Posted in खान्ग्रेस

कॉंग्रेस का जन्म


कॉंग्रेस का जन्म आज से 132 साल पहले अफगानिस्तान में
हुआ था । गाजी खान ने अंग्रेज़ो के साथ मिलक
पार्टी बनाई थी। गाजी खान के तीन लड़के थे – सबसे
बड़ा फेजल खान उसके बाद सलीम खान ओर सबसे
छोटा मोइन खान (मोती लाल नेहरू )। फेजल खान एक
बीमारी की वजह से 14 साल की उम्र मे ही मर गया।
सलीम खान शादी के बाद कश्मीर मे रहने लगा।
उसी सलीम खान के वंशज की औलाद आज कश्मीर मे
फारुख अब्दुला ओर उमर अब्दुला है, जो कॉंग्रेस के साथ
है। अब बात आती है गाजी खान की। गाजी खान ने
चुनाव लड़ा, पर कभी जीता नहीं। गाजी खान के मरने
के बाद मोइन खान ने हिन्दू धर्म अपना लिया ओर
मोती लाल नेहरू बन गया। पर वो भी कभी चुनाव
नहीं जीता। उसके बाद मोती लाल की औलाद, जवाहर
लाल नेहरू ने जिन्ना के साथ मिलकर रणनीति बनाई
कि (जब अंग्रेज़ 1947 मे देश छोड़ रहे थे)
जिन्ना को पाकिस्तान का पीएम
बनाया जाएगा ओर नेहरु को इंडिया का पीएम
बनाया जाएगा। पर जनता सरदार पटेल को पीएम
बनाना चाहती थी। पर महात्मा गांधी ने नेहरू
का साथ दिया ओर नेहरू को पीएम बना दिया। फिर
नेहरू की बेटी इंदरा (जो फिरोज खान से निकाह
किया था) फिर से मुसलमान बन गई। पर महात्म
गांधी ने इंदरा को अपना नाम दे दिया। उसी दिन से
ये गांधी का नाम लगा कर देश को लूट रहे है। फिरोज
खान के बाद राजीव खान, राजीव खान के बाद
सोनिया खान, सोनिया खान के बाद अब राहुल
खान। इस पोस्ट को इतना शेयर करो की इस
नकली गांधी परिवार की असलियत
सभी को पता चले।
सूचना : इस पोस्ट में हर एक मुद्दे का सबूत और लिंक दिए हैं !

आज सबूतों के साथ देखिये की किस तरह धर्मनिरपेक्षता के बहाने आम हिंदुओ का पैसा कांग्रेस और उसके सहयोगी जैसे राष्ट्रवादी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस मुसलमानों में बाट रही है ताकि उसका वोट बैंक और मजबूत हो सके और सेक्युलर हिंदू आज भी अनजान है और गुलामो की तरह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी जैसी देशद्रोही पार्टियों कों वोट दे रही है !
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
1) मुसलामानों को करोडो की हज सबसिडी
http://article.wn.com/view/WNAT413778122370bd3b91d6603ab1ab5889/
http://www.hindujagruti.org/news/3414.html

अमरनाथ यात्रा पे जजिया टॅक्स
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/6069187.cms
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
2) गाय के कत्लखानों को सबसिडी, गौशाला पर लगाया टैक्स
http://timesofindia.indiatimes.com/india/Beef-exports-up-44-in-4-years-India-is-top-seller/articleshow/19314449.cms
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130222_beef_global_india_da.shtml
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
3) मस्जिद और मदरसों कों मुफ्त जमिन, बिजली और अनुदान
http://www.hindustantimes.com/india-news/mumbai/maharashtra-govt-scheme-to-provide-aid-to-madrasas-takes-off/article1-1135253.aspx
http://www.indianexpress.com/news/muslim-body-asks-govt-to-provide-land-to-build-more-mosques/946285/
http://zeenews.india.com/election09/story.aspx?aid=684052
http://www.indianexpress.com/news/jama-masjid-runs-up-rs-4cr-power-bill-spat-over-dues-has-area-in-dark/1007397
http://www.jagran.com/uttar-pradesh/pilibhit-10482123.html

मंदिरो पर टॅक्स ठोका
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-27/varanasi/29590887_1_water-tax-vnn-varanasi-nagar-nigam
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-03-16/india/37766404_1_worship-tax-exemption-income-tax
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
4) दिवाली के पटाखो पे बंधन, नवरात्र में डीजे पर पाबंदी
http://www.hindustantimes.com/India-news/Mumbai/No-bursting-crackers-on-roads-this-Diwali/Article1-615228.aspx
http://tinyurl.com/mcc4h6n
http://www.dnaindia.com/ahmedabad/report-people-cant-be-deprived-of-navratri-celebrations-hc-1898277

नमाज के लाउड़ स्पीकर कों छूट
http://khabar.ibnlive.in.com/news/76272/3/21
http://www.haindavakeralam.com/HKPage.aspx?PageID=12402
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
5) बांग्लादेशी मुस्लिम कों राशन कार्ड,
http://www.rediff.com/news/1998/jul/29bang1.htm
http://hindi.business-standard.com/storypage_hin.php?autono=81302
http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JAI-bangladeshis-pakistanis-trying-to-build-the-ration-card-the-congress-mlas-3518261.html

पाकिस्तानी हिंदू कों नहीं
http://tinyurl.com/l5o82hj
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
6) मुस्लिम छात्राओ को 30,000 रु, हिंदू छात्राओं कों इनकार !
http://hindi.in.com/latest-news/News/Sp-Govt-Launch-Scheme-For-Only-Muslim-Girls-1725032.html
http://ibnlive.in.com/news/up-akhilesh-yadav-launches-girl-education-aid-scheme-bjp-slams-move/309845-3-242.html
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
7) रमजान में नियमित बिजली आपूर्ति;
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-07-18/hyderabad/29786562_1_uninterrupted-power-power-supply-areas
http://www.khaskhabar.com/hindi-news/no-load-shedding-in-ramzan-in-up-072011311123404812.html

दिवाली में भारी कटौती
http://navbharattimes.indiatimes.com/faridabad/–/articleshow/6843011.cms
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-10-23/mumbai/30312966_1_extra-power-power-cuts-mw
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-11-08/madurai/34993892_1_unscheduled-power-power-cuts-power-failure
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
8) मुस्लिमो कों कॉलेज, नौकरी में आरक्षण; गरीब हिंदू कों नहीं
http://www.siasat.com/english/news/muslim-reservation-cong-achievement-not-ysrs-ma-shabbir
http://abpnews.newsbullet.in/ind/34-more/40401-2012-12-17-09-34-44
http://tinyurl.com/l8awtry
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-03-26/india/28121377_1_exclusive-quota-muslim-castes-muslims-and-christians

मुसलमानों कों बिना ब्याज के सस्ते कर्ज, हिंदुओ कों इनकार
http://khabar.ibnlive.in.com/news/72883/3/19
http://www.jagran.com/bihar/kaimoor-10463554.html
http://navbharattimes.indiatimes.com/other-news-mumbai/–/articleshow/6246679.cms
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
9) आतंकवादियों कों, अबू सलेम कों VIP जेल
http://www.mid-day.com/news/2010/jul/270710-arthur-road-jail-abu-salem-underworld-don-luxury-items-ramesh-bagwe.htm
http://ibnlive.in.com/news/abu-salem-lived-like-a-vip-in-jail-minister/127524-3.html

साध्वी प्रज्ञा कों जेल में यातनाए दी
http://www.dnaindia.com/mumbai/1607207/report-african-drug-peddlers-tormenting-me-in-jail-sadhvi
http://www.speakingtree.in/spiritual-blogs/seekers/self-improvement/sadhvi-pragya-at-least-be-human-to-her
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
10) मुसलमान लड़कियों को शादी के लिए 50 हजार, हिंदू को नहीं
http://bit.ly/1lxAOuM

http://timesofindia.indiatimes.com/city/bangalore/Congress-gifts-Nikah-Bhagya-ahead-of-LS-polls/articleshow/24224212.cms
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
11) मस्जिदो के इमामो कों भत्ता, मंदिरों के पुजारियों कों इनकार
http://khabar.ibnlive.in.com/news/72883/3/19
http://post.jagran.com/Mamata-Banerjee-announces-Rs-2500-monthly-stipend-for-imams-1333533792
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
12) पाकिस्तानी आतंकवादियों कों पेन्शन

इंडियन आर्मी कंगाल
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-03-29/india/31253747_1_air-defence-defence-secretary-army
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
हिंदू लाईट बिल, पानी पट्टी, गृह कर, इनकम टैक्स, अमरनाथ यात्रा पर टैक्स चुकाता है और कांग्रेस उसे सेक्युलरिजम के नाम पर मुसलमानों में बाटती है !

इसे शेयर करने के पैसे नहीं लगते दोस्तों, 5 सेकंड का समय देकर इसे शेयर करे !
Jai hindu

Posted from WordPress for Android

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ईश्वर का कार्य


ईश्वर का कार्य …………….
एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले
तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा अर्जुन को उस पर दआ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण
को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी। जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला।किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।
ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।
अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।
ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण
की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ
गयी अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण
को मूल्यवान एक माणिक दिया।
ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराण
घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था,
ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया। किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण
उसे नींद आ गयी, इस बीच
ब्राहमण की स्त्री नदी में जल
लेने चली गयी किन्तु मार्ग में
ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर
चली गई और जैसे ही उसने घड़े
को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।
ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।
अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में देखा तो जाकर उसका कारण पूंछा।
सारा वृतांत सुनकर अर्जुन को बड़ी हताश हुई और मन
ही मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।
अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।
उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।
तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु
मेरी दी मुद्राए और माणिक
भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से
इसका क्या होगा” ?
यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस
ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।
रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि”दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ? प्रभु की यह कैसी लीला है “?
ऐसा विचार करता हुआ वह
चला जा रहा था उसकी दृष्टि एक मछुवारे पर पड़ी, उसने देखा कि मछुवारे के जाल में एक
मछली फँसी है, और वह छूटने के लिए तड़प रही है ।
ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी। उसने सोचा”इन दो पैसो से पेट की आग
तो बुझेगी नहीं।क्यों? न इस
मछली के प्राण ही बचा लिए जाये”।यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। कमंडल में जल भरा और मछली को नदी में छोड़ने चल पड़ा।
तभी मछली के मुख से कुछ निकला।उस निर्धन ब्राह्मण ने देखा ,वह वही माणिक था जो उसने घड़े में छुपाया था।
ब्राहमण प्रसन्नता के मारे चिल्लाने लगा “मिल गया, मिल गया ”..!!!
तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहाँ से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।
उसने ब्राह्मण को चिल्लाते हुए सुना “ मिल गया मिल गया ”
लुटेरा भयभीत हो गया। उसने सोंचा कि ब्राहमण उसे
पहचान गया है और इसीलिए चिल्ला रहा है, अब
जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा। इससे डरकर
वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा। और उससे
लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे
वापस कर दी।
यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।
अर्जुन बोले,प्रभु यह कैसी लीला है?
जो कार्य थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक
नहीं कर सका वह आपके दो पैसो ने कर दिखाया।
श्री कृष्णा ने कहा “अर्जुन यह
अपनी सोंच का अंतर है, जब तुमने उस निर्धन को थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक दिया तब उसने मात्र अपने सुख के विषय में सोचा। किन्तु जब मैनें उसको दो पैसे
दिए। तब उसने दूसरे के दुःख के विषय में सोचा। इसलिए हे अर्जुन-सत्य तो यह है कि, जब आप दूसरो के दुःख के विषय
में सोंचते है, जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप
ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं, और तब ईश्वर आपके साथ होते
हैं।

Posted from WordPress for Android

Posted in काश्मीर - Kashmir

कश्मीर


एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी।

एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खड़ा हुआ। अपना पक्ष रखने से पहले उसने ऋषि कश्यप की एक बहुत पुरानी कहानी सुनाने की अनुमति माँगी। अनुमति मिलने के बाद भारतीय प्रवक्ता ने अपनी बात शुरू की…

“एक बार महर्षि कश्यप, जिनके नाम पर आज कश्मीर का नाम पड़ा है, घूमते-घूमते कश्मीर पहुंच गए।

वहाँ उन्होंने एक सुन्दर झील देखी तो उस झील में उनका नहाने का मन हुआ।

उन्होंने अपने कपड़े उतारे और झील में नहाने चले गए।

जब वो नहा कर बाहर निकले, तो उनके कपड़े वहाँ से गायब मिले।

दरअसल, उनके कपड़े किसी पाकिस्तानी ने चुरा लिये थे…”

इतने में पाकिस्तानी प्रवक्ता चीख पड़ा और बोला:
“क्या बकवास कर रहे हो? उस समय तो ‘पाकिस्तान’ था ही नहीं!!!”

भारतीय प्रवक्ता मुस्कुराया और बोला:
“अब सब कुछ साफ़ हो चुका है। अब मैं अपना भाषण शुरू करना चाहता हूँ।”

मेरा भाषण है… “और ये पाकिस्तानी कहते हैं कि कश्मीर इनका है!!!”   🇮🇳🇮🇳
😜😂

इतना सुनते ही… पूरा संयुक्त राष्ट्र सभा ठहाकों की गूंज से भर उठा।।
😂😝😜👏👏👏

एक हिन्दुस्तानी होने के नाते यह वाकया मुझे बहुत पसंद आया।

यदि पसंद आए तो आप भी इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें।

Posted from WordPress for Android

Posted in रामायण - Ramayan

AYODHYA :


Rayvi Kumar updated the group photo.

DESECRETAD JEWELS OF BHARATAM ….SERIES[TM]

AYODHYA :

Through the centuries of brutal Islamic rule over India, tens of thousands of Hindu temples were destroyed and mosques built at their sites. In northern India, which was under Islamic rule for a longer period of time, hardly any temple has survived the Islamic period. Among the temples destroyed were the 3 greatest temples of Sanatana Dharma – those dedicated to Shri Ram, Shri Krishna, and Shankar (lord Shiva), at Ayodhya, Mathura, and Benaras (Varanasi), respectively.

Muslims kept fairly accurate accounts of their temple demolitions, since they considered them acts of great poius activity -which should give them the right to go to heaven (what absurd idea for killing innocent people). By destroying the temples of the “kafirs” (unbelievers of islam), they were doing Allah’s bidding, and imitating Muhammad, who himself had destroyed all the idols in the Kaaba and made it into a mosque. Muslim rulers throughout history have repeated this act. The West knows of the conversion of the St. Sophia in Constantinople into a mosque. But indian history has thousands of such tragic instances.
Given below are some of the accounts left by muslim historians of the destruction of the Ram Janmabhumi temple in Ayodhya – one of the greatest temples of Sanatana Dharma. We will never know its splendour, but judging by the temples of South India that did survive Islamic rule, it must have been a stupendous feat of architecture.

The muslim writers unanimously describe the following:

1. The temple complex comprised of the Janmasthan of Shri Ram at Kot Ram Chander, the private apartments (mahal sarai) of King Dasaratha and Sri Rama, and a temple and a kitchen popularly known as Sita Ki Rasoi, where tradition held that Sita (wife of Shri Ram) lived.
2. All three were demolished and a mosque constructed thereupon in 1528 A.D. under orders of Babur’s commander Mir Baqi, and the religious guidance of a Muslim cleric named Sayed Musa Ashikan.

The earliest of such authors is none other than the granddaughter of the Mughal (Mogul) emperor Aurangzeb. Many of these Muslim writers were residents of Ayodhya (Awadh) and some were eye-witness to or participants in the Hindu-Muslim clashes that resulted from the numerous (77 recorded) attempts by Hindus to regain control of their holy site. Muslim records state that over 100,000 Hindus, over the centuries, perished in attempts to regain the temple.

Let us now see what the Muslim writers have said:

1) Abul Fazl (late sixteeth century)

Abul Fazl, the author of Akbar Nama and Ain-i-Akbari is an eminent writer of the Moghul age who describes Ayodhya as the residential place (banga) of Sri Ram Chandra who during the Treta age was the embodiment of both the spiritual sovereign supremacy as well as the mundane kingly office. Abul Fazl also testifies that Awadh (Ayodhya) was esteemed as one of the holiest places of antiquity. He reports that Ram-Navami festival, marking the birthday of Rama continues to be celebrated in a big way.

2) Safiha-i Chahal Nasaih Bahadur Shahi, written by the daughter of Bahadur Shah Alamgir during the early 18th century.

Out of the above Chahal Nasaih (“Forty Advices”), twenty-five instructions were copied and incorporated in the manuscript entitled Nasihat-i Bist-o-Panjam Az Chahal Nisaih Bahadur Shahi in 1816 AD, which is the oldest known account of the destruction of Ram Janmabhoomi for construction of the Babri Mosque, and its author is none other than Aurangzeb’s grand daughter.

Mirza Jan, the author of Hadiqa-i-Shahda, 1856, Lucknow, has reproduced the above text in Persian on pp.4-7 of his book. The text runs as follows:

“… the mosques built on the basis of the king’s orders (ba farman-i Badshahi) have not been exempted from the offering of the namaz and the reading of the Khutba [therein]. The places of worship of the Hindus situated at Mathura, Banaras and Awadh, etc., in which the Hindus (kufar) have great faith – the place of the birthplace of Kanhaiya, the place of Rasoi Sita, the place of Hanuman, who, according to the Hindus, was seated by Ram Chandra over there after the conquest of Lanka – were all demolished for the strength of Islam, and at all these places mosques have been constructed. These mosques have not been exempted from juma and jamiat (Friday prayers). Rather it is obligatory that no idol worship should be performed over there and the sound of the conch shell should not reach the ear of the Muslims …”

3) Hadiqa-i-Shahada by Mirza Jan (1856), pages 4-7.

The author was an eye-witness and an active participant in the jihad led by Amir Ali Amethawi during Wazid Ali Shah’s rule in 1855 for recapture of Hanumangarhi from the Hindus. His book was ready just after the failure of the jihad due to stout Hindu resistance, and was published the following year (1856) in Lucknow. In Chapter IX of his book, entitled Wazid Ali Shah Aur Unka Ahd (“Wazid Ali Ahah and His Regime”), we find his account of construction of the Babri mosque.

Mirza Jan who claims to have gone through various old sources says in his own account as follows:

“The past Sultans encouraged the propagation and glorification of Islam and crushed the forces of the unbelievers (kufar), the Hindus. Similarly, Faizabad and Awadh(Ayodhya) were also purged of this mean practice [of kufr]. This [Awadh] was a great worshipping centre and the capital of [the kingdom of] Rama’s father. Where there was a large temple, a big mosque was constructed and where there was a small mandaf, there a small kanati masjid was constructed. The temple of Janmasthan was the original birthplace (masqat) of Ram, adjacent to which is Sita Ki Rasoi, Sita being the name of his wife. Hence at that site, a lofty (sarbaland) mosque has been built by Babar Badshah under the guidance of Musa Ashikan… That mosque is till date popularly known as Sita Ki Rasoi…”

4) Fasana-i Ibrat by the Urdu novelist Mirza Rajab Ali Beg Surur.

Dr. Zaki Kakorawi has appended an excerpt from this book by Surur (1787-1867) in his work. The excerpt reads as follows :

“During the reign of Babar Badshah, a magnificent mosque was constructed in Awadh at a place which is associated with Sita ki Rasoi. This was the Babari mosque. As during this period the Hindus could not dare to offer any resistance, the mosque was constructed under the benign guidance of Saiyed Mir Ashikan. Its date of construction could be reckoned from [the words] Khair-Baqi. And in the Ram Darbar, a mosque was constructed by Fidai Khan, the subedar.”

5) Zia-i Akhtar by Haji Muhammed Hasan (Lucknow 1878), p.38-39.

The author states :

“The mosque which had been built by Saiyid Musa Ashikan in 923 AH in compliance with the order of Zahiruddin Badshah, Delhi, after demolishing the private apartments (mahal sarai) of Raja Ram Chander and the kitchen of Sita, as well as the second mosque built by Muiuddin Aurangzeb, Alamgir Badshah, [in fact] both these mosques have developed cracks at various places because of the ageing character. Both these mosques have been gradually mitigated by the Bairagis and this very fact accounts for the riot. The Hindus have great hatred for the Muslims…”

6) Gumgashte Halat-i Ajudhya Awadh (“Forgotten Events of Ayodhya”), i.e. Tarikh-i Parnia Madina Alwaliya (in Persian) (Lucknow 1885), by Maulvi Abdul Karim.

The author, who was then the imam of the Babri Masjid, while giving a description of the dargah of Hazrat Shah Jamal Gojjri states :

“To the east of this dargah is mahalla Akbarpur, whose second name is also Kot Raja Ram Chander Ji. In this Kot, there were few burjs [towery big halls]. Towards the side of the western burj, there was the house of birthplace (makan-i paidaish) and the kitchen (bawarchi khana) of the above-mentioned Raja. And now, this premises is known as Janmasthan and Rasoi Sita Ji. After the demolition and mitigation of these houses [viz. Janmasthan and Rasoi Sita Ji], Babar Badshah got a magnificent mosque constructed thereon.”

7) Tarikh-i Awadh(“History of Ayodhya”) by Alama Muhammad Najamulghani Khan Rampuri (1909).
Dr. Zaki Kakorawi has brought out an abridged edition of this book. An excerpt from vol.II (pp.570-575) of this edition runs as follows :

“Babar built a magnificent mosque at the spot where the temple of Janmasthan of Ramchandra was situated in Ayodhya, under the patronage of Saiyid Ashikan, and Sita ki Rasoi is situated adjacent to it. The date of construction of the mosque is Khair Baqi (923 AH). Till date, it is known as Sita ki Rasoi. By its side stands that temple. It is said that at the time of the conquest of Islam there were still three temples, viz. Janmasthan, which was the birthplace of Ram Chanderji, Swargadwar alias Ram Darbar, and the Treta ka Thakur. Babar built the mosque after having demolished Janmasthan.”

8) Hindustan Islami Ahad Mein (“India is under Islamic rule”) by Maulana Hakim Sayid Abdul Hai.
The book contained a chapter on “The Mosques of Hindusthan” (Hindustan ki Masjidein), giving at least six instances of the construction of the mosques on the very sites of the Hindu temples demolished by the Indian Muslim rulers during the 12th-17th centuries. As regards Babri Masjid, he writes :

“This mosque was constructed by Babar at Ajodhya which the Hindus call the birthplace of Ram Chanderji. There is a famous story about his wife Sita. It is said that Sita had a temple here in which she lived and cooked for her husband. On that very site Babar constructed this mosque…”

It is this Babri mosque, built as a symbol of the subjugation and humiliation of Hindus at a spot they venerated so highly, that was damaged by a crowd of Hindus in 1992 at the height of the nationalist movement to rebuild a temple for Shri Ram at the site which had been venerated as his birthplace by Hindus for millenia.

Islam deliberately destroyed and desecrated what was most sacred to Hindus, and replaced it with a symbol of Islamic victory. The same reason Sultan Mehmet converted the Hagia Sophia into a mosque. The Hindus and the West have been fighting the same foe for centuries.

I end with the lament of Will Durant, from his Story of Civilization

DESECRETED JEWELS OF BHARATAM ....SERIES[TM]

AYODHYA :

Through the centuries of brutal Islamic rule over India, tens of thousands of Hindu temples were destroyed and mosques built at their sites. In northern India, which was under Islamic rule for a longer period of time, hardly any temple has survived the Islamic period. Among the temples destroyed were the 3 greatest temples of Sanatana Dharma - those dedicated to Shri Ram, Shri Krishna, and Shankar (lord Shiva), at Ayodhya, Mathura, and Benaras (Varanasi), respectively.

Muslims kept fairly accurate accounts of their temple demolitions, since they considered them acts of great poius activity -which should give them the right to go to heaven (what absurd idea for killing innocent people). By destroying the temples of the "kafirs" (unbelievers of islam), they were doing Allah's bidding, and imitating Muhammad, who himself had destroyed all the idols in the Kaaba and made it into a mosque. Muslim rulers throughout history have repeated this act. The West knows of the conversion of the St. Sophia in Constantinople into a mosque. But indian history has thousands of such tragic instances.
Given below are some of the accounts left by muslim historians of the destruction of the Ram Janmabhumi temple in Ayodhya - one of the greatest temples of Sanatana Dharma. We will never know its splendour, but judging by the temples of South India that did survive Islamic rule, it must have been a stupendous feat of architecture.

The muslim writers unanimously describe the following:

1. The temple complex comprised of the Janmasthan of Shri Ram at Kot Ram Chander, the private apartments (mahal sarai) of King Dasaratha and Sri Rama, and a temple and a kitchen popularly known as Sita Ki Rasoi, where tradition held that Sita (wife of Shri Ram) lived.
2. All three were demolished and a mosque constructed thereupon in 1528 A.D. under orders of Babur's commander Mir Baqi, and the religious guidance of a Muslim cleric named Sayed Musa Ashikan.

The earliest of such authors is none other than the granddaughter of the Mughal (Mogul) emperor Aurangzeb. Many of these Muslim writers were residents of Ayodhya (Awadh) and some were eye-witness to or participants in the Hindu-Muslim clashes that resulted from the numerous (77 recorded) attempts by Hindus to regain control of their holy site. Muslim records state that over 100,000 Hindus, over the centuries, perished in attempts to regain the temple.

Let us now see what the Muslim writers have said:

1) Abul Fazl (late sixteeth century)

Abul Fazl, the author of Akbar Nama and Ain-i-Akbari is an eminent writer of the Moghul age who describes Ayodhya as the residential place (banga) of Sri Ram Chandra who during the Treta age was the embodiment of both the spiritual sovereign supremacy as well as the mundane kingly office. Abul Fazl also testifies that Awadh (Ayodhya) was esteemed as one of the holiest places of antiquity. He reports that Ram-Navami festival, marking the birthday of Rama continues to be celebrated in a big way.

2) Safiha-i Chahal Nasaih Bahadur Shahi, written by the daughter of Bahadur Shah Alamgir during the early 18th century.

Out of the above Chahal Nasaih ("Forty Advices"), twenty-five instructions were copied and incorporated in the manuscript entitled Nasihat-i Bist-o-Panjam Az Chahal Nisaih Bahadur Shahi in 1816 AD, which is the oldest known account of the destruction of Ram Janmabhoomi for construction of the Babri Mosque, and its author is none other than Aurangzeb's grand daughter.

Mirza Jan, the author of Hadiqa-i-Shahda, 1856, Lucknow, has reproduced the above text in Persian on pp.4-7 of his book. The text runs as follows:

"... the mosques built on the basis of the king's orders (ba farman-i Badshahi) have not been exempted from the offering of the namaz and the reading of the Khutba [therein]. The places of worship of the Hindus situated at Mathura, Banaras and Awadh, etc., in which the Hindus (kufar) have great faith - the place of the birthplace of Kanhaiya, the place of Rasoi Sita, the place of Hanuman, who, according to the Hindus, was seated by Ram Chandra over there after the conquest of Lanka - were all demolished for the strength of Islam, and at all these places mosques have been constructed. These mosques have not been exempted from juma and jamiat (Friday prayers). Rather it is obligatory that no idol worship should be performed over there and the sound of the conch shell should not reach the ear of the Muslims ..."

3) Hadiqa-i-Shahada by Mirza Jan (1856), pages 4-7.

The author was an eye-witness and an active participant in the jihad led by Amir Ali Amethawi during Wazid Ali Shah's rule in 1855 for recapture of Hanumangarhi from the Hindus. His book was ready just after the failure of the jihad due to stout Hindu resistance, and was published the following year (1856) in Lucknow. In Chapter IX of his book, entitled Wazid Ali Shah Aur Unka Ahd ("Wazid Ali Ahah and His Regime"), we find his account of construction of the Babri mosque.

Mirza Jan who claims to have gone through various old sources says in his own account as follows:

"The past Sultans encouraged the propagation and glorification of Islam and crushed the forces of the unbelievers (kufar), the Hindus. Similarly, Faizabad and Awadh(Ayodhya) were also purged of this mean practice [of kufr]. This [Awadh] was a great worshipping centre and the capital of [the kingdom of] Rama's father. Where there was a large temple, a big mosque was constructed and where there was a small mandaf, there a small kanati masjid was constructed. The temple of Janmasthan was the original birthplace (masqat) of Ram, adjacent to which is Sita Ki Rasoi, Sita being the name of his wife. Hence at that site, a lofty (sarbaland) mosque has been built by Babar Badshah under the guidance of Musa Ashikan... That mosque is till date popularly known as Sita Ki Rasoi..."

4) Fasana-i Ibrat by the Urdu novelist Mirza Rajab Ali Beg Surur.

Dr. Zaki Kakorawi has appended an excerpt from this book by Surur (1787-1867) in his work. The excerpt reads as follows :

"During the reign of Babar Badshah, a magnificent mosque was constructed in Awadh at a place which is associated with Sita ki Rasoi. This was the Babari mosque. As during this period the Hindus could not dare to offer any resistance, the mosque was constructed under the benign guidance of Saiyed Mir Ashikan. Its date of construction could be reckoned from [the words] Khair-Baqi. And in the Ram Darbar, a mosque was constructed by Fidai Khan, the subedar."

5) Zia-i Akhtar by Haji Muhammed Hasan (Lucknow 1878), p.38-39.

The author states :

"The mosque which had been built by Saiyid Musa Ashikan in 923 AH in compliance with the order of Zahiruddin Badshah, Delhi, after demolishing the private apartments (mahal sarai) of Raja Ram Chander and the kitchen of Sita, as well as the second mosque built by Muiuddin Aurangzeb, Alamgir Badshah, [in fact] both these mosques have developed cracks at various places because of the ageing character. Both these mosques have been gradually mitigated by the Bairagis and this very fact accounts for the riot. The Hindus have great hatred for the Muslims..."

6) Gumgashte Halat-i Ajudhya Awadh ("Forgotten Events of Ayodhya"), i.e. Tarikh-i Parnia Madina Alwaliya (in Persian) (Lucknow 1885), by Maulvi Abdul Karim.

The author, who was then the imam of the Babri Masjid, while giving a description of the dargah of Hazrat Shah Jamal Gojjri states :

"To the east of this dargah is mahalla Akbarpur, whose second name is also Kot Raja Ram Chander Ji. In this Kot, there were few burjs [towery big halls]. Towards the side of the western burj, there was the house of birthplace (makan-i paidaish) and the kitchen (bawarchi khana) of the above-mentioned Raja. And now, this premises is known as Janmasthan and Rasoi Sita Ji. After the demolition and mitigation of these houses [viz. Janmasthan and Rasoi Sita Ji], Babar Badshah got a magnificent mosque constructed thereon."

7) Tarikh-i Awadh("History of Ayodhya") by Alama Muhammad Najamulghani Khan Rampuri (1909).
Dr. Zaki Kakorawi has brought out an abridged edition of this book. An excerpt from vol.II (pp.570-575) of this edition runs as follows :

"Babar built a magnificent mosque at the spot where the temple of Janmasthan of Ramchandra was situated in Ayodhya, under the patronage of Saiyid Ashikan, and Sita ki Rasoi is situated adjacent to it. The date of construction of the mosque is Khair Baqi (923 AH). Till date, it is known as Sita ki Rasoi. By its side stands that temple. It is said that at the time of the conquest of Islam there were still three temples, viz. Janmasthan, which was the birthplace of Ram Chanderji, Swargadwar alias Ram Darbar, and the Treta ka Thakur. Babar built the mosque after having demolished Janmasthan."

8) Hindustan Islami Ahad Mein ("India is under Islamic rule") by Maulana Hakim Sayid Abdul Hai.
The book contained a chapter on "The Mosques of Hindusthan" (Hindustan ki Masjidein), giving at least six instances of the construction of the mosques on the very sites of the Hindu temples demolished by the Indian Muslim rulers during the 12th-17th centuries. As regards Babri Masjid, he writes :

"This mosque was constructed by Babar at Ajodhya which the Hindus call the birthplace of Ram Chanderji. There is a famous story about his wife Sita. It is said that Sita had a temple here in which she lived and cooked for her husband. On that very site Babar constructed this mosque..."

It is this Babri mosque, built as a symbol of the subjugation and humiliation of Hindus at a spot they venerated so highly, that was damaged by a crowd of Hindus in 1992 at the height of the nationalist movement to rebuild a temple for Shri Ram at the site which had been venerated as his birthplace by Hindus for millenia.

Islam deliberately destroyed and desecrated what was most sacred to Hindus, and replaced it with a symbol of Islamic victory. The same reason Sultan Mehmet converted the Hagia Sophia into a mosque. The Hindus and the West have been fighting the same foe for centuries.

I end with the lament of Will Durant, from his Story of Civilization
Posted in PM Narendra Modi

जनधन योजना


जनधन योजना के तहत मोदी सरकार ने 5 महीने से भी कम समय में 11.5 करोड़ बैंक खाते खोल कर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है जिसको गिनीस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है ।
इसे कहते है मजबूत इरादे वाली सरकार अब कोई आपिया ये ना कहदे कि गिनीज बुक वाले भी मोदी जी से मिले हुए है इसकी जांच होनी चाहिए जी ।

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

नेहरू


1)… नेहरू के कपङे स्वदेशी आँदोलन के दौरान भी विलायत मेँ धुलने जाते थे
2)… भगत सिँह की फाँसी को केवल एक व्यक्ति ही उसे रूकवा सकता था, गाँधी, अगर इरविन पैक्ट पर हस्ताक्षर नहीँ होते पर नेहरू ने ऎसा होने नहीँ दिया
3)… भारत का विभाजन (धर्म के आधार पर) स्वीकार कर सदा के लिये अखँड भारत का सपना तोङा नेहरू ने
4)… नेहरू के कारण 10लाख लोग विभाजन के बाद साँप्रदायिक दँगोँ मेँ मारे गये ,काँग्रेस को याद आता है केवल गुजरात
5)… किसी स्वतँत्र देश का पहला गवर्नर जनरल माउँटबटेन विदेशी था ,कारण आप सब जानते हैँ मिसेस माउँटबटेन का नाम लेना नहीँ चाहता
6)… काँग्रेस मेँ बङे देशभक्तोँ लाला, बाल और पालको हासिये पर डाल खुदको प्रोजेक्ट किया नेहरूने
7)सुभाष चँद्र बोस को पहले काँग्रेस से बाहर करवाया और फिर आजादी के बाद उनके मौत के कारणोँ की जाँच के लिये कमेटी का गठन से इँकार किया नेहरू ने
8)भारत को मिल रहे सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद्की स्थायी सदस्यता को चीन को भेँट
9)सरदार पटेल के लाख मना करने के बाद भी चीन के साथ पँचशील का समझौता किया नेहरू ने
10)सरदार पटेल के लाख मना करने के बाद भी पाकिस्तान को 55करोङ रू दिलवाये नेहरू ने
11)उन्ही 55 करोङ का इस्तेमाल पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमले किये और सरदार की इच्छा के विरूद्ध कश्मीर को सुरक्षा परिषद् मेँ ले गये नेहरू
12)भारत का पहला घोटाला’जीप घोटाला ‘के सूत्रधार थे श्री जवाहर लाल नेहरू
13) 1962 मेँ सेनाध्यक्ष के बार बार कहने पर कि चीन हमारे सैनिकोँ को मार रहा है ,नेहरू ने कारवाई का आदेश नहीँ दिया
14)हैदराबाद के निजाम ने फैसला कर लिया था कि वह पाकिस्तान के साथ जायेगा ,नेहरू ने पहले कारवाई का विरोध किया था
15)मुझे कोई एक उदाहरण दे दे कि कब और कहाँ नेहरू ने अपनी बेटी इँदिरा को छोङकर
किसी और बच्चे के लिये कुछ किया ? ..फिर ये बाल दिवस का ढोँग क्योँ ?

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

हिन्‍दू मंदिरों की लूट


💥💥💥💥💥💥

हिन्‍दू मंदिरों की लूट

हिन्दुओ के मंदिरों और उनकी सम्पदाओं को पर कैसे एकाधिकार किया जाये इसके लिये छद्म धर्म निरपेक्ष नेताओं के दिमाग में एक शैतानी कीड़ा कुलबुला रहा था, इसी को ध्‍यान में रखते हुये इस पर एकाधिकार करने के उद्देश्‍य से सन १९५१ में एक अधिनियम बना – “The Hindu Religious and Charitable Endowment Act १९५१ “

इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकारों को मंदिरों की परिसंपत्तियों का पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया, जिसके अंतर्गत वे मंदिरों की जमीन , धन आदि मूल्यमान सामग्री को कभी भी कैसे भी बेच सकते है जिसे कोई रोक-टोक नही सकता, और जैसे भी चाहे उसका उपयोग कर सकते है, इसमें कहीं से कोई भी मनाही नही होगा.

हिन्दुस्तान में हो रहे मंदिरों की संपत्ति के सरकारी लूट का रहस्योद्घाटन अपने देश में ही नही बल्कि इसकी गूंज एक विदेशी लेखक “स्टीफन नाप” ने भी अपने एक पुस्‍तक में किया. उन्होंने इस विषय में एक पुस्तक लिखी -“Crimes Against India and the Need to Protect Ancient Vedic Tradition”

इस पुस्तक में उन्होंने अनेक हिन्‍दू मंदिरों के सरकारी लूट जैसे तथ्यों को उजागर किया है.

इतिहास साक्षी है कि भारत में अति प्राचीन काल से अनेक धार्मिक राजाओं ने असंख्‍य मंदिरों का निर्माण किया, और श्रद्धालुओं ने इन मंदिरों में यथाशक्ति दान देकर उन्हें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न किया परन्तु भारत की अनेक राज सरकारों ने श्रद्धालुओं की इस धन का अर्थात मंदिरों की संपत्तियों का भरपूर शोषण किया, अनेक गैर हिंदू तत्वों के लिए इसका उपयोग किया गया, यहां तक कि मंदिरों का पैसा मदरसों में भी लगाया जाता रहा, वहां के मुल्‍ला मौलवियों को हर महीनें तनख्‍वाह के रूप बाकायदे मंदिरों में भक्‍तों के चढ़ावा का ही पैसा उन्‍हें दिया जाता है। और, यह बात सबको पता है कि इन मदरसों से ही आतंकवाद की पौध तैयार की जाती है। यूं कह ले कि हिन्‍दू श्रद्धालु अपने पैसे से ही अपने मरने का भी बंदोबस्‍त करता है, यह एक प्रकार से सेकुलर सरकार का हिन्‍दू जनता के साथ बहुत बड़ा अन्‍याय है।

इस हिन्‍दुओं के प्रति अन्‍याय वाले कानून के अंतर्गत श्रद्धालुओं-भक्‍तों की संपत्ति का किस तरह भारी मात्रा में दुरूपयोग हो रहा है इसका विस्तृत वर्णन दिया गया है –

मंदिर अधिकारिता अधिनियम के अंतर्गत आंध्रप्रदेश में ४३००० मंदिरों के संपत्ति से केवल १८ % दान मंदिरों को अपने खर्चो के लिए दिया गया और बचा हुआ ८२ प्रतिशत कहां खर्च हुआ इसका कहीं भी कोयी जिक्र नही है।

और तो और विश्व प्रसिद्ध तिरूमाला तिरूपति मंदिर भी पूरी तरह से सरकार ने लूट लिया है, हर साल यहां आने वाले भक्‍तों के दान से इस मंदिर में लगभग १३०० करोड रुपये आते है जिसमें से ८५ प्रतिशत सीधे राज्यसरकार के राजकोष में चले जाता है। अब निर्णय स्‍वयं हिन्‍दू भक्‍त करें कि क्या हिंदू दर्शनार्थी इसलिए इन मंदिरों में दान करते हैं कि उनका पैसा मुल्‍लों को मदरसों में माहवारी तनख्‍वाह या हज में जाने के लिये दिया जाये।

यही नही लेखक स्टीफन एक और गंभीर आरोप आंध्र प्रदेश सरकार पर लगाते हैं, उनके अनुसार कमसे कम १० मंदिरों को सरकारी आदेश पर अपनी जमीन देनी पड़ी , …….गोल्फ के मैदानों को बनाने के लिए !!!

स्टीफन अब यहां यह प्रश्न करते हैं कि “क्या हिन्दुस्तान में १० मस्जिदों के साथ ऐसा होने की कल्पना की जा सकती है? सेकुलर सरकार में दम है तो वह ऐसा करके दिखाये।”

इसी प्रकार कर्नाटक में कुल २ लाख मंदिरों से ७९ करोड़ रुपया सरकार ने लूट लिया जिसमे से केवल ७ करोड रुपयों मंदिर कार्यकारिणियो को दिए गए. इसी दौरान मदरसों और हज सब्सिडी के नाम पर ५९ करोड खर्च हुआ और चर्च जीर्णोद्धार के लिए १३ लाख का अनुदान दिया गया.

सरकार के इस घृणित कार्य पर अपनी बात कहते हुए स्टीफन नाप लिखते है “ये सब इसलिए भारत में होता होता रहा क्योंकि हिन्दुओ में इस के विरुद्ध खड़े रहने की या आवाज उठाने की शक्ति इच्छा नहीं थी, यहां के हिन्‍दू कायर और स्‍वार्थी थे, उनके अंदर का जमीर मर गया है, वहां के हिंदू संगठन नपुंसक हो गये हैं, उन्‍हें अपने से ही लड़ने की फुर्सत नही है”।

इन तथ्यों को रहस्‍योद्घाटन करते हुए स्टीफन केरल के गुरुवायुर मंदिर का दृष्‍टांत देते हैं,
इस मंदिर के अनुदान से दूसरे ४५ मंदिरों का जीर्णोद्धार करने की बात गुरुवायुर मंदिर कार्यकारिणी ने रखी थी, जिसको ठुकराते हुए मंदिर का सारा पैसा सरकारी प्रोजेक्ट पर खर्च किया गया!

स्‍टीफन के अनुसार इन सबसे ज्यादा महा कुकर्म ओडिसा सरकार के है जिसने जगन्नाथ मंदिर की ७०००० एकड़ जमीन बेचने के लिये निकाली है जिससे सरकार को इतनी आय होना संभव हो की जिसके उपयोग से वे अपने वित्तीय कुप्रबंधानो से हुए नुक्सान को भर सके.

ये बरसो से अनवरत होता आया है, इसका प्रकाशन न होने की महत्वपूर्ण कारण है – “भारतीय की हिन्दु विरोधी प्रवृत्ति”

भारतीय मिडिया (जिसमें अंग्र‍ेजियत कूट-कूट के भरी है ) इन तथ्यों का रहस्‍योद्घाटन करने में किसी भी प्रकार की रूचि ही नही रखता. इसलिये इस प्रकार का सरकारी लूट हमेंशा लगातार चलता रहेगा।

इस छद्म धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रित देश में हिन्दुओ की इन प्राचीन सम्पदाओं के को दोनों हाथो से जेहादी तत्‍वों को लुटाया जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकारें हिन्दुओ की अपने धर्म के प्रति उदासीनता को और उनकी अनंत सहिष्णुता को अच्छी तरह जानती है … जिसका भरपूर दोहन व शोषण हो रहा है, ये सरकारें मस्जिदों, चर्चों की संपत्तियों को लेकर दिखायें, इनकी सरकार ही बदल जायेगी।

परन्तु अब हिन्दू समाज का धीरज समाप्‍त हो गया गया है की कोई हिंदू, छद्म सरकार के विरूद्ध जो भारी लूटमार रूपी दुराचार में लिप्‍त है, के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करे, जनता के धन का (जो की उन्होंने इश्वर के कार्यों में दान किया है), इस तरह से होता सरकारी दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार से जवाब मांगे!

जरा एक गैर-हिंदू विदेशी लेखक की भावना को देखें उसे हिन्‍दुओं के उपर हो रहे इस जुल्‍मो-सितम को सहन नही कर पाया, उसे यह भ्रष्‍टाचार देखा नही गया, और उसने इन तथ्यों को पूरी तरह से पर्दाफाशकिया वो भी सार्वजनिक तौर पर, परन्तु लाखों हिंदू इस धार्मिक उत्पीड़नों को प्रतक्ष सहन करते आ रहे हैं ….क्यों??

󾭚󾌽󾭚󾌽󾭚󾌽󾭚󾌽󾭚󾌽󾭚

हिन्‍दू मंदिरों की लूट

हिन्दुओ के मंदिरों और उनकी सम्पदाओं को पर कैसे एकाधिकार किया जाये इसके लिये छद्म धर्म निरपेक्ष नेताओं के दिमाग में एक शैतानी कीड़ा कुलबुला रहा था, इसी को ध्‍यान में रखते हुये इस पर एकाधिकार करने के उद्देश्‍य से सन १९५१ में एक अधिनियम बना – “The Hindu Religious and Charitable Endowment Act १९५१ “

इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकारों को मंदिरों की परिसंपत्तियों का पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया, जिसके अंतर्गत वे मंदिरों की जमीन , धन आदि मूल्यमान सामग्री को कभी भी कैसे भी बेच सकते है जिसे कोई रोक-टोक नही सकता, और जैसे भी चाहे उसका उपयोग कर सकते है, इसमें कहीं से कोई भी मनाही नही होगा.

हिन्दुस्तान में हो रहे मंदिरों की संपत्ति के सरकारी लूट का रहस्योद्घाटन अपने देश में ही नही बल्कि इसकी गूंज एक विदेशी लेखक “स्टीफन नाप” ने भी अपने एक पुस्‍तक में किया. उन्होंने इस विषय में एक पुस्तक लिखी -“Crimes Against India and the Need to Protect Ancient Vedic Tradition”

इस पुस्तक में उन्होंने अनेक हिन्‍दू मंदिरों के सरकारी लूट जैसे तथ्यों को उजागर किया है.

इतिहास साक्षी है कि भारत में अति प्राचीन काल से अनेक धार्मिक राजाओं ने असंख्‍य मंदिरों का निर्माण किया, और श्रद्धालुओं ने इन मंदिरों में यथाशक्ति दान देकर उन्हें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न किया परन्तु भारत की अनेक राज सरकारों ने श्रद्धालुओं की इस धन का अर्थात मंदिरों की संपत्तियों का भरपूर शोषण किया, अनेक गैर हिंदू तत्वों के लिए इसका उपयोग किया गया, यहां तक कि मंदिरों का पैसा मदरसों में भी लगाया जाता रहा, वहां के मुल्‍ला मौलवियों को हर महीनें तनख्‍वाह के रूप बाकायदे मंदिरों में भक्‍तों के चढ़ावा का ही पैसा उन्‍हें दिया जाता है। और, यह बात सबको पता है कि इन मदरसों से ही आतंकवाद की पौध तैयार की जाती है। यूं कह ले कि हिन्‍दू श्रद्धालु अपने पैसे से ही अपने मरने का भी बंदोबस्‍त करता है, यह एक प्रकार से सेकुलर सरकार का हिन्‍दू जनता के साथ बहुत बड़ा अन्‍याय है।

इस हिन्‍दुओं के प्रति अन्‍याय वाले कानून के अंतर्गत श्रद्धालुओं-भक्‍तों की संपत्ति का किस तरह भारी मात्रा में दुरूपयोग हो रहा है इसका विस्तृत वर्णन दिया गया है -

मंदिर अधिकारिता अधिनियम के अंतर्गत आंध्रप्रदेश में ४३००० मंदिरों के संपत्ति से केवल १८ % दान मंदिरों को अपने खर्चो के लिए दिया गया और बचा हुआ ८२ प्रतिशत कहां खर्च हुआ इसका कहीं भी कोयी जिक्र नही है।

और तो और विश्व प्रसिद्ध तिरूमाला तिरूपति मंदिर भी पूरी तरह से सरकार ने लूट लिया है, हर साल यहां आने वाले भक्‍तों के दान से इस मंदिर में लगभग १३०० करोड रुपये आते है जिसमें से ८५ प्रतिशत सीधे राज्यसरकार के राजकोष में चले जाता है। अब निर्णय स्‍वयं हिन्‍दू भक्‍त करें कि क्या हिंदू दर्शनार्थी इसलिए इन मंदिरों में दान करते हैं कि उनका पैसा मुल्‍लों को मदरसों में माहवारी तनख्‍वाह या हज में जाने के लिये दिया जाये।

यही नही लेखक स्टीफन एक और गंभीर आरोप आंध्र प्रदेश सरकार पर लगाते हैं, उनके अनुसार कमसे कम १० मंदिरों को सरकारी आदेश पर अपनी जमीन देनी पड़ी , …….गोल्फ के मैदानों को बनाने के लिए !!!

स्टीफन अब यहां यह प्रश्न करते हैं कि “क्या हिन्दुस्तान में १० मस्जिदों के साथ ऐसा होने की कल्पना की जा सकती है? सेकुलर सरकार में दम है तो वह ऐसा करके दिखाये।”

इसी प्रकार कर्नाटक में कुल २ लाख मंदिरों से ७९ करोड़ रुपया सरकार ने लूट लिया जिसमे से केवल ७ करोड रुपयों मंदिर कार्यकारिणियो को दिए गए. इसी दौरान मदरसों और हज सब्सिडी के नाम पर ५९ करोड खर्च हुआ और चर्च जीर्णोद्धार के लिए १३ लाख का अनुदान दिया गया.

सरकार के इस घृणित कार्य पर अपनी बात कहते हुए स्टीफन नाप लिखते है “ये सब इसलिए भारत में होता होता रहा क्योंकि हिन्दुओ में इस के विरुद्ध खड़े रहने की या आवाज उठाने की शक्ति इच्छा नहीं थी, यहां के हिन्‍दू कायर और स्‍वार्थी थे, उनके अंदर का जमीर मर गया है, वहां के हिंदू संगठन नपुंसक हो गये हैं, उन्‍हें अपने से ही लड़ने की फुर्सत नही है”।

इन तथ्यों को रहस्‍योद्घाटन करते हुए स्टीफन केरल के गुरुवायुर मंदिर का दृष्‍टांत देते हैं,
इस मंदिर के अनुदान से दूसरे ४५ मंदिरों का जीर्णोद्धार करने की बात गुरुवायुर मंदिर कार्यकारिणी ने रखी थी, जिसको ठुकराते हुए मंदिर का सारा पैसा सरकारी प्रोजेक्ट पर खर्च किया गया!

स्‍टीफन के अनुसार इन सबसे ज्यादा महा कुकर्म ओडिसा सरकार के है जिसने जगन्नाथ मंदिर की ७०००० एकड़ जमीन बेचने के लिये निकाली है जिससे सरकार को इतनी आय होना संभव हो की जिसके उपयोग से वे अपने वित्तीय कुप्रबंधानो से हुए नुक्सान को भर सके.

ये बरसो से अनवरत होता आया है, इसका प्रकाशन न होने की महत्वपूर्ण कारण है – “भारतीय की हिन्दु विरोधी प्रवृत्ति”

भारतीय मिडिया (जिसमें अंग्र‍ेजियत कूट-कूट के भरी है ) इन तथ्यों का रहस्‍योद्घाटन करने में किसी भी प्रकार की रूचि ही नही रखता. इसलिये इस प्रकार का सरकारी लूट हमेंशा लगातार चलता रहेगा।

इस छद्म धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रित देश में हिन्दुओ की इन प्राचीन सम्पदाओं के को दोनों हाथो से जेहादी तत्‍वों को लुटाया जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकारें हिन्दुओ की अपने धर्म के प्रति उदासीनता को और उनकी अनंत सहिष्णुता को अच्छी तरह जानती है … जिसका भरपूर दोहन व शोषण हो रहा है, ये सरकारें मस्जिदों, चर्चों की संपत्तियों को लेकर दिखायें, इनकी सरकार ही बदल जायेगी।

परन्तु अब हिन्दू समाज का धीरज समाप्‍त हो गया गया है की कोई हिंदू, छद्म सरकार के विरूद्ध जो भारी लूटमार रूपी दुराचार में लिप्‍त है, के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करे, जनता के धन का (जो की उन्होंने इश्वर के कार्यों में दान किया है), इस तरह से होता सरकारी दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार से जवाब मांगे!

जरा एक गैर-हिंदू विदेशी लेखक की भावना को देखें उसे हिन्‍दुओं के उपर हो रहे इस जुल्‍मो-सितम को सहन नही कर पाया, उसे यह भ्रष्‍टाचार देखा नही गया, और उसने इन तथ्यों को पूरी तरह से पर्दाफाशकिया वो भी सार्वजनिक तौर पर, परन्तु लाखों हिंदू इस धार्मिक उत्पीड़नों को प्रतक्ष सहन करते आ रहे हैं ….क्यों??
󾌮󾌺󾌮󾌺󾌮󾌺󾌮󾌺󾌮󾌺󾌮
Posted in Uncategorized

‘Haran’ In Turkey Shiva Connection To Mesopotamia


‘Haran’ In Turkey Shiva Connection To Mesopotamia

Ramani's blog

I have been studying archology related information, Astronomy to seek information about the spread of Sanatana Dharma throughout the world.

And I also check the Linguistic affiliations along with Cultural similarities.

Moon God Sin Insignia.jpg Insignia of the Moon God ‘Sin’ of Haran. Notice the crossed-legged posture akin to yogic semi-Padmasana of Shiva, the crescent moon and the winged-bulls which were the vehicles of the moon-god ‘Sin’.

Mesopotamian Civilisation Map.jpg Mesopotamian Civilisation Map.

The Sanatana Dharma civilisation, as distinct from the Sarasvati Valley civilisation has been dated as the oldest in the world.

This coupled with the existence of Super Continents and reference to this by Tamil ,another ancient Language of India, the date of which is as old as Sanatana Dharama, had spurred me to dig deep into the subject.

Based on this, it transpires that a Group from South India, the Dravida desa, left the South because of a Tsunami (referred to by the Puranas…

View original post 1,017 more words

Posted in Uncategorized

Krishna – the Supreme Personality of Godhead


Krishna – the Supreme Personality of Godhead

Journal Edge

krishna

Krishna, the Supreme Personality of Godhead, is an historical person who appeared on this earth in India 5,000 years ago.The great exponent of the Bhagavad Gita, Krishna is the ninth and the most powerful incarnation of Vishnu, the Godhead of the Hindu Trinity of deities.

View original post