विदेशी कोल्डड्रिंक बंद नहीं कर सकते और
कोसने मोदी को लग जाएंगे।

सच्चे भारतीय होने के नाते हम जरुर
शेयर करें
[अगर सिर्फ whats app or facebook पे जोक सुन सुन के मोदी जी की विदेश दौरों का पता है तो मुर्ख हो  । इन उपलब्दियों के बारे में भी पता होना चाहिए …

1. मोदी जी ने सऊदी अरब को “On-Time Delivery” Premium charges on Crude Oil  के लिए मना लिया है ।

2. India भूटान में 4 Hydropower stations Dams बनाएगा । जिस से Green energy मिलेगी ।

3. India नेपाल में सबसे बड़ा hydro dam बनाएगा जिस से 83% Green energy इंडिया को मिलेगी। ( इसके लिए china कब से लगा हुआ था )

4. जापान के साथ समझोता हुआ. वो भारत में 10 लाख करोड़ invest करेंगे और bullet train चलाने में मदद करेंगे।
( कांग्रेस के टाइम में ये समझोता सिर्फ 1000 करोड़ का था)

5. Vietnam के साथ रिश्ते सुधारे हैं और अब भारत को आयल देने और आयल रिफानरी में भारत के लिए मदद करेगा।
कोंग्रेश के समय उसने मना कर दिया थ।

6. इरान अब डॉलर की जगह रूपये में आयल देने को राजी हो गया है । इस से खाफी बचत होगी ।

7. मोदी जी 28 साल के बाद औस्ट्रेलिया जाने वाले प्रधनमंत्री बने । और वहां दोस्ती के रिश्ते बनाये । अब वहां से Uranium मिलेगा जिससे बिजली बनाने के लिए काफी मदद मिलेगी।

8. मोदी जी इस साल श्री लंका गये और टूटी हुई दोस्ती सुधारी। जो कांग्रेश ने श्री लंका ना जाके बिगाड़ ली थी।

9. China के सामान india में बहुत बिक रहे हैं , इसके लिए बोल दिया की या तो इंडिया में invest करो नही तो गैर क़ानूनी माना जाएगा । अब China $20 billion Invest करेगा।

1 India ने North East and around India china border पे रोड बनाना शुरू कर दिया है ताकि हमारी army को जाने में दिक्कत न हो।
कांग्रेश इस बनाने में डरती रही।

12. India यमन से 4000+ Indians को लाने में सफल रही ।ये सब मोदी और सऊदी अरब किंग की दोस्ती की वजह से संभव हो पाया।

13. India की Air force की ताकत कमजोर हो गयी थी। इसके लिए आते ही  फ़्रांस से 36 Rafale fighter Jets खरीदने के लिए deal की है।

14. after  42 years Canada , भारत को Uranium देने के लिए राजी हो गया है । इस से बिजली की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी ।

15. Canada अब भारतीयों को On-Arrival visa देगा।

16. अब तक हम अमेरिक और रूस से ही Nuclear Reactor खरीद सकते थे । मगर अब फ़्रांस भारतीय कम्पनी के साथ यही बनाएगी ।
– MAKE IN INDIA

17. बराक ओबामा से दोस्ती की और अमेरिका अब भारत में 16 Nuclear power plant लगाने में मदद करेगा । जिस से भारत में बिजली की दिक्कत ख़तम हो जाएगी ।

Please do not forward if u do not agree above fact

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प्रमुख नारे …


प्रमुख नारे …………………

1.सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है = रामप्रसाद बिस्मिल
2 सम्राज्यवाद का नाश हो = भगत सिंह
3. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा = सुभाषचंद्र बोस
4. जय जवान जय किसान = लाल बहादुर शास्त्री
5. मारो फिरंगी को = मंगल पांडे
6. इंकलाब जिंदाबाद = भगत सिंह
7. वंदे मातरम् = बंकिमचंद्र चटर्जी
8. संपूर्ण क्रांति = जयप्रकाश नारायण
9. स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है = बाल गंगाधर तिलक
भारत माता के सच्चे सपूत और महान क्रांतिकारियों को शत शत नमन

शेयर जरूर करना
ताकि लोग सलमान, शारुख के फ़िल्मी डायलॉग को छोड़ के देश के असली हीरो के डायलॉग को समझे बोले और जिए

दीपक शर्मा's photo.
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67 साल पहले एक गुजराती ने देश को अंग्रेजों से मुक्त


67 साल पहले एक गुजराती

ने देश को अंग्रेजों से मुक्त

किया था…..

अब 67 साल बाद एक गुजराती

ने देश को कांग्रेस से मुक्त

किया है……

पहले वाला गुजराती ‘नोटो’ पर

छा गया,

अभी वाला गुजराती ‘वोटों’ पर

छा गया..

ऐ दोस्त खिडकिया खोल

के देखने दे मुझे……. .

मेरे वतन की नई तस्वीर बन

रही है…….

आज भारत फिरसे आजाद

हुआ…… पहला इग्लेड की

रानी से….. और आज

” इटली की नौकरानी ” से…..

जो पढ़ सके न खुद, किताब मांग रहे है,

खुद रख न पाए, वे हिसाब मांग रहे है।

जो कर सके न साठ साल में कोई विकास देश का, वे 1 साल में जवाब मांग रहे है।

आज गधे गुलाब मांग रहे है, चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे है।

जो लुटते रहे देश को 60 सालों तक,

सुना है आज वो 1साल का हिसाब मांग रहे है?

ये???

वर्षों बाद एक नेता को माँ गंगा की आरती करते देखा है,

वरना अब तक एक परिवार की समाधियों पर फूल चढ़ते देखा है।

वर्षों बाद एक नेता को अपनी मातृभाषा में बोलते देखा है,

वरना अब तक रटी रटाई अंग्रेजी बोलते देखा है।

अब तक एक परिवार की मूर्तियां बनते देखा है।

वर्षों बाद एक नेता को संसद की माटी चूमते देखा है,

वरना अब तक इटैलियन सैंडिल चाटते देखा है।

वर्षों बाद एक नेता को देश के लिए रोते देखा है,

वरना अब तक “मेरे पति को मार दिया” कह कर वोटों की भीख मांगते देखा है।

पाकिस्तान को घबराते देखा है,

अमेरिका को झुकते देखा है।

इतने वर्षों बाद भारत माँ को खुलकर मुस्कुराते देखा है।

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आप सभी से निवेदन इस मेसेज को पुरे भारत हर एक नागरीक तक पहुचाने में मेरी मदद करे🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Posted in संस्कृत साहित्य

ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म् ।


ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म् ।

♦♦  के 11 शारीरिक लाभ / IMPORTANCE OF AUM : ♦♦

KNOWLEDGE VALLEY FROM INTERNET
ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म् ।

“अ” का अर्थ है उत्पन्न होना, “उ” का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, “म” का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।
ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानें, ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए मात्र ॐ के उच्चारण का मार्ग…

1, ॐ दूर करे तनावः अनेक बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित
हो जाता है।

2. ॐ और घबराहटः अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

3. ॐ और तनावः यह शरीर के विषैले
तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. ॐ और खून का प्रवाहः यह हृदय
और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. ॐ और पाचनः ॐ के उच्चारण से
पाचन शक्ति तेज़ होती है।

6. ॐ लाए स्फूर्तिः इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. ॐ और थकान: थकान से बचाने के
लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. ॐ और नींदः नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है।
रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी।

9. ॐ और फेफड़े: कुछ विशेष प्राणायाम
के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

10. ॐ और रीढ़ की हड्डी: ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा
होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

11. ॐ और थायरायडः ॐ के दूसरे अक्षर का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो कि थायरायड ग्रंथि पर प्रभाव डालता है।

#ॐनम:शिवाय

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

भारतीय समाज में पवित्र माना जाता है पान।


भारतीय समाज में पवित्र माना जाता है पान।

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भारतीय समाज में पवित्र माना जाता है पान।सांस की बीमारी में पान का तेल है फायदेमंद।पान का सेवन पायरिया से दिलाता है राहत।बिना तम्‍बाकू वाले पान का ही करें सेवन।भारतीय समाज में पूजा में पान के पत्‍तों का प्रयोग पुरातन काल से किया जाता रहा है। पान खाने के शौकीन तो नवाबों से लेकर आम जनता तक रही है। और आज भी पान भारत के हर संस्‍कृति में उपयोग होता है। लेकिन, यह पान न केवल मुंह का रंग और जायका बदलता है, बल्कि इसके कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी हैं। आइये इस लेख के माध्यम से हम आपको बताते हैं पान के ऐसे ही 15 फायदे।

पान को भारतीय सभ्यता और संकृति के हिसाब से बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पान खाने के भी बहुत फायदे हैं, बशर्ते यह तम्बाकू वाला न हो। पान खाना हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

इसका प्रयोग करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर किया जा सकता है। पान में क्लोरोफिल पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इसके रस को कई प्रकार की दवाईयां बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। आइए हम आपके स्‍वादिष्ट पान के गुणों के बारे में बताते हैं।

मुंह की तकलीफों से लेकर डायबिटीज तक को दूर करने में पान बेहद उपयोगी होता है । पान का सेवन कई बीमारियों से बचाता है। साथ ही कई रोगों का इलाज भी पान की पत्तियों के जरिये किया जा सकता है।

पान के लाभ –

पायरिया के मरीजों के लिए पान बहुत फायदेमंद है। पायरिया होने पर पान में दस ग्राम कपूर को लेकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है। लेकिन पान की पीक पेट में जानी नहीं चाहिए।

खांसी आने पर भी पान फायदा करता है। खांसी आने पर पान में अजवाइन डालकर चबाने से लाभ होता है। गर्म हल्दी को पान में लपेटकर चबाएं, फायदा होगा।

किडनी खराब हो तो भी पान काफी फायदेमंद साबित होता है। किडनी खराब होने पर मसाले, मिर्च एवं शराब (मांस एवं अंडा भी) से परहेज करना चाहिए।

चोट लगने पर पान बहुत फायदेमंद है। अगर कहीं चोट लग जाए तो पान को गर्म करके परत-परत करके चोट वाली जगह पर बांध लेना चाहिए। इससे दर्द में आराम मिलता है।

जले पर पान लगाने से भी फायदा मिलता है। जल जाने पर पान को गर्म करके लगाने से दर्द कम होता है।

मुंह के छालों के लिए पान बहुत फायेदेमंद होता है। छाले पड़ने पर पान के रस को देशी घी से लगाने पर प्रयोग करने से फायदा होता है।

जुकाम होने पर पान को लौंग में डालकर खाना चाहिए।

सांस की नली में दिक्कत होने पर पान का तेल प्रयोग फायदा देता है। पान के तेल को गर्म करके सोते वक्त  सीने पर लगाने से श्वास नली की बीमारियां समाप्त होती हैं।

पान में पकी सुपारी व मुलेठी डालकर खाने से मन पर अच्छा असर पड़ता है।

सावधानी

हमारे देश में कई तरह के पान मिलते हैं। इनमें मगही, बनारसी, गंगातीरी और देशी पान दवाइयों के रूप में ज्यादा प्रयोग किया जाता है। लेकिन ज्यादा पान खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए ज्यादा पान का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

पान के लाभ

पान में दस ग्राम कपूर को लेकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया दूर हो जाता है। लेकिन पान की पीक पेट में जानी नहीं चाहिए।खांसी आने पर पान में अजवाइन डालकर चबाने से लाभ होता है। गर्म हल्दी को पान में लपेटकर चबाएं, फायदा होगा।किडनी खराब होने पर पान का सेवन करना लाभकारी होता है। इस दौरान तेज मसाले, शराब एवं मांसाहार से परहेज करना चाहिए।चोट पर पान को गर्म करके परत-परत करके चोट वाली जगह पर बांध लेना चाहिए। इससे दर्द में आराम मिलता है।जले पर पान लगाने से भी फायदा मिलता है। जल जाने पर पान को गर्म करके लगाने से दर्द कम होता है।मुंह के छालों के लिए पान बहुत फायेदेमंद होता है। छाले पड़ने पर पान के रस को देशी घी से लगाने पर प्रयोग करने से फायदा होता है।जुकाम होने पर पान को लौंग में डालकर खाना चाहिए।पान के तेल को गर्म करके सोते वक्त  सीने पर लगाने से श्वास नली की बीमारियां समाप्त होती हैं।कब्‍ज होने पर पान का सेवन काफी फायदा करता है।माथे पर पान के पत्‍तों का लेप लगाने से सिरदर्द दूर हो जाता है।पान के पत्‍तों के रस में शहद मिलाकर पीने से अंदरूनी दर्द व थकावट और कमजोरी को दूर किया जा सकता है।धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, तो पान के ताजा पत्‍ते चबायें। इससे आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद मिलेगी।कमर दर्द से राहत पाने के लिए उस पर पान के पत्‍तों से मसाज करें, लाभ होगा।पान के पत्‍ते चबाने से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।मसूड़ों से खून आने पर पान के पत्‍तों को पानी में उबालकर उन्‍हें मैश कर लें। इन्‍हें मसूड़ों पर लगाने से खून बहना बंद हो जाता है।

सावधानी

हमारे देश में कई तरह के पान मिलते हैं। इनमें मगही, बनारसी, गंगातीरी और देशी पान दवाइयों के रूप में ज्यादा प्रयोग किया जाता है। लेकिन ज्यादा पान खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए ज्यादा पान का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

पान में दस ग्राम कपूर को लेकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया दूर हो जाता है। लेकिन पान की पीक पेट में जानी नहीं चाहिए।

Posted in श्री कृष्णा

श्री कृष्ण ने क्यों किया कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथों पर?, जानिए कर्ण से जुडी कुछ ऐसी ही रोचक बातें ।


श्री कृष्ण ने क्यों किया कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथों पर?, जानिए कर्ण से जुडी कुछ ऐसी ही रोचक बातें ।

कर्ण के पिता सूर्य और माता कुंती थी, पर चुकी उनका पालन एक रथ चलाने वाले ने किया था, इसलिए वो सूतपुत्र कहलाएं और इसी कारण उन्हें वो सम्मान नहीं मिला, जिसके वो अधिकारी थे। इस लेख में आज हम महारथी कर्ण से सम्बंधित कुछ रोचक बातेंजानेंगे।

क्यों नहीं चुना द्रौपदी ने कर्ण को अपना पति?
“””””‘”””’””””””””””””””””‘”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कर्ण द्रोपदी को पसंद करता था और उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था साथ ही द्रौपदी भी कर्ण से बहुत प्रभावित थी और उसकी तस्वीर देखते ही यह निर्णय कर चुकी थी कि वह स्वयंवर में उसी के गले में वरमाला डालेगी। लेकिन फिर भी उसने ऐसा नहीं
किया।
द्रोपदी और कर्ण, दोनों एक-दूसरे से विवाह करना चाहते थे लेकिन सूतपुत्र होने की वजह से यह विवाह नहीं हो पाया। नियति ने इन दोनों का विवाह नहीं होने दिया, जिसके परिणामस्वरूप कर्ण, पांडवों से नफरत करने लगा। द्रोपदी ने कर्ण के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि उसे अपने परिवार के सम्मान को बचाना था।

क्या आप जानते है की द्रौपदी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद कर्ण ने दो विवाह किए थे।
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
चलिए आपको बताते हैं किन हालातों में किससे कर्ण ने विवाह किया था। कर्ण ने किए थे दो विवाह
अविवाहित रहते हुए कुंती ने कर्ण को जन्म दिया था। समाज के लांछनों से बचने के लिए उसने कर्ण को स्वीकार नहीं किया। कर्ण का पालन एक रथ चलाने वाले ने किया जिसकी वजह से कर्ण को सूतपुत्र कहा जाने लगा। कर्ण को गोद लेने वाले उसके पिता
आधीरथ चाहते थे कि कर्ण विवाह करे। पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कर्ण ने रुषाली नाम की एक सूतपुत्री से विवाह किया। कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था। सुप्रिया का जिक्र महाभारत की कहानी में ज्यादा नहीं किया गया है।
रुषाली और सुप्रिया से कर्ण के नौ पुत्र थे। वृशसेन, वृशकेतु, चित्रसेन, सत्यसेन, सुशेन, शत्रुंजय, द्विपात, प्रसेन और बनसेन। कर्ण के सभी पुत्र महाभारत के युद्ध में शामिल हुए, जिनमें से 8 वीरगति को प्राप्त
हो गए। प्रसेन की मौत सात्यकि के हाथों हुई, शत्रुंजय, वृशसेन और द्विपात की अर्जुन, बनसेन की भीम, चित्रसेन, सत्यसेन और सुशेन की नकुल के द्वारा मृत्यु हुई थी।
वृशकेतु एकमात्र ऐसा पुत्र था जो जीवित रहा। कर्ण की मौत के पश्चात उसकी पत्नी रुषाली उसकी चिता में सती हो गई थी।
महाभारत के युद्ध के पश्चात जब पांडवों को यह बात पता चली कि कर्ण उन्हीं का ज्येष्ठ था, तब उन्होंने कर्ण के जीवित पुत्र वृशकेतु को इन्द्रप्रस्थ की गद्दी सौंपी थी। अर्जुन के संरक्षण में वृशकेतु ने कई युद्ध भी लड़े थे।

श्री कृष्ण ने क्यों किया कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथोंपर?
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जब कर्ण मृत्युशैया पर थे तब कृष्ण उनके पास उनके दानवीर होने की परीक्षा लेने के लिए आए। कर्ण ने कृष्ण को कहा कि उसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे में कृष्ण ने उनसे उनका सोने का दांत
मांग लिया। कर्ण ने अपने समीप पड़े पत्थर को उठाया और उससे अपना दांत तोड़कर कृष्ण को दे दिया। कर्ण ने एक बार फिर अपने दानवीर होने का प्रमाण दिया जिससे कृष्ण काफी प्रभावित हुए। कृष्ण
ने कर्ण से कहा कि वह उनसे कोई भी वरदान मांग़ सकते हैं। कर्ण ने कृष्ण से कहा कि एक निर्धन सूत पुत्र होने की वजह से उनके साथ बहुत छल हुए हैं। अगली बार जब कृष्ण धरती पर आएं तो वह पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन को सुधारने के लिए प्रयत्न करें। इसके
साथ कर्ण ने दो और वरदान मांगे।
दूसरे वरदान के रूप में कर्ण ने यह मांगा कि अगले जन्म में कृष्ण उन्हीं के
राज्य में जन्म लें और तीसरे वरदान में उन्होंने कृष्ण से कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां कोई पाप ना हो।
पूरी पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नहीं होने के कारण कृष्ण ने कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथों पर किया। इस तरह दानवीर कर्ण मृत्यु के पश्चात साक्षात वैकुण्ठ धाम को प्राप्त हुए

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

कुर्ते के साथ पायजामा पहना जाता है लेकिन पठानी कुर्ते और सलवार की जोड़ी क्यों है, हिन्दू वीरों की ये गौरव गाथा जानिए…. मेरे देशभक्त भाइयो !


कुर्ते के साथ पायजामा पहना जाता है लेकिन पठानी कुर्ते और सलवार की जोड़ी क्यों है, हिन्दू वीरों की ये गौरव गाथा जानिए….
मेरे देशभक्त भाइयो !
मुस्लिमों के रोज रोज के झगड़ों और औरतों व् बच्चों पर अत्याचारों से परेशान होकर महाराजा रणजीत सिंह के सेनापति हरी सिंह नलवा ने उनको उनकी औकात बताने के लिये अफगानिस्तान पर आक्रमण कर दिया।
मुस्लिमों को गाजर मूली की तरह काटा और अफगानिस्तान पर अधिकार कर लिया।
हजारों मुस्लिमों को बंदी बनाकर एक बाड़े में रोक दिया कि कल इन सबको काट देंगे ताकि फिर ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी।
उनकी बीवियां आकर रोने लगीं, उनकी जान बख्शने की विनती करने लगी, हिन्दू धर्म का वास्ता देने लगी।
आखिर नारी जाति को रोते देख हरी सिंह नलवा जी का हृदय पसीज गया और उन्होंने कहा कि ठीक है कल आप बाड़े के सामने एक एक सलवार ले कर पहुँच जाना, जिसका पति सलवार पहनकर जायेगा, उसे जाने दिया जायेगा।
अगले दिन सबको शर्त बता दी गयी, 2 मुस्लिमों ने बिना सलवार पहने बाड़े से बाहर कदम रखा और साथ की साथ तलवार के एक -एक ही वार से नरकगामी हो गए।
उनका ये हश्र देखकर सबने चुप चाप सलवार पहनी और अपनी औरतों के साथ हिजड़ा बन कर निकल गए।
इसके बाद सभी बाकि के मुस्लिम पुरुषों को भी सलवार में रहने का ही आदेश जारी कर दिया गया।
हरी सिंह नलवा जी एकमात्र ( अमेरिका और रूस भी नहीं ) ऐसे योद्धा थे जिन्होंने सालों अफगानिस्तान पर राज किया और वहां के मुस्लिमों को अपनी पत्नियों के साथ उनकी सलवार पहन के रहना पड़ा, ये उनकी असली औकात थी।
कई सालों तक जिन्दा रहने के लिए मजबूरन पहनी वो सलवार बाद में मुस्लिम समाज का हिस्सा बन गयी जिसे वो आज तक पहन रहे हैं।
उन्ही के कुछ वंशज आज भी हिंदुओं को काफ़िर कायर कहते हैं ,15 मिनट पुलिस हटाने पर हिन्दू धर्म को खत्म करने की बात कहते हैं।
कोई समझाओ उन्हें की कत्ले आम तो बाद की बात है, सलवार पहनते हो और लड़ने की बात करते हो???
पहले सलवार से पायजामे पर तो आ जाओ। मर्दों की बारात में हिजडों की टोलियां शोभा नही देती।

Posted in जीवन चरित्र

कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)


नाम – कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म – 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि – कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि – 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता – श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता – राणी जीवत कँवर जी
राज्य – मेवाड़
शासन काल – 1568–1597ई.
शासन अवधि – 29 वर्ष
वंश – सुर्यवंश
राजवंश – सिसोदिया
राजघराना – राजपूताना
धार्मिक मान्यता – हिंदू धर्म
युद्ध – हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी – उदयपुर
पूर्वाधिकारी – महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी – राणा अमर सिंह
अन्य जानकारी –
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम ‘चेतक’ था।
राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि
राणा प्रताप का जन्म हुआ।
महाराणा का नाम
इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है।
महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर
के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती
है।
महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-
1… महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट
डालते थे।
2…. जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होने
अपनी माँ से पूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर
आए| तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि
हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना जहाँ का राजा अपनी प्रजा के
प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी
मातृभूमि को चुना ” लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया
था | “बुक ऑफ़
प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |
3…. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच
का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन
207 किलो था।
4…. आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान
उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5…. अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो
आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से
मना कर दिया |
6…. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और
अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7…. महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है जो आज
भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8…. महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ
लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि
फौज के लिए तलवारें बनाईं| इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार
कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |
9…. हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें
पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |
10….. महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा “श्री जैमल
मेड़तिया जी” ने दी थी जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000
मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे
जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11…. महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |
12…. मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो महाराणा प्रताप
को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे|
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं तो दूसरी तरफ भील |
13….. महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का
दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने
के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज
खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है
|
14….. राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी
की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|
15….. मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया
हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और
महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे |
16…. महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो
म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।
महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:
मित्रो आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते
बताता हुँ।
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।
वो लिखता है की जब महाराणा
प्रताप पर अकबर ने चढाई की
थी तब उसने दो चीजो को
ही बंदी बनाने की मांग की
थी एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।
आगे अल बदायुनी लिखता है
की वो हाथी इतना समझदार
व ताकतवर था की उसने
हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही
अकबर के 13 हाथियों को मार
गिराया था
वो आगे लिखता है कि
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया तब
कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।
अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।
उस हाथी को अकबर के समक्ष
पेश किया गया जहा अकबर ने
उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।
तब अकबर ने कहा था कि
जिसके हाथी को मैं अपने सामने
नहीं झुका पाया उस महाराणा
प्रताप को क्या झुका पाउँगा।
ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ
जानवर थे।
इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो
तो शेयर कर देना।

Posted in PM Narendra Modi

Truly “Achchhe Din


👌Truly “Achchhe Din..”👏
👉First of its kind of army operation in INDEPENDENT INDIA..
👉 First ” Surgical”
Operation by Indian Army..
👉 First ever operation done in foreign country…
👉 Only 2 teams of 25 brave soldiers shot 80 militants in Myanmar..🔫💣
👉 Operation performed late night @ 1.30 AM…
👉 First time any Indian NSA(Mr. Ajit Doval) and Army Chief (Mr. Suhag) went to border to supervise it..👏👏
👉 First ever Instant approval given by PMO that too in midnight..
👉  First time PMO took permission from any foreign country to attack in their boarders..

➡ We had forwarded hundreds of msgs of ‘Maggi’… IT’S TURN TO SALUTE INDIAN ARMY…

✌ Let’s forward to buck up our brave soldiers and say them WE ALL ARE WITH YOU FROM DEPTH OF HEART…💐💐💐👍👍👍

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