Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

आजाद हिन्द बैंक ” की स्थापना सन १९४३ में हुई थी ।


वन्देमातरम (भारतमाता) 4 hr वन्देमातरम (भारतमाता) 4 hrs · ======================================================== एक लाख रुपये का नोट जारी करने वाले ” आजाद हिन्द बैंक ” की स्थापना सन १९४३ में हुई थी । तव इस बैंक को १० देशों बर्मा , क्रोएशिया , नानकिंग , मंचूको , इटली , थाईलैंड , फिलीपीन्स व आयरलैण्ड के बैंकों ने इसकी करेंसी को मान्यता दी थी । ————————————————————————————————————— इस बैंक ने १० रु. के सिक्के से लेकर , एक लाख रु. तक के नोट जारी किये थे । इसके पूर्व तक ५००० रु. तक के जारी किये गये नोट की जानकारी ही सार्वजनिक थी । पांच हजार का एक नोट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (B.H.U ) के भारत कला-भवन में रखा है। जबकि शनिवार ३०-जून-२०१५ , को एक लाख रुपये के नोट की तस्वीर नेताजी की प्रपौत्री राज्यश्री चौधरी नें ” विशाल भारत संस्थान को उपलब्ध कराई ! यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि ०५-जून से , विशाल भारत संस्थान की तरफ से , नेताजी श्री सुभाष चन्द्र बोस के बारे में खोज को लेकर एक राष्ट्र-व्यापी कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जा रहा है । इसमें समस्त विश्व से ” सुभाषवादियों ” को आमंत्रित किया गया है । इस अभियान के केंन्द्र-बिन्दू बनेंगे , नेताजी के चालक रहे श्री कर्नल निजामुद्दीन जी , जो अपने स्वास्थ्य संबंधी उपचार हेतु , इस समय वाराणसी में ही रह रहे हैं । उनहोंने बताया कि जब नेताजी रंगून के जुबली हाल में भाषण दिया था , तो उन्हें सुनने के लिए एशिया भर से लोग आये थे । उस समय नेताजी को , लोगों नें सोने चाँदी के आभूषणों से भरे २७ बोरियों से उन्हें तोला था , और उन बोरियों को वह स्वयं और कुछ अन्य साथियों ने भी अपने कंधों से ढोकर , आजाद हिन्द फौज के राजकोष में जमा किया था । सुभाषवादियों का यह भी दावा है कि उस समय आजाद हिन्द बैंक में , करीब ७० हजार करोड़ रु. जमा थे । इस बैंक ने बर्मा को दस लाख रुपये ऋण देने का एक प्रस्ताव भी पारित किया था। आरोप यह भी है कि श्री नेताजी की हत्या या गुमनामी के पीछे , इतनी बड़ी धनराशि का मामला होना भी , एक प्रमुख कारण था । जिसे बाद में भारतीय और इंग्लैण्ड के राजनेताओं ने बंदर-बांट कर लिया होगा। विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष श्री राजीव श्रीवास्तव कहते हैं , कि आजाद हिन्द सरकार नें , फौज और बैंक की स्थापना के बाद , श्री नेताजी को जनवरी में हुए एक कार्यक्रम में , उन्हें आजाद-भारत का पहला राष्ट्रपति बनाने की माँग भी की गई थी । ———————————————————————————————— आजाद हिन्द सरकार का अपना रेडियो स्टेशन , अपना अखबार और एक बड़ी फौज भी थी , जो कई देशों में फैली हुई थी । ================================================ वन्देमातरम (भारतमाता)’s photo. Harshad Kanaiyalal Ashodiya Unlike · Comment · Share · 135s · ======================================================== एक लाख रुपये का नोट जारी करने वाले ” आजाद हिन्द बैंक ” की स्थापना सन १९४३ में हुई थी । तव इस बैंक को १० देशों बर्मा , क्रोएशिया , नानकिंग , मंचूको , इटली , थाईलैंड , फिलीपीन्स व आयरलैण्ड के बैंकों ने इसकी करेंसी को मान्यता दी थी । ————————————————————————————————————— इस बैंक ने १० रु. के सिक्के से लेकर , एक लाख रु. तक के नोट जारी किये थे । इसके पूर्व तक ५००० रु. तक के जारी किये गये नोट की जानकारी ही सार्वजनिक थी । पांच हजार का एक नोट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (B.H.U ) के भारत कला-भवन में रखा है। जबकि शनिवार ३०-जून-२०१५ , को एक लाख रुपये के नोट की तस्वीर नेताजी की प्रपौत्री राज्यश्री चौधरी नें ” विशाल भारत संस्थान को उपलब्ध कराई ! यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि ०५-जून से , विशाल भारत संस्थान की तरफ से , नेताजी श्री सुभाष चन्द्र बोस के बारे में खोज को लेकर एक राष्ट्र-व्यापी कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जा रहा है । इसमें समस्त विश्व से ” सुभाषवादियों ” को आमंत्रित किया गया है । इस अभियान के केंन्द्र-बिन्दू बनेंगे , नेताजी के चालक रहे श्री कर्नल निजामुद्दीन जी , जो अपने स्वास्थ्य संबंधी उपचार हेतु , इस समय वाराणसी में ही रह रहे हैं । उनहोंने बताया कि जब नेताजी रंगून के जुबली हाल में भाषण दिया था , तो उन्हें सुनने के लिए एशिया भर से लोग आये थे । उस समय नेताजी को , लोगों नें सोने चाँदी के आभूषणों से भरे २७ बोरियों से उन्हें तोला था , और उन बोरियों को वह स्वयं और कुछ अन्य साथियों ने भी अपने कंधों से ढोकर , आजाद हिन्द फौज के राजकोष में जमा किया था । सुभाषवादियों का यह भी दावा है कि उस समय आजाद हिन्द बैंक में , करीब ७० हजार करोड़ रु. जमा थे । इस बैंक ने बर्मा को दस लाख रुपये ऋण देने का एक प्रस्ताव भी पारित किया था। आरोप यह भी है कि श्री नेताजी की हत्या या गुमनामी के पीछे , इतनी बड़ी धनराशि का मामला होना भी , एक प्रमुख कारण था । जिसे बाद में भारतीय और इंग्लैण्ड के राजनेताओं ने बंदर-बांट कर लिया होगा। विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष श्री राजीव श्रीवास्तव कहते हैं , कि आजाद हिन्द सरकार नें , फौज और बैंक की स्थापना के बाद , श्री नेताजी को जनवरी में हुए एक कार्यक्रम में , उन्हें आजाद-भारत का पहला राष्ट्रपति बनाने की माँग भी की गई थी । ———————————————————————————————— आजाद हिन्द सरकार का अपना रेडियो स्टेशन , अपना अखबार और एक बड़ी फौज भी थी , जो कई देशों में फैली हुई थी । ================================================ वन्देमातरम (भारतमाता)’s photo. Harshad Kanaiyalal Ashodiya Unlike · Comment · Share · 135

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