Posted in जीवन चरित्र

महारणा प्रताप जी की लंबाई :- 7ft 5 inches, वजन :- 120 Kg, और उनके भाला का वजन :- 80 Kg, आर्मर (कवच) :- 72 Kg, जूते :- 5 kg (shoe each) और दोनों तलवारें :- 25 kg each । ताकत इतनी की दो उँगलियों के बीच सिक्के को रख उसे लंबा कर देते थे ।


महारणा प्रताप जी की लंबाई :- 7ft 5 inches, वजन :- 120 Kg, और उनके भाला का वजन :- 80 Kg, आर्मर (कवच) :- 72 Kg, जूते :- 5 kg (shoe each) और दोनों तलवारें :- 25 kg each । ताकत इतनी की दो उँगलियों के बीच सिक्के को रख उसे लंबा कर देते थे ।

ऐसे वीर शिरोमणि स्वदेश प्रेमी, दृढ़ प्रतिज्ञावादी महाराणा प्रताप जी को उनके 475 वीं जन्मदिवस पर शत शत नमन __/\__

अविनाश सिंह's photo.
अविनाश सिंह's photo.
अविनाश सिंह's photo.
अविनाश सिंह's photo.

हल्दीघाटी में समर लड्यो, वो चेतक रो असवार कठे..
मायड़ थारो वो पूत कठे, वो एकलिंग दीवान कठे…
वो महाराणा प्रताप कठे

महारणा प्रताप जी की लंबाई :- 7ft 5 inches, वजन :- 120 Kg, और उनके भाला का वजन :- 80 Kg, आर्मर (कवच) :- 72 Kg, जूते :- 5 kg (shoe each) और दोनों तलवारें :- 25 kg each । ताकत इतनी की दो उँगलियों के बीच सिक्के को रख उसे लंबा कर देते थे ।

ऐसे वीर शिरोमणि स्वदेश प्रेमी, दृढ़ प्रतिज्ञावादी महाराणा प्रताप जी को उनके 475 वीं जन्मदिवस पर शत शत नमन __/\__

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

Today Moon tenants the constellation of Delta Sagittari or Utharashada and is Pallivetta


Today Moon tenants the constellation of Delta Sagittari or Utharashada and is Pallivetta, the Day when the Deity goes hunting and tomorrow is the concluding Arattu at Lord Bharata Temple in Irinjalakuda. Bless us, O Lord, Praseeda Devesha Jagannivasa !

The Arattu Festival is held for 10 days. This event which starts after the famous Trichur Pooram, begins on Atham Day, when the Moon tenants the constellation of Delta Corvi ( 1 May this year ) and ends on Sravana or Thiruvonam day ( Alpha Aquilae) ( 10th May this year ).

Seventeen caparisoned elephants take part in the parade. Two small baby elephants flank the Main Elephant carrying the Deity. Seven elephants wear Swarna Nettipattam ( headdress made up of pure gold ) and the rest ten elephants wear Velli Nettipattam ( headdress made of pure silver ). Sacred Music or Panchari Melam enliven the proceedings !

The given photo is that of Four Temples

1) Lord Rama Temple at Triprayar
2) Lord Bharata Temple at Irinjalakuda
3) Lord Lakshmana Temple at Moozhikulam
4) Lord Shatrughna Temple at Payammal

All deities are Brahman, the Absolute and the Eternal Law is monotheistic.

Esoteric Symbolism behind Temples.

The outer wall of the Temple represents our gross physical body, Sthoola Sareera, the inner wall represents our subtle physical body, the Sookshma Sareera and the inmost wall represents our causal body, the Karana Sareera. And the Deity within is our own Self !

That is why a Yogi installed a Mirror in one Temple !

Am I a God then ?
Yes, in these pure features I behold
Creative Nature to Soul unfold !

More photos and videos about this huge temple at

Spiritual Tourism XVIII – Heavens on Earth – Koodal Manikyam Temple, Irinjalakuda, part of Nalambala Darshanam
GURUVAYUR4U.COM
Posted in मंत्र और स्तोत्र

परिवार में पारस्परिक प्रेम-प्राप्ति के लिए गणपति स्तोत्र


परिवार में पारस्परिक प्रेम-प्राप्ति  के लिए गणपति स्तोत्र

 

सुवर्णवर्णसुंदर सितैकदन्तबन्धुरं गृहीतपाशकाङ्कुशं वरप्रदाभयप्रदम्

चतुर्भुजं त्रिलोचनं भुजङ्गमोपवीतिनं प्रफुल्लवारिजासनं भजामि सिंधुराननम्

किरीटहारकुण्डलं प्रदीप्तबाहुभूषणं प्रचण्डरत्नकङ्कणं प्रशोभिताङ्घियष्टिकम्

 

प्रभातसूर्यसुन्दराम्बरद्वयप्रधारिणं सरत्नहेमनूपुरप्रशोभिताङ्घ्रिपङ्कजम्

सुवर्णदण्डमण्डितप्रचण्डचारुचामरं गृहप्रदेन्दुसुन्दरं युगक्षणप्रमोदितम्

कवीन्द्रचित्तरञ्जकं महाविपत्तिभञ्जकं षडक्षरस्वरूपिणं भजे गजेन्द्ररूपिणम्

विरिञ्चविष्णुवन्दितं विरूपलोचनस्तुतं गिरीशदर्शनेच्छया समर्पितं पराम्बया

निरन्तरं सुरासुरैः सपुत्रवामलोचनैः महामखेटकर्मसु स्मृतं भजामि तुन्दिलम्

मदौघलुब्धचंचलालिमञ्जुगुञ्जितारवं प्रबुद्धचित्तरञ्जकं प्रमोदकर्णचालकम्

अनन्यभक्तिमानवं प्रचण्डमुक्तिदायं नमामि नित्यमादरेण वक्रतुण्डनायकम्

दारिद्रयविद्रावणमाशु कामदं स्तोत्रं पठेदेतदजस्त्रमादरात्

पुत्री कलत्रस्वजनेषु मैत्री पुमान्  भवेदेकवरप्रसादात्

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

मुग़ल साम्राज्य


बाबर ने मुश्किल से कोई 4 वर्ष राज किया।
हुँमायुं को ठोक पीटकर भगा दिया।
मुग़ल साम्राज्य की नींव अकबर ने डाली और जहाँगीर,शाहजहाँसे होते हुए अवरंगजेब आते आते उखड़ गया।
कुल 100 वर्ष(अकबर 1556ई से ओरंगजेब1658ई तक) के समय के स्थिर शासन को मुग़ल काल नाम से # इतिहासमें एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है….मानो सृष्टि आरम्भ से आजतक के कालखण्ड में तीन भाग कर बीच के मध्यकाल तक इन्हीं का राज रहा….!
अब इस स्थिर(?) शासन की तीन चार पीढ़ी के लिए कई किताबें, पाठ्यक्रम, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न, विज्ञापनों में गीत, ….इतना हल्ला मचा रखा है, मानो पूरा मध्ययुग इन्हीं 100वर्षों के इर्द गिर्द ही है।
जबकि उक्त समय में मेवाड़ इनके पास नहीँ था।दक्षिण और पूर्व भी एक सपना ही था।
अब जरा विचार करें…..क्या भारत में अन्य तीन चार पीढ़ी और शताधिक वर्ष पर्यन्त राज्य करने वाले वंशों को इतना महत्त्व या स्थान मिला है?
हर्यक वंश, मौर्य साम्राज्य, गुप्त काल, इनके वंशजों ने कई कई पीढ़ियों तक शानदार शासन चलाए। अकेला विजयनगर साम्राज्य ही 300 वर्ष तक टिका रहा। हीरे माणिक्य की # हम्पीनगर में मण्डियां लगती थी।
पर उनका वर्णन करते समय इतिहासकारों को मुँह का कैंसर हो जाता है। जी के की किताबों में पन्ने कम पड़ जाते है।पाठ्यक्रम के पृष्ठ सिकुड़ जाते है।कोचिंग वालों की नानी मर जाती है। प्रतियोगी परीक्षकों के हृदय पर हल चल जाते है।
वामपंथी इतिहासकारों ने नेहरुवाद का मल भक्षण कर, जो उल्टियाँ की.उसे ज्ञान समझ चाटने वाले चाटुकारों…!
तुम्हें धिक्कार है!!!

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

घरेलू नुस्खे


घरेलू नुस्खे
1. दो चम्मच धनिया उबालकर सेवन करने से आँव में फौरन
लाभ होगा ।
2. प्रात: काल बिना कुछ खाए 5दाने मुनक्का खाने से
कब्ज दूर होती है ।
3. लौंग के तेल की दो-तीन बूँदें चीनी या बतासे के साथ
लेने से हैजे में फायदा होता है ।
4. एक गिलास गरम पानी में डेढ़ चम्मच शहद गरारे करने
से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है और आवाज खुल जाती है

5. शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह
शाम पीने से जुकाम ठीक हो जाता है ।
6. एरंडी के तेल में कपूर मिलाकर सुबह शाम मसूड़ों पर मलें
यह प्रयोग मसूड़ों के लिये अत्यंत लाभकारी है।
7. अमरूद के पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर काढ़ा
तैयार कीजिये ।
8. पत्तियों को इतना उबालिये की उनका रस उस पानी
में आ जाए और पानी उबले दूध की तरह गाढ़ा हो जाए ।
9. इस काढ़े को बार-बार कुल्ला कीजिये, इससे भयानक से
भयानक दांत का दर्द भी दूर हो जायेगा ।
10. हल्दी और दूध गर्म कर उसमें गुड़ मिलाकर पीने से
जुकाम, कफ व शरीर दर्द से राहत मिलती है ।
11. जायफल के तेल का फाहा दांत में रखने से दंतक्षय रुक
जाता है । और दांत के कीड़े मर जाते है । और दांत की
पीड़ा भी शांत होती है ।
12. देसी घी को जरा सा गरम करके उसमें चुटकी भर
नमक मिलाकर होंठों पर मलें, होंठों का फटना बंद हो
जायेगा ।
13. जहां खटमल दिखाई दें वहां नारंगी का छिलका
कुचलकर रख दें खटमल नौ दो ग्यारह हो जाएंगे ।
14. भुने हुये प्याज को पीसकर उसमें जीरे का चूर्ण और
मिश्री मिलाकर खाने से लू का प्रकोप नष्ट होता है ।
15. मुख की दुर्गंध तथा छाले दूर करने के लिये अनार की
छाल पानी में उबाल कर थोड़ी देर मुंह में रखकर गरारे
करें ।
16. खांसी आने पर अरबी की सब्जी खाएं इससे खांसी को
तुरंत आराम मिलेगा|
17. तुलसी के पत्तों का रस चीनी में मिलाकर पीने से
दिन में दो-तीन बार प्याज खाने या इमली को भिगो
कर उसका पानी पीने से लू नहीं लगती ।
18. जले हुये स्थान पर केले का गूदा लगाने से जलन
मिटेगी व फफोले नहीं पड़ेगे ।
19. कत्था पानी में घोल कर गाढ़ा- गाढ़ा छालों पर
लेप करें या गाय के दूध से बने दही में पका केला मिलाकर
खाएं, छाले बिल्कुल ठीक हो जाएंगे ।
20. गन्ने का रस पीलिया रोग में बड़ा लाभ-प्रद है यह
पीलिया की जड़ काट देता है ।
21. कपूर के चूर्ण को नारियल तेल में मिलाकर रात को
सिर में लगायें सुबह किसी अच्छे शैम्पू से सिर धो ले जुएं मर
जाएंगे ।
22. ततैया काटने पर कटे हुये स्थान पर तुरंत मिट्टी का
तेल लगाएं, जलन शांत हो जाएगी ।
23. एक चम्मच तुलसह का रस, एक चम्मच अदरक का रस
और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार
सेवन करने से कफ तथा खांसी में राहत मिलती है.

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

सैंकड़ो बीमारियों का एक इलाज -प्रातः जल सेवन


सैंकड़ो बीमारियों का एक इलाज -प्रातः
जल सेवन
आज के इस दौर में, जहाँ हमारे देशवासी छोटी-सी-छोटी
तकलीफ के लिए बड़ी ही हाईपावर की दवा-गोलियों का
इस्तेमाल कर अपने शरीर में जहर घोलते जा रहे हैं, वहीं हमारे ऋषि-
महर्षियों द्वारा अनुभव कर प्रकाश में लाया गया एक
अत्यधिक आसान प्रयोग, जिसे अपनाकर प्राचीनकाल से
करोड़ो भारतवासी सदैव स्वस्थ व प्रसन्नचित्त रहते हैं. आप भी
उसे अपनाएं व सैकड़ो बीमारियों से छुटकारा पायें.
नयी तथा पुरानी अनेकों प्राणघातक बीमारियाँ दूर करने का
एक ही सरल उपाय है – प्रातःकाल में जल-सेवन। प्रतिदिन
प्रभात काल में सूर्योदय से पूर्व उठकर, कुल्ला करके, ताँबे के
पात्र में रात का रखा हुआ 2 से 4 बड़े गिलास (आधा से सवा
लीटर) पानी पी ले। पानी भरकर ताँबे का पात्र हमेशा विद्युत
की कुचालक वस्तु (प्लास्टिक, लकड़ी या कम्बल) के ऊपर रखें।
खड़े होकर पानी पीने से आगे चलकर पिण्डलियों में दर्द की
तकलीफ होती है। अतः किसी गर्म आसन अथवा विद्युत की
कुचालक वस्तु पर बैठकर ही पानी पीयें। पानी में चाँदी का एक
सिक्का डालकर रखने से पानी और अधिक शक्तिदायक हो
जाता है। तदनंतर 45 मिनट तक कुछ खायें-पीयें नहीं। प्रयोग के
दौरान नाश्ता या भोजन करने के दो घंटे बाद ही पानी पीयें।
प्रातःकाल नियमित रूप से जल सेवन करने से निम्निलिखित
नयी एवं पुरानी बीमारियों में लाभ होता हैः
कब्ज,
मधुमेह (डायबिटीज),
ब्लडप्रेशर,
लकवा (पेरालिसिस),
कफ, खाँसी, दमा (ब्रोंकाइटिस),
यकृत (लीवर) के रोग,
स्त्रियों का अनियमित मासिक स्राव,
गर्भाशय का कैंसर,
बवासीर (मस्से),
कील-मुहाँसे एवं फोड़े-फुंसी,
वृद्धत्व व त्वचा पर झुर्रियाँ पड़ना,
एनीमिया (रक्त की कमी), मोटापा,
क्षयरोग (टी.बी.), कैंसर,
पेशाब की समस्त बीमारियाँ (पथरी, धातुस्राव
आदि),
सूजन, बुखार, एसिडिटी (अम्लपित्त),
वात-पित्त-कफ जन्य रोग,
सिरदर्द, जोड़ों का दर्द,
हृदयरोग व बेहोशी,
आँखों की समस्त बीमारियाँ,
मेनिंजाइटिस, प्रदररोग,
गैस की तकलीफ व कमर से संबंधित रोग,
मानसिक दुर्बलता,
पेट के रोग आदि।
इस अनुभूत प्रयोग से बहुतों को लाभ हुआ है। आप भी लाभ
उठाइये। मंदाग्नि, वायुरोग व जोड़ों के दर्द से पीड़ित रोगी
गुनगुने पानी का प्रयोग करें। यदि गर्म न पड़े तो उसमें 1 से 2
काली मिर्च का पाउडर या सोंठ अथवा अजवायन मिला
सकते हैं।
चार गिलास पानी एक साथ पीने से स्वास्थ्य पर कोई
कुप्रभाव नहीं पड़ता। आरम्भ के दो-चार दिनों तक पेशाब कुछ
जल्दी-जल्दी आयेगा लेकिन बाद में पूर्ववत् हो जायेगा। गुर्दों
की तकलीफ वाले सवा लीटर पानी न पियें, उन्हें चिकित्सक से
सलाह लेकर पानी की मात्रा निर्धारित करनी चाहिए।

राजीव दीक्षित राजपाल भारत's photo.
Posted in ज्योतिष - Astrology

रत्न के बदले मूल (पेड़ की जड़) पहनी जाती है ये सभी जानते हैं-


रत्न के बदले मूल (पेड़ की जड़) पहनी जाती है ये सभी जानते हैं—मगर जड़ो के साथ-साथ कुछ ख़ास पेड़-पौधे भी हैं जो घर पर लगाये जाएँ तो ग्रह अच्छा फल देते हैं—
ग्रह ———       रत्न———–     जड़—————–          पेड़ पौधे
सूर्य——                        माणिक्य—        बेल की जड़—                 सूर्यमुखी फूल,आम,पपीते का पेड़।
चन्द्र—–            -मोती———     खिरनी———–             लौकी का पेड़।
मंगल—–          मूंगा——-         अनन्त मूल——–           लाल-मिर्च।
बुध——-           पन्ना——-        विधारा ———–                        धनिया,सौंफ,मेथी।
गुरु——                        पुखराज—–       केले की जड़——             लौंग,केला,हल्दी का पेड़।
शुक्र—–             हीरा——–        स्वेत-लज्जावती—           कच्चे आम,हरी मिर्च,सफ़ेद फूल।
शनि—–                        नीलम——        शमी—————-          सेव,नारंगी,निम्बू।
राहु—–             गोमेद—–          स्वेत-चन्दन———-       सेव,नारंगी,निम्बू।
केतु—               लहसुनिया–        अश्वगंध————–       लाल मिर्च।

Posted in AAP, राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

“कोकशास्त्रीय कवि कुमार विश्वास का सेक्स स्केंडल से खानदानी नाता है… कुछ में यह स्वयं आरोपी है तो……… कुछ में आरोपी इसका भ्राता है…….


प्रदीप सजल गुप्ता's photo.

भाई राजीव को आभार~

“कोकशास्त्रीय कवि कुमार विश्वास का
सेक्स स्केंडल से खानदानी नाता है…
कुछ में यह स्वयं आरोपी है तो………
कुछ में आरोपी इसका भ्राता है……….

चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय मेरठ में कुमार विश्वास के बड़े भाई डॉ. संजीव शर्मा राजनीति विभाग में रीडर हैं। इन पर सन 2005 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, नोएडा में राजनीती शास्त्र की रीडर डॉ.अभा अग्रवाल के यौन शोषण का आरोप लगा जो क्रमबद्ध तरीके से दैनिक जागरण में प्रकाशित होता रहा। कुमार विश्वास के एक और बड़े भाई हैं डॉ. विकास शर्मा वर्तमान में डीएवी डिग्री कॉलेज, बुलंदशहर में अस्थाई प्रधानाचार्य हैं। यह जनाब पहले आर आर डिग्री कॉलेज, अलवर में अध्यापक थे… वहाँ 1999 सेक्स स्केंडल में फंसे… एक महिला को स्वयं को अविवाहित बता कर विवाह का झांसा दे कर लम्बे समय तक शोषण करने के आरोपों से घिरे। फिर छात्राओं के यौन शोषण पर हंगामा खड़ा हो गया… लोग सड़कों पर उतर आये तो जनाब नौकरी छोड़ कर वहां से खिसक लिए। फिर 2005-07 में रिसर्च स्कॉलर मोनिका के साथ इनके यौन शोषण के किस्से का ज्वालामुखी ही फट पड़ा था और इनकी जुलूस निकाल कर पिटाई हुयी थी… इनकी बहन डॉ. वंदना MMPG कॉलेज, मोदी नगर अपनी व्यापक जनसेवा और चारित्रिक उदारता के लिए अति लोकप्रिय हैं।
कुल मिलकर कुमार विश्वास की कविताओं में ही नहीं… करतूतों में ही नहीं… उनके DNA में भी कोकशास्त्र है। बहरहाल अमेठी में उन्होंने लोकसभा के चुनाव में वोट भले ही मात्र 1100 पाए हैं परन्तु लोक सभा का चुनाव… कोकसभा के तरीकों से कुछ अपियाइनों के साथ बेहद अपनेपन से लड़ा। अब यह आप नेता कह रहे हैं कि…
हम आपके हैं कौन ?…तो
अपियाइन क्यों रहे मौन ?
यह आप के पाप और पापियों, आपियों के यौन शोषण और आपियायिनों के यौन पोषण के क्रमगत विकास का कोकशास्त्रनुमा समाज शास्त्र है।

Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

In the Bhagavad Gita, Lord Krishna tells Arjuna:


In the Bhagavad Gita, Lord Krishna tells Arjuna:

“All the worlds from Brahma’s world (the universe) are periodic. Arjuna.
They, those who know the day and night, know that the day of Brahma is a thousand yugas long and a night is a thousand yugas long.
From the unmanifested, all the manifest things spring forth on the arrival of the day (of Brahma). On the onset of night all these sink into what is called the unmanifested.

Partha, (Arjuna), this multitude of created things having existed over and over again and helplessly destroyed at the onset of night, spring forth on the onset of day.”

All this sounds a little like the modern theory of an oscillating universe that begins with a big bang that all matter flying out until the outrushing matter comes to a halt and collapses back into a tiny speck, leading to another big bang, and so on. An entire cycle according to present-day cosmological ideas could take 10,000million to 20,000 million years. It seems incredible that the ancient Hindus could hit upon this idea thousands of years ago. Some biased scholars have tended to dismiss this agreement of the order of length of the cycle as a mere coincidence.

“Interestingly, modern science has estimated that the age of the earth is about 4 billion years. Scholars feel it is uncanny that the Vedic Aryans could have conceived of such a vast span of time over 3,500 years ago that would be similar to the same figure estimated by science today.”