Posted in रामायण - Ramayan

एक उपयोगी पंचांग अयोध्‍या से


एक उपयोगी पंचांग अयोध्‍या से

अयोध्‍या शोध संस्‍थान (तुलसी स्‍मारक भवन, अयोध्‍या फैजाबाद) ने इस साल एक बहुत सुंदर पंचांग का प्रकाशन किया है। मेरे लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जिस दिन मिला, उसी दिन यह जानने को मिला कि अयोध्‍या एक नाम नहीं, परंपरा है। राम की अयोध्‍या, रामजी से ही जाने। अयोध्‍या के राम मानव के हृदय में बसते हैं, इसलिए पूरी दुनिया में लोगों ने सड्कों, दुकानों, अपने बच्‍चों, यहां तक की स्‍थानों के नाम भी इन्‍हीं स्‍मृतियों को स्‍थायी करने लिए रख लिए।
यह पंचांग इसलिए भी उपयोगी है कि इसमें दिवस के साथ ही अंग्रेजी वारों नाम, तिथि और वह उस दिन कब तक है, नक्षत्र क्‍या है तथा वह कितने समय तक है, सूर्योदय व सूर्यास्‍त, चंद्रमा की राशि कौनसी है, प्रवेश समय और किस दिन किस संस्‍कार के लिए मुहूर्त है…। विक्रमीय संवत्‍सर के साथ ही शक संवत्‍सर का भी इसमें उपयोग है। सचमुच बहुत सुनियोजित रूप से इसको परिकल्पित कर साकार किया गया है। सारे ही पन्‍ने रंगीन, देखते ही मन मोहने वाले। मैं आदरणीय योगेन्‍द्र प्रताप सिंहजी का आभार मानता हूं कि इस उपहार के रूप में रोजाना याद रहने वाली भेंट से मुझे धनाढ़य किया है। सिंह साहब यों भी मेरे लिखे के प्रशंसक है, मार्गदर्शक और प्रोत्‍साहनदाता है। उनकी सदाशयता, उदारता का सानी नहीं। पूर्व में भी साक्षी के दो अंक भेजकर अपने मिशन में सहभागी होने का न्‍यौता दिया है। उनको प्रणाम करता हुआ मैं आज की तिथि को देख रहा हूं जबकि विष्‍णु का नक्षत्र श्रवण है और कुंभ का चंद्रमा होने से उपनयन के लिए उचित अवसर है…। जय जय।

Shri Krishan Jugnu's photo.
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कौन चलाता है भारत का मीडिया ?


🚩🇮🇳🚩जागो हिंदुस्तानी🚩🇮🇳🚩

कौन चलाता है भारत का मीडिया ?
🚩प्राचीन विषयों के प्रमुख जानकार और प्रसिध्द विद्वान M.S.राजाराम ने अपनी खोज के आधार पर स्पष्ट किया है कि भारत का तथाकथित मीडिया बड़े पैमाने पर विदेशी शक्तियों द्वारा संचालित है ।

🚩सनातन धर्म – हिंदूत्व को बदनाम करने के लिए करोडो रुपये चैनल द्वारा फुके जा रहे है । हिन्दू धर्म के संतो और साधुओ को निशाना बनाकर हिन्दू धर्म को बदनाम करने की घहरी साजिस चल रही है ।

🚩इस संबंध में उन्होंने एक विस्तृत सूची तैयार की है ।
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एन.डी.टीवी. : इसे स्पेन स्थित गॉस्पेल्स ऑफ चैरिटी चर्च से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है । पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इस चैनल को पाकिस्तान में प्रसारित होने की छूट दिया था, जिसके परिणामस्वरूप इस चैनल ने पाकिस्तान के प्रति नरम रवैया अपना रखा है । इसीके साथ एन.डी.टीवी. के स्वामी प्रणय राय कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात के रिश्तेदार भी हैं ।

🚩1सी.एन.एन.-आई.बी.एन. : इसे नाउदर्न बैपटिस्ट चर्च शत-प्रतिशत आर्थिक
सहायता प्रदान करता है और समस्त विश्व में इसकी शाखाएँ हैं तथा इसका
IBN7-News-Channel-Logo मुख्यालय अमेरिका में है। यह चर्चप्रति वर्ष अपने चैनल के विस्तार के लिए 800 मिलियन डॉलर खर्च करता है । भारत में इसके
प्रमुख राजदीप सरदेसाई हैं ।

टाइम्स ग्रुप : द टाइम्स ऑफ इण्डिया, मिड डे, नवभारत टाइम्स, स्टार डस्ट, फेमिना, विजय टाइम्स, विजय कर्नाटक, टाइम्स नाउ इस ग्रुप के प्रमुख पत्र-पत्रिकाएँ या चैनल हैं । इस ग्रुप का स्वामित्व बेनेट कोलमैन एण्ड कम्पनी लिमिटेड के पास है । इस ग्रुप को 80 प्रतिशत आर्थिक सहायता वर्ल्ड क्रिश्चयन काउंसिल द्वारा प्राप्त होती है और शेष 20 प्रतिशत एक अंग्रेज तथा एक इतालवी व्यक्ति द्वारा दी जाती है । इतालवी राबर्टियो मिण्डो श्रीमती सोनिया गाँधी का करीबी रिश्तेदार है ।

hindustan times हिन्दुस्तान टाइम्सः मूलरूप में बिरला ग्रुप के स्वामित्व में था परंतु अब यह टाइम्स ग्रुप के साथ सहयोग में चल रहा है |

🚩ABPन्यूज़(Star News) :एक आस्ट्रेलियाई इसका संचालन करता है, जिसे मेलबोर्न स्थित सेन्ट पीटर्स पोन्टीफिकल चर्च द्वारा सहायता प्राप्त होती है ।
द हिन्दूः 125 वर्ष पूर्व आरम्भ हुआ यह समाचार पत्र कुछ दिन पूर्व स्विट्जरलैण्ड में बर्न की जोशुआ सोसायटी द्वारा अपने हाथ में ले लिया गया है ।
द इण्डियन एक्सप्रेसः यह द इण्डियन एक्सप्रेस और द न्यू इण्डियन एक्सप्रेस नामक दो समूहों में विभाजित है । द न्यू इण्डियन एक्सप्रेस दक्षिण का संस्करण है। द इण्डियन एक्सप्रेस में एक्ट्स मिनिस्ट्रीज (चर्च का भाग) का काफी बड़ा अंश है ।
द एशियन एज और द डेक्कन क्रोनिकलः इसका नियंत्रण साउदी अरब की एक कम्पनी के हाथ में है और इसके प्रधान सम्पादक एम.जे. अकबर हैं।

Communist_Party_of_India द स्टेट्समैन : इसका नियंत्रण कम्यूनिस्ट पार्टी के हाथ में है ।
मातृभूमिः मुसलिम लीग और कम्यूनिस्ट नेताओं ने इसमें भारी निवेश कर रखा है ।

कैराली टीवी. : इसका नियंत्रण मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के हाथ में है ।

🚩भारत में 400 से अधिक न्यूज़ चैनल है जिनमें 80% पैसा विदेशी ईसाई मिशनरी
संस्थाओं से आता है इसलिए इनसे भारत हितैषी कार्यो की आशा नहीं की जा सकती।

🚩मिड़िया किस प्रकार ड़ालती है आपके मन- मस्तिष्क पर प्रभाव:-
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💻http://www.youtube.com/watch?v=ewpQpKuUeZY

मिड़िया के द्वारा देश के महत्वपुर्ण मुद्दो को छोड़कर केवल संतो को कठघरे में खड़ा करता है जिसने देश के हर व्यक्ति के मन में एक सवाल खड़ा किया है ।
मीड़िया के इस अतिरेक पर कई मीड़िया चैनल पर बहस हुई –
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💻http://m.youtube.com/watch?v=HU5IkEoc-bM

🚩🇮🇳🚩जागो हिंदुस्तानी🚩🇮🇳🚩

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

“Akhbarat”


“Akhbarat”

These were reports from different provinces compiled in the reign of Aurangzeb.

Excerpts: Muhiyu’d-Din Muhammad Aurangzeb ‘Alamgir Padshah Ghazi (1658-1707)

Mathura (Uttar Pradesh)

” ……… The emporer learning that in the temple of Keshav Rai at Mathura there was a stone railing presented by Dara Shikoh, remarked, ‘In the Muslim faith it is a sin even to look at a temple, and this Dara Shikoh had restored a railing in a temple. This fact is not creditable to the Muhammadans. REMOVE THE RAILING.’ By his order Abdun Nabi Khan (the faujdar of Mathura) REMOVED IT. …….”

Ujjain (Madhya Pradesh)

” ……. News came from Malwa that Wazir Khan had sent Gada Beg, a slave, with 400 troopers, TO DESTROY ALL TEMPLES AROUND UJJAIN. ….. A Rawat of the place resisted and slew Gada Beg with 121 of his men. ……”

Aurangabad (Maharashtra)

“…… The Emperor learnt from a secret news writer of Delhi that in Jaisinghpura Bairagis used to worship idols, and that the Censor on hearing of it had gone there, arrested Sri Krishna Bairagis and taken him with 15 idols away to his house; then the Rajputs had assembled, flocked to the Censor’s house, wounded three footmen of the Censor and tried to seize the Censor himself; so that the latter set the Bairagis free and sent the copper idols to the local subahdar …….”

Pandharpur (Maharashtra)

“….. The Emperor, summoning Muhammad Khalil and Khidmat Rai, the darogha of hatchet-men …. ORDERED THEM TO DEMOLISH THE TEMPLE OF PANDHARPUR, and to take the butchers of the camp there AND SLAUGHTER COWS IN THE TEMPLE ….. It was done. ….”

On Way to the Deccan

” … When the war with the Rajputs was over, Aurangzeb decided to leave for the Deccan. His march seems to have been marked with A DESTRUCTION TO MANY TEMPLES on the way. On May 21, 1681, the superintendent of the labourers WAS ORDERED TO DESTROY ALL THE TEMPLES on the route. …..”

Lakheri ( ??? – means the place is not traceable today )

” ……. On 27 Sept., 1681, the emperor issued orders FOR THE DESTRUCTION OF THE TEMPLES at Lakheri. ……”

Rasulpur ( ??? )

“…. About this time, April 14, 1692, orders were issued to the provincial governor and the district faujdar TO DEMOLISH THE TEMPLES at Rasulpur. …..”

Sheogaon ( ??? )

” …… Sankar, a messenger, was sent TO DEMOLISH A TEMPLE near Sheogaon

Ajmer (Rajasthan)

“…. Bijai Singh and several other Hindus were reported to be carrying on public worship of idols in a temple in the neighborhood of Ajmer. On 23 June, 1694, THE GOVERNER OF AJMER WAS ORDERED TO DESTROY THE TEMPLE and stop the public adoration of idol worship there. ….”

Wakenkhera (?)

” …. The TEMPLE OF WAKENKHERA IN THE FORT WAS DEMOLISHED ON 2 MARCH, 1705. ….”

Bhagwant Garh (Rajasthan)

“…. The newswriter of Ranthambore REPORTED THE DESTRUCTION OF A TEMPLE IN PARGANAH BHAGWANT GARH. Gaj Singh Gor had repaired the temple and made some additions thereto. ….”

Malpura (Rajasthan)

” …. Royal orders FOR THE DESTRUCTION OF TEMPLES IN MALPURA TODA were received and the officers were assigned for this work. ….”

Hinduism (The forgotten facts)'s photo.
Posted in हिन्दू पतन

मनु स्मृति


अंधविश्वास की कैद रिटर्न पेज की पोल खोल's photo.

👉👎 “मक्कार अंबेडकर की मक्कारी”👎👈
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👉दलितों का नेता बनने के चक्कर में मक्कार अंबेडकर की मक्कारी देखो इसका सरनेम सकपाल था लेकिन आज तक ब्राह्मण गुरू का सरनेम अंबेडकर लगा के रखता था जो आज तक चल रहा है।👈

👉अम्बेडकर द्वारा मनु स्मृति के श्लोको के अशुद्ध अर्थ करके उनसे विरोधी निष्कर्ष निकालना (अम्बेडकर का छद्म)👈
👎“मक्कार अम्बेडकर “👎ने अपने ब्राह्मण वाद से घ्रणा के चलते मनुस्मृति को निशाना बनाया और इतना ही नही अपनी कटुता के कारण मनुस्मृति के श्लोको का गलत अर्थ भी किया …अब चाहे अंग्रेजी भाष्य के कारण ऐसा हुआ हो या अनजाने में लेकिन” मक्कार अम्बेडकर “का 🚩📑वैदिक धर्म 📑🚩के प्रति नफरत का भाव अवश्य नज़र आता है कि उसने अपने ही दिए तथ्यों की जांच करने की जिम्मेदारी न समझी।👎👎👈

👉यहाँ आप स्वयं देखे अम्बेडकर ने किस तरह गलत अर्थ प्रस्तुत कर गलत निष्कर्ष निकाले –👈

👉(१) अशुद्ध अर्थ करके मनु के काल में भ्रान्ति पैदा करना और मनु को बोद्ध विरोधी सिद्ध करना –
(क) पाखण्डिनो विकर्मस्थान वैडालव्रतिकान् शठान् |
हैतुकान् वकवृत्तीश्र्च वाङ्मात्रेणापि नार्चयेत् ||(४.३०)

👉👎👎👎“मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ – ” वह (गृहस्थ) वचन से भी विधर्मी, तार्किक (जो वेद के विरुद्ध तर्क करे ) को सम्मान न दे|”
” मनुस्मृति में बोधो और बुद्ध धम्म के विरुद्ध में स्पष्ट व्यवस्था दी गयी है |”
(अम्बेडकर वा. ,ब्राह्मणवाद की विजय पृष्ठ. १५३)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – पाखंडियो, विरुद्ध कर्म करने वालो अर्थात अपराधियों ,बिल्ली के सामान छली कपटी जानो ,धूर्ति ,कुतर्कियो,बगुलाभक्तो को अपने घर आने पर वाणी से भी सत्कार न करे |👍👍👍👍👈

👉समीक्षा- इस श्लोक में आचारहीन लोगो की गणना है उनका वाणी से भी अतिथि सत्कार न करने का निर्देश है |
यहा विकर्मी अर्थात विरुद्ध कर्म करने वालो का बलात विधर्मी अर्थ कल्पित करके फिर उसका अर्थ बोद्ध कर लिया |विकर्मी का विधर्मी अर्थ किसी भी प्रकार नही बनता है | ऐसा करके डा . अम्बेडकर मनु को बुद्ध विरोधी कल्पना खडी करना चाहते है जो की बिलकुल ही गलत है |👈

👉(ख) या वेदबाह्या: स्मृतय: याश्च काश्च कुदृष्टय: |
सर्वास्ता निष्फला: प्रेत्य तमोनिष्ठा हि ता: स्मृता:|| (१२.९५)👈

👉👎👎”मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ – जो वेद पर आधारित नही है, मृत्यु के बाद कोई फल नही देती, क्यूंकि उनके बारे में यह घोषित है कि वे अन्धकार पर आधारित है| ” मनु के शब्द में विधर्मी बोद्ध धर्मावलम्बी है| ” (वही ,पृष्ठ१५८)👎👎👈

👉👍👍शुद्ध अर्थ -🚩📑 ‘ वेदोक्त’ सिद्धांत के विरुद्ध जो📑 ग्रन्थ है ,और जो कुसिधान्त है, वे सब श्रेष्ट फल से रहित है| वे परलोक और इस लोक में अज्ञानान्ध्कार एवं दुःख में फसाने वाले है |

👉समीक्षा- इस श्लोक में किसी भी शब्द से यह भासित नही होता है कि ये बुद्ध के विरोध में है| मनु के समय अनार्य ,वेद विरोधी असुर आदि लोग थे ,जिनकी विचारधारा वेदों से विपरीत थी| उनको छोड़ इसे बुद्ध से जोड़ना लेखक की मुर्खता ओर पूर्वाग्रह दर्शाता है |👈

👉(ग) कितवान् कुशीलवान् क्रूरान् पाखण्डस्थांश्च मानवान|
विकर्मस्थान् शौण्डिकाँश्च क्षिप्रं निर्वासयेत् पुरात् || (९.२२५)👈

👉👎”मक्कार अम्बेडकर” का अर्थ – ” जो मनुष्य विधर्म का पालन करते है …….राजा को चाहिय कि वह उन्हें अपने साम्राज्य से निष्कासित कर दे | “(वही ,खंड ७, ब्राह्मणवाद की विजय, पृष्ठ. १५२ )👎👈

👉👍👍शुद्ध अर्थ – ‘ जुआरियो, अश्लील नाच गाने करने वालो, अत्याचारियों, पाखंडियो, विरुद्ध या बुरे कर्म करने वालो ,शराब बेचने वालो को राजा तुरंत राज्य से निकाल दे |👈👍👍

👉समीक्षा – संस्कृत पढने वाला छोटा बच्चा भी जानता है कि कर्म, सुकर्म ,विकर्म ,दुष्कर्म इन शब्दों में कर्म ‘क्रिया ‘ या आचरण का अर्थ देते है | यहा विकर्म का अर्थ ऊपर बताया गया है | लेकिन बलात विधर्मी और बुद्ध विरोधी अर्थ करना केवल मुर्खता प्राय है |👈

👉(२) अशुद्ध अर्थ कर मनु को ब्राह्मणवादी कह कर बदनाम करना –
👉(क) सेनापत्यम् च राज्यं च दंडेंनतृत्वमेव च|
सर्वलोकाघिपत्यम च वेदशास्त्रविदर्हति||(१२.१००)👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ – राज्य में सेना पति का पद, शासन के अध्यक्ष का पद, प्रत्येक के ऊपर शासन करने का अधिकार ब्राह्मण के योग्य है|’ (वही पृष्ठ १४८)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ- ‘ सेनापति का कार्य , राज्यप्रशासन का कार्य, दंड और न्याय करने का कार्य ,चक्रवती सम्राट होने, इन कार्यो को करने की योग्यता वेदों का विद्वान् रखता है अर्थात वाही इसके योग्य है |’👍👍👍👈

👉समीक्षा – पाठक यहाँ देखे कि मनु ने कही भी ब्राह्मण पद का प्रयोग नही किया है| वेद शास्त्र के विद्वान क्षत्रिय ओर वेश्य भी होते है| मनु स्वयम राज्य ऋषि थे और वेद ज्ञानी भी (मनु.१.४ ) यहा ब्राह्मण शब्द जबरदस्ती प्रयोग कर मनु को ब्राह्मणवादी कह कर बदनाम करने का प्रयास किया है |👈

👉📑 (ख) कार्षापण भवेद्दण्ड्यो यत्रान्य: प्राकृतो जन:|
तत्र राजा भवेद्दण्ड्य: सहस्त्रमिति धारणा || (८.३३६ )📑👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ – ” जहा निम्न जाति का कोई व्यक्ति एक पण से दंडनीय है , उसी अपराध के लिए राजा एक सहस्त्र पण से दंडनीय है और वह यह जुर्माना ब्राह्मणों को दे या नदी में फैक दे ,यह शास्त्र का नियम है |(वही, हिन्दू समाज के आचार विचार पृष्ठ२५० )👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – जिस अपराध में साधारण मनुष्य को एक कार्षापण का दंड है उसी अपराध में राजा के लिए हज़ार गुना अधिक दंड है | यह दंड का मान्य सिद्धांत है |👍👍👍👈

👉समीक्षा :- इस श्लोक में अम्बेडकर द्वारा किये अर्थ में ब्राह्मण को दे या नदी में फेक दे यह लाइन मूल श्लोक में कही भी नही है ऐसा कल्पित अर्थ मनु को ब्राह्मणवादी और अंधविश्वासी सिद्ध करने के लिए किया है |👈

👉अंबेडकर मक्कारी👈
👉👎👎”मक्कार अम्बेडकर” का अर्थ – जब ब्राह्मणों के धर्माचरण में बलात विघ्न होता हो, तब तब द्विज शस्त्र अस्त्र ग्रहण कर सकते है , तब भी जब द्विज वर्ग पर भयंकर विपति आ जाए |” (वही, हिन्दू समाज के आचार विचार, पृष्ठ २५० )👎👎👈

👉शुद्ध अर्थ:- ‘ जब द्विजातियो (ब्राह्मण,क्षत्रिय ,वैश्य ) धर्म पालन में बाँधा उत्पन्न की जा रही हो और किसी समय या परिस्थति के कारण उनमे विद्रोह उत्पन्न हो गया हो, तो उस समय द्विजो को शस्त्र धारण कर लेना चाहिए|’
समीक्षा – यहाँ भी पूर्वाग्रह से ब्राह्मण शब्द जोड़ दिया है जो श्लोक में कही भी नही है |👈

👉📑(३) अशुद्ध अर्थ द्वारा शुद्र के वर्ण परिवर्तन सिद्धांत को झूटलाना |
(क) शुचिरुत्कृष्टशुश्रूषुः मृदुवागानहंकृत: |
ब्राह्मणाद्याश्रयो नित्यमुत्कृष्टां जातिमश्रुते|| (९.३३५)📑👈

👉👎”मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ – ” प्रत्येक शुद्र जो शुचि पूर्ण है, जो अपनों से उत्कृष्ट का सेवक है, मृदु भाषी है, अंहकार रहित है सदा ब्राह्मणों के आश्रित रहता है (अगले जन्म में ) उच्चतर जाति प्राप्त करता है |”(वही ,खंड ९, अराजकता कैसे जायज है ,पृष्ठ ११७)👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – ‘ जो शुद्र तन ,मन से शुद्ध पवित्र है ,अपने से उत्क्रष्ट की संगती में रहता है, मधुरभाषी है , अहंकार रहित है , और जो ब्राह्मणाआदि तीनो वर्णों की सेवा कार्य में लगा रहता है ,वह उच्च वर्ण को प्राप्त कर लेता है|👍👍👍👈

👉समीक्षा – इसमें मनु का अभिप्राय कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का है ,जिसमे शुद्र उच्च वर्ण प्राप्त करने का उलेख है , लेकिन अम्बेडकर ने यहाँ दो अनर्थ किये – ” श्लोक में इसी जन्म में उच्च वर्ण प्राप्ति का उलेख है अगले जन्म का उलेख नही है| दूसरा श्लोक में ब्राह्मण के साथ अन्य तीन वर्ण भी लिखे है लेकिन उन्होंने केवल ब्राह्मण लेकर इसे भी ब्राह्मणवाद में घसीटने का गलत प्रयास किया है |इतना उत्तम सिधांत उन्हें सुहाया नही ये महान आश्चर्य है |👈

👉(४) अशुद्ध अर्थ करके जातिव्यवस्था का भ्रम पैदा करना 👈

👉📑(क) ब्राह्मण: क्षत्रीयो वैश्य: त्रयो वर्णों द्विजातय:|
चतुर्थ एक जातिस्तु शुद्र: नास्ति तु पंचम:||👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेडकर “का अर्थ- ” इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि मनु चातुर्यवर्ण का विस्तार नही चाहता था और इन समुदाय को मिला कर पंचम वर्ण व्यवस्था के पक्ष में नही था| जो चारो वर्णों से बाहर थे|” (वही खंड ९, ‘ हिन्दू और जातिप्रथा में उसका अटूट विश्वास,’ पृष्ठ१५७-१५८)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – विद्या रूपी दूसरा जन्म होने से ब्राह्मण ,वैश्य ,क्षत्रिय ये तीनो द्विज है, विद्यारुपी दूसरा जन्म ना होने के कारण एक मात्र जन्म वाला चौथा वर्ण शुद्र है| पांचवा कोई वर्ण नही है|👍👍👍👈

👉समीक्षा – कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था ,शुद्र को आर्य सिद्ध करने वाला यह सिद्धांत भी अम्बेडकर को पसंद नही आया | दुराग्रह और कुतर्क द्वारा उन्होंने इसके अर्थ के अनर्थ का पूरा प्रयास किया |👈

👉📑(५) अशुद्ध अर्थ करके मनु को स्त्री विरोधी कहना |
(क) न वै कन्या न युवतिर्नाल्पविध्यो न बालिश:|
होता स्यादग्निहोतरस्य नार्तो नासंस्कृतस्तथा||( ११.३६ )📑👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेडकर” का अर्थ – ” स्त्री वेदविहित अग्निहोत्र नही करेगी|” (वही, नारी और प्रतिक्रान्ति, पृष्ठ ३३३)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – ‘ कन्या ,युवती, अल्पशिक्षित, मुर्ख, रोगी, और संस्कार में हीन व्यक्ति , ये किसी अग्निहोत्र में होता नामक ऋत्विक बनने के अधिकारी नही है|👍👍👍👈

👉समीक्षा – “मक्कार अम्बेडकर “ने इस श्लोक का इतना अनर्थ किया की उनके द्वारा किया अर्थ मूल श्लोक में कही भव ही नही है यहा केवल होता बनाने का निषद्ध है न कि अग्निहोत्र करने का |👈

👉📑(ख) सदा प्रहृष्टया भाव्यं गृहकार्येषु दक्षया |
सुसंस्कृतोपस्करया व्यये चामुक्तह्स्त्या|| (५.१५०)📑👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेकर” का अर्थ – ” उसे सर्वदा प्रसन्न ,गृह कार्य में चतुर , घर में बर्तनों को स्वच्छ रखने में सावधान तथा खर्च करने में मितव्ययी होना चाहिय |”(वही ,पृष्ठ २०५)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ -‘ पत्नी को सदा प्रसन्न रहना चाहिय ,गृहकार्यो में चतुर ,घर तथा घरेलू सामान को स्वच्छ सुंदर रखने वाली और मित्यव्यी होना चाहिय |👍👍👍👈

👉समीक्षा – ” सुसंस्कृत – उपस्करया ” का बर्तनों को स्वच्छ रखने वाली” अर्थ अशुद्ध है | ‘उपस्कर’ का अर्थ केवल बर्तन नही बल्कि सम्पूर्ण घर और घरेलू सामान जो पत्नीं के निरीक्षण में हुआ करता है |👈

👉📑(६) अशुद्ध अर्थो से विवाह -विधियों को विकृत करना
(क) (ख) (ग) आच्छद्य चार्चयित्वा च श्रुतिशीलवते स्वयम्|
आहूय दान कन्यायाः ब्राह्मो धर्मः प्रकीर्तित:||(३.२७)
यज्ञे तु वितते सम्यगृत्विजे कर्म कुर्वते|
अलकृत्य सुतादान दैव धर्म प्रचक्षते||(३.२८)
एकम गोमिथुंनं द्वे वा वराददाय धर्मत:|
कन्याप्रदानं विधिविदार्षो धर्म: स उच्यते||(३.२९)📑👈

👉👎👎👎”मक्कार अम्बेडकर” का अर्थ – बाह्म विवाह के अनुसार किसी वेदज्ञाता को वस्त्रालंकृत पुत्री उपहार में दी जाती थी| देव विवाह था जब कोई पिता अपने घर यज्ञ करने वाले पुरोहित को दक्षिणास्वरूप अपनी पुत्री दान कर देता था | आर्ष विवाह के अनुसार वर, वधु के पिता को उसका मूल्य चूका कर प्राप्त करता था|”( वही, खंड ८, उन्नीसवी पहेली पृष्ठ २३१)👎👎👎👈

👉👍👍👍शुद्ध अर्थ – ‘वेदज्ञाता और सदाचारी विद्वान् कन्या द्वारा स्वयम पसंद करने के बाद उसको घर बुलाकर वस्त्र और अलंकृत कन्या को विवाहविधिपूर्वक देना ‘ बाह्य विवाह’ कहलाता है ||’
‘ आयोजित विस्तृत यज्ञ में ऋत्विज कर्म करने वाले विद्वान को अलंकृत पुत्री का विवाहविधिपूर्वक कन्यादान करना’ दैव विवाह ‘ कहाता है ||”
‘ एक या दो जोड़ा गाय धर्मानुसार वर पक्ष से लेकर विवाहविधिपूर्वक कन्यादान करना ‘आर्ष विवाह ‘ है |’ आगे ३.५३ में गाय का जोड़ा लेना वर्जित है मनु के अनुसार👍👍👍👈

👉समीक्षा – विवाह वैदिक व्यवस्था में एक संस्कार है | मनु ने ५.१५२ में विवाह में यज्ञीयविधि का विधान किया है | संस्कार की पूर्णविधि करके कन्या को पत्नी रूप में ससम्मान प्रदान किया जाता है | इन श्लोको में इन्ही विवाह पद्धतियों का निर्देश है | अम्बेडकर ने इन सब विधियों को निकाल कर कन्या को उपहार , दक्षिणा , मूल्य में देने का अशुद्ध अर्थ करके सम्मानित नारी से एक वस्तु मात्र बना दिया | श्लोको में यह अर्थ किसी भी दृष्टिकोण से नही बनता है | वर वधु का मूल्य एक जोड़ा गाय बता कर अम्बेडकर ने दुर्भावना बताई है जबकि मूल अर्थ में गाय का जोड़ा प्रेम पूर्वक देने का उलेख है क्यूंकि वैदिक संस्कृति में गाय का जोड़ा श्रद्धा पूर्वक देने का प्रतीक है |

👉अम्बेडकर द्वारा अपनी लिखी 📚पुस्तको में प्रयुक्त🚩 मनुस्मृति 🚩के श्लोको की एक सारणी जिसके अनुसार अम्बेडकर ने कितने गलत अर्थ प्रयुक्त किये और कितने प्रक्षिप्त श्लोको का उपयोग किया और कितने सही श्लोक लिए का विवरण –
वर्णन के आधार पर स्पष्ट है कि अम्बेडकर ने मनु स्मृति के कई श्लोको के गलत अर्थ प्रस्तुत कर मन मानी कल्पनाय और आरोप गढ़े है | ऐसे में अम्बेडकर निष्पक्ष लेखक न हो कर कुंठित व्यक्ति ही माने जायेंगे जिन्होंने खुद भी ये माना है की उनमे कुंठित भावना थी | जो कि इसी ब्लॉग पर बाबा साहब की बेवाक काबिले तारीफ़ नाम से है | इन सब आधारों पर अम्बेडकर के लेख और समीक्षाय अप्रमाणिक ही कही जायेंगी |
संधर्भित पुस्तके -📑 (१) मनु बनाम अम्बेडकर-डा. सुरेन्द्र कुमार
📑(२) मनुस्मृति और अम्बेडकर – डा.के वी पालीवाल

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भारत-बांग्लादेश का 41 वर्ष पुराना सीमा विवाद मोदी जी ने अपनी सूझ -बुझ से सुलझाया


कांग्रेस जहाँ फ़सादी जड़ है वहीं केजरीवाल रायता बेल है

Sanjay Dwivedy's photo.

भारत-बांग्लादेश का 41 वर्ष पुराना सीमा विवाद मोदी जी ने अपनी सूझ -बुझ से सुलझाया

याद कीजिये इसी तरह अटल जी ने भी तमिलनाडु और कर्नाटक का 35 वर्ष पुराना पानी विवाद सुलझाया था।

कॉंग्रेस विवाद को जन्म देती है और भाजपा विवाद को सुलझा देती है। जो काम कॉंग्रेस नहीं कर सकती वो भाजपा सरकार करती है।

भारतीय संसद ने भूमि सीमा समझौते को मंजूरी देते हुए 41 सालों से पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ चले आ रहे बॉर्डर के विवाद को सुलझाने की ओर कदम बढ़ाया.

इस विधेयक के पारित होने से शेष क्षेत्रों में बाड़ लगाई जा सकेगी और घुसपैठ की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा.

भारत को बांग्लादेश से करीब 510 एकड़ भूमि वापस मिलेगी

सीमाओं के पुनर्निर्धारित होने से अवैध आप्रवासियों की समस्या पर बेहतर नियंत्रण हो सकेगा.

अब बांग्लादेश के साथ भारत का जो सबसे महत्वपूर्ण अनसुलझा मसला है वह केवल तीस्ता जैसी नदियों के पानी के बंटवारे का है.

दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा का विवाद भी अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल के फैसले से बीते साल ही सुलझा लिया गया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार से मांग की थी कि वह बांग्लादेश से आने वाले करीब 60 से 70 हजार लोगों को बसाने के लिए आर्थिक पैकेज दें.

विदेश मंत्री स्वराज ने बताया कि अलग अलग अनुमान बता रहे हैं कि करीब 3,500 से 35,000 लोगों को पुनर्वास में मदद की जरूरत होगी, जिसके लिए सरकार ने पश्चिम बंगाल को 3,008 करोड़ रुपये का पैकेज देने का फैसला किया है. इस राशि का इस्तेमाल बांग्लादेश के लोगों को पश्चिम बंगाल में ही बसाने के लिए किया जाएगा. इन इन्क्लेवों में रहने वालों को नागरिकता चुनने का भी अधिकार मिलेगा.

वर्तमान में भारत में 111 जबकि बांग्लादेश में ऐसे 51 इन्क्लेव हैं. यहां रहने वाले लोगों को फिलहाल किसी भी देश के नागरिक होने का अधिकार प्राप्त नहीं है. यह इन्क्लेव किसी द्वीप की तरह ही कुछ ऐसे बसे हैं, कि एक देश के नागरिकों की आबादी के हिस्से चारों ओर से दूसरे देश की भूमि और उसके निवासियों से घिरे हुए हैं. सदियों पहले राजाओं के जमाने में हुए जमीन के बंटवारे के कारण ऐसी स्थिति बनी थी और वही व्यवस्था 1947 में ब्रिटिश शासन के खत्म होने और 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग होने के दौरान भी बरकरार रह गई. संविधान के संसोधन के बाद दोनों देश अपने इन्क्लेवों की अदला बदली कर सकेंगे. भारत में यह क्षेत्र पूर्वोत्तर के असम, त्रिपुरा, मेघालय और पूर्वी बंगाल के हिस्सों में स्थित हैं. किसी एक देश की नागरिकता चुनने के बाद आगे चलकर इन सभी इनक्लेवों का अस्तित्व खत्म हो पाएगा.

http://abpnews.abplive.in/…/Loksabha-passes-bill-on-exchang…

Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

How many of you know DR.TESSY THOMAS ?


Inspiring Young India's photo.

How many of you know DR.TESSY THOMAS ?

She is the Project Director for many Missile project in Indian Defence Research and Development Organisation.
She was the Master mind and was responsible for success of 3,000 km range Agni-III missile project, Mission Agni IV project, 5,000 km range Agni-V in 2009.The missiles were successfully tested on 19 April 2012.

“We are all proud of our country. Agni-C is one of our greatest achievements”

Agni-V missile is most powerful and Dangerous weapon that will make the world fear India.
Once fired, It cannot be stopped,It travels faster than a Bullet and can carry 1000 kg of nuclear weapon and It has 5000 km Range.
It can be configured to launch small satellite and
can be used later to shoot down the enemy satellites in orbits.
It can be launched only on direct order of the Prime minister.

Because of her India now features among the super powers
We salute her outstanding contribution for making India self-reliant in the field of missile technology.

Why do we always fail to respect true Heros ?
I think She demands nothing from us but let us give her some respect and a little bit recognition. So Please LIKE & SHARE with Inspiring Young India

Posted in PM Narendra Modi

Here is the Not in News for the last week from 1st June to 7th June.


Not in News by Satyameva Jayate

Satyameva Jayate's photo.

Here is the Not in News for the last week from 1st June to 7th June.

The biggest event of the week was the deal between India and Bangladesh. It is a historic event, something that no country has ever been able to do on such a huge scale (peacefully). A big win for both countries.

Do give your feedback on this week’s Not in News.

1) India and Bangladesh settled their 4,096-km long prickly land boundary dispute on Saturday. As Prime Minister Narendra Modi and Sheikh Hasina exchanged instruments of ratification of the land boundary agreement, far away in the enclaves on the India-Bangladesh border, the door opened for over 50,000 virtually stateless people to finally get a national identity.

Read more: http://timesofindia.indiatimes.com/…/articlesh…/47570745.cms

2) Amid a global black money crackdown including by India, Switzerland has announced a stringent due diligence regime for its banks to ‘reject’ accepting illicit funds from both existing and new customers.
Swiss banks, known for their strict secrecy practices, would also terminate relationships with existing clients who are found to have stashed illegal assets in their accounts.
Long perceived as a safe haven for stashing untaxed assets including by Indians, Switzerland has been making efforts to do away with such banking secrecy practices and has also agreed to be part of a global automatic exchange of tax information framework.

Read more: http://www.newsnation.in/…/81051-swiss-govt-asks-banks-reje…

3) The Narendra Modi government’s sharp focus on employment generation through Make in India and Skill India initiatives appears to have paid off, with India adding more than double the number of jobs between July and December 2014 compared to the corresponding period of the previous year. According to a labour ministry survey released on Wednesday, 2.75 lakh jobs were created in eight key sectors during the six months, an increase of 118 per cent over 1.26 lakh jobs created in the year-ago period.

Read more:
http://economictimes.indiatimes.com/articleshow/47534655.cms

4) The National Skill Development Corporation has begun implementing Rs 1,500-crore Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojna (PMKVY) to provide skills training to 24 lakh people, including youth.
National Skill Development Corporation (NSDC) Managing Director and CEO Dilip Chenoy told this to PTI yesterday on the sidelines of ITM Technovision 2015, an international conference on skill development, cyber security & clean & smart village, organised by ITM group of Institutes here.

Read more at:
http://economictimes.indiatimes.com/articleshow/47541157.cms

5) India and US on Wednesday signed a new strategically important 10-year defence framework agreement setting the stage for co-development and manufacture of defence equipment and technology besides holding joint exercises and greater intelligence sharing.
The agreement, which was decided during the visit of US President Barack Obama to India in January and focuses on issues ranging from maritime security, aircraft carrier to jet engine technology cooperation, was inked by Defence Minister Manohar Parrikar and visiting US Defence Secretary Ashton Carter.

Read more: http://www.abplive.in/…/India-US-strengthen-military-ties-w…

6) With an aim to boost bilateral trade, Bangladesh has offered to establish two Special Economic Zones (SEZ) for Indian companies besides allowing Life Insurance Corporation to start operations in the country.
After Prime Minister Narendra Modi’s talks with his counterpart Sheikh Hasina yesterday, both sides signed a number of pacts to spur economic engagement and enhance connectivity so that North East region could be linked to South Asian countries.

Read more: http://www.ndtv.com/…/bangladesh-offers-2-special-economic-…

7) In a move to boost our India’s water infrastructure, Prime Minister Narendra Modi is putting his plan of developing 1,000 islands and 300 lighthouses across India, into high gear.
The Indian Government will entreat the Parliament for a positive go-ahead on a bill that will convert 101 rivers into waterways in order to develop these “tourist-friendly” islands and lighthouses.

Read more at:
http://www.indiatimes.com/…/namos-dream-of-1000-islands-and…

8) Railways has rolled out a non-AC coach of Rewari-Sitapur passenger train lit by solar panels installed on its roof as part of its plan to harness the green source of energy in a big way.
Railways is also planning to come out with a solar policy for procuring 1000 MW solar power in the next five years.
Coaches of Shan-e-Punjab Express and Taj Express are also going to be equipped with solar power shortly, a senior Northern Railway official said.

Read more: http://www.firstpost.com/…/indian-railways-launches-solar-p…

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

क्या हजरतबल से पैगंबर मोहम्मद के बाल की चोरी हुई थी?


Aditi Gupta's photo.
Aditi Gupta's photo.
Aditi Gupta's photo.

क्या हजरतबल से पैगंबर मोहम्मद के बाल की चोरी हुई थी?

पचास साल पहले श्रीनगर की हजरतबल दरगाह से मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद का बाल) का चोरी होना और उसकी बरामदगी, दोनों ही आज तक रहस्य हैं.

भारत सरकार के लिए कभी एक मिनट का समय इतना असमंजस भरा साबित नहीं हुआ होगा जितना छह फरवरी, 1964 को हुआ था. उस घटना के बारे में वरिष्ठ पत्रकार इंदर मल्होत्रा लिखते हैं, ‘फिर मिराक शाह (जम्मू-कश्मीर के आध्यात्मिक नेता) आगे निकलकर आए और उन्होंने पवित्र अवशेष तकरीबन एक मिनट तक अपनी आंखों के सामने रखा…. यह साठ सेकंड का सस्पेंस अल्फ्रेड हिचकॉक (सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों के प्रसिद्ध हॉलीवुड निर्देशक) को भी हैरानी में डाल सकता था….. शाह ने अपना सिर हिलाया, फिर धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा कि यही मू–ए-मुकद्दस है. इसके साथ वहां जुटी जनता में खुशी की लहर दौड़ गई. कश्मीर का एक संकट सुलझ गया था.’

जम्मू-कश्मीर में आज भी छोटी से छोटी घटना बड़ा तूफान खड़ा कर सकती है और 1963 में तो श्रीनगर की हजरतबल दरगाह से मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद का बाल) चोरी हुआ था. राजनीतिक संवेदनशीलता को एक किनारे रख दिया जाए तो भी मू-ए-मुकद्दस की चोरी से बड़ा हंगामा मचना ही था. जम्मू कश्मीर में जो कुछ हुआ वह अपेक्षित था लेकिन इसका असर बंगाल और पूर्वी पाकिस्तान ( आज का बांग्लादेश) में भी देखा जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था. पूर्वी पाकिस्तान में तब कई मंदिरों पर हमले हुए और हिंदू समुदाय के कुछ लोग मारे भी गए. ऐसी ही घटनाएं पश्चिम बंगाल में भी हो रही थीं. तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारीलाल नंदा के लोकसभा में दिए एक वक्तव्य के मुताबिक पूर्वी पाकिस्तान में भड़के दंगों में 29 लोग मारे गए थे. अखबारों की खबरो के मुताबिक बंगाल में उस समय करीब 200 लोग मारे गए थे जिनमें दोनों समुदाय के लोग शामिल थे. इसके अलावा 50 हजार से ज्यादा लोग बेघरबार हो गए थे. इतिहासकार रामचंद्र गुहा अपने एक लेख में बताते हैं कि इस घटना से उपजे तनाव के बाद हिंदू शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान से बंगाल आने लगे थे साथ ही यहां से मुसलमानों का पलायन शुरू हो गया था.

जो घटना कश्मीर से लेकर सुदूर बांग्लादेश तक सांप्रदायिक तनाव का कारण बन रही थी वह दिसंबर, 1963 की है. उस महीने की 26 तारीख की सुबह जब श्रीनगर के लोग उठे तो उन्होंने एक उड़ती-उड़ती खबर सुनी. खबर यह थी कि मू-ए-मुकद्दस चोरी हो गया. मू-ए-मुकद्दस यानी इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद की दाढ़ी का बाल. पैगंबर के अवशेष दुनिया में गिनी-चुनी जगहों पर ही हैं और ये इस्लाम मानने वालों के लिए आस्था के सबसे बड़े प्रतीक हैं. दो-तीन घंटों के भीतर ही इस अफवाह के सच होने की पुष्टि हो गई. श्रीनगर पुलिस ने माना कि पैगंबर के पवित्र अवशेष दरगाह से चोरी हो गए हैं. यह खबर कुछ ही घंटों में आग की तरह पूरे राज्य में फैल गई और उसी दिन से श्रीनगर की सड़कों पर हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

जम्मू-कश्मीर के लिए वह वैसे भी काफी उथलपुथल भरा वक्त था. राज्य के पूर्व प्रधानमंत्री या वजीरे आजम शेख अब्दुल्ला जेल में थे. इसके बाद कुछ समय तक नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता बख्शी गुलाम मोहम्मद उनकी जगह सरकार के मुखिया थे. माना जाता है कि नई दिल्ली द्वारा गुलाम मोहम्मद की वजीरे आजम के पद पर नियुक्ति से जनता में नाराजगी थी. नेशनल कॉन्फ्रेंस में कश्मीर की आजादी के समर्थक धड़े ने गुलाम मोहम्मद के खिलाफ एक आंदोलन छेड़ा हुआ था. इन परिस्थितियों में उन्हें अक्टूबर, 1964 में इस्तीफा देना पड़ा. जाते-जाते उन्होंने सुनिश्चित किया कि इस पद पर उनके करीबी शम्सुद्दीन वजीरे आजम बन जाएं. कश्मीर में जनमत समर्थक धड़ा इससे और आक्रोशित हो गया.

मू-ए-मुकद्दस की चोरी इन परिस्थितियों में आग में घी डालने का काम कर रही थी. दो-तीन दिन के भीतर ही राज्य में हालात बेकाबू होने लगे. पाकिस्तानी मीडिया (पूर्वी पाकिस्तान में भी) में इस घटना की काफी आक्रामक रिपोर्टिंग हो रही थी. इधर नई दिल्ली की चिंता थी कि यदि मू-ए-मुकद्दस नहीं खोजा गया तो कहीं पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव न फैल जाए. इस बीच पश्चिम बंगाल से दंगों और आगजनी की खबरें आने लगीं. कश्मीर मामले पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने यह सबसे बड़े संकटों में से था. स्थानीय प्रशासन से मसला हल न होते देख प्रधानमंत्री ने भारतीय गुप्तचर एजेंसी के प्रमुख बीएन मलिक को जांच के लिए श्रीनगर रवाना कर दिया.

देश के बाकी हिस्सों में इस घटना पर सांप्रदायिक तनाव देखा जा रहा था लेकिन जम्मू-कश्मीर में शुरुआत में ऐसा नहीं था. श्रीनगर में जब विरोध प्रदर्शन हुए तो मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू और सिख भी इनमें शामिल थे. केंद्र सरकार के लिए तात्कालिक रूप से बस यही राहत की बात थी. इस समय जम्मू कश्मीर में एक नए संगठन – आवामी एक्शन कमेटी (एएसी) का भी गठन किया गया. इसके नेता 19 साल के मीरवाइज मौलवी फारुक थे जो हुर्रियत कॉन्फरेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुख के पिता थे. एएसी ने अपने गठन के साथ ही पूरे आंदोलन की कमान संभाल ली.

सीबीआई प्रमुख इस मामले की जांच पर पूरी नजर रखे हुए थे लेकिन हर दिन बीतने के साथ ऐसा लग रहा था कि यदि जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो हालात विस्फोटक हो जाएंगे. कश्मीर का माहौल बिगाड़ने में पाकिस्तान कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा था. वहां के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान रेडियो पाकिस्तान पर दोहरा रहे थे कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

अब तक इस घटना को नौ दिन बीत चुके थे. माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ था लेकिन चार जनवरी को अचानक सबकुछ बदल गया. दोपहर में रेडियो कश्मीर पर एक विशेष प्रसारण हुआ. राज्य के प्रधानमंत्री शमसुद्दीन ने आम जनता को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज हमारे लिए ईद है. मैं आपको यह बताते हुए बहुत खुश हूं कि पवित्र अवशेष बरामद कर लिया गया है.’ यह बरामदगी किसी दूसरी जगह से नहीं हुई थी. मू-ए-मुकद्दस दरगाह में जहां से चोरी हुआ वहीं वापस रख दिया गया था. इसके बाद कुछ समय तक लोगों को इससे मतलब नहीं रहा कि पैगंबर का अवशेष वापस कैसे आया. लोगों के लिए उसकी वापसी की खबर ही सबसे बड़ी थी. शहर में तुरंत मिठाई बांटी जाने लगी. राज्य में उस दिन ईद जैसा माहौल बन गया.

लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं था. अब सवाल यह था कि पुलिस जिस मू-ए-मुकद्दस को खोजने का दावा कर रही है वह असली है कि नहीं इसकी जांच कैसे हो? एएसी की मांग थी कि सार्वजनिक रूप से इसकी शिनाख्त की जाए. ऐसा न होने पर उसने राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की धमकी दी. सरकार इस विवाद को अब और आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी. दोनों पक्षों के बीच तकरीबन एक महीने तक गतिरोध जारी रहा.

केंद्र सरकार की तरफ से इस विवाद को निपटाने जिम्मेदारी लालबहादुर शास्त्री को सौंप दी गई. उन्होंने इस मसले पर सभी पक्षों से बातचीत की जिसके बाद सरकार ने एएसी की मांग मान ली. छह फरवरी को जनता के सामने मू-ए-मुकद्दस के आम दीदार का कार्यक्रम आयोजित किया गया. उस दिन दरगाह के सामने सैकड़ों की संख्या में लोग जमा थे. सभी पक्षों की सहमति से जम्मू-कश्मीर के आध्यात्मिक नेता मिराक शाह कशानी को मू-ए-मुकद्दस की शिनाख्त के लिए चुना गया और जैसा हमने इस लेख की शुरुआत में बताया कि किस तरह शिनाख्त के पहले का वह एक मिनट राज्य और केंद्र दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया था.

अब यह तो निश्चित हो गया कि सीबीआई और पुलिस ने असली मू-ए-मुकद्दस ही बरामद किया था. उसे वापस दरगाह में स्थापित भी कर दिया गया. लेकिन कुछ सवाल अभी भी अनुत्तरित थे. मू-ए-मुकद्दस अपनी जगह वापस कैसे आया? यह चोरी किसने की थी और उसका मकसद क्या था?

गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने फरवरी, 1964 में लोकसभा में जो जानकारी दी उसके मुताबिक दरगाह के एक खादिम (दरगाह की देखरेख करने वाला व्यक्ति) ने यह पवित्र अवशेष चोरी किया था. इसमें उसके एक रिश्तेदार ने उसकी मदद की थी. नंदा के मुताबिक एक और व्यक्ति जो इस साजिश में शामिल था, वह पाकिस्तान आता-जाता रहता था. बाद में इन तीनों लोगों पर मुकदमा चलाया गया. नंदा ने यह भी बताया कि जब खादिम दरगाह में वह पवित्र अवशेष दोबारा रखने के बाद भाग रहा था तब उसे हिरासत में लिया गया. यह सरकार का पक्ष था जिसे एएसी ने कभी नहीं माना. इसकी भी एक वाजिब वजह थी. दरअसल यह बात स्पष्ट नहीं की जा रही थी कि चोरी के पीछे इन लोगों का मकसद क्या था.

उस समय लोगों की आम राय थी कि पवित्र अवशेष बख्शी गुलाम मोहम्मद ने गायब करवाया था. यह भी कहा जाता है कि मू-ए-मुकद्दस चोरी नहीं हुआ था बल्कि कुछ समय के लिए दरगाह से बाहर ले जाया गया. इंदर मल्होत्रा द इंडियन एक्सप्रेस में लिखते हैं, ‘लगभग सभी को पता था कि हजरतबल के खादिम को बलि का बकरा बनाया गया है. यह माना जाता है और बाद में इस बात की पुष्टि भी हुई कि पवित्र अवशेष को गायब करवाने के पीछे कोई साजिश नहीं थी बल्कि बख्शी परिवार की एक मरणासन्न महिला इसका दीदार करना चाहती थी और इसीलिए इसे गायब किया गया.’ सरकार और सीबीआई ने कभी बख्शी गुलाम मोहम्मद को इस प्रकरण में शामिल नहीं बताया. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व वजीरे आजम, पंडित जवाहरलाल नेहरू के बेहद करीबी थे इसलिए उनको इस पूरे प्रकरण से बचाया गया.

जानकारों का एक धड़ा यह भी कहता है कि पवित्र अवशेष गायब करवाने में नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक गुट का हाथ था. वह इसके जरिये शमसुद्दीन सरकार और उनके जरिए बख्शी गुलाम मोहम्मद को कमजोर करना चाहता था. बाद में हुआ भी यही. शमसुद्दीन को इस घटना के बाद वजीरे आजम का पद छोड़ना पड़ा.

इस पूरी जांच और उसके नतीजे पर आज तक रहस्य इसलिए भी बना है कि खुद बीएन मलिक ने पवित्र अवशेष की बरामदगी के बारे कुछ नहीं कहा. वे अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, ‘यह एक खुफिया अभियान था…पवित्र अवशेष अपनी जगह पर वापस कैसे आया इस वाकये को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.’ बीएन मलिक की अब मृत्यु हो चुकी है. यदि हम उनकी आत्मकथा की इन पंक्तियों को उनका सबसे विश्वसनीय बयान मानें तो मू-ए-मुकद्दस की चोरी और उसकी बरामदगी के रहस्य से अब शायद ही कभी पर्दा हटे.

सभी मित्रो से निवेदन हैं की इसको शेयर अवशय करे जिससे इस रहस्य को अधिक से अधिक लोग जान सके की….यह कितनी बड़ी साजिस थी…

नोट – हजरत बल में रखे पैगंबर मोहम्मद के बाल की तस्वीरें अमर उजाला से ली गयी हैं लिंक –http://goo.gl/GJW6RQ

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इजरायल आविष्कृत पावर ट्री


इजरायल हिंदी में's photo.

इजरायल आविष्कृत पावर ट्री

इजरायल में फोन को चार्ज करने, पानी को ठंढा करने और वाई-फाई के लिए सोलर पावर ट्री लगे हैं। आम तौर पर पेड़ सूर्य की किरणों को रासायनिक उर्जा में परिवर्तित करता है। एक पेड़ ऐसा भी है, जो सूर्य की किरणों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर उपकरणों को चार्ज करता है, पानी को ठंढा करता है और वाई-फाई के इस्तेमाल में काम आता है। इसके अलावा यह तकनीकि लोगों के लिए कई तरह से लाभप्रद है। इस बेहतरीन आइडिया का श्रेय इजरायली कंपनी सोलोजिक को जाता है। सोलर पावर ट्री पर्यावरण संबंधित जागरूकता बढ़ाने का आधार बना है, जो हरित ऊर्जा उपलब्ध कराता है।

यह ई-ट्री पत्तों की जगह धातुओं की डाली से तैयार किया गया है। इसकी शाखाएं सोलर पैनल को सपोर्ट करने के लिए बाहर की ओर निकली हुई हैं। इसका डिजाइन खुले वृक्ष की तरह है, जो 8-बिट विडियो गेम की तरह नजर आता है। यह सोलर पैनल की मदद से ऊर्जा ग्रहण कर स्मार्टफोन व टैबलेट, फ्री वाई-फाई, पेट्स वाटर ट्रॉफ, मनुष्य के लिए ड्रिंकिंग वाटर फाउंटेन, रात में रोशनी करने के उपकरण और एलसीडी स्क्रीन की यूएसबी को चार्ज करता है।

पहला ई-ट्री इजरायल में जिखरोन याकोव के पास हानादिव गार्डन में लगाया गया था। सोलोजिक कंपनी की योजना सोलर पावर ट्री को चीन और फ्रांस में बेचने की है। बबूल मॉडल के एक ई-ट्री की कीमत करीब 100,000 $ है। सात पैनल वाला एक ई-ट्री 1.4 किलोवॉट तक ऊर्जा पैदा कर सकता है, जो 35 लैपटॉप चलाने के लिए काफी है। इजरायल की निजी पॉवर कंपनी में निवेश करने वाले ऐली बरनिया का कहना है कि बड़ी कीमत इस बात का संकेत है कि ई-ट्री संभवतया छतों पर लगाए जाने वाले पारंपरिक सोलर पैनल की जगह नहीं लेगा। हालांकि, यह दुनिया भर के पार्कों में नजर आ सकता है। सोलोजिक की कल्पना है कि भविष्य में ई-ट्री के साथ टच-स्क्रीन डिस्पले युक्त कैमरों को जोड़ा जाए, जिससे एक सोलर पावर ट्री के नीचे खड़े होकर एक व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में स्थापित दूसरे सोलर पावर ट्री के नीचे खड़े दूसरे व्यक्ति को हैलो कर सके

Posted in संस्कृत साहित्य

जलस्रोतों की परंपरा और व्‍हीर


जलस्रोतों की परंपरा और व्‍हीर

जलस्रोतों के रूप में वापी या बावड़ी अथवा बावली की परंपरा उतनी पुरानी जरूर स्‍वीकारनी चाहिए जबकि आदमी ने यह जान लिया हो कि गहराई पर पानी के लिए उसके स्‍तर तक पहुंचना जरूरी है। यों तो सीढ़ीदार जलस्रोत गुजरात के धोलावीर आदि की खुदाई में मिले हैं, इसी कारण जो लोग शकों के आगमन के साथ वापी के प्रचलन की बात कहते थे और कर्केंदु और शकेंदु शब्‍दों से वापी की पहचान करते थे, उनके सामने इस जलस्रोत के भारतीय अवदान का प्रमाण नवीन खोज ही सही किंतु पुराने काल का है।
महाराष्‍ट्र और कर्णाटक से लगे इलाकों में भी वापियों की सुदीर्घ परंपरा रही है। इसको वहां ‘व्‍हीर’ या ‘व्‍यीर’ कहा जाता है। पिछले दिनों जब मैं सातारा जिले के कराड़ में था, प्रियवर श्री सचिन पुरूषोत्‍तम वहेरे, श्री नरेन उमरीकर, श्री ढुंढीराज पाठक, संध्‍या, सारिका आदि मुझे वहां के एक प्राचीन व्‍हीर के पास लेकर गए। मैं चकित था कि श्‍याम पाषाणों को इतने सुंदर ढंग से संयोजित कर इस वापी को बनाया गया था कि देखते ही चित्‍त चकित‍ और मन मुग्‍ध हो जाए। जलस्‍तर तक पहुंचने के लिए सीढि़यों की चमत्‍कृत करने वाली शृंखला और बीच में माड (जिसका उल्‍लेख अपराजितपृच्‍छा जैसे पूर्वमध्‍यकालीन ग्रंथों में आना शुरू होता है), यही नहीं, उस तक अलग से पहुचने के लिए दीवार के सहारे-सहारे रचे भिट्ट और उसमें द्वारीयता…। मुख्‍य कूप का विधान कुछ अलग ही था। उस पर जलराशि को सहेजने के लिए कभी लकड़ी के पटियों को लगाया जाता था। उनके अवशेष आज तक दिखाई देते हैं। यह वापी कृष्‍णा नदी के पास बनी है और उसी के छने-छने जल से यह भरी-पूरी रहती होगी। यों भी जल का शुद्धीकरण और जल को पीने के योग्‍य बनाए रखने की परंपरा बुवाई वाली खेती से कम नहीं। वापी नाम संस्‍कृत के वपन से हुआ है, तो क्‍या यह जल की खेती नहीं हैं, सोचने योग्‍य है न। जलाेत्‍थान के लिए इस वापी पर कभी रहट रहा होगा और उस रहट या जलोत्‍थान यंत्र के लिए अलग से कूप पर माडा बना गया है।
महाराष्‍ट्र से लगे कर्णाटक तक इस प्रकार के पत्‍थरों के संयोजन से ही जलस्रोतों का निर्माण होता रहा। कुंडों की रचना भी इसी तरह की गई। जलस्‍थापत्‍य की ये रचनाएं निश्चित ही रोचक है। इनको पुष्‍करिणी कहा गया। दीर्घिका भी नाम दिया गया। हौद या हौज नाम भी आए, मगर लोक ने शब्‍दों को अपने कंठकोश पर जीवंत रखा है। मैंने कराड़ में शोधार्थी संध्‍या से कहा था कि क्‍यों न संस्‍कृत में जलस्‍थापत्‍य पर ही शोध कर डालें। हमारी हैंडपंप सुविधा ने इस परंपरा पर परदा डालने का पूरा प्रयास किया है और हमारी परंपराओं की प्रासंगिकता पर लिखा ही जाना चाहिए, जैसा कि कुछ समय पहले Kusum Solanki भारतीय बावडि़यों पर शोध कार्य किया ही था और मुझे अपने ग्रंथ की भूमिका लिखने का अवसर दिया था। फेसबुक मित्र श्री Abdul Aziz Rajput ने आज कुछ ऐसे ही चित्रों का उपहार दिया तो मुझे लगा कि क्‍यों न इस परंपरा की ओर भी झांका जाए। खासकर उस अवधि में जबकि जलदान का पुण्‍य करने की परंपरा भारतीय दान ग्रंथों में सबसे ज्‍यादा लिखी गई है। राजपूतजी ने बिदर तालुका के हुमनाबाद के कुंड का मनोरम चित्र भेजा है। देखियेगा और अाप भी अपने इलाके के जलस्रोतों की जानकारी देकर हमें उपकृत कीजिएगा। जय-जय।

Shri Krishan Jugnu's photo.
Shri Krishan Jugnu's photo.