Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

Sikh woman (Bhaag kaur) fought against tyrant mughals in the 18th century.


Sikh woman (Bhaag kaur) fought against tyrant mughals in the 18th century.

Mai BHAGO (Mata Bhaag Kaur)

Mai bhago (also called bhaag Kaur) was born at Amritsar Punjab.She married to Bhai Nidhan singh of patti village(Punjab).She was a very brave woman and was expert in Archery,swordsmanship and horsemanship.She was one of the Sikh women warriors and was a great Sikh women, with a Keski tied around her head, with the Khalsa Uniform, with her Kirpan fighting, she was the first women in the history of Punjab, to fight On a battlefield.

BATTLE OF MUKTSAR (1705)

She led a force of 40 Sikhs in the battle of MUKTSAR in 1705.All the 40 Sikhs fought bravely with 1000 Mughal army. The Sikhs defeated the Mughal forces in the battle.All the 40 Sikhs died fighting in the battle field except Mai bhago. Later on,Guru Gobind Singh ji addressed them as 40 muktas (the fourty liberators).

She also accompanied Guru gobind singh to Nanded with other Sikhs and served Khalsa. In 1708,Mai Bhago settled down at Jinvara (Karnataka) ,where she died at old age…

"Mai BHAGO (Mata Bhaag Kaur)

 Mai bhago (also called bhaag Kaur) was born at Amritsar Punjab.She married to Bhai Nidhan singh of patti village(Punjab).She was a very brave woman and was expert in Archery,swordsmanship and horsemanship.She was one of the Sikh women warriors and was a great Sikh women, with a Keski tied around her head, with the Khalsa Uniform, with her Kirpan fighting, she was the first women in the history of Punjab, to fight On a battlefield. 

 BATTLE OF MUKTSAR (1705)

 She led a force of 40 Sikhs in the battle of MUKTSAR in 1705.All the 40 Sikhs fought bravely with 1000 Mughal army. The Sikhs defeated the Mughal forces in the battle.All the 40 Sikhs died fighting in the battle field except Mai bhago. Later on,Guru Gobind Singh ji addressed them as 40 muktas (the fourty liberators).

 She also accompanied Guru gobind singh to Nanded with other Sikhs and served Khalsa. In 1708,Mai Bhago settled down at Jinvara (Karnataka) ,where she died at old age..."
Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

Madhubani


Madhubani is a town and a municipality in Madhubani district in the Indian state of Bihar. It is the district headquarters. It lies 26 km northeast of Darbhanga town and was part of the erstwhile ‘Bettiah Raj’. Internal disputes and family quarrels divided the Bettiah Raj in course of time. The Madhuban Raj in Madhubani was created as a consequence.[1] The word “Madhuban” means “forest of honey” from which Madhubani is derived, but sometimes it is also known as “madhu”+”vaani”, meaning “sweet” “voice/language”.[2] Madhubani is the cultural heart of Mithilanchal, being the birthplace of many literary people and home to Madhubani Paintings.It is said to be that Madhubani is the world’s second city who adopted democracy. The Madhubani district is situated at height of 58 meters from Sea. North :Hill region of Nepal South :Darbhanga East  :Supaul West  :Sitamarhi • Madhubani occupies a total of 3501 km2. • Main Rivers are Kamla, Kareh, Balan, Bhutahi Balan, Gehuan, Supen, Trishula, Jeevachh, Koshi and Adhwara Group. • High Flood Level is 54.017 m. • Whole District is under Earthquake ZONE 5. • Total Cropped Area – 218381 Hect. • Barren /Uncultivable Land – 1456.5 Hect • Land under Non-agricultural use – 51273.24 Hect • Cultivable Barren Land – 333.32 Hect • Permanent Pasture – 1372.71 Hect • Miscellaneous Trees – 8835.90 Hect • Cultivable Land – 232724 Hect • Cropping Intensity – 134.23% Madhubani Town is located at 26°22′N 86°05′E / 26.37°N 86.08°E / 26.37; 86.08.[3] It has an average elevation of 56 metres (183 feet). As of 2001[update] India census,[4] Madhubani Town had a population of 166,285. Males constitute 53% of the population and females 47%. Madhubani Town has an average literacy rate of 60%, just above the national average of 59.5%: male literacy is 67%, and female literacy is 53%. In Madhubani Town, 16% of the population is under 6 years of age. In earlier times[when?] there was a landlord named Babu who was the OWNER of all of the estate of Babubarahi. Consequently, it is now known as Babu Barahi. There was a ancient king known as GANGERA, whose palace found under the agriclture field at the time of excavation of canal joining Jaynagar and Saharghat. where that his palace found known as Gangaur and name of this place also derived from king name. The palace of king Janak of Janakpur and father of lordess Sita is 12 km from gangaur. most no of ponds in madhubani. Maithili has highly developed literature. Madhubani has produced several authors in different fields. Vidyapati wrote collection of poems known as “Padabali”. Dr. Jaikant Mishra wrote History of Maithili literature. Mukund Jha Bakshi wrote Mithila Bhasamay Itihas, a first historical book in Maithili.Madhubani has been a center of learning from ancient time and it retains that position even now.

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

राजसमंद जिले का पिपलांत्री गांव न सिर्फ बेटियों को बचाने, बल्कि उनके बहाने चारों तरफ हरियाली से लबरेज माहौल पैदा करने की एक कामयाब मिसाल बन कर खड़ा है।


Rajeev Singla shared Baba Ramdev‘s photo to the group:Vote for BJP.
2 hrs ·

"राजसमंद जिले का पिपलांत्री गांव न सिर्फ बेटियों को बचाने, बल्कि उनके बहाने चारों तरफ हरियाली से लबरेज माहौल पैदा करने की एक कामयाब मिसाल बन कर खड़ा है।
पिपलांत्री में एक बेटी जन्म लेती है तो गांव के लोग एक सौ ग्यारह पेड़ लगाते हैं और उनके फलने-फूलने से लेकर देखरेख तक का पूरा इंतजाम करते हैं।
 इस तरह बेटियों के प्रति यह स्वीकार-भाव पर्यावरण संरक्षण के अभियान का भी रूप ले चुका है। 
नतीजतन पिछले छह साल में इस इलाके में ढाई लाख से ज्यादा पेड़ और उन्हें दीमक से बचाने के लिए इतनी ही संख्या में एलोवेरा यानी ग्वारपाठा के पेड़ लगाए जा चुके हैं।"

राजसमंद जिले का पिपलांत्री गांव न सिर्फ बेटियों को बचाने, बल्कि उनके बहाने चारों तरफ हरियाली से लबरेज माहौल पैदा करने की एक कामयाब मिसाल बन कर खड़ा है।
पिपलांत्री में एक बेटी जन्म लेती है तो गांव के लोग एक सौ ग्यारह पेड़ लगाते हैं और उनके फलने-फूलने से लेकर देखरेख तक का पूरा इंतजाम करते हैं।
इस तरह बेटियों के प्रति यह स्वीकार-भाव पर्यावरण संरक्षण के अभियान का भी रूप ले चुका है।
नतीजतन पिछले छह साल में इस इलाके में ढाई लाख से ज्यादा पेड़ और उन्हें दीमक से बचाने के लिए इतनी ही संख्या में एलोवेरा यानी ग्वारपाठा के पेड़ लगाए जा चुके हैं।

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

मन्दिरो में दान देने वाले हिन्दू भाइ-बहन सुप्रीम कोर्ट की ये न्यूज़ पढ़े.


ISKCON ( International Society of
Krishna Consiousness ) एक
AMERICAN संस्था है जिसने अनेक देश में
कृष्ण भगवान के मंदिर खोले हुए है और ये
मँदिर AMERICA की कमाई के सबसे बड़े
SOURCE है क्योँकि इन मंदिर पर
INCOME TAX भी नही है । ये
संस्था लोगो की अंधभक्ति का फ़ायदा उठ
खरब डॉलर इन मंदिर में आनेवाले चढ़ावे के
माध्यम से AMERICA ट्रान्सफर कर
देती है और दुर्भाग्य से इस
लुटेरी ISKCON संस्था के सबसे
ज्यादा मंदिर भारत में है। आपको जानकर
आश्चयॅ होगा कि AMERICA की COLGATE
कंपनी एक साल में जितना COLGATE
कँपनी जितना NET PROFIT AMERICA
भेजती है उससे 3 गुना ज्यादा अकेले
BANGLORE का ISKCON मंदिर भारत
का पैसा AMERICA Transfer कर
देता है!। और BANGLORE से
भी बड़ा मंदिर दिल्ली में है, और दिल्लीसे
भी बड़ा मंदिर मुंबई में है और उससे
भी बड़ा मंदिर मथुरा में हो गया है
भगवान कृष्ण की छाती पर । और
वहाँ धुआँधार चढ़ावा आता है । .
कृपया ISKCON और इस तरह
की सभी लुटेरी संस्थाओँ का प्रबल विरोध
करके देश को लुटने से बचाने में
अपना सहयोग दे।

इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर…

Dhanyawad
मन्दिरो में दान देने वाले हिन्दू भाइ-बहन सुप्रीम कोर्ट की ये न्यूज़ पढ़े….

आप सोचते हैं कि मन्दिरों में किया हुआ दान, पैसा/सोना,..इत्यादि हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए काम आ रहा है ओर आपको पुन्य मिल रहा है तो आप निश्चित ही बड़े भोले… हैं।

कर्नाटक सरकार के मन्दिर एवं पर्यटन विभाग (राजस्व) द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार 1997 से 2002 तक पाँच साल में कर्नाटक Congress सरकार को राज्य में स्थित मन्दिरों से
“सिर्फ़ चढ़ावे में” 391 करोड़ की रकम प्राप्त हुई, जिसे निम्न मदों में खर्च किया गया-

1) मुस्लिम मदरसा उत्थान एवं हज मक्का मदिना सब्सिडी, विमान टिकट – 180 करोड़ (यानी 46%)
2) ईसाई चर्च को अनुदान (To convert poor Hindus into Christian) – 44 करोड़ (यानी 11.2%)
3) मन्दिर खर्च एवं रखरखाव – 84 करोड़
(यानी 21.4%)
4) अन्य – 83 करोड़ (यानी 21.2%)
कुल 391 करोड!!!!!

ये तो सिर्फ एक राज्य का हिसाब हैं….

सबसे अमीर- तिरुपति बालाजी, शिर्डि साइबाबा, ये दोनों मन्दिर Congress के कब्जे में है…. हर रोज हजारों करोड़ों पैसा/सोना दान …सच हिन्दुओं को ही पता नहीं चलेगा…

भगवत् गीता मे भगवान ने बताया हैं कि दान देते वक्त अपनी विवेक बुद्धि से दान दे…ताकि वह समाज/देश की भलाई में इस्तेमाल हो, नहीं तो दानि पाप का ही भागीदार है….

हिन्दुओं के पैसों से, हिन्दुओं के ही विनाश का षड्यंत्र ६० साल से चल रहा है, ओर यह सच्चाई हिन्दुओं को पता ही नहीं….

कृपया अधिक से अधिक हिन्दुओ को भेजे तथा उन्हें जागरूक करें….

जय श्री कृष्ण !

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Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

पापमोचनी एकादशी → 17th March, 2015.


पापमोचनी एकादशी → 17th March, 2015.

महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो वे बोले : ‘राजेन्द्र ! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था ।’

मान्धाता ने पूछा : भगवन् ! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये ।

लोमशजी ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! पूर्वकाल की बात है । अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी । वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे । मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी । मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये । मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी । मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे । रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा । इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये । मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई । जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन् ! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये ।’

मेघावी बोले : देवी ! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो ।

अप्सरा ने कहा : विप्रवर ! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं ! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये !

लोमशजी ने कहा : राजन् ! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे । उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये । उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया । उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी ! तू पिशाची हो जा ।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली : ‘विप्रवर ! मेरे शाप का उद्धार कीजिये । सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है । ब्रह्मन् ! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन् ! मुझ पर कृपा कीजिये ।’

मुनि बोले : भद्रे ! क्या करुँ ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है । फिर भी सुनो । चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी ।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है । सुन्दरी ! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी ।

ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये । उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा : ‘बेटा ! यह क्या किया ? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला !’

मेघावी बोले : पिताजी ! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है । अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय ।

च्यवन ने कहा : बेटा ! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा ।

पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया । इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये । इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया । ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी ।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।

‪#‎पापमोचनीएकादशी‬ ‪#‎PaapmochaniEkadashi‬

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"पापमोचनी एकादशी → 17th March, 2015.

महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो वे बोले : ‘राजेन्द्र ! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था ।’

मान्धाता ने पूछा : भगवन् ! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये ।

लोमशजी ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! पूर्वकाल की बात है । अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी । वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे । मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी । मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये । मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी । मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे । रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा । इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये । मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई । जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन् ! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये ।’

मेघावी बोले : देवी ! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो ।

अप्सरा ने कहा : विप्रवर ! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं ! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये !

लोमशजी ने कहा : राजन् ! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे । उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये । उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया । उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी ! तू पिशाची हो जा ।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली : ‘विप्रवर ! मेरे शाप का उद्धार कीजिये । सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है । ब्रह्मन् ! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन् ! मुझ पर कृपा कीजिये ।’

मुनि बोले : भद्रे ! क्या करुँ ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है । फिर भी सुनो । चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी ।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है । सुन्दरी ! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी ।

ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये । उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा : ‘बेटा ! यह क्या किया ? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला !’

मेघावी बोले : पिताजी ! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है । अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय ।

च्यवन ने कहा : बेटा ! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा ।

पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया । इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये । इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया । ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी ।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।

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Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

काशी में एक कर्मकांडी पंडित का आश्रम था


काशी में एक कर्मकांडी पंडित का आश्रम था, जिसके सामने एक मोची बैठता था। वह जूतों की मरम्मत करते वक्त कोई न कोई भजन गाता रहता था। लेकिन पंडितजी का ध्यान कभी भी उसके भजन की तरफ नहीं जाता था। एक बार पंडित जी बीमार पड़ गए और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। उस समय उनका ध्यान मोची के भजनों की तरफ गया। पंडित जी का मन रोग की तरफ से हट कर भजनों की तरफ चला गया। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ, कि जूते गांठने वाले के भजन सुनते-सुनते उनका दर्द कम हो रहा है।

एक दिन एक शिष्य को भेजकर उन्होंने मोची को बुलवाया और कहा ‘भाई तुम तो बहुत अच्छा गाते हो। मेरा रोग बड़े-बड़े वैद्यों के इलाज से भी ठीक नहीं हो रहा था लेकिन तुम्हारे भजन सुनकर मैं ठीक होने लगा हूं।’ उन्होंने उसे सौ रुपये देते हुए कहा ‘तुम इसी तरह गाते रहना।’ रुपये पाकर मोची बहुत खुश हुआ। लेकिन पैसा पाने के बाद से उसका मन कामकाज से हटने लगा। वह भजन गाना भूल गया। दिन-रात यही सोचने लगा कि रुपये को संभालकर कहां रखे। काम में लापरवाही के कारण उसके ग्राहक भी उस पर नाराज रहने लगे।

धीरे-धीरे उसकी दुकानदारी चौपट होने लगी। उधर भजन बंद होने से पंडित जी का ध्यान फिर रोग की तरफ जाने लगा। उनकी हालत फिर बिगड़ने लगी। एक दिन अचानक मोची पंडित जी के पास पहुंचकर बोला ‘आप अपने पैसे वापस रख लीजिए।’ पंडित जी ने पूछा ‘क्यों, क्या किसी ने तुमसे कुछ कहा?’ मोची बोला ‘कहा तो नहीं, लेकिन इन पैसों को अपने पास रखूंगा तो आप की तरह मैं भी बिस्तर पकड़ लूंगा। इसी रुपये ने मेरा जीना हराम कर दिया। मेरा गाना भी छूट गया। काम में मन नहीं लगता, इसलिए कामकाज ठप हो गया। मैं समझ गया कि अपनी मेहनत की कमाई में जो सुख है, वह पराये पैसों में नहीं है। आपके धन ने तो परमात्मा से भी नाता तुड़वा दिया।’

"काशी में एक कर्मकांडी पंडित का आश्रम था, जिसके सामने एक मोची बैठता था। वह जूतों की मरम्मत करते वक्त कोई न कोई भजन गाता रहता था। लेकिन पंडितजी का ध्यान कभी भी उसके भजन की तरफ नहीं जाता था। एक बार पंडित जी बीमार पड़ गए और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। उस समय उनका ध्यान मोची के भजनों की तरफ गया। पंडित जी का मन रोग की तरफ से हट कर भजनों की तरफ चला गया। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ, कि जूते गांठने वाले के भजन सुनते-सुनते उनका दर्द कम हो रहा है।

एक दिन एक शिष्य को भेजकर उन्होंने मोची को बुलवाया और कहा 'भाई तुम तो बहुत अच्छा गाते हो। मेरा रोग बड़े-बड़े वैद्यों के इलाज से भी ठीक नहीं हो रहा था लेकिन तुम्हारे भजन सुनकर मैं ठीक होने लगा हूं।' उन्होंने उसे सौ रुपये देते हुए कहा 'तुम इसी तरह गाते रहना।' रुपये पाकर मोची बहुत खुश हुआ। लेकिन पैसा पाने के बाद से उसका मन कामकाज से हटने लगा। वह भजन गाना भूल गया। दिन-रात यही सोचने लगा कि रुपये को संभालकर कहां रखे। काम में लापरवाही के कारण उसके ग्राहक भी उस पर नाराज रहने लगे।

धीरे-धीरे उसकी दुकानदारी चौपट होने लगी। उधर भजन बंद होने से पंडित जी का ध्यान फिर रोग की तरफ जाने लगा। उनकी हालत फिर बिगड़ने लगी। एक दिन अचानक मोची पंडित जी के पास पहुंचकर बोला 'आप अपने पैसे वापस रख लीजिए।' पंडित जी ने पूछा 'क्यों, क्या किसी ने तुमसे कुछ कहा?' मोची बोला 'कहा तो नहीं, लेकिन इन पैसों को अपने पास रखूंगा तो आप की तरह मैं भी बिस्तर पकड़ लूंगा। इसी रुपये ने मेरा जीना हराम कर दिया। मेरा गाना भी छूट गया। काम में मन नहीं लगता, इसलिए कामकाज ठप हो गया। मैं समझ गया कि अपनी मेहनत की कमाई में जो सुख है, वह पराये पैसों में नहीं है। आपके धन ने तो परमात्मा से भी नाता तुड़वा दिया।'"
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

इतिहास गवाह है ,


Rahul Singh shared 10tak news‘s photo to the group:Vote for BJP.
1 hr ·

इतिहास गवाह है ,
जब जब किसी ने भरतपुर की तरफ आँख उठाई वो यमराज के पास गया , यहाँ महाराज सूरजमल जेसे वीर पैदा हुए है जिनसे पुरे asia के राजा मदद मांगने आते थे , इनही के बेटे जवाहर सिंह ने दिल्ली मै मुगलों को बड़ी बेरेह्मी से पिटा था ,और मुगलों का सुरक्षा कवच कहे जाने वाला दुवार (gate) यादगार के लिए उख!ड लाये थे जो आज भी भरतपुर मै लगा हुआ है ,अफ़सोस की बात है हमारी किताबो मै इसका जिक्र तक भी नही किया जाता ! क्या ये हमारे बच्चो को पढ़ना नहीं चाहिए ?
जुड़े whatsaap :-8013637371 पर

"इतिहास गवाह है , 
जब जब किसी ने भरतपुर की तरफ आँख उठाई वो यमराज के पास गया , यहाँ महाराज सूरजमल जेसे वीर पैदा हुए है जिनसे पुरे asia के राजा मदद मांगने आते थे , इनही के बेटे जवाहर सिंह ने दिल्ली मै मुगलों को बड़ी बेरेह्मी से पिटा था ,और मुगलों का सुरक्षा कवच कहे जाने वाला दुवार (gate) यादगार के लिए उख!ड लाये थे जो आज भी भरतपुर मै लगा हुआ है ,अफ़सोस की बात है हमारी किताबो मै इसका जिक्र तक भी नही किया जाता ! क्या ये हमारे बच्चो को पढ़ना नहीं चाहिए ? 
जुड़े whatsaap :-8013637371 पर"

इतिहास गवाह है ,
जब जब किसी ने भरतपुर की तरफ आँख उठाई वो यमराज के पास गया , यहाँ महाराज सूरजमल जेसे वीर पैदा हुए है जिनसे पुरे asia के राजा मदद मांगने आते थे , इनही के बेटे जवाहर सिंह ने दिल्ली मै मुगलों को बड़ी बेरेह्मी से पिटा था ,और मुगलों का सुरक्षा कवच कहे जाने वाला दुवार (gate) यादगार के लिए उख!ड लाये थे जो आज भी भरतपुर मै लगा हुआ है ,अफ़सोस की बात है हमारी किताबो मै इसका जिक्र तक भी नही किया जाता ! क्या ये हमारे बच्चो को पढ़ना नहीं चाहिए ?
जुड़े whatsaap :-8013637371 पर

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

हार्ट अटैक: ना घबराये ……!!!


"हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!
सहज सुलभ उपाय ....
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता....
पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।
पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।
इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।
* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ......
तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..
शेयर करना ना भूले..... शेयर करना ना भूले..... शेयर करना ना भूले....."

हार्ट अटैक: ना घबराये ……!!!
सहज सुलभ उपाय ….
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता….
पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।
पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।
इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।
* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ……
तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..
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कॉंग्रेस ने कश्मीर को पाकिस्तान बना दिया और कोई आवाज़ नहीं उठाया।


कॉंग्रेस ने कश्मीर को पाकिस्तान बना दिया और कोई आवाज़ नहीं उठाया।

પ્રહલાદ પ્રજાપતિ

'काँग्रेस ने चुपचाप पूरे नार्थ ईस्ट का इसाईकरण कर दिया कर दिया गया और कोई आवाज़ तक नहीं उठी ये सेक्युलरिज़्म की विशेषता है
.
कॉंग्रेस ने कश्मीर को पाकिस्तान बना दिया और कोई आवाज़ नहीं उठाया।
.
आज सभी मोदी जी को कोस रहे हैं। अभी तक किसी ने भी PDP को दोष नही दिया.चाहे विरोधी या जनता.
सारा दोष मोदी जी पर, जबकि J&K का कानून C.M.को स्वाययता देता है.
.
यही कमजोरी हे हिन्दुओ मे,यदी घर का लडका दूसरो की ठुकाई करके आता हे तो सबसे पहले अपने लडके को ही धमकाता है। दुसरो को कहने नही जाता की तुने मेरे लडके से झगडा क्यो किया। 
इसलिऐ सब मोदीजी को कह रहे है । मुफ्ती को कोई नही।
वह रे बेशर्म हिंदुओं। डूब मारो।'

काँग्रेस ने चुपचाप पूरे नार्थ ईस्ट का इसाईकरण कर दिया कर दिया गया और कोई आवाज़ तक नहीं उठी ये सेक्युलरिज़्म की विशेषता है
.
कॉंग्रेस ने कश्मीर को पाकिस्तान बना दिया और कोई आवाज़ नहीं उठाया।
.
आज सभी मोदी जी को कोस रहे हैं। अभी तक किसी ने भी PDP को दोष नही दिया.चाहे विरोधी या जनता.
सारा दोष मोदी जी पर, जबकि J&K का कानून C.M.को स्वाययता देता है.
.
यही कमजोरी हे हिन्दुओ मे,यदी घर का लडका दूसरो की ठुकाई करके आता हे तो सबसे पहले अपने लडके को ही धमकाता है। दुसरो को कहने नही जाता की तुने मेरे लडके से झगडा क्यो किया।
इसलिऐ सब मोदीजी को कह रहे है । मुफ्ती को कोई नही।
वह रे बेशर्म हिंदुओं। डूब मारो।

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Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

હોંશિયાર એવો અતિશ્રીમંત ઘરનો એક નવયુવક કૉ


જરૂર વાંચજો                 ખૂબ જ હોંશિયાર એવો અતિશ્રીમંત
ઘરનો એક
નવયુવક કૉલેજના અંતિમ
વરસની પરીક્ષાની તૈયારી કરી રહ્યો હતો.
એના પિતા એ
વિસ્તારના સૌથી ધનવાન અને
પ્રતિષ્ઠિત ઉદ્યોગપતિ હતા.
એના પિતાએ પૂછયું કે
પરીક્ષાની તૈયારીઓ કેવી ચાલે છે ?
દીકરાએ
જવાબ આપ્યો કે કદાચ
યુનિવર્સિટીમાં પ્રથમ
નંબર આવી જાય તો પણ નવાઈ નહીં.
બાપ આ
સાંભળીને
ખૂબ ખુશ થયો. થોડી વાર પછી એ યુવકે
ફરી પૂછ્યું
કે, ‘પિતાજી, જો મારો પ્રથમ નંબર આવે
તો ફલાણા શૉરૂમમાં રાખવામાં આવેલી હોન્ડાની નવી સ્પોર્ટસ
કાર મને ભેટમાં આપશો ખરા ?’
બાપે હા પાડી. એના માટે
તો આવી કારની ખરીદી એ
રમતવાત હતી. પેલો યુવક ખૂબ રાજી થઈ
ગયો.

કાર ખરેખર તો એના માટે ડ્રીમ કાર
હતી.
એનો વાંચવાનો ઉત્સાહ અનેક
ગણો વધી ગયો.
મહેનતુ અને હોશિયાર તોએ હતો જ. રોજ
કૉલેજથી આવતાં જતાં એ પેલા શૉ-રૂમ
પાસે
ઊભો રહી હોન્ડા-સ્પૉર્ટસ-કારને બેક્ષણ
જોઈ
લેતો.
થોડા દિવસો પછી જ આ
કારના સ્ટિયરિંગ પર
પોતાની આંગળીઓ ફરતી હશે એ
વિચારમાત્ર એને
રોમાંચિત કરી દેતો. એની પરીક્ષા ખૂબ
જ સરસ
રહી.
યુનિવર્સિટીમાં એ પ્રથમ આવ્યો છે
એવી જાણ
થતાં જ એણે કૉલેજ
પરથી પોતાના પિતાને ફોન
કરી દીધો. પોતાની ભેટની વાત પણ
યાદ કરી. ઘર
નજીક એ ઘરે પહોંચ્યો.
કમ્પાઉન્ડનો દરવાજો ખોલીને
આંગણામાં એણે નજર નાખી, પણ
પેલી કાર ક્યાંય
દેખાઈ નહીં. એ થોડોક નિરાશ અને
ઉદાસ થઈ
ગયો.
કદાચ
કારની ડિલિવરી પછી લેવાની હશે તેમ
વિચારીને એ ઘરમાં દાખલ થયો. નોકરે
એને
આવીને
કહ્યું કે શેઠ સાહેબ
એમના રૂમમાં એના આવવાની રાહ જુએ છે.
દોડતો એ
પિતાજીના રૂમમાં પહોંચ્યો.
એના પિતાજી જાણે
એના આવવાની રાહ જ જોઈ
રહ્યા હોય તેવું લાગ્યું. એના આવતાં જ
એમણે
ઊભા થઈ એ યુવકને ગળે વળગાડ્યો. અમીર
બાપનો દીકરો હોવા છતાં બાપના પૈસે
તાગડધિન્ના કરવાને બદલે દિલ દઈને
ભણવાવાળા દીકરા માટે એમને કેટલું બધું
ગૌરવ છે
એવું પણ કહ્યું. પછી સુંદર
કાગળમાં વીંટાળેલું એક
નાનકડું બૉક્સ એને આપીને કહ્યું ; ‘દીકરા,
આમ

આગળ વધતો રહે એવા મારા આશીર્વાદ
છે. આ લે
તારા માટે મારા તરફથીઉત્તમ ભેટ !’ એટલું
કહી બૉક્સ
દીકરાના હાથમાં આપી તેઓ
પોતાના કામે
જવા નીકળી ગયા.
પિતાના ગયા પછી દીકરાએ બૉક્સ
ખોલ્યું. જોયું
તો એમાં પાકા પૂઠાંવાળું
સોનેરી અક્ષરોથી લખાયેલું
રામાયણ હતું. રામાયણ બંને
હાથમાં પકડીને એ
થોડી વાર એની સામે જોઈ રહ્યો. એને
અત્યંત
ગુસ્સો આવ્યો. રામાયણ એમ જ ટેબલ પર
મૂકીને
એ વિચારમાં પડી ગયો. ઘરમાં અઢળક
પૈસો હોવાછતાં પોતાની એક જ
માગણી પૂરી કરવામાં બાપનો જીવ ન
ચાલ્યો એ
વાત એને હાડોહાડ કોરી ખાતી હતી.
સ્પોર્ટસ કાર
અપાવવાની હા પાડ્યા પછી પણ
પિતાનો જીવ ન
ચાલ્યો એનું એને ખૂબ જ લાગી આવ્યું.
એ પોતે પણ સ્વમાની હતો. એટલે
બીજી વખત
પિતા પાસે માગવાનો કે એમને યાદ
અપાવવાનો તો સવાલ જ
નહોતો પેદા થતો.
ઘણો વખત વિચાર કર્યા પછી એણે કાગળ
લીધો.
એમાં ટૂકમાં એટલું જ લખ્યું કે, ‘પૂજ્ય
પિતાજી,
સ્પૉર્ટસ કારને બદલે રામાયણ
આપવામાં આપનો કોઈ શુભ ઈરાદો જ હશે
એમ
માનું
છું. પણ મારે સ્પૉર્ટસકાર જોઈતી હતી. હું
ઘરેથી જાઉં છું. ક્યાં જાઉં છું તે નહીં કહું.
જ્યારે
તમારી સમકક્ષ પૈસાદાર બની જઈશ ત્યારે
જ હવે
તમને મોં બતાવીશ. એ જ… પ્રણામ.’
ચિઠ્ઠી રામાયણના બૉક્સ પર મૂકી એ
ઘરેથી નીકળી ગયો.
વરસો વીતી ગયાં. યુવકનાં નસીબ ખૂબ
સારાં હતાં.
મહેનતુ અને હોશિયાર તો એ હતો એટલે એણે
જે
બિઝનેસ શરૂ કર્યો તેમાં તેને
અણધારી સફળતામળી અને એ
અતિશ્રીમંત
બની ગયો. સુંદર મજાનું ઘર બનાવી એણે
લગ્ન
પણ કરી લીધાં. વચ્ચે વચ્ચે એને
પોતાના પ્રેમાળ
પિતા યાદ આવી જતા.પરંતુ એ પ્રેમાળ
ચહેરા પાછળ રહેલો કંજૂસ
માણસનો ચહેરો એને
તરત જ દેખાતો. માતાના મૃત્યુ પછી પોતે
આટલા વરસમાં એક સ્પોર્ટસ-કાર જ
માગી અને
અઢળક પૈસો હોવા છતાં એના પિતાએ
કારને બદલે
ફિલૉસૉફી ઝાડવા ફકત રામાયણ જ
આપ્યું, એ યાદ આવતાં જ એનું મન
કડવાશથી ભરાઈ જતું.
પરંતુ એક દિવસ વહેલી સવારથી જ ન જાણે
કેમ
એને એના પિતાની યાદ ખૂબ જ
આવતી હતી. હવે
તો એ ઘણા વૃદ્ધ પણ થઈ ગયા હશે. કંઈ
નહીં તો એમની સાથે વાત તો કરવી જ
જોઈએ.
વૃદ્ધ માણસોને
સંતાનોના અવાજથી પણ
શાતા વળતી હોય છે. પિતા સાથે ફોન
પર વાત
કરવાની એને અતિતીવ્ર ઈચ્છા થઈ
આવી. આમેય
સમયની સાથે દરેક ગુસ્સાનું કારણ નાનું થતું
જાય
છે
અને એકાદ દિવસ એવો પણ આવે કે માણસને
એમ
થાય કે, ‘અરે ! આવા નાનાઅને
વાહિયાત કારણ
માટે
આપણે આટલા બધા ગુસ્સે થયા હતા ?!’ આવું

કંઈક એ યુવાનની સાથે બની રહ્યું હતું. એણે
ફોન
લઈ પોતાના ઘરનો નંબર ઘુમાવ્યો.
સામા છેડે જ્યારે કોઈએ ફોન
ઊંચક્યો ત્યારે
એના ધબકારા ખૂબ વધી ગયા હતા.
પિતાજી સાથે
પોતે કઈ રીતે વાત કરી શકશે એની અવઢવ
સાથે
એણે ‘હેલો !’ કહ્યું. પણ એને
નિરાશા સાંપડી.
સામા છેડે એના પિતાજી નહોતા પણ
ઘરનો નોકર
હતો. નોકરે કહ્યું કે : ‘શેઠ સાહેબ
તો અઠવાડિયા પહેલાં અવસાન
પામ્યા. તમે
પોતાનું
સરનામું જણાવેલ નહીં એટલે તમને જાણ
શી રીતે
કરી શકાય ? પણ મરતાં સુધી તમને યાદ
કરીને
રડતા હતા. એમણે કહેલું કે તમારો ફોન
ક્યારેય
પણ
આવે તો તમને બધો કારોબાર
સંભાળવા બોલાવી લેવા. એટલે તમે
આવી જાવ !’
પેલા યુવક પર તો જાણે વજ્રઘાત થયો.
પોતાના પિતાને
એમની છેલ્લી ક્ષણોમાં પણ
મળી ન શકાયું એ વાતની વેદનાએ
એના હૈયાને
વલોવી નાખ્યું. પણ હવે શું થાય ?
પોતાના ઘરે
પાછા જવાની ઈચ્છા સાથે એણે સહકુટુંબ
વતન
તરફ
પ્રયાણ કર્યું. ઘરે આવીને સીધો જ એ
પોતાના પિતાના રૂમમાં ગયો.
એમની છબી સામે
ઊભા રહેતાં જ એની આંખો વરસી પડી.
થોડી વાર
આંખો બંધ કરીને એ એમ જ ઊભો રહ્યો.
પછી પોતાના રૂમમાં આવ્યો.
એવામાં એની નજર પોતાના ટેબલ પર
પડેલ
સોનેરી અક્ષરવાળા રામાયણ પર પડી,
આ એ જ
રામાયણ હતું જેના કારણે એણે ઘર છોડ્યું
હતું.
એના મનમાંથી પિતાજી માટેની બધી જ
કડવાશ
ગાયબ થઈ ગઈ હતી. એણે રામાયણ
હાથમાં લઈ
ખોલ્યું. પ્રથમ પાના પર જ એના પિતાએ
લખ્યું
હતું:
‘હે ભગવાન ! મારા દીકરા જેવા ઉત્તમ
સંતાનને
ભેટ
કઈ રીતે આપવી તે તું મને શિખવાડજે. એણે
માગેલ
વસ્તુઓ સાથે એને ઉત્તમ
સંસ્કારોનો વારસો પણ
આપી શકું એવું કરજે.’
એ યુવકને આજે પોતાના પિતાએ લખેલ આ
શબ્દો રામાયણના શબ્દો જેટલા જ
મહાન લાગ્યા.
એ શબ્દોને ચૂમવા એણે રામાયણને હોઠે
લગાડ્યું.

જ વખતે એનાં પાનાંઓ વચ્ચે ક્યાંક
છુપાયેલ એક
નાનકડું કવર નીચે જમીન પર પડ્યું.
પેલા યુવાને એ કવર ખોલ્યું.
એમાં હોન્ડા સ્પૉર્ટસ-
કારની ચાવી અને સંપૂર્ણ
ચૂકતે લખેલું પેલા શૉ-રૂમનું બિલ હતું. એના પર
તારીખ હતી : એ પ્રથમ નંબરે પાસ થઈને
આવ્યો હતો એ જ દિવસની….!કંઈકેટલીય
વાર
સુધી એ નીચે બેસી રહ્યો. પછી હૃદય
ફાટી જાય
એટલું બધું રડ્યો. ધ્રુસકે ધ્રુસકે. એ
પછી કલાકો સુધી સૂનમૂન બની એ
પોતાનાપિતાજીની છબી સામે
જોતો રહ્યો.
ભેટ આપણે ધારીએ એ રીતે મળે તો જ આપણે
એનો સ્વીકાર કરીએ એ તો કેવું ?
વડીલો તો ઠીક,
ભગવાન તરફથી જુદી જુદી રીતે પૅકિંગ
કરાયેલ
આવી કેટલી બધી ભેટોનો આપણે
અસ્વીકાર
કરતાં હોઈશું ? કારણ એક જ કે
આપણી ધારણા પ્રમાણે એનું પૅકિંગ થયું
નથી હોતું.
બસ ! એટલું જ !!

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