Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

ना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देते है ।


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****ध्यान रहे पथरी के रोगीओं के लिए चूना वर्जित है****
चूना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देते है । �

जैसे किसीको पीलिया हो जाये माने जोंडिस उसकी सबसे अछि दावा है चूना ; गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है । और येही चूना नपुंसकता की सबसे अछि दावा है – अगर किसीके शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल देड साल में भरपूर शुक्राणु बन्ने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अछि दावा है ये चूना । बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अछि है जो लम्बाई बढाती है – गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिलाके खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिलाके खाओ, दाल नही है तो पानी में मिलाके पियो – इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है । जिन बच्चोकी बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे उनकी सबसे अछि दावा है चूना, जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अछे हो जायेंगे ।

बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अछि दावा है चूना । और हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंध हुआ उनकी सबसे अछि दावा है चूना; गेहूँ के दाने के बराबर चूना हरदिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना ।

जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए किउंकि गर्भवती माँ को सबसे जादा काल्सियम की जरुरत होती है और चूना कैल्सियम का सब्से बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में – अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फाईदे होंगे – पहला फाईदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नोर्मल डेलीभरी होगा, दूसरा बछा जो पैदा होगा वो बहुत हस्टपुष्ट और तंदरुस्त होगा , तीसरा फ़ायदा वो बछा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया , और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बछा बहुत होसियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।

चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है । कई बार हमारे रीड़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दुरी बड़ जाती है Gap आ जाता है – ये चूना ही ठीक करता है उसको; रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चुने से ठीक होता है । अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे जादा चुने में है । चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।

अगर मुह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है , मुह में अगर छाले हो गए है तो चुने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है । शारीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , अनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अछि दावा है ये चूना , चूना पीते रहो गन्ने के रस में , या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में – अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है – एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ।

भारत के जो लोग चुने से पान खाते है, बहुत होसियार लोग है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है .. तो चूना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चुने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था कन्सर करता है, पान में सुपारी मत डालिए सोंट डालिए उसमे , इलाइची डालिए , लोंग डालिए. केशर डालिए ; ये सब डालिए पान में चूना लगाके पर तम्बाकू नही , सुपारी नही और कत्था नही ।
अगर आपके घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हाड़सिंगार के पत्ते का काड़ा खाइए घुटने बहुत अछे काम करेंगे । राजीव भाई कहते है चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसको भी ..ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है ; आजकल हमारे देश में चूना लगाने वाले बहुत है पर ये भगवान ने खाने के लिए दिया है ।

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Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

पीपल क्या-क्या कर सकता है हमारे जीवन में ….!


jai hind….

पीपल क्या-क्या कर सकता है हमारे जीवन में ….!

* भगवान श्री कृष्ण ने पीपल के वृक्ष की महिमा का बखान करते हुए विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ गीता में कहा है-‘सब पेड़ों में उत्तम और दिव्य गुणों से सम्पन्न पीपल मैं स्वयं हूँ।’ इसका अर्थ है कि जितना सम्मान लोग भगवान श्री कृष्ण को देते हैं उतना ही आदर उन्हें पीपल के वृक्ष को देना चाहिए। इसी भाव तथा विचार को ध्यान में रखकर गांवों में आज भी विद्यालय, पंचायत घर, मंदिर के प्रांगण आदि में पीपल का वृक्ष लगाकर उसकी जड़ को चारों ओर से एक गोल चबूतरे से घेर दिया जाता है ताकि उसको कोई जानवर या व्यक्ति हानि न पहुंचा सके और चबूतरे पर थोड़ी देर बैठकर प्राणवायु को नि:शुल्क ग्रहण किया जा सके।

* इस विचार से यह तथ्य स्पष्ट होता है कि विभिन्न प्रकार के वृक्षों में पीपल सर्वमान्य तथा सर्व गुण सम्पन्न है। वेदों में भी पीपल के गुणों का वर्णन अनेक स्थानों पर किया गया है। अथर्ववेद में एक स्थान पर लिखा है-‘‘यत्राश्वत्था प्रतिबुद्धा अभूतन्’’…‘‘अश्वत्थ व कारणं प्राणवायु..’’ इसका मतलब है कि पीपल का वृक्ष ज्ञानी-ध्यानी लोगों के लिए सब कुछ देता है…जहां यह वृक्ष होता है वहां प्राणवायु मौजूद रहती है। यह बात सच भी मालूम पड़ती है कि आज भी साधु संत और ज्ञानी-ध्यानी लोग पीपल के पेड़ के नीचे कुटिया बनाते तथा धूनी रमाते हैं। वे पीपल की लकड़ी जलाते हैं और रूखा-सूखा खाकर भी दीर्घजीवी होते हैं।

* पीपल के पत्तों तथा छाल का प्रयोग करने से व्यक्ति बहुत सी बीमारियों से बचा रह सकता है। बीमारियों से बचने का मतलब है स्वस्थ शरीर और ऐसा शरीर ही बहुत समय तक जीवित रह सकता है। पीपल द्वारा लम्बी आयु प्रदान करने का यही रहस्य है। दूसरी रहस्य की बात यह है कि प्रकृति ने हमें हर प्रकार की नियामत दी है। यदि हम उनके मूल्य तथा गुणों को पहचान कर लाभ उठाना नहीं चाहते तो इसमें किसका दोष…. ?

* इस दृष्टि से ‪#‎पीपल‬ का बूटा-बूटा और पत्ता-पत्ता हमें निरोग बनाता है, स्वस्थ रखता है और लम्बी आयु प्रदान करता है।

* पीपल के वृक्ष को लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह अपने आप उग आता है। इसके पके फलों को पक्षी खाते हैं। फिर वे बीट कर देते हैं। बीट में मौजूद बीज दीवारों की दरारों या निचली भूमि में गिरकर जम जाते हैं। इसका मतलब है कि पीपल के वृक्ष को उगाने के लिए न तो किसी विशेष प्रकार की भूमि की जररूत होती है और न ही खाद पानी की। यह सभी प्रकार की भूमि में पैदा हो जाता है।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग –http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

पीपल के वृक्ष की विशेषताएं निम्नांकित हैं:-
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* यह धरती और आकाश की विषैली वायु को शुद्ध करता है तथा प्राण-वायु का संचार आवश्यकतानुसार करता है।

* दमा तथा तपेदिक (टी.बी) के रोगियों के लिए पीपल अमृत के समान है। कहा जाता है कि दमा तथा तपेदिक के रोगियों को पीपल के पत्तों की चाय पीनी चाहिए। पीपल की छाल को सुखा कर उसका चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए। जड़ को पानी में उबालकर स्नान करना चाहिए। ये गुण अन्य किसी वृक्ष में नहीं पाए जाते।

* पीपल का वृक्ष सूर्य की किरणों को अपने पत्तों में जज्ब कर धरती पर छोड़ता है और ये किरणें शीतलता तथा सौम्यता प्रदान करती हैं।

* पीपल की छांव में बैठने से थकावट दूर होती है क्योंकि पीपल के पत्तों से छनकर नीचे आने वाली किरणों में तैलीय गुण आ जाते हैं जो बिना तेल के ही शरीर की मालिश कर देते हैं। उससे शरीर के अंग-अंग की टूटन दूर हो जाती है।

* पीपल का वृक्ष दिन-रात प्रकाश देता है। दिन हो या रात पीपल के पेड़ के नीचे सघन अंधकार कभी दिखाई नहीं देता। पत्तियों के बीच से दिन में सूर्य का और रात में चन्द्रमा का प्रकाश छन-छनकर आता रहता है।

* चरक ने अपने ग्रंथ में लिखा है-‘यदि व्यक्ति में नपुंसकता का दोष मौजूद है और वह सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ है तो उसे शमी वृक्ष की जड़ या आसपास उगने वाला पीपल के पेड़ की जटा को औटाकर उसका क्वाथ (काढ़ा) पीना चाहिए। पीपल के जड़ तथा जटा में पुरुषत्व प्रदान करने के गुण विद्यमान हैं।

* पीपल की एक विशेषता यह है कि यह ‪#‎चर्म‬-विकारों को जैसे-कुष्ठ, फोड़े-फुन्सी दाद-खाज और खुजली को नष्ट करने वाला है। वैद्य लोग पीपल की छाल घिसकर चर्म रोगों पर लगाने की राय देते हैं। कुष्ठ रोग में पीपल के पत्तों को पीसकर कुष्ठ वाले स्थान पर लगाया जाता है तथा पत्तों का जल सेवन किया जाता है। हमारे ग्रंथों में तो यहां तक लिखा गया है कि पीपल के वृक्ष के नीचे दो घंटे प्रतिदिन नियमित रूप से आसन लगाने से हर प्रकार के त्वचा रोग से छुटकारा मिल जाता है।

अपच में :-
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* भोजन न पचने की हालत में पेट में दर्द, व्याकुलता जी मिचलाना या कई बार उल्टियां हो जाने की शिकायत हो जाती है। भूख खत्म हो जाती है तथा पेट में गैस अधिक मात्रा में बनने लगती है। कभी-कभी पेट में मरोड़-सा मालूम पड़ता है और जलन के साथ पीड़ा होती है। अम्ल बनने लगता है जो डकारें भी पैदा करता है।

उपचार:-
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* पीपल के फल 20 ग्राम, जीरा 5 ग्राम, काली मिर्च 5 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम, सेंधा नमक 5 ग्राम-सबको अच्छी तरह सुखा लें। फिर पीसकर चूर्ण बनाकर शीशी में रख लें। इसमें से प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ लें। भोजन के बाद भी इस चूर्ण को खाने से काफी लाभ होता है।

* अजयवायन, छोटी हर्र, हींग (2 रत्ती) तथा पीपल की छाल सब 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण भोजन के बाद गरम पानी से सेवन करें।

* आठ लौंग, दो हरड़, चार फल पीपल के तथा दो चुटकी सेंधा नमक-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। सुबह-शाम इस चूर्ण का प्रयोग भोजन के बाद करें।

* पीपल के पत्तों को कुचल कर एक चम्मच रस निकाल लें। उसमें प्याज का रस आधा चम्मच मिलाएं। दोनों का सेवन सुबह-शाम करें।

* पीपल के पत्तों को लेकर सुखा लें। फिर कूट-पीस कर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

अजीर्ण रोग में :-
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* अजीर्ण का रोग हो जाने पर भूख नहीं लगती। खाना भी ठीक से हजम नहीं होता। पेट फूल जाता है और कब्ज के कारण पेट में दर्द होने लगता है। प्यास अधिक लगती है तथा पेट में बार-बार दर्द हो जाता है। जी मिचलाना, बार-बार डकारें आना, पेट में गैस का बनना, सुस्ती, सिर में भारीपन आदि अजीर्ण रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
उपचार-पीपल की छाल, चार नग लौंग, दो हरड़ तथा एक चुटकी हींग-चारों चीजों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर सेवन करें।

* खट्टी डकारें आती हों तो पीपल के पत्तों को जलाकर उसकी भस्म में आधा नीबू निचोड़ कर सेवन करें।

* पीपल के दो फल (गूलर) एक गांठ की दो कलियां लहसुन थोड़ी-सी अदरक, जरा सा हरा धनिया, पुदीना तथा काला नमक सबकी चटनी बनाकर सुबह-शाम भोजन के साथ या बाद में सेवन करें।

* पीपल की छाल, जामुन की छाल तथा नीम की छाल तीनों छालों को थोड़ी-छोड़ी मात्रा में लेकर कूट लें। फिर काढ़ा बनाकर सेवन करें। यह काढ़ा पेट के हर रोग के लिए उत्तम दवा है।

* एक चम्मच राई, थोड़ी-सी मेथी तथा पीपल की जड़ की छाल-तीनों चीजों को कूट कर काढ़ा बनाकर सेवन करें।

अरुचि में :-
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* अरुचि की पहचान बड़ी सरल है। पेट हर समय भारी-भारी रहता है। भोजन लेने को मन करता है लेकिन खाते समय भीतर से जी भोजन को ग्रहण नहीं करता। मुंह में लार आ जाती है। फीकी तथा खट्टी डकारें आती है। यदि यह रोग बराबर बना रहता है तो रोगी को दूसरे रोग भी घेर लेते हैं।

उपचार:-
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* सर्वप्रथम मन को शान्त करें। मन से चिन्ता, भय, शोक, क्रोध, घबराहट आदि को दूर करें।

* पीपल के आठ फल सुखाकर पीस लें। इनमें दो चम्मच अजवायन, एक रत्ती हींग, एक चम्मच सोंठ, जरा-सा काला नमक मिला लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और एक शाम को भोजन के बाद गरम पानी से लें।

* पीपल की छाल 10 ग्राम, पीपल (दवा) 5 ग्राम, सोंठ 5 ग्राम-तीनों को महीन पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण का सेवन दोपहर के बाद करें।

* भोजन तथा अन्य उपाय-गेहूं तथा जौ की रोटी, हरी सब्जियां, सादी दाल, उबली हुई सब्जी आदि का कुछ दिनों तक सेवन करें।

* खट्टी तेज, गरिष्ठ, मिर्च मसालेदार तथा देर से पचने वाली चीजें न खाएँ।

अम्लपित्त:-
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* तेज, कठोर, खट्टे गरिष्ठ तथा देर से पचने वाले पदार्थों को खाने से पेट में अम्लपित्त बढ़ जाता है। कुछ लोगों को घी, तेल, मिर्च मसाले तथा मांस-मछली खाने का बहुत शौक होता है। अत: ये सब चीजें भोजन को ठीक से नहीं पचने नहीं देती। पेट तथा सीने में जलन होती है। कभी-कभी आंतों में हल्के घाव बन जाते हैं। भोजन हजम होने के समय पित्त अधिक मात्रा में बनना शुरू हो जाता है। कभी खट्टी तथा कभी फीकी डकारें आने लगती हैं। भोजन स्वादिष्ट नहीं लगता।

उपचार:-
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* पीपल की थोड़ी-सी कोंपलें, मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच तथा बच का चूर्ण 2 रत्ती-तीनों की चटनी बनाकर शहद के साथ सेवन करें।

* पीपल के दो पत्तों को भोजन के बाद चबा जाएं।

* पीपल की छाल को सुखाकर पीस लें। उसमें जरा-सी हींग, जरा सा सेंधा नमक तथा जरा-सी अजवायन मिलाकर गरम पानी के साथ सेवन करें।

* पीपल के चार सूखे फल, सफेद जीरा, धनिया तीनों 10-10 ग्राम लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक-एक चम्मच भर चूर्ण सुबह-शाम भोजन से पहले गरम पानी से साथ सेवन करें।

* 10 फल पीपल मुनक्का 50 ग्राम, सौंफ 25 ग्राम, काला नमक 5 ग्राम-सबको पीसकर रख लें। इसमें से एक चम्मच भर पाउडर भोजन के बाद सेवन करें।

पेट की गैस :-
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* पेट में बहुत अधिक वायु भर जाती है। रोगी यकायक घबरा जाता है। उसे सांस लेने में कष्ट का अनुभव होता है। पेट की नसें तन जाती हैं। पेट तथा सीने में जलन होती है। रोगी को लगता है जैसे उसका पेट फट जाएगा। नाड़ी तेजी से चलने लगती है। माथे पर पसीना आ जाता है। पेट की गैस ऊपर की ओर चढ़ जाती है तो रह-रहकर डकारें आने लगती हैं सिर में दर्द, माथे का चकराना तथा गिर पड़ना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार:-
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* पीपल के पत्तों को सुखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में जरा-सी राई पीसकर मिला लें। दोनों को छाछ या मट्ठे के साथ सेवन करें।

* पीपल की जड़ 10 ग्राम, गेहूं की भूसी 10 ग्राम, बाजरे के दाने 10 ग्राम, सेंधा नमक दो चुटकी या आधा चम्मच काला जीरा 8 ग्राम अजवायन 5 ग्राम सबको एक पोटली में बांधकर गरम करें। फिर इससे पेट की सिंकाई करें।

* बच का चूर्ण 2 रत्ती, काला नमक 4 रत्ती, हींग 2 रत्ती पीपल की छाल 10 ग्राम-सबको सुखाकर पीस लें। इसमें से प्रतिदिन आधा चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें।

* पीपल की छाल को पीसकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण में दो रत्ती हींग तथा जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।

पेट का दर्द:-
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* इस रोग में भोजन के बाद आमाशय में पीड़ा होती है। ऐसा लगता है जैसे नाखून से कोई आंतों को खुरच रहा है। खाने की चीजें पेट में पहुंचते ही दर्द शुरू हो जाता है। दर्द की हालत में बेचैनी बढ़ जाती है। यह रोग, भोजन की अधिकता, पेट में मल के रुकने, आंतों में मल के चिपकने, पाचनदोष तथा पेट में वायु के भर जाने के कारण होता है।

उपचार:-
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* आमाशय से वायु निकलने वाली दवा का प्रयोग सबसे पहले करना चाहिए।

* पीपल के पत्ते को गरम करके उस पर जरा-सा घी लगाएं। अब पत्ते को पेट पर रखकर पट्टी बांध लें। वायु निकलते ही पेट का दर्द रुक जाएगा।

* पीपल की छाल का चूर्ण, अजवायन का चूर्ण, हींग तथा खाने वाला सोडा-सबकी उचित मात्रा लेकर फंकी लगाएं और ऊपर से गरम पानी पी लें।

* पीपल के पत्तों का रस 10 ग्राम, भांगरे के पत्तों का रस 5 ग्राम काला नमक 3 ग्राम सबको मिलाकर सेवन करें। तथा सोंठ का चूर्ण एक चम्मच, पीपल के सूखे फलों का चूर्ण एक चम्मच तथा काला नमक चौथाई चम्मच तीनों को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द तत्काल रुक जाता है।

अतिसार (दस्त):-
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* गलत खान-पान, अशुद्ध जल, पाचन क्रिया की गड़बड़ी पेट में कीडों का होना, यकृत की खराबी, मौसम बदलने के कारण पेट में खराबी जुलाब लेने की आदत, चिन्ता, शोक, भय, दु:ख आदि के कारण अतिसार का रोग हो जाता है। यह रोग जल्दी ठीक हो जाता है, किन्तु सही समय पर अच्छी चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। इसमें पतले दस्त आते हैं किन्तु दस्त आने से पहले पेट में हल्का दर्द होता है। दस्त लगते ही पिचकारी सी छूटती है। चूंकि पेट का जल दस्तों के साथ बाहर निकल जाता है इसलिए बहुत ज्यादा कमजोरी हो जाती है। आँखें भीतर की तरफ धंस जाती हैं और पीली पड़ जाती है। शरीर की त्वचा रुखी हो जाती है। देखते-देखते रोगी की शक्ति क्षीण हो जाती है। प्यास अधिक लगती है और पेट में गुड़गुड़ होती रहती है।

उपचार:-
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* पीपल के पत्तों के साथ थोड़े से खजूर में पीसकर चटनी बना लें। यह चटनी घंटे-घंटे भर बाद खाएं।

* पीपल की कोंपलें, नीम की कोंपलें, बबूल के पत्ते सब 6-6 ग्राम लेकर पीस लें। इसमें थोड़ा-सा शहद मिला लें। इस चटनी की तीन खुराक करके सुबह-दोपहर-शाम को सेवन करें।

पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:-
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* पीपल के कोमल पत्तों का मुरब्बा बड़ी शक्ति देता है | इसके सेवन से शरीर की कई प्रकार की गर्मी-संबंधी बीमारियाँ चली जाती है | यह किडनी की सफाई करता है | पेशाब खुलकर आता है | पित्त से होने वाली आँखों की जलन दूर होती है | यह गर्भाशय व मासिक संबंधी रोगों में लाभकारी है | इसके सेवन से गर्भपात का खतरा दूर हो जाता है | पीपल के पत्ते ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए | पहले पीपल देवता को प्रणाम करना कि ‘महाराज ! औषध के लिए हम आपकी सेवा लेते हैं, कृपा करना |’ पीपल को काटना नहीं चाहिए | उसमें सात्विक देवत्व होता है |

मुरब्बा बनाने की विधि:-
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* पीपल के २५० ग्राम लाल कोमल पत्तों को पानी से धोकर उबाल लें, फिर पीसकर उसमें समभाग मिश्री व ५० ग्राम देशी गाय का घी मिलाकर धीमी आँच पर सेंक लें | गाढ़ा होने पर ठंडा करके सुरक्षित किसी साफ बर्तन ( काँच की बरनी उत्तम है ) में रख लें |

सेवन-विधि: -१०-१० ग्राम सुबह-शाम दूध से लें |

हृदय मजबूत करने के लिए :- १०-१२ ग्राम पीपल के कोमल पत्तों का रस और चोथाई चमम्च पीसी मिश्री सुबह-शाम लेने से हृदय मजबूत होता है, हृदयघात (हार्ट -अटैक) नहीं होता | इससे मिर्गी व मूर्च्छा की बीमारी में लाभ होता है |

दमा : -पीपल की अन्तरछाल (छाल के अन्दर का भाग) निकालकर सुखा लें और कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर लें, यह चूर्ण दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है। पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसमें यह चूर्ण बुरककर खीर को 4-5 घंटे चन्द्रमा की किरणों में रखें, इससे खीर में ऐसे औषधीय तत्व आ जाते हैं कि दमा रोगी को बहुत आराम मिलता है। इसके सेवन का समय पूर्णिमा की रात को माना जाता है।

दाद-खाज : -पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों में आराम होता है।

मसूड़े :- मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें।

अन्य उपयोग : –
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* इसकी छाल का रस या दूध लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।

* पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें, इसे एक कप पानी में घोलकर रख दें, जब राख नीचे बैठ जाए, तब पानी नितारकर पिलाने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

* इसके पत्तों को जलाकर राख कर लें, यह राख घावों पर बुरकने से घाव ठीक हो जाते हैं।

* जुकाम, खांसी और दमा में फायदा: पीपल के पांच पत्तों को दूध में उबालकर चीनी या खांड डालकर दिन में दो बार, सुबह-शाम पीने से जुकाम, खांसी और दमा में बहुत आराम होता है.

* आंखों के दर्द के लिए: इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आंख में लगाने से आंख का दर्द ठीक हो जाता है.

* दांतों के लिए पीपल की ताजी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी होती है. नकसीर में आराम : पीपल के ताजे पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है.
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ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता:-
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* पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें। पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

* इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें। इसकी खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें। प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें ।

* पीलिया के रोगी को पीपल की नर्म टहनी (जो की पेंसिल जैसी पतली हो) के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर माला बना लें। यह माला पीलिया रोग के रोगी को एक सप्ताह धारण करवाने से पीलिया नष्ट हो जाता है।

* बहुत से लोगों को रात में दिखाई नहीं पड़ता। शाम का झुट-पुटा फैलते ही आंखों के आगे अंधियारा सा छा जाता है। इसकी सहज औषध है पीपल। पीपल की लकड़ी का एक टुकड़ा लेकर गोमूत्र के साथ उसे शिला पर पीसें। इसका अंजन दो-चार दिन आंखों में लगाने से रतौंधी में लाभ होता है।

* पीपल की टहनी का दातुन कई दिनों तक करने से तथा उसको चूसने से मलेरिया बुखार उतर जाता है।

* पीपल की ताजी हरी पत्तियों को निचोड़कर उसका रस कान में डालने से कान दर्द दूर होता है। कुछ समय तक इसके नियमित सेवन से कान का बहरापन भी जाता रहता है।

* सर्दी के सिरदर्द के लिए सिर्फ पीपल की दो-चार कोमल पत्तियों को चूसें। दो-तीन बार ऎसा करने से सर्दी जुकाम में लाभ होना संभव है। उपचार के लिए इसके उपयोग से पूर्व किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

* पीपल के सूखे पत्ते को खूब कूटें। जब पाउडर सा बन जाए, तब उसे कपड़े से छान लें। लगभग 5 ग्राम चूर्ण को दो चम्मच मधु मिलाकर एक महीना सुबह चाटने से दमा और खांसी में लाभ होता है।

* पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों में आराम होता है।

* मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग –http://upchaaraurpryog120.blogspot.in/20…/…/blog-

Rss Kailash Sharma's photo.
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‘Vishnu’s footprint’ in the so-called Humayun Tomb, New Delh


jai hind….

‘Vishnu’s footprint’ in the so-called Humayun Tomb, New Delhi. This photo is reproduced from page 78 of “The World of Ancient India,” translated into English (from G. Le Bon’s original French book published in the 19th century) by David Macrae, Tudor Publishing co., New York, 1974.
This photo proves that the so-called Humayun mausoleum is an ancient Hindu temple palace. Inquiries with archaeologists in Delhi drew a blank They have never seen these footprints, which indicates that they are heir to a lot of non-information and mis-information. Humayun is not at all buried in Delhi. According to Farishta’s chronicle (English translation by John Briggs, Vol. II, page 174) Humayun is buried in Agra, while according to Abul Fazal (Elliot & Dowson, Vol. VI, page 22) Humayun lies buried in Sirhind.

Rss Kailash Sharma's photo.
Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

9th century, Kashmir, Shiva Chakrasamvara, brass murti


9th century, Kashmir, Shiva Chakrasamvara, brass murti – This meditational deity, also known as Heruka (a semi-wrathful guardian of the faith) is represented in his 12-arm form. He has four heads, each with three eyes and four fangs, 2 legs, and 12 hands. Ten of them are holding various attributes such as a drum, knife, skull cup, axe, thunderbolt, bell, chopper, trident, lasso, sword, the other two hold the skin of an elephant stretched behind him like a cloak. He stands on two deities (Bhairava and Kalaratri), and his wearing a skull crown, a garland of 50 freshly severed heads, a tiger skin loincloth, and bone jewellery.

The facial features of the characters and the lobed abdomen of Chakrasamvara are typical of Kashmiri works, along with the use of brass. The lotus base over a rocky formation supported by a plinth is quite singular.

Kashmiri Hindu Front's photo.
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प्रताप-महान” (महाराणा प्रताप) के एक वार से बहलोल खां के सिर से घोड़े तक हो गए थे दो टुकड़े”


संजय कुमार's photo.
संजय कुमार's photo.
संजय कुमार's photo.

प्रताप-महान” (महाराणा प्रताप) के एक वार से बहलोल खां के सिर से घोड़े तक हो गए थे दो टुकड़े”
….
अकबर और महाराणा प्रताप के बीच हुए हल्दीघाटी के युद्ध को महासंग्राम कहा गया। वजह ये कि 5 घंटे की लड़ाई में जो घटनाएं हुईं, अद्भुत थीं। इस युद्ध में महाराणा के एक वार से मुगल सैनिक और उसके घोड़े के दो टुकड़े हो गए थे। अबुल फजल ने कहा कि यहां जान सस्ती और इज्जत महंगी थी। इसी लड़ाई से मुगलों का अजेय होने का भ्रम टूटा था। मेवाड़ सेना में 3000 और मुगल सेना में 5000 सैनिक थे। फौजों से मरे 490 सैनिक। परिणाम भी ऐसा कि कोई हारा, जीता। इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने इसे थर्मोपॉली (यूनान में हुआ युद्ध) कहा है।

18 जून का दिन। मुगल सेना मेवाड़ की राजधानी गोगुंदा पर कब्जा करने निकली। मानसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना ने मोलेला में पड़ाव डाला था। इसे रोकने के मकसद से निकले प्रताप ने लोसिंग में पड़ाव डाला। मोलेला से गोगुंदा जाने को निकली मुगल सेना तीन हिस्सों में बंट गई। एक हिस्सा सीधे गोगुंदा की ओर मुड़ा, दूसरा हल्दीघाटी होकर और तीसरा उनवास की ओर। खून इतना बहा कि जंग के मैदान को रक्त तलाई कहा हल्दीघाटी में दोनों सेनाएं सामने हो गईं। घबराए मुगल सैनिक भागने लगे। मेवाड़ी सेना ने पीछा किया। खमनोर में दोनों फौजों की सभी टुकड़ियां आमने-सामने हो गईं। इतना खून बहा कि जंग के मैदान को रक्त तलाई कहा गया।

” प्रताप के एक वार से बहलोल खां के सिर से घोड़े तक हो गए थे दो टुकड़े” बदायूनी लिखते हैं कि देह जला देने वाली धूप और लू सैनिकों के मगज पिघला देने वाली थी। चारण रामा सांदू ने आंखों देखा हाल लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह पर वार किया। वह झुककर बच गया, महावत मारा गया। बेकाबू हाथी को मानसिंह ने संभाल लिया। सबको भ्रम हुआ कि मानसिंह मर गया। दूसरे ही पल बहलोल खां पर प्रताप ने ऐसा वार किया कि सिर से घोड़े तक के दो टुकड़े कर दिए।

युद्ध में प्रताप को बंदूक की गोली सहित आठ बड़े घाव लगे थे। तीर-तलवार की अनगिनत घाव थीं। चेतक के घायल होने के बाद निकले प्रताप के घावों को कालोड़ा में मरहम मिला। ग्वालियर के राजा राम सिंह तंवर प्रताप की बहन के ससुर थे। उन्होंने तीन बेटों और एक पोते सहित बलिदान दिया। इस पर बदायूनी लिखते हैं कि ऐसे वीर की ख्याति लिखते मेरी कलम भी रुक जाती है। युद्ध के बाद मुगल सेना ने कैंप में लौटकर देखा कि रसद सामग्री भील लूट चुके थे। अगले ही दिन गोगुंदा पर कब्जा कर लिया, लेकिन कुछ नहीं मिला तो फल खाकर समय निकाला। आखिर गोगुंदा छोड़कर लौटना पड़ा। खाली हाथ लौटे मानसिंह पर अकबर इतना नाराज हुआ कि सात दिन तक उसे ड्योढ़ी में नहीं आने दिया।

मान सिंह जैसे गद्दारों की बजह से ही भारत में मुस्लिम शासन चला नहीं तो हम भारतीय इतने बहादुर थे की विश्वविजेता अलेक्जेंडर ( सिकंदरयूनान) जैसे ने हार मान कर वापस चले गए थे ! मान सिंह जैसे गद्दारो पर थूकता हूँ !

Posted in लक्ष्मी प्राप्ति - Laxmi prapti

कीमती रत्न


Nageshwar Singh Baghel's photo.
Nageshwar Singh Baghel's photo.
Nageshwar Singh Baghel's photo.

रायपुर (छत्तीसगढ़) से करीब 120 किलोमीटर और गरियाबंद से 40 किमी दूर मैनपुर ब्लॉक का गांव पायलीखंड .घने जंगल और पहाड़ों के बीच करीब 40 एकड़ जमीन में हीरे,पुखराज,पन्ना,नीलम जैसे कई रत्न मिल रहे है ओ भी जमीन से मात्र पांच फिट नीचे ! यहाँ के स्थानीय निवासी प्रतिदिन सुबह सुबह झुण्ड बना कर आते है गढ्ढा खोदते है और चोरी चोरी कीमती रत्न निकालते है और फिर साम को औने-पौने दाम (कीमत) जो बाजार से हजारो गुना कम में में बेच देतें है ! शहर के बड़े बड़े ब्यापारी मजे मार रहे है और छत्तीसगढ़ सरकार कुम्भकर्णी नींद में सोई हुई है ! (बिस्तर से जानकारी के लिए कमेंट्स बॉक्स में पढ़े )

सुप्रभात मित्रो – जय जय श्री राम – जय श्री कृष्णा !

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

Hindu Valour


Hindu Valour

The Hindus were declared the by the Greeks to be the bravest nation they ever came in contact with. (source: History of India – by Mountstuart Elphinstone p. 197).

It was the Hindu King of Magadha that struck terror in the ever-victorious armies of Alexander. Abul Fazal, the minister of Akbar, after admiring their noble virtues, speaks of the valor of the Hindus in these terms:

“Their character shines brightest in adversity. Their soldiers (Rajputs) know to what it is to flee from the fields of battle, but when the success of the combat becomes doubtful, they dismount from their horses and throw away their lives in payment of the debt of valor.”

Francois Bernier, a 17th century traveler says that:

“The Rajputs embrace each other when on the battlefields as if resolved to die.”

It is well known that when a Rajput becomes desperate, he puts on garments of saffron color, which act, in technical language, is called kesrian kasumal karna (donning saffron robes). (source: Hindu Superiority – By Har Bilas Sarda p. 79 – 91

Kashmiri Hindu Front's photo.
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Myth of the 1000 yrs Mughal rule over the Hindus


Myth of the 1000 yrs Mughal rule over the Hindus

It will be a surprise to most readers who have been fed on the establishment history books to know that it is the Hindus who resisted the onslaught of Arabs for over two centuries unlike the regions west and north of Arabia which succumbed immediately. It took over five hundred years for the Arabs and Turks to lay a foundation for their empire in India and another two centuries before a stable Empire could be formed after Akbar’s reign which also perished after a century.

It is also a mistake to assume that the Arabs ruled India. Actually the Arabs did not rule India except Sindh for 150 years and a small kingdom in Madura for a few years, although many Arab families settled in the country. The rulers were mostly Turks and Afghans (several Turk families had settled in Afghanistan from where they came into India) and senior officers apart from them also included those from Iran.

Posted in PM Narendra Modi

Narendra Modi’s foreign visits…


Since last few days, I have seen quite a few jokes on Narendra Modi’s foreign visits…. and all people are curious why Narendra Modi visits so many countries, and what is India achieving from it. . . Narendra Modi is no greenhorn in politics and statecraft. . . He has already achieved more for Gujarat in his tenure as CM there than any Indian state ever had. . . Few hidden (because the main stream media will purposely ignore them) achievements are given below:

1. BJP Govt. convinced Saudi Arabia not to charge “On-Time Delivery Premium charges” on Crude Oil – Young Petroleum Minister Dharmendra Pradhan & External Affairs Minister Sushma Swaraj sealed the deal. Saved the country thousands of crores…

2. India will build 4 Hydroelectric power stations + Dams in Bhutan (India will get lion’s share in Green energy that will be produced in future from these projects) . .

3. India will build Biggest ever dam of Nepal (China was trying hard to get that) – India will get 83% Green energy produce from that hydro power station for free – in future. . . . .

4. Increased relationship with Japan and they agreed to invest $ 30 Billion in DMIC (Delhi – Mumbai Investment Corridor). That’s Rs 200,000 crores by today’s exchange rates….. . .

5. Increased strategic relationship with Vietnam and Vietnam has now agreed to give contract of Oil exploration to ONGC-Videsh (UPA was not ready to take this at all because they were worried about China – and getting into a conflict of interests on south China sea). The UPA had always been on the backfoot about every aspect of foreign policy. . .

6. Increase Oil Imports from Iran, despite the ban by USA. . Iran agreed to sell in Indian Rupees and it saved our Forex, not just for now, but protected India from future currency fluctuations. India also gets to build “Chabahar” port of Iran, encircling Pakistan. Because we well have exclusive access for our Naval ships in this port. . .

7. India – Australia (NaMo is first PM to visit Australia after 28 yrs), despite Australia being a major supplier of Coal & Uranium. . . NaMo was able to convince Tony Abbott and now Australia will supply Uranium for our energy production. . . .

8. China leaning President Rajapakse lost elections in Sri Lanka – Remember UPA lost “Hambantota” port development – read latest report of CIA, where they mention RAW has played a major role in power shift of Sri Lanka. Now Modi has confirmed he is visiting Sri Lanka in April. And Sri Lanka has backed out of Chinese contract and shifted to Indian project managers. . .

9. With China, as Trade Deficit was increasing, NaMo forced their hand. Anti-Dumping will come soon so China will invest heavily into India. – China has already committed $ 20 billion Investment in India. That’s nearly ₹140,000 crores. . . .

10. On Security – I think adding Ajit Doval to his team is the best decision by NaMo. See the recent tie-up with Pentagon, Israel & Japan. . . Remember I. K. Gujaral as PM stopped RAW’s offensive operations in foreign countries. . Now see how we stopped the Terror Boat and listen to his words … “Any Mumbai like attack from Pakistan and Pakistan will lose Baluchistan!” That’s the language of deterrence that I want to hear as an Indian. We won’t hit first, but if you do, we surely won’t turn the other cheek…. . . .

11. India approved the border road in the NorthEast and around India- China border – Remember just because of China’s opposition, the ADB (Asian Development Bank) didn’t give us funds during UPA regime and UPA held that file under “Environment Ministry control – Remember the infamous “JAYANTHI TAX “? No one bothered about the disastrous effect on our armed forces. . . .

12. India managed to bring back 4,500+ Indians from War zone in Yemen and also brought foreign nationals of 41 different countries, which put India’s name onto the highest platform globally in conducting that rescue mission – PM Narendra Modi specially talked to the new Saudi Arabian king Salman and told him to allow Indian Airforce planes to fly – as Saudi Arabia was attacking on Yemen and Yemen skies was declared NO-FLY Zone: thanks to this we got an assured clear window of a few hours and guys guess who coordinated this? Ajit Doval, Sushama Swaraj and Gen V K Singh. All in person…. When was the last time you ever heard of ministers involved personally in such efforts that didn’t fetch thousands of crores?? Guess the religion of those rescued?? But it isn’t secular to mention that most of those rescued from Yemen or earlier from Iraq weren’t Hindus at all.. . .

13. India’s Air defense was getting weaker by the day, UPA was very happy to let it happen despite repeated specific inputs from the armed forces, NaMo renegotiated Rafale fighter Jets deal with France personally and bought 36 Jets on ASAP basis. At better than rack rates. No middlemen, no commissions… . . .

14. For the first time after 42 yrs Indian Prime Minister visited Canada not to attend some meeting but as a specific state visit, in a Bilateral deal, India was able convince to Canada to supply Uranium for India’s Nuclear reactors for next 5 years. It will be of great help to resolve India’s Power problems. . . .

15. Canada approves visa on arrival for all Indian tourists. . . .

16. Till recently we were exclusively buying Nuclear Reactors from Russia or USA and it was much like beggar kind of situation because they were worried about usage of Nuclear reactor for some other use. So only what they opted to give us, we could get. . Now Narendra Modi was able to convince France and now France will make Nuclear reactors with the latest technology in India. On MAKE IN INDIA efforts.. with collaboration with an Indian company as a partner. . .

17. During 26th Jan. visit of Barak Obama, NaMo convinced USA to drop rule of Nuclear fuel tracking and sorted out Liabilities rules which now open the gates for next 16 Nuclear power plant projects. . . . Isn’t this good enough to improve the lot of India??

The paid media # Presstitutes will ensure you never get to hear this…Spread the word. It’s worth the trouble.
(By Aniruddha Chandokar)

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अगर 30 जनवरी 1948 के दिन गोडसे गांधी वध ना करते तो आज भारत का मानचित्र ऐसा होता। हम सबको तो गोडसे जी का शुर्कगुजार होना चाहिए कि उन्होंने भारत के दो और टुकडे होने से बचा लिए।


अगर 30 जनवरी 1948 के दिन गोडसे गांधी वध ना करते तो आज भारत का मानचित्र ऐसा होता। हम सबको तो गोडसे जी का शुर्कगुजार होना चाहिए कि उन्होंने भारत के दो और टुकडे होने से बचा लिए।

गांधी भक्तों सच को जानो और उसे मान ने कि कोशिश करो। 60 सालों से हमें झुठा इतिहास पढाया जा रहा है। एक पाकिस्तान और बाग्लादेश तो सभाला नहीं जाता इस 60 साल कि सरकार से ये कैसे सभाल पाती। अगर एक गोली गोडसे नेहरु के सीने में भी उतार देते तो आज कश्मीर का मसला भी ना होता।

हमें अकबर महान पढाया जाता है महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी को भगोडा बताया जाता है। हमें गांधी महापुरुष बताया जाता है और भगत, आजाद, और उधम सिंह को खूनी और पागल बताया जाता है।

मेरे मित्रों अगर आप भगत जी और गांधी का बोद्धीक आंकलन करते हो तो आपको 23 साल का वो नौजवान 60 साल के बुड्ढे से ज्यादा समझदार और अक्लमंद लगेगा।
दुख होता है हमारे हि देश में गोडसे और भगत को आंतकवादी कहा जाता है।
जय हिन्द

Sanjay Dwivedy's photo.
Unli

गोडसे को क्या पड़ी थी पंजाब से आये एक रिफ्यूजी मदन लाल पाहवा के दर्द को अपना समझे और देश व् धर्म रक्षार्थ गंधासुर उर्फ़ मोहन लाल करमचंद गाजी का वध कर दे।
वो भी अपना जीवन मजे से काट सकता था।

जो व्यक्ति 50,000 की FD करवा कर बैठ हो और अपने भाई को कहता हो मेरे मरने के बाद उसे ले लेना तो वह व्यक्ति राष्ट्र व् धर्म के।प्रति कितना समर्पित होगा इसका अनुमान क्या कोई लगा सकता है।

फांसी के बाद सावरकर जी गोडसे के घर गये तो उनकी माता व् अन्य परिवारजन फूट फूट कर रोने लग गए।

सावरकर जी बोले आज गोडसे को सभी अपमानित कर रहे है उसे हत्यारा बता रहे है पर याद रखना 50 साल बाद लोग गोडसे के त्याग व् राष्ट्र धर्म के प्रति उसके समर्पण को याद करेंगे।

राजनेताओ ने उनके नाम का प्रयोग करके वाहवाही तो लूटी पर किसी में इतना दम नहीं की आज के दिन गोडसे जी को श्रद्धांजलि भी दे दे।

नमन है उस वीर को जिसने गांधी के 3 फरवरी 1948 को कराची पहुँच कर ढाका से लाहौर कॉरिडोर बनवाने की मांग करने से पहले ही नरकगामी कर दिया।

नकली राष्ट्रपिता देश के लिए नासूर था। भारत का विभाजन तो होना ही था पर उस विभाजन के बाद जो होने वाला था उसे रोककर गोडसे ने जो महान कार्य किया उसका ऋण ये राष्ट्र कभी नहीं चुका पायेगा।

¤हरि: ॐ¤
जय महाकाल.!!!

Sanjay Dwivedy's photo.