Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सच्चा सुख –


सच्चा सुख –

एक सम्राट गहरी चिंता में डूबा रहता। कहने को तो वह शासक था पर वह अपने को अशक्त, परतंत्र और पराजित अनुभव करता था। एक दिन वह अपनी चिंताओं से पीछा छुड़ाने के लिए बहुत दूर एक जंगल में निकल पड़ा। उसे वहां बांसुरी के स्वर सुनाई पड़े। एक झरने के पास वृक्षों की छाया तले एक युवा चरवाहा बांसुरी बजा रहा था। उसकी भेड़ें पास में ही विश्राम कर रही थीं। सम्राट ने चरवाहे से कहा,’तुम तो ऐसे आनंदित हो जैसे तुम्हें कोई साम्राज्य ही मिल गया है।’ चरवाहे ने कहा, ‘आप ठीक कहते हैं। मैं सम्राट हूं।’ राजा ने आश्चर्य से पूछा, ‘ऐसा क्या है, जिसके कारण तुम अपने को सम्राट कहते हो?’

चरवाहा बोला,’व्यक्ति संपत्ति और शक्ति के कारण नहीं, स्वतंत्रता के कारण सम्राट होता है। मेरे पास तो कुछ भी नहीं है सिवा स्वयं के। मैं इसे ही अपनी संपदा मानता हूं। सौंदर्य को देखने के लिए मेरे पास आंखें हैं। प्रेम करने के लिए मेरे पास हृदय है। सूर्य जितना प्रकाश मुझे देता है उससे ज्यादा सम्राट को नहीं देता। चंद्रमा जितनी चांदनी मुझ पर बरसाता है उससे ज्यादा सम्राट पर नहीं बरसाता। सुंदर फूल जितने सम्राट के लिए खिलते हैं उतने ही मेरे लिए भी खिलते हैं। सम्राट पेट भर खाता है और तन भर पहनता है। मैं भी वही करता हूं। फिर सम्राट के पास ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है। मेरे पास तो एक सम्राट से ज्यादा ही कुछ है। मैं जब चाहता हूं संगीत का सुख लेता हूं, जब चाहता हूं सो जाता हूं, जबकि एक सम्राट चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता।’ सम्राट हतप्रभ हो चरवाहे को देखता रह गया।

शिक्षा — सब सुविधायें एकत्र करने से सुख नहीं प्राप्त होता है सुख मिलता है संतुष्टि से । जीवन मे आप कितना भी अर्जन कर ले परंतु यदि संतुष्टि नहीं है तो सब व्यर्थ हो जाता है क्योंकि संतुष्टि न होने से आप कभी सुख का अनुभव ही नहीं कर पाएंगे ।

विकास खुराना's photo.

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s