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Modi


✅ 5/- रूपये वाली ‘बीयर’ की बोतल आज 80/- रुपये की हो गई, कभी किसी ने दारु का ठेका नहीं फूंका ?????

✅ 25 पैसे वाली कोकाकोला , आज 12/- रुपये की हो गई कभी किसी ने अमेरिका का पुतला नहीं फूंका ????

✅ 5/- रूपये वाला Mac-Donald बर्गर  आज 55/- रुपये में बिक रहा है, कभी किसी ने रेल नहीं रोकी ?????

✅ 5/- रूपये का चिप्प्स 🍕🍕 का पैकट आज 30/- रूपये का हो गया कभी किसी ने रेल नहीं रोकी ?????

✅ 5/- रुपये में आने वाला सिनेमा  का टिकिट 300/- रूपये का हो गया कभी किसी ने कोई सिनेमा हॉल नहीं फूँका ??????

✅ चीनी  २/- रुपये महँगा क्या हुई Breaking news हो गई I 

✅ और 10/- रूपये का रेल टिकट 11.40/- रूपये का क्या हुआ, सब छातिया पीटने लगे I जो महिनो मे एक दो बार देना है !

अच्छे दिन आयेंगे सब्र तो करो ।

जम्मू से कटरा रेल का किराया 20 रुपया हे ।
टेक्सी वाले 2500 से 3000 रुपया लेते हैं|
यही तो अच्छे दिन हे
कांग्रेस 10 साल मे एक “सरबजीत सिह” को वापिस हिन्दुस्तान नही ला सकी और मोदी सरकार 15 दिन मे ही “ईराक मे फसे 174 भारतीयो” को खुंखार आतंकवादीयो से छुडाकर ले आयी ।
सब्र रखो अच्छे दिन आयेंगे ।
: मोदीजी  5 साल में देश को यूरोप के विकसित देशों की लाइन में सबसे आगे खड़ा कर देंगे । बस देश की जनता आलू-प्याज़ को छोड़कर कुछ बड़ा सोचे”।
China मोदी के खिलाफ !
# America मोदी के खिलाफ !
# CIA मोदी के खिलाफ !
# CBI मोदी के खिलाफ !
# IB मोदी के खिलाफ !
# ISI मोदी के खिलाफ !
# PAK मोदी के खिलाफ !
# Congress मोदी के खिलाफ !
# JDU मोदी के खिलाफ !
# BSP मोदी के खिलाफ !
# SP मोदी के खिलाफ !
# CPI मोदी के खिलाफ !
# CPIM मोदी के खिलाफ !
# AAP मोदी के खिलाफ !

# लालू, मालू, भालू, कालू, राहु, कजरी, मोदी के खिलाफ !

सारे गद्दार मोदी के खिलाफ !
सारे देश द्रोही मोदी के िवरोध में!

सारी कायनात लगी है एक शख्स
को झुकाने में… खुदा भी सोचता होगा,
जाने किस मिटटी का इस्तेमाल किया मैंने “मोदी” को बनाने में!!

JARA  SOCHO…

जो व्यक्ति
       PM बनने से पहले
               यदि
    अमरीका को झुका सकता है,
           भूखे नंगे देश
           पाकिस्तान में
               हडकंप
            मचा सकता है,
       चीन जैसे गद्दार देश के
           अखबारों की
      सुर्खियों में आ सकता है
             तो भाई
      वह भारत को विश्व गुरु
           बना सकता है
        यह बात पक्की है!
      ” देश की जरुरत है मोदी ”

“मैं मुफ्त भोजन दूंगा” – राहुल गांधी

“मैं मुफ्त पानी दूंगा” – केजरीवाल

            “न तो मैं
         मुफ्त पानी दूँगा ,
       ना ही मुफ्त भोजन
        कि बात करूंगा ,
            बल्कि मैं
    इतने रोजगार पैदा करूँगा,
        भारत के युवाओं
    को इतना सक्षम कर दूंगा,
                 की
     मेरे देश का हरेक व्यक्ति      
           स्वाभिमान से
             अपना भी
             पेट भरेगा
                 और
            दूसरों की भी
                प्यास
              बुझाएगा”
            – नरेंद्र मोदी

    दिक्कत केजरीवाल में नहीं,
       भारत की जनता में है
           जो मुफ्त की
         चीज पाने के लिए
                लादेन
         को भी वोट दे देगी !!!

अगर देश के लिए कुछ करना है तो यह सन्देश 3 लोगो को भेजना है।
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते पूरा देश जुड़ जायेगा।

बस…जरासा forwards..करो..
सिफॅ 2-3 सेकंड ही लगेंगे…
Jai Ho

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शेयर करें और मोदी सरकार की उपलब्धियां जन जन तक पहुंचाएं।


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मोदी सरकार के एक साल में भ्रष्टाचार घटा है और भारत को कई लाख करोड़ रुपये का फायदा भी हुआ है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ )के अनुसार मोदी सरकार के कामकाज से भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ है और सरकारी दफ्तरों में पक्षपात घटा है।
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मोदी सरकार ने कोल ब्‍लॉक और 2G स्पेक्ट्रम निलामी से 2.6 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं, यूपीए सरकार ने खदानों को मुफ्त में और 2G स्पेक्ट्रम को मनमाने दामों पर बांट दिया था। मोदी सरकार ने किसानों की मदद बढ़ा कर डेढ़ गुना कर दी है और 50% की जगह अब सिर्फ 33% नुक्सान में ही किसान को मुआवज़ा देने का प्रावधान कर दिया है।
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मोदी सरकार ने इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ा कर २ से २.५ लाख कर दी है। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस से गरीबों को सीधे फायदा मिला है।
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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ ) ने एक अध्ययन में पाया है कि मोदी सरकार के सुशासन का असर दिखने लगा है। सरकारी दफ्तरों में पक्षपात घटा है।
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मोदी सरकार के कामकाज से नेताओं पर भरोसा भी बढ़ रहा है। डब्ल्यूईएफ ने सालाना अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक सरकारी दफ्तरों में पक्षपात को लेकर भारत की रैंकिंग में 45 अंक का सुधार हुआ है। व 94वें स्थान से 49वें नंबर पर आ गया है।
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नेताओं पर जनता के भरोसे के मामले में भारत की रैंकिंग में 65 अंक का सुधार हुआ है। वहीं, सरकारी धन के गलत इस्तेमाल में 38 अंक का सुधार हुआ है। घूसखोरी जैसे मानकों में सुधार तो है, लेकिन महज 17 स्थान का।

चार सवालों पर सुधरी रैंकिंग-
1. नेताओं पर बढ़ा भरोसा
पिछले साल 115वें स्थान पर था। अब 50वें स्थान पर है। भरोसा 65 अंक बढ़ा है। सिंगापुर पहले, कतर दूसरे और संयुक्त अरब अमीरात तीसरे नंबर पर है।
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2. सरकारी धन का दुरुपयोग
पिछले साल 98वें स्थान पर था। अब 60वें पर आ गया है। स्थिति में सुधार 38 अंक का है। न्यूजीलैंड पहले, डेनमार्क दूसरे और फिनलैंड तीसरे नंबर पर है।
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3. घूसखोरी
पिछले साल 10वें स्थान पर था। अब 93वें स्थान पर है। सबसे कम घूसखोरी के साथ न्यूजीलैंड पहले, फिनलैंड दूसरे और सिंगापुर तीसरे स्थान पर है।
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4. सरकारी फैसलों में पक्षपात
इससे पहले भारत 94वें स्थान पर था। अब 49वें स्थान पर है। कतर पहले, न्यूजीलैंड दूसरे और सिंगापुर तीसरे स्थान पर रहा।
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क्या है डब्ल्यूईएफ की रैंकिंग
डब्ल्यूईएफ ने वर्ल्ड कॉम्पीटिटिवनेस रिपोर्ट जारी की है। सर्वे में शामिल हर व्यक्ति/संस्था को एक से सात अंक देने को कहा गया था। इसी के आधार पर रैंकिंग दी गई है।
गरीबों के नाम पर हो रहे आरोप-प्रत्यारोप के तमाम पहलुओं पर चर्चा तो आपने खूब सुना और पढ़ा. अब उन तीन योजनाओं को जानिए जो पीएम मोदी ने खास तौर पर गरीबों के लिए शुरु किया है. इन तीन योजनाओं से गरीबों की हालत सुधरेगी।
जीवन ज्योति बीमा योजना क्या है-
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दूसरी योजना पीएमजेजेबीवाई के तहत सभी बचत खाता धारक को किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु की स्थिति में दो लाख रुपये की एक वर्षीय जीवन बीमा सुरक्षा दी जाएगी. यह 18 से 50 वर्ष तक की अवस्था के लिए लागू है. इसके तहत हर बीमाधारक के लिए प्रीमियम राशि सालाना 330 रुपये है.
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सुरक्षा बीमा योजना क्या है-
पीएमएसबीवाई योजना के तहत बीमा धारक को 12 रुपये की सालाना बीमा पर दो लाख रुपये की निजी दुर्घटना बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी. यह योजना बैंक के बचत खाता धारक के लिए 18 से 70 वर्ष की अवस्था के लिए लागू है. इसके तहत बीमा लेने वाले बैंक को हर साल 31 मई या उससे पहले खुद खाते से प्रीमियम काट लेने की अनुमति देंगे, जिस पर बीमा धारक को एक जून से अगले साल 31 मई तक दुर्घटना बीमा सुरक्षा हासिल होगी. इस बीमा का खुद-ब-खुद नवीनीकरण होता रहेगा. बीमा कवर 1 जून से लागू होगा.
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अटल पेंशन योजना क्या है-
इसके तहत उपभोक्ता को 60 वर्ष की अवस्था पूरी करने के बाद 18 से 40 वर्ष की अवस्था के बीच चुने गए विकल्पों के आधार पर न्यूनतम 1000, 2000, 3000, 4000 या 5000 रुपये मासिक पेंशन दिया जाएगा. इस तरह इस योजना में योगदान 20 साल या उससे अधिक का होगा. मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन मिलेगा.
इन तीन योजनाओं से गरीबों की हालत सुधरेगी।
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दस साल के पाकिस्तानपरस्त कांग्रेसी शासन के बाद पहली बार भारतीय सैनिको को खुली छूट मिली है ताबड़तोड़ गोली व गोला दागने को।
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भारत को सामरिक तौर पर मज़बूत करने के लिए मोदी सरकार ने अत्याधुनिक अपाचे हेलीकाप्टर, परमाणु पनडुब्बी और राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का निर्णय किया है।
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शंघाई में 22 अरब $ का करार: भारत में निवेश के वादे में चीन से पीछे छूटा यूएस।
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इन समझौतों के बाद निवेश के वादों के मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। ये हालात बीते 8 महीने में बदले हैं। पहले जिनपिंग की भारत यात्रा और अब मोदी की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच 52 अरब डॉलर के करार हो चुके हैं। इसमें से 95% से ज्यादा रकम भारत में निवेश के रूप में आएगी। वहीं, अमेरिका ने भी बीते 8 महीने में दो बार भारत के साथ करार किए। लेकिन कुल मूल्य 45 अरब डॉलर ही रहा। हालांकि, चीन हो या अमेरिका, निवेश का फायदा भारत के मेक इन इंडिया कैम्पेन को मिलने वाला है।

http://www.bhaskar.com/…/UT-DEL-NEW-increased-trust-in-poli…

Sanjay Dwivedy's photo.
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स्वीडिश कंपनी के दलाल थे राजीव गांधी: विकिलीक्स


स्वीडिश कंपनी के दलाल थे राजीव गांधी: विकिलीक्स

विकिलीक्स ने खुलासा किया है कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने से पहले इंडियन एयरलाइंस के पायलट की नौकरी के दौरान स्वीडिश कंपनी साब-स्कॉनिया के लिए दलाली करते थे। कंपनी 70 के दशक में भारत को फाइटर प्लेन विजेन बेचने की कोशिश कर रही थी। कांग्रेस ने फिलहाल इस खुलासे पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पूरे आसार है कि विपक्षी पार्टियां इस मामले को तूल दे सकती हैं। बीजेपी नेता प्रकाश जावडेकर ने इस खुलासे पर कहा कि हर रक्षा सौदे में गांधी परिवार का नाम ही सामने क्यों आता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गांधी परिवार को जवाब देना चाहिए और तब के दस्तावेज सार्वजनिक होने चाहिए।

विकिलीक्स ने यह खुलासा हेनरी किसिंजर केबल्स के हवाले से किया है। हेनरी किसिंजर अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। ‘द हिन्दू’ में छपी खबर के मुताबिक, हालांकि स्वीडिश कंपनी के साथ सौदा नहीं हो पाया था और ब्रिटिश जगुआर ने बाजी मार ली थी। विकिलीक्स केबल्स के मुताबिक, आपतकाल के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस ने अंडरग्राउंड रहते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए से आर्थिक मदद भी मांगी थी।

राजीव गांधी 1980 तक राजनीति से दूर रहे थे। संजय गांधी के निधन के बाद इंदिरा गांधी उन्हें बतौर मिस्टर क्लीन राजनीति में लेकर आईं। हालांकि बतौर प्रधानमंत्री पहले कार्यकाल में ही वह एक दूसरी स्वीडिश कंपनी से बोफोर्स तोपों की खरीद के लिए हुए सौदे में घूसखोरी के आरोपों से घिर गए और इसकी वजह से 1989 के आम चुनावों में उनकी पार्टी को हार का सामना भी करना पड़ा।

सन् 1974 से 1976 के दौरान के जारी 41 केबल्स के मुताबिक, स्वीडिश कंपनी को इस बात का अंदाजा था कि फाइटर एयरक्राफ्ट्स की खरीद के बारे में अंतिम फैसला लेने में गांधी परिवार की भूमिका होगी। फ्रांसीसी एयरक्राफ्ट कंपनी दसो को भी इसका अनुमान था। उसकी ओर से मिराज फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए तत्कालीन वायुसेना अध्यक्ष ओपी मेहरा के दामाद दलाली करने की कोशिश कर रहे थे। केबल में मेहरा के दलाल का नाम नहीं लिया गया है।

1975 में दिल्ली स्थित स्वीडिश दूतावास के एक राजनयिक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के खिलाफ अपने पूर्वाग्रहों की वजह से जगुआर न खरीदने का फैसला कर लिया है। अब मिराज और विजेन के बीच फैसला होना है। मिसेज गांधी के बड़े बेटे बतौर पायलट एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े हैं और पहली बार उनका नाम बतौर उद्यमी सुना जा रहा है। अंतिम फैसले को परिवार प्रभावित करेगा। हालांकि, राजीव गांधी एक ट्रांसपोर्ट पायलट हैं और उनके पास फाइटर प्लेन के मूल्यांकन की योग्यता नहीं है, लेकिन उनके पास एक ‘दूसरी योग्यता’ है।’

दूसरे केबल में स्वीडिश राजनयिक के हवाले से कहा गया है, ‘इस डील में इंदिरा गांधी की अति सक्रियता की वजह से स्वीडन चिढ़ा हुआ था।’ इसके मुताबिक, उन्होंने फाइटर प्लेन की खरीद की प्रक्रिया से एयरफोर्स को दूर रखा था। रजनयिक के मुताबिक, 40 से 50 लाख डॉलर प्रति प्लेन के हिसाब से 50 विजेन के लिए बातचीत चल रही थी। स्वीडन को भरोसा था कि भारत सोवियत संघ से और युद्धक विमान न खरीदने का फैसला कर चुका था।

6 अगस्त 1976 के एक दूसरे केबल से पता चलता है कि भारत को फाइटर प्लेन बेचने की कोशिश में जुटे स्वीडन को अमेरिकी दबाव में अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। अमेरिका ने साब-स्कॉनिया को भारत को विजेन निर्यात करने और देश में बनाने का लाइसेंस देने की अनुमति नहीं दी थी।

अमेरिका की ओर से कहा गया था, ‘गंभीरता से विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि विजेन के किसी भी ऐसे संस्करण को भारत को निर्यात करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं, जिसमें अमेरिकी कल-पुर्जे लगे हों।’ अमेरिका ने कहा था कि वह अमेरिकी डिजाइन और तकनीक से लैस इस विमान के भारत में उत्पादन का विरोध करेगा।

http://navbharattimes.indiatimes.com/…/article…/19438081.cms

Sanjay Dwivedy's photo.