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भीतरगाँव मंदिर के नाम से ही इसकी स्थिति का पता चलता है।


भीतरगाँव मंदिर के नाम से ही इसकी स्थिति का पता चलता है। किवदंती के अनुसार यह पुष्पपुर या फूलपुर नामक प्राचीन गाँव के आंतरिक भाग में स्थित है। भीतरगाँव में एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 6 वीं शताब्दी में भारत के स्वर्णिम गुप्तकाल के दौरान हुआ था। अत: इस मंदिर का नाम इस गाँव के आधार पर पड़ा।
भीतरगाँव मंदिर को सबसे प्राचीन हिन्दू पवित्र स्थान माना जाता है जिसमें ऊंची छत या शिखर है। 68.25 ऊंची यह संरचना टेराकोटा और 18 इंच लम्बी, 9 इंच चौड़ी और 3 इंच मोटी ईंटों से बनी है। यह 36 फीट लंबे और 47 फीट चौड़े मंच पर बना है। मंदिर की दीवारों की मोटाई 8 फीट है।
इसमें एक गुम्बदाकार मेहराब है जिसका उपयोग भारत में पहली बार किया गया। पूरा ढांचा उस समय की वास्तुकला का प्रमाण है। 15 फीट लम्बा और 15 फीट चौड़ा यह गर्भगृह दो मंजिला है और यह देवी सीता के अपहरण से अधिक नर और नारायण की पश्चाताप की हिंदु अवधारणा को प्रस्तुत करता है।[bhitargaon kanpur]

Jigna Shah's photo.
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