Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

आप इतिहास की सामान्य जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति से पूछिये कि सिकंदर से भारत में कौन लडा था ? किसने उसे वापस जाने पर मजबूर किया था ?? तुरंत जवाब मिलेगा – पोरस .


आप इतिहास की सामान्य जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति से पूछिये कि सिकंदर से भारत में कौन लडा था ? किसने उसे वापस जाने पर मजबूर किया था ?? तुरंत जवाब मिलेगा – पोरस .
पर क्या वास्तव में यही सचाई है ? या अधूरी सचाई है ?? महान ईरानी साम्राज्य को ध्वस्त करने वाली , पोरस के हाथियों के सामने भी डटकर खडी रहने वाली सिकंदर की विश्वविजयी सेना ने विपाशा ( व्यास ) नदी से आगे बढने इंकार कर सिकंदर से विद्रोह क्यों कर दिया ? किससे डर गये थे वे ?? यूनानी इतिहासकारों ने तो उनके इस ‘ डर ‘ को छिपाया ही है , भारतीय इतिहासकारों ने भी ” व्यक्ति पूजा ” की प्रवृत्ति के चलते इस घटना के महान नायकों को नेपथ्य में डाल दिया .
और ये थे………… ” कठ ” .
कौन थे ये ” कठ ” ? क्या विशेषता थी इनकी ??
क्यों यूनानी इनसे जीत कर भी अपना साहस गंवा बैठे थे ??? आइये जानते हैं …
वैदिक आर्यों का एक प्रसिद्ध जन ” मद्र ” ( नकुल सहदेव की माँ इसी मद्र की राजकुमारी थीं ) था जो रावी नदी के किनारे अवस्थित था और शाकल ( स्यालकोट ) इनकी राजधानी थी . कालांतर में इनकी ही एक शाखा ” कठ ” सर्वाधिक प्रभुत्वपूर्ण सिद्ध हुई क्योंकि इन्होंने आज से २५०० साल पहले ” यूजेनिक्स ” के सिद्धांत अपनाकर जैसी उच्च उपलब्धियाँ अर्जित कीं उसकी तुलना कुछ हद तक सिर्फ ” स्पार्टा ” , ” मालवों ” और पूर्वी भारत के ” लिच्छिवियों ” से ही की जा सकती है . स्पार्टा के लोगों की ही भांति कठ अपने यहाँ ‘ शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर ” और ” असुंदर ” शिशुओं को जीने नहीं देते थे और उन्हें मार डालते थे . इसके परिणाम स्वरूप हर कठ युवक क्षीर गौर वर्ण ,पीत केश , नील या स्वर्ण वर्णी नेत्र , अत्यधिक लंबाई , दृढ शरीर और उच्च मस्तिष्क का स्वामी होता था . शस्त्रों और शास्त्रों में इनकी समान गति थी . जितने भयंकर ये योद्धा थे उतने ही अधिक चिंतनशील थे जिसका प्रमाण है ” कठोपनिषद ” ….
जी हाँ प्रसिद्ध उपनिषदकार -” नचिकेता ” इसी कठ गणराज्य के गणक्षत्रिय थे जो प्रसिद्ध ऋषि बने .
अस्तु , झेलम के युद्ध में पोरस पर विजय ( ? ) या संधि के पश्चात सिकंदर आगे बढा और जा टकराया कठों से जिन्होंने अपने नगर सांकल के चारों ओर एक अद्भुत व्यूह रच दिया जिसके बारे में सिकंदर ने सुना तक नहीं था – ” रथ व्यूह ” एक एसा व्यूह जिसका उपयोग २००० साल बाद यूरोप में महान चैक हीरो ” यान झीझका ” ने प्रशियन नाइट्स के विरुद्ध अभेद्य ” शकट व्यूह ” के रूप में किया . …बेचारा सिकंदर…… उसके तथाकथित अजेय अश्वारोही जाते और इस व्यूह से सिर टकराकर अपनी बलि दे देते ….हजारों की संख्या में यूनानी मारे गये और सिकंदर हताश हो उठा …पर ….पर…पर …हाय रे भारत का दुर्भाग्य…… हमेशा की तरह …इन वीरों को ” स्वघात ” का सामना करना पडा और इस बार ये काम किया खुद ” पोरस ” ने जी हाँ पोरस ने …रथ व्यूह को सिर्फ हाथियों से ही तोडा जा सकता था और ये बात पोरस जानता था और उसने अपने साम्राज्य को बढाने के लालच में यह देशघाती कृत्य किया . ( हालांकि बाद में उसे इसका पश्चाताप हुआ और चंद्रगुप्त के विद्रोह को सहायता देकर इसका प्रायश्चित्त भी किया जिसके कारण ही यूनानी क्षत्रप यूथेडेमस ने उसकी हत्या कर दी थी .)
रथ व्यूह टूट जाने पर भी कठों ने हथियार डालना स्वीकार नहीं किया और सैकडों युनानियों को मारते हुए अपने प्राण दे दिये . लगभग १७००० पुरुष लडते मारे गये और ७०००० स्त्रियों और बच्चों को बंदी बनाया गया , जिनका क्या हुआ पता नहीं . सांगल को इतनी बुरी तरह नष्ट किया गया कि आज तक इतिअहासकार उसके ध्वंसावशेषों को ढूँढ नहीं पाये हैं .
परंतु इस भीषण प्रतिरोध से यूनानी सैनिक इतने आतांकित हो गये कि व्यास के किनारे उन्होंने आगे बढने से साफ इनकार कर दिया और सिकंदर को लौटने के लिये विवश होना पडा . परंतु युद्ध के नियमों के विपरीत कठों के भीषण नरसंहार से भन्नाये हुए भारतीयों ने जैसे सिकंदर को भारत से जिंदा बाहर ना जाने देने की सौगंध खा ली थी और तब सिकंदर को सामना करना पडा मालवों का जिनके दिये घाव ,कहते हैं कि सिकंदर की मृत्यु का कारण बने . ( इन मालवों के बारे में अगले अंक में ) ——- तो ये थे वे महान कठ जिनके कारण उत्पन्न जनाक्रोश चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा भारत के राष्ट्रीय एकीकरण का आधार बना .
इसके बाद फिर कठों के बारे में फिर कभी कुछ नहीं सुना गया . तैमूरनामा में किसी ” कोठार ” जाति का उल्लेख अवश्य है जिसने पंजाब में तैमूर की सेना की भीषण क्षति की थी और मेरा मानना है कि ये उन्हीं कठों के अवशिष्ट वंशज रहे होंगे . इसके बाद कालदेवता यम से भी जीतकर लौट आने वाले नचिकेता के कठों का नाम भारत के इतिहास से सदा के लिये विलुप्त हो गया .
आज २५ जनवरी , गणतंत्र दिवस के पूर्व दिवस पर भारत के इन महान सपूतों को जिनके रक्त से भारत की महानता की नींव रखी गयी , अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि …….मेरी ओर से ….मेरे कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से ..जिन्होंने हमारे आज के लिये अपने खुद के वर्तमान को मिटा दिया और इतिहास के पन्नों में चुपचाप समा गये …..

आप इतिहास की सामान्य जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति से पूछिये कि सिकंदर से भारत में कौन लडा था ? किसने उसे वापस जाने पर मजबूर किया था ?? तुरंत जवाब मिलेगा - पोरस .
पर क्या वास्तव में यही सचाई है ? या अधूरी सचाई है ?? महान ईरानी साम्राज्य को ध्वस्त करने वाली , पोरस के हाथियों के सामने भी डटकर खडी रहने वाली सिकंदर की विश्वविजयी सेना ने विपाशा ( व्यास ) नदी से आगे बढने इंकार कर सिकंदर से विद्रोह क्यों कर दिया ? किससे डर गये थे वे ?? यूनानी इतिहासकारों ने तो उनके इस ' डर ' को छिपाया ही है , भारतीय इतिहासकारों ने भी " व्यक्ति पूजा " की प्रवृत्ति के चलते इस घटना के महान नायकों को नेपथ्य में डाल दिया . 
और ये थे............ " कठ " .
कौन थे ये " कठ " ? क्या विशेषता थी इनकी ??
 क्यों यूनानी इनसे जीत कर भी अपना साहस गंवा बैठे थे ??? आइये जानते हैं ...
वैदिक आर्यों का एक प्रसिद्ध जन " मद्र " ( नकुल सहदेव की माँ इसी मद्र की राजकुमारी थीं ) था जो रावी नदी के किनारे अवस्थित था और शाकल ( स्यालकोट ) इनकी राजधानी थी . कालांतर में इनकी ही एक शाखा " कठ " सर्वाधिक प्रभुत्वपूर्ण सिद्ध हुई क्योंकि इन्होंने आज से २५०० साल पहले " यूजेनिक्स " के सिद्धांत अपनाकर जैसी उच्च उपलब्धियाँ अर्जित कीं उसकी तुलना कुछ हद तक सिर्फ " स्पार्टा " , " मालवों " और पूर्वी भारत के " लिच्छिवियों " से ही की जा सकती है . स्पार्टा के लोगों की ही भांति कठ अपने यहाँ ' शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर " और " असुंदर " शिशुओं को जीने नहीं देते थे और उन्हें मार डालते थे . इसके परिणाम स्वरूप हर कठ युवक क्षीर गौर वर्ण ,पीत केश , नील या स्वर्ण वर्णी नेत्र , अत्यधिक लंबाई , दृढ शरीर और उच्च मस्तिष्क का स्वामी होता था . शस्त्रों और शास्त्रों में इनकी समान गति थी . जितने भयंकर ये योद्धा थे उतने ही अधिक चिंतनशील थे जिसका प्रमाण है " कठोपनिषद " ....
जी हाँ प्रसिद्ध उपनिषदकार -" नचिकेता " इसी कठ गणराज्य के गणक्षत्रिय थे जो प्रसिद्ध ऋषि बने .
अस्तु , झेलम के युद्ध में पोरस पर विजय ( ? ) या संधि के पश्चात सिकंदर आगे बढा और जा टकराया कठों से जिन्होंने अपने नगर सांकल के चारों ओर एक अद्भुत व्यूह रच दिया जिसके बारे में सिकंदर ने सुना तक नहीं था - " रथ व्यूह " एक एसा व्यूह जिसका उपयोग २००० साल बाद यूरोप में महान चैक हीरो " यान झीझका " ने प्रशियन नाइट्स के विरुद्ध अभेद्य " शकट व्यूह " के रूप में किया . ...बेचारा सिकंदर...... उसके तथाकथित अजेय अश्वारोही जाते और इस व्यूह से सिर टकराकर अपनी बलि दे देते ....हजारों की संख्या में यूनानी मारे गये और सिकंदर हताश हो उठा ...पर ....पर...पर ...हाय रे भारत का दुर्भाग्य...... हमेशा की तरह ...इन वीरों को " स्वघात " का सामना करना पडा और इस बार ये काम किया खुद " पोरस " ने जी हाँ पोरस ने ...रथ व्यूह को सिर्फ हाथियों से ही तोडा जा सकता था और ये बात पोरस जानता था और उसने अपने साम्राज्य को बढाने के लालच में यह देशघाती कृत्य किया . ( हालांकि बाद में उसे इसका पश्चाताप हुआ और चंद्रगुप्त के विद्रोह को सहायता देकर इसका प्रायश्चित्त भी किया जिसके कारण ही यूनानी क्षत्रप यूथेडेमस ने उसकी हत्या कर दी थी .)
रथ व्यूह टूट जाने पर भी कठों ने हथियार डालना स्वीकार नहीं किया और सैकडों युनानियों को मारते हुए अपने प्राण दे दिये . लगभग १७००० पुरुष लडते मारे गये और ७०००० स्त्रियों और बच्चों को बंदी बनाया गया , जिनका क्या हुआ पता नहीं . सांगल को इतनी बुरी तरह नष्ट किया गया कि आज तक इतिअहासकार उसके ध्वंसावशेषों को ढूँढ नहीं पाये हैं .
परंतु इस भीषण प्रतिरोध से यूनानी सैनिक इतने आतांकित हो गये कि व्यास के किनारे उन्होंने आगे बढने से साफ इनकार कर दिया और सिकंदर को लौटने के लिये विवश होना पडा . परंतु युद्ध के नियमों के विपरीत कठों के भीषण नरसंहार से भन्नाये हुए भारतीयों ने जैसे सिकंदर को भारत से जिंदा बाहर ना जाने देने की सौगंध खा ली थी और तब सिकंदर को सामना करना पडा मालवों का जिनके दिये घाव ,कहते हैं कि सिकंदर की मृत्यु का कारण बने . ( इन मालवों के बारे में अगले अंक में ) ------- तो ये थे वे महान कठ जिनके कारण उत्पन्न जनाक्रोश चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा भारत के राष्ट्रीय एकीकरण का आधार बना .
इसके बाद फिर कठों के बारे में फिर कभी कुछ नहीं सुना गया . तैमूरनामा में किसी " कोठार " जाति का उल्लेख अवश्य है जिसने पंजाब में तैमूर की सेना की भीषण क्षति की थी और मेरा मानना है कि ये उन्हीं कठों के अवशिष्ट वंशज रहे होंगे . इसके बाद कालदेवता यम से भी जीतकर लौट आने वाले नचिकेता के कठों का नाम भारत के इतिहास से सदा के लिये विलुप्त हो गया .
आज २५ जनवरी , गणतंत्र दिवस के पूर्व दिवस पर भारत के इन महान सपूतों को जिनके रक्त से भारत की महानता की नींव रखी गयी , अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि .......मेरी ओर से ....मेरे कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से ..जिन्होंने हमारे आज के लिये अपने खुद के वर्तमान को मिटा दिया और इतिहास के पन्नों में चुपचाप समा गये .....

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