Posted in PM Narendra Modi

मोदी सरकार ने चीन व पाकिस्तान के काटे तार


Vikram Pratap's photo.
Vikram Pratap's photo.
Vikram Pratap's photo.
Vikram Pratap's photo.
Vikram Pratap's photo.

==>> मोदी सरकार ने चीन व पाकिस्तान के काटे तार <<==

Secular राजनीती और Prostitution मिडिया हाउस ये हमें नही बतायेगे की मोदी की कूटनीति क्या है चीन और पाकिस्तान के क्या उद्देश्य है हिंदुस्तान को तोरने के लिए |

बिस्तार से :-
जिस दिन से नरेँद्र मोदी जी प्रधान सेवक बने है तब से लगातार भारत इस पूरे भारतीय उपमहाद्वीप, अरब सागर एवं हिंद महासागर में अपना वर्चस्व बढ़ा रहा है फिर वो चाहे नेपाल +भूटान + जापान + विएतनाम + श्रीलंका + सेशेल्स + मॉरीशस हो या अरब देशों के साथ भारत का व्यापार।

सामरिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ईरान के चाबहार बंदरगाह को बनाने व विकास करने की दिशा में भारत और ईरान ने बुधवार को एक बड़ा अहम फैसला किया और इस संदर्भ में एक समझौते ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किया। इस समझौते के तहत भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में निवेश करेगा और भारतीय कंपनियाँ दो बर्थों को लीज पर लेकर उसे बहूउद्देशीय कंटेनर एवं मल्टी-पर्पस कार्गो (माल) टर्मिनल बनाने का काम करेगी।

चाबहार बंदरगाह को विकसित करने का निर्णय और इस मामले में ईरान की हामी यह दर्शाती है कि भारत ने चीन और पाकिस्तान के नापाक और चालाकी भरी साजिश को कूटनीतिक तौर पर एक ज़बरदस्त झटका दिया है। भारत के व्यापारियों व उत्पादों के लिए अफगानिस्तान समेत मध्य एशिया तथा यूरोप में सस्ते जमीनी रास्ते से व्यापार करना हमेशा से थोड़ा मुश्किल रहा है क्योंकि बीच में पाकिस्तान पड़ता है जो यदा कदा हमसे लड़ाइयों और झड़पों में मशगूल रहा है।

पाकिस्तान ने न तो अफ़ग़ानिस्तान के उत्पादों को अपना रास्ता दिया अटारी सीमा तक आने के लिए और न ही भारत को मुक्त रास्ता देता है मध्य एशिया तक जाने के लिए। और तो और पिछले कुछ सालों से चीन ने पकसितन के दक्षिणी चोर पर ग्वादर बंदरगाह का निर्माण व विकास शुरू कर दिया है जिससे होगा यह कि चीन के मालवाहक जहाज तथा नौसैनिक जहाजों का बेड़ा भारत से लगकर अरब सागर से होता हुआ पाकिस्तान में आ-जा सकेगा जिससे ज़ाहिर तौर पर भारत के सुरक्षा को चिंता तो होगी ही।चीन को इससे दो फायदे होंगे, एक तो मध्य एशिया, पाकिस्तान एवं यूरोप तक उसके उत्पादों की पहुँच बढ़ जाएगी और वह भी सस्ते में। दूसरा यह कि इस अरब सागर क्षेत्र में उसकी पहुँच नहीं थी और भारत एकमात्र बड़ी शक्ति है लेकिन पाकिस्तान ने चीन को यहाँ आने (घुसपैठ) करने की अनुमति दे दी है जिसके ऐवज में चीन उसके ग्वादर बंदरगाह में अरबों का निवेश कर रहा है।

हिन्दुस्थान के चाबहार [ ईरान के चाबहार बंदरगाह ] वाले रणनीति से पाकिस्तान बिफर पड़ा है क्योंकि उसके ग्वादर पोर्ट से सिर्फ 72 किलोमीटर दूर ही चाबहार पोर्ट स्थित है जिसके द्वारा भारत अब अफगानिस्तान, ईरान, मध्य एशिया तथा यूरोप तक अपने व्यापास के तार फैला सकता है। सामरिक दृष्टि से यह चीन व पाकिस्तान के तार काटने जैसा है।

पाकिस्तान के बड़े बड़े विशेषज्ञ तो इस बात पर खार खाये बैठे हैं कि आखिर कैसे एक इस्लामिक देश ईरान भारत से नजदीकी बढ़ा रहा है और व्यापार की छूट दे रहा है.

इसी तरह सऊदी अरब, कतर व कुवैत समेत अन्य अरब देश भी लगातार भारत से अच्छे संबंध बनाए हुए हैं क्योंकि उनको भारत में एक बड़ा निष्पक्ष मित्र नज़र आता है और वह भी विश्वसनीय।

वाकई में यदि नरेंद्र मोदी की सरकार चीन व पाकिस्तान के इस ग्वादर बंदरगाह का काट ‘चाबहार’ के जरिये निकाल सकती है तो निश्चित ही भारत के सामरिक, आर्थिक ताकत व कूटनीतिक शक्ति के लिहाज से “आने वाले दिन अच्छे हैं।”
इसे कहते है की ” अच्छे दिन आ गए ” …….

कुछ लोग सब्जियों के दाम के साथ देश के विकास की तुलना करते है लेकिन उनकी समज में यह नहीं आता के देश सीमा सुरक्षित होंगी तब घरकी समस्या का निवार आसानी से हो सकेगा।

आज आंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी जी ने हिन्दुस्तान को बड़ी उंचाइ तक पहुंचाया है।

Posted in संस्कृत साहित्य

પિતૃઓને શ્રાદ્ધ ની પ્રાપ્તિ કઇ રીતે થાય ?


પિતૃઓને શ્રાદ્ધ ની પ્રાપ્તિ કઇ રીતે થાય ?
આ જીજ્ઞાસા સ્વાભાવિક છે કે શ્રાદ્ધમાં
દેવામાં આવતી અન્ન પિંડ વગેરે સામગ્રિ પિતૃઓને
મળે કઇ રીતે ; કેમકે કર્મ અનુસાર મૃત્યુ પછી જીવ ને
ભિન્ન ભિન્ન ગતિ પ્રાપ્ત થાય છે. કોઇ દેવ યોનિ
પામે, કોઇ મનુષ્ય યોનિ પામે,કોઇ પિતૃ યોનિ,
કોઇ પ્રેત યોનિ, કોઇ હાથી, કોઇ કીડી, તો કોઇ
વૃક્ષ ની યોનિ પામે. શ્રાદ્ધ માં દેવામાં આવતા
પિંડદાન આદિ હાથી નું પેટ કઇ રીતે ભરી શકે ? એવો
જ રીતે કીડી આવડા મોટા પિંડ ને કઇ રીતે ખાઇ
શકે ? દેવતાઓ તો અમૃતથી જ તૃપ્ત થાય,પિંડ
આપવાથી એની તૃપ્તિ કઇ રીતે શક્ય બને? આ
પ્રશ્નોના જવાબ આપણા શાસ્ત્રકારો એ સુસ્પષ્ટ
રીતે આપ્યો છે કે નામ અને ગોત્ર નાં આધારે
વિશ્વેદેવ અને અગ્નિષ્વાત આદિ દિવ્ય દેવ આપણા
દિધેલા પિંડદાનાદિ ને પિતૃઓને પ્રાપ્ત કરાવી
આપે છે | જો આપણા પિતૃઓ દેવયોનિમાં હોય તો
આપણે દીધેલું પિંડદાન આદી તેમને અમૃત નાં રૂપમાં
પ્રાપ્ત થાય | મનુષ્યયોનિ માં અન્નરૂપમાં તથા
પશુયોનિમાં તૃણનાં રૂપમાંપ્રાપ્ત
થાય.નાગયોનિમાં હોય તો વાયનાંરૂપમાં
પ્રાપત થાય.
नाममंत्रास्तथा देशा भवान्तरगतानपि ।
प्राणिनः प्रीणयन्त्येते तदाहारत्वमागतान् ।।
देवो यदि पिता जातः शुभकर्मानुयोगतः ।
तस्यान्नममृतं भूत्वा देवत्वेऽप्युनुगच्छति ।।
मर्त्यत्वे ह्यन्नरूपेण पशुत्वे च तृणं भवेत् ।
श्राद्धान्नं वायुरूपेण नागत्वे ऽ प्युपतिष्ठति ।।
જે રીતે ગૌશાળામાં અનેક ગાયો ની વચ્ચે ભૂલું
પડેલ વાછરડું કોઇ ને કોઇ રીતે પોતાની માતા ને
શોધી લે છે. તે જ રીતે મંત્ર દ્વારા નામ ગોત્ર
પૂર્વક અપાયેલ વસ્તુ તે જે યોનિ માં હોય તે પ્રમાણે
તેમને યથોચિત માત્રામાં પહોચાડી દેવામાં
આવે. નામ ગોત્ર હ્રદયની શ્રદ્ધા એવં સંકલ્પપૂર્વક
દેવામાં આવેલ પદાર્થોને ભક્તિપૂર્વક મંત્ર દ્વારા
તેમની પાસે પહોચાડી આપે છે. જીવ ચાહે સૈંકડો
યોનિયોંને પાર કેમ ન કરી ગયો હોય તૃપ્તિ તો
એમની પાસે પહોંચી જાય છે.
यथा गोष्ठे प्रणष्टां वै वत्सो विन्देत मातरम् ।
तथा तं नयते मंत्रो जन्तुर्यत्रावतिष्ठते ।
नाम गोत्रं च मंत्रश्च दत्तमन्नं नयन्ति तम् ।
अपि योनिशतं प्राप्तांस्तृप्तिस्ताननुगच्छति ।।

                         ~ महादेव हर ~