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मीडिया PUBLIC को गुमराह कर रही है पूरी बात नहीं बता रही है


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  • Ashok Bhardwaj मीडिया PUBLIC को गुमराह कर रही है पूरी बात नहीं बता रही है , हर सीट का Analysis करने पर एक ही बात दिखाई दे रही है की ये BJP की हार नहीं चक्रव्यूह की जीत है , चक्रव्यूह ?? जी हाँ चक्रव्यूह , जैसे चक्रव्यूह में अभिमन्यु को कायर्तापूर्वक घेर कर मारा गया था वैसा ही कुछ इस बार BJP के साथ किया गया है
    90% सीटों के नतीजे बताते हैं की पिछली बार दिल्ली चुनावों में प्रत्येक Seat पर On An Average यदि BJP को 35,000 Votes मिले थे , AAP को 30,000 Votes और Congress को 25,000 Votes तो इस बार भी BJP को उतने ही 35,000 Votes प्राप्त हुए लेकिन इस बार AAP को अपने पिछले 30,000 + कोंग्रेस के 20,000 Votes = 50,000 Votes प्राप्त हुए हैं
    साफ़ है या तो Congress अपने Voters को सम्भाल नहीं पाई या फिर उसने जानबूझकर अंतिम समय पर उनसे AAP के लिए VOTING करवा दी ताकि BJP को हराया जा सके इसीलिए हम कह रहे हैं की BJP के Voters को दिल से सलाम है क्योंकि उन्होनें इतनी विपरीत परिस्तिथि में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और अपना पूरा फर्ज अदा किया
    इसलिए ये कहना पूरी तरह से सही नहीं है की BJP के कार्यकर्ता घर पर बैठ गए या उन्होनें मेहनत नहीं की , मेहनत की BJP के लिए वोट भी डलवाए हैं लेकिन इस विचित्र परिस्तिथि या कहें की जाल की ना तो उन्होनें और ना ही अमित शाह जी ने कल्पना की होगी की ऐसा भी सम्भव हो सकता है की कोंग्रेस का लगभग पूरे का पूरा इतनी भारी मात्रा में Vote Bank इस तरह से AAP में TRANSFER हो जाए
    यही मुख्य वजह है BJP की हार की और सीटें ना जीत पाने की, हर सीट पर देखा जाए तो पता चलता है की वोट BJP को भी जमकर पड़ा है लेकिन AAP के Votes में कोंग्रेस के Votes ADD हो जाने के कारण AAP इतने बड़े अंतर से हर सीट जीत गयी है
    यही FORMULAE बिहार में नितीश कुमार और लालू यादव जैसे भ्रष्ट्र और गुंडा टाईप नेता अपनाने के लिए एक हुए हैं BJP को रोकने के लिए , दिल्ली में इस FORMULAE की सफलता एक प्रकार से BJP को ईश्वर का ही संकेत प्रतीत होती है की बिहार में भी ऐसा ही हकीकत में भी सम्भव हो सकता है इसलिए जल्द ही इसकी काट निकाली जाए
    किरण बेदी को BJP में लाना गलती नहीं थी , किरण बेदी को BJP में देर से लाना गलती जरुर थी , चुनाव से मात्र 20 दिन पहले लाने पर वो बेचारी ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकती थी ,कम से कम 2 महीने पहले उन्हें लाया जाता तो उन्हें सन्गठन और उसकी कार्यप्रणाली को ठीक प्रकार से समझने का उचित समय मिलता , कृष्णानगर सीट पर भी वो मात्र 2400 votes से हारी है और कारण यहाँ भी वही है कोंग्रेस Votes का AAP में मिल जाना
    इसे BJP की हार कहना वैसा ही है जैसे कोई मूर्ख चक्रव्यूह में अभिमन्यु की हार कहे ,
    जितने AAPtards , मोदी-विरोधी और देशविरोधी ताकतें इस 1 षड्यंत्र की कामयाबी पर खुश हो रहे हैं वो एक बात समझ लें की उनकी ये ख़ुशी Short Term की है Long Term की नहीं
    अभिमन्यु को घेरकर मार के अधर्मी कौरव भले ही 1 दिन खुश हो लिए थे लेकिन अंतिम जीत फिर भी पांडवों और धर्म की ही हुई थी |
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