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मदर टेरसा


मदर टेरसा – संत या धोखेबाज

लेख : सुरेश चिपलूनकर जी

एग्नेस गोंक्झा बोज़ाझियू अर्थात मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे, मेसेडोनिया में हुआ था और बारह वर्ष की आयु में उन्हें अहसास हुआ कि “उन्हें ईश्वर बुला रहा है”। 24 मई 1931 को वे कलकत्ता आईं और फ़िर यहीं की होकर रह गईं। उनके बारे में इस प्रकार की सारी बातें लगभग सभी लोग जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसे तथ्य, आँकड़े और लेख हैं जिनसे इस शख्सियत पर सन्देह के बादल गहरे होते जाते हैं। उन पर हमेशा वेटिकन की मदद और मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी की मदद से “धर्म परिवर्तन” का आरोप तो लगता ही रहा है, लेकिन बात कुछ और भी है, जो उन्हें “दया की मूर्ति”, “मानवता की सेविका”, “बेसहारा और गरीबों की मसीहा”… आदि वाली “लार्जर दैन लाईफ़” छवि पर ग्रहण लगाती हैं, और मजे की बात यह है कि इनमें से अधिकतर आरोप (या कहें कि खुलासे) पश्चिम की प्रेस या ईसाई पत्रकारों आदि ने ही किये हैं, ना कि किसी हिन्दू संगठन ने, जिससे संदेह और भी गहरा हो जाता है (क्योंकि हिन्दू संगठन जो भी बोलते या लिखते हैं उसे तत्काल सांप्रदायिक ठहरा दिये जाने का “रिवाज” है)। बहरहाल, आईये देखें कि क्यों इस प्रकार के “संत” या “चमत्कार” आदि की बातें बेमानी होती हैं (अब ये पढ़ते वक्त यदि आपको हिन्दुओं के बड़े-बड़े और नामी-गिरामी बाबाओं, संतों और प्रवचनकारों की याद आ जाये तो कोई आश्चर्यजनक बात नहीं होगी) –

यह बात तो सभी जानते हैं कि धर्म कोई सा भी हो, धार्मिक गुरु/गुरुआनियाँ/बाबा/सन्त आदि कोई भी हो बगैर “चन्दे” के वे अपना कामकाज(?) नहीं फ़ैला सकते हैं। उनकी मिशनरियाँ, उनके आश्रम, बड़े-बड़े पांडाल, भव्य मन्दिर, मस्जिद और चर्च आदि इसी विशालकाय चन्दे की रकम से बनते हैं। जाहिर है कि जहाँ से अकूत पैसा आता है वह कोई पवित्र या धर्मात्मा व्यक्ति नहीं होता, ठीक इसी प्रकार जिस जगह ये अकूत पैसा जाता है, वहाँ भी ऐसे ही लोग बसते हैं। आम आदमी को बरगलाने के लिये पाप-पुण्य, अच्छाई-बुराई, धर्म आदि की घुट्टी लगातार पिलाई जाती है, क्योंकि जिस अंतरात्मा के बल पर व्यक्ति का सारा व्यवहार चलता है, उसे दरकिनार कर दिया जाता है। पैसा (यानी चन्दा) कहीं से भी आये, किसी भी प्रकार के व्यक्ति से आये, उसका काम-धंधा कुछ भी हो, इससे लेने वाले “महान”(?) लोगों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता। उन्हें इस बात की चिंता कभी नहीं होती कि उनके तथाकथित प्रवचन सुनकर क्या आज तक किसी भी भ्रष्टाचारी या अनैतिक व्यक्ति ने अपना गुनाह कबूल किया है? क्या किसी पापी ने आज तक यह कहा है कि “मेरी यह कमाई मेरे तमाम काले कारनामों की है, और मैं यह सारा पैसा त्यागकर आज से सन्यास लेता हूँ और मुझे मेरे पापों की सजा के तौर पर कड़े परिश्रम वाली जेल में रख दिया जाये..”। वह कभी ऐसा कहेगा भी नहीं, क्योंकि इन्हीं संतों और महात्माओं ने उसे कह रखा है कि जब तुम अपनी कमाई का कुछ प्रतिशत “नेक” कामों के लिये दान कर दोगे तो तुम्हारे पापों का खाता हल्का हो जायेगा। यानी, बेटा..तू आराम से कालाबाजारी कर, चैन से गरीबों का शोषण कर, जम कर भ्रष्टाचार कर, लेकिन उसमें से कुछ हिस्सा हमारे आश्रम को दान कर… है ना मजेदार धर्म…

बहरहाल बात हो रही थी मदर टेरेसा की, मदर टेरेसा की मृत्यु के समय सुसान शील्ड्स को न्यूयॉर्क बैंक में पचास मिलियन डालर की रकम जमा मिली, सुसान शील्ड्स वही हैं जिन्होंने मदर टेरेसा के साथ सहायक के रूप में नौ साल तक काम किया, सुसान ही चैरिटी में आये हुए दान और चेकों का हिसाब-किताब रखती थीं। जो लाखों रुपया गरीबों और दीन-हीनों की सेवा में लगाया जाना था, वह न्यूयॉर्क के बैंक में यूँ ही फ़ालतू पड़ा था? मदर टेरेसा को समूचे विश्व से, कई ज्ञात और अज्ञात स्रोतों से बड़ी-बड़ी धनराशियाँ दान के तौर पर मिलती थीं।

अमेरिका के एक बड़े प्रकाशक रॉबर्ट मैक्सवैल, जिन्होंने कर्मचारियों की भविष्यनिधि फ़ण्ड्स में 450 मिलियन पाउंड का घोटाला किया, ने मदर टेरेसा को 1.25 मिलियन डालर का चन्दा दिया। मदर टेरेसा मैक्सवैल के भूतकाल को जानती थीं। हैती के तानाशाह जीन क्लाऊड डुवालिये ने मदर टेरेसा को सम्मानित करने बुलाया। मदर टेरेसा कोलकाता से हैती सम्मान लेने गईं, और जिस व्यक्ति ने हैती का भविष्य बिगाड़ कर रख दिया, गरीबों पर जमकर अत्याचार किये और देश को लूटा, टेरेसा ने उसकी “गरीबों को प्यार करने वाला” कहकर तारीफ़ों के पुल बाँधे।

मदर टेरेसा को चार्ल्स कीटिंग से 1.25 मिलियन डालर का चन्दा मिला, ये कीटिंग महाशय वही हैं जिन्होंने “कीटिंग सेविंग्स एन्ड लोन्स” नामक कम्पनी 1980 में बनाई थी और आम जनता और मध्यमवर्ग को लाखों डालर का चूना लगाने के बाद उसे जेल हुई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान मदर टेरेसा ने जज से कीटिंग को “माफ़”(?) करने की अपील की थी, उस वक्त जज ने उनसे कहा कि जो पैसा कीटिंग ने गबन किया है क्या वे उसे जनता को लौटा सकती हैं? ताकि निम्न-मध्यमवर्ग के हजारों लोगों को कुछ राहत मिल सके, लेकिन तब वे चुप्पी साध गईं।

ब्रिटेन की प्रसिद्ध मेडिकल पत्रिका Lancet के सम्पादक डॉ.रॉबिन फ़ॉक्स ने 1991 में एक बार मदर के कलकत्ता स्थित चैरिटी अस्पतालों का दौरा किया था। उन्होंने पाया कि बच्चों के लिये साधारण “अनल्जेसिक दवाईयाँ” तक वहाँ उपलब्ध नहीं थीं और न ही “स्टर्लाइज्ड सिरिंज” का उपयोग हो रहा था। जब इस बारे में मदर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “ये बच्चे सिर्फ़ मेरी प्रार्थना से ही ठीक हो जायेंगे…”(?)

बांग्लादेश युद्ध के दौरान लगभग साढ़े चार लाख महिलायें बेघरबार हुईं और भागकर कोलकाता आईं, उनमें से अधिकतर के साथ बलात्कार हुआ था। मदर टेरेसा ने उन महिलाओं के गर्भपात का विरोध किया था, और कहा था कि “गर्भपात कैथोलिक परम्पराओं के खिलाफ़ है और इन औरतों की प्रेग्नेन्सी एक “पवित्र आशीर्वाद” है…”। उन्होंने हमेशा गर्भपात और गर्भनिरोधकों का विरोध किया। जब उनसे सवाल किया जाता था कि “क्या ज्यादा बच्चे पैदा होना और गरीबी में कोई सम्बन्ध नहीं है?” तब उनका उत्तर हमेशा गोलमोल ही होता था कि “ईश्वर सभी के लिये कुछ न कुछ देता है, जब वह पशु-पक्षियों को भोजन उपलब्ध करवाता है तो आने वाले बच्चे का खयाल भी वह रखेगा इसलिये गर्भपात और गर्भनिरोधक एक अपराध है” (क्या अजीब थ्योरी है…बच्चे पैदा करते जाओं उन्हें “ईश्वर” पाल लेगा… शायद इसी थ्योरी का पालन करते हुए ज्यादा बच्चों का बाप कहता है कि “ये तो भगवान की देन हैं..”, लेकिन वह मूर्ख नहीं जानता कि यह “भगवान की देन” धरती पर बोझ है और सिकुड़ते संसाधनों में हक मारने वाला एक और मुँह…)

मदर टेरेसा ने इन्दिरा गाँधी की आपातकाल लगाने के लिये तारीफ़ की थी और कहा कि “आपातकाल लगाने से लोग खुश हो गये हैं और बेरोजगारी की समस्या हल हो गई है”। गाँधी परिवार ने उन्हें “भारत रत्न” का सम्मान देकर उनका “ऋण” उतारा। भोपाल गैस त्रासदी भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना है, जिसमें सरकारी तौर पर 4000 से अधिक लोग मारे गये और लाखों लोग अन्य बीमारियों से प्रभावित हुए। उस वक्त मदर टेरेसा ताबड़तोड़ कलकत्ता से भोपाल आईं, किसलिये? क्या प्रभावितों की मदद करने? जी नहीं, बल्कि यह अनुरोध करने कि यूनियन कार्बाईड के मैनेजमेंट को माफ़ कर दिया जाना चाहिये। और अन्ततः वही हुआ भी, वारेन एंडरसन ने अपनी बाकी की जिन्दगी अमेरिका में आराम से बिताई, भारत सरकार हमेशा की तरह किसी को सजा दिलवा पाना तो दूर, ठीक से मुकदमा तक नहीं कायम कर पाई। प्रश्न उठता है कि आखिर मदर टेरेसा थीं क्या?

एक और जर्मन पत्रकार वाल्टर व्युलेन्वेबर ने अपनी पत्रिका “स्टर्न” में लिखा है कि अकेले जर्मनी से लगभग तीन मिलियन डालर का चन्दा मदर की मिशनरी को जाता है, और जिस देश में टैक्स चोरी के आरोप में स्टेफ़ी ग्राफ़ के पिता तक को जेल हो जाती है, वहाँ से आये हुए पैसे का आज तक कोई ऑडिट नहीं हुआ कि पैसा कहाँ से आता है, कहाँ जाता है, कैसे खर्च किया जाता है… आदि।

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार क्रिस्टोफ़र हिचेन्स ने 1994 में एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसमें मदर टेरेसा के सभी क्रियाकलापों पर विस्तार से रोशनी डाली गई थी, बाद में यह फ़िल्म ब्रिटेन के चैनल-फ़ोर पर प्रदर्शित हुई और इसने काफ़ी लोकप्रियता अर्जित की। बाद में अपने कोलकाता प्रवास के अनुभव पर उन्होंने एक किताब भी लिखी “हैल्स एन्जेल” (नर्क की परी)। इसमें उन्होंने कहा है कि “कैथोलिक समुदाय विश्व का सबसे ताकतवर समुदाय है, जिन्हें पोप नियंत्रित करते हैं, चैरिटी चलाना, मिशनरियाँ चलाना, धर्म परिवर्तन आदि इनके मुख्य काम हैं…” जाहिर है कि मदर टेरेसा को टेम्पलटन सम्मान, नोबल सम्मान, मानद अमेरिकी नागरिकता जैसे कई सम्मान मिले।

संतत्व गढ़ना –
मदर टेरेसा जब कभी बीमार हुईं, उन्हें बेहतरीन से बेहतरीन कार्पोरेट अस्पताल में भरती किया गया, उन्हें हमेशा महंगा से महंगा इलाज उपलब्ध करवाया गया, हालांकि ये अच्छी बात है, इसका स्वागत किया जाना चाहिये, लेकिन साथ ही यह नहीं भूलना चाहिये कि यही उपचार यदि वे अनाथ और गरीब बच्चों (जिनके नाम पर उन्हें लाखों डालर का चन्दा मिलता रहा) को भी दिलवातीं तो कोई बात होती, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ…एक बार कैंसर से कराहते एक मरीज से उन्होंने कहा कि “तुम्हारा दर्द ठीक वैसा ही है जैसा ईसा मसीह को सूली पर हुआ था, शायद महान मसीह तुम्हें चूम रहे हैं”,,, तब मरीज ने कहा कि “प्रार्थना कीजिये कि जल्दी से ईसा मुझे चूमना बन्द करें…”। टेरेसा की मृत्यु के पश्चात पोप जॉन पॉल को उन्हें “सन्त” घोषित करने की बेहद जल्दबाजी हो गई थी, संत घोषित करने के लिये जो पाँच वर्ष का समय (चमत्कार और पवित्र असर के लिये) दरकार होता है, पोप ने उसमें भी ढील दे दी, ऐसा क्यों हुआ पता नहीं।

मोनिका बेसरा की कहानी –
पश्चिम बंगाल की एक क्रिश्चियन आदिवासी महिला जिसका नाम मोनिका बेसरा है, उसे टीबी और पेट में ट्यूमर हो गया था। बेलूरघाट के सरकारी अस्पताल के डॉ. रंजन मुस्ताफ़ उसका इलाज कर रहे थे। उनके इलाज से मोनिका को काफ़ी फ़ायदा हो रहा था और एक बीमारी लगभग ठीक हो गई थी। मोनिका के पति मि. सीको ने इस बात को स्वीकार किया था। वे बेहद गरीब हैं और उनके पाँच बच्चे थे, कैथोलिक ननों ने उनसे सम्पर्क किया, बच्चों की उत्तम शिक्षा-दीक्षा का आश्वासन दिया, उस परिवार को थोड़ी सी जमीन भी दी और ताबड़तोड़ मोनिका का “ब्रेनवॉश” किया गया, जिससे मदर टेरेसा के “चमत्कार” की कहानी दुनिया को बताई जा सके और उन्हें संत घोषित करने में आसानी हो। अचानक एक दिन मोनिका बेसरा ने अपने लॉकेट में मदर टेरेसा की तस्वीर देखी और उसका ट्यूमर पूरी तरह से ठीक हो गया। जब एक चैरिटी संस्था ने उस अस्पताल का दौरा कर हकीकत जानना चाही, तो पाया गया कि मोनिका बेसरा से सम्बन्धित सारा रिकॉर्ड गायब हो चुका है (“टाईम” पत्रिका ने इस बात का उल्लेख किया है)।

“संत” घोषित करने की प्रक्रिया में पहली पायदान होती है जो कहलाती है “बीथिफ़िकेशन”, जो कि 19 अक्टूबर 2003 को हो चुका। “संत” घोषित करने की यह परम्परा कैथोलिकों में बहुत पुरानी है, लेकिन आखिर इसी के द्वारा तो वे लोगों का धर्म में विश्वास(?) बरकरार रखते हैं और सबसे बड़ी बात है कि वेटिकन को इतने बड़े खटराग के लिये सतत “धन” की उगाही भी तो जारी रखना होता है….

(मदर टेरेसा की जो “छवि” है, उसे धूमिल करने का मेरा कोई इरादा नहीं है, इसीलिये इसमें सन्दर्भ सिर्फ़ वही लिये गये हैं जो पश्चिमी लेखकों ने लिखे हैं, क्योंकि भारतीय लेखकों की आलोचना का उल्लेख करने भर से “सांप्रदायिक” घोषित किये जाने का “फ़ैशन” है… इस लेख का उद्देश्य किसी की भावनाओं को चोट पहुँचाना नहीं है, जो कुछ पहले बोला, लिखा जा चुका है उसे ही संकलित किया गया है, मदर टेरेसा द्वारा किया गया सेवाकार्य अपनी जगह है, लेकिन सच यही है कि कोई भी धर्म हो इस प्रकार की “हरकतें” होती रही हैं, होती रहेंगी, जब तक कि आम जनता अपने कर्मों पर विश्वास करने की बजाय बाबाओं, संतों, माताओं, देवियों आदि के चक्करों में पड़ी रहेगी, इसीलिये यह दूसरा पक्ष प्रस्तुत किया गया है)

सन्दर्भ – महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति साहित्य (डॉ. इन्नैय्या नरिसेत्ति)
also see this link… http://www.slate.com/…/fighting…/2003/10/mommie_dearest.html

http://hinduexistence.org/tag/mother-teresa-was-no-saint/

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

कुछ सूत्र जो याद रक्खे…..!


कुछ सूत्र जो याद रक्खे…..!

चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए।दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।

सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी।

दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।

दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।

गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।

ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।

शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।

खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं।

घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।

तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।

चावल के साथ सिरका कभी नहीं।

चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।

खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

खरबूजे के साथ चीनी
इमली के साथ गुड
गाजर और मेथी का साग
बथुआ और दही का रायता
मकई के साथ मट्ठा
अमरुद के साथ सौंफ
तरबूज के साथ गुड
मूली और मूली के पत्ते
अनाज या दाल के साथ दूध या दही
आम के साथ गाय का दूध
चावल के साथ दही
खजूर के साथ दूध
चावल के साथ नारियल की गिरी
केले के साथ इलायची

कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं।

ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ —-

केले की अधिकता में दो छोटी इलायची
आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड
जामुन ज्यादा खा लिया तो ३-४ चुटकी नमक
सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम
खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत
तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग
अमरूद के लिए सौंफ
नींबू के लिए नमक
बेर के लिए सिरका
गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो ३-४ बेर खा लीजिये
चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये

बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च
मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये
बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं
खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये
मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं
इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये
मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये
मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये
घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं
खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें
पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये

अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये ,८०% बीमारियों से बचे रहेंगे।

कुछ सूत्र जो याद रक्खे.....!

चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए।दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।

सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी।

दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।

दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।

गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।

ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।

शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।

खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं।

घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।

तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।

चावल के साथ सिरका कभी नहीं।

चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।

खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

खरबूजे के साथ चीनी
इमली के साथ गुड
गाजर और मेथी का साग
बथुआ और दही का रायता
मकई के साथ मट्ठा
अमरुद के साथ सौंफ
तरबूज के साथ गुड
मूली और मूली के पत्ते
अनाज या दाल के साथ दूध या दही
आम के साथ गाय का दूध
चावल के साथ दही
खजूर के साथ दूध
चावल के साथ नारियल की गिरी
केले के साथ इलायची

कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं।

ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ ----

केले की अधिकता में दो छोटी इलायची
आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड
जामुन ज्यादा खा लिया तो ३-४ चुटकी नमक
सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम
खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत
तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग
अमरूद के लिए सौंफ
नींबू के लिए नमक
बेर के लिए सिरका
गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो ३-४ बेर खा लीजिये
चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये

बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च
मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये
बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं
खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये
मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं
इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये
मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये
मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये
घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं
खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें
पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये

अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये ,८०% बीमारियों से बचे रहेंगे।
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

ले.जनरल ठाकुर नाथू सिंह राठोड़


ले.जनरल ठाकुर नाथू सिंह राठौड़। एक बार जरूर पढ़े और शेयर करे।

जय हिन्द,जय राजपुताना—-
****ले.जनरल ठाकुर नाथू सिंह राठोड़****

आजकल जब सेनाध्यक्ष के पद के लिये इतनी खींचतान होती है, हम आपको एक ऐसे जनरल के बारे में बताना चाहेंगे जिसने आदर्शों की खातिर देश के पहले सेनाध्यक्ष का पद ठुकरा दिया था………………………………
उस जनरल का नाम था ठाकुर नाथू सिंह……………………………………..

ठाकुर नाथू सिंह का जन्म 10 मई 1902 को राजस्थान की डूँगरपुर रियासत के गुमानपुरा ठिकाने के ठाकुर हमीर सिंह जी के घर हुआ था। वो मेवाड़ के महान शूरवीर जयमल राठौड़ के वंशज थे। बचपन में ही उनके माता पिता का निधन हो जाने की वजह से उनकी आगे की शिक्षा आदि का पूरा भार डूँगरपुर रियासत के महारावल विजय सिंह जी ने उठाया। महारावल छोटी उम्र में उनकी बुद्धिमता से बहुत प्रभावित थे। उनकी शिक्षा अजमेर के मेयो कॉलेज से हुई और वहॉ से शिक्षा प्राप्त कर के वो ब्रिटेन की रॉयल सैंड्हर्स्ट मिलिट्री अकादमी गए जहाँ से पास आउट होने वाले वो जनरल राजेन्द्र सिंहजी जाडेजा के बाद दुसरे भारतीय थे।

यह वीरभूमि राजस्थान के लिये बड़े गौरव की बात है कि जहाँ ठाकुर नाथू सिंह जैसे निर्भीक और राष्ट्रवादी सेनानायक का जन्म हुआ था।
उनके व्यक्तित्व और योग्यता की जानकारी निम्नलिखित तथ्यों से हो सकती है…..

1- प्रधानमंत्री नेहरु ,लार्ड माउन्टबेटन के प्रभाव में आकर आजाद भारत के पहले सेनाध्यक्ष के रूप में किसी ब्रिटिश जनरल की नियुक्ति करना चाहते थे,वे भारतीय सैन्य जनरलों को अनुभवहीन मानते थे, पर जनरल नाथू सिंह ने इसका विरोध किया और यहाँ तक कि मीटिंग में जनरल नाथू सिंह ने पं. नेहरु से पूछ लिया
“प्रधानमंत्री का आपको कितना अनुभव है श्रीमान्‌”?
यह सुनकर पहले तो बैठक में सन्नाटा छा गया ,किन्तु बाद में नेहरु उनकी बात से सहमत हो गये.

2-इस बैठक के बाद जनरल नाथू सिंह की योग्यता और निर्भीकता से प्रभावित होकर नेहरू जी ने भारतीय सेनाओं का प्रधान सेनापति ठाकुर नाथू सिंह को ही बनाने का निर्णय लिया गया। रक्षा-मंत्री ने उनको पत्र द्वारा प्रधान सेनापति बनाये जाने की सूचना दी।पर ठाकुर नाथू सिंह ने स्पष्ट इन्कार कर दिया, इसलिये कि सेना में जनरल करियप्पा उनसे वरिष्ठ थे और उनका मानना था कि वरिष्ठ होने के नाते करियप्पा को ही प्रधान सेनापति बनाया जाना चाहिये। आखिरकार जनरल करियप्पा ही भारत के पहले सेनाध्यक्ष बनाये गये……

3- जनरल नाथू सिंह अंग्रेज़ो के समय भी अपनी निडरता और स्पष्टवादिता के लिये जाने जाते थे। वो एक प्रखर राष्ट्रवादी थे, सेना में होने के बावजूद वो अपनी राष्टवाद की भावनाओ और अंग्रेज़ो के प्रति नापसन्दगी को खुल कर व्यक्त करते थे और स्वाधीनता आंदोलन के नेताओ का खुलकर समर्थन करते थे। उनकी स्पष्टवादिता और अख्खड़ स्वभाव की वजह से अँगरेज़ अधिकारियो से उनकी कभी नही बनती थी लेकिन उनकी जबरदस्त बुद्धिमता और प्रतिभा की वजह से वो उनके विरुद्ध कोई कदम नही उठा पाते थे।

4-उनकी बुद्धिमता और प्रतिभा का एक प्रमाण यह है की जब वो सेना में अधिकारी बने उसके बाद प्रमोशन के लिये होने वाले डिफेन्स स्टाफ कॉलेज की परीक्षा के लिये उन्हें जानबूझकर यह कहकर अनुमति नही दी जा रही थी की वो अनुभवहीन है लेकिन जब आखिर में उन्हें 1935 में अनुमति मिली तो ना केवल उन्होंने पहली बार में ही परीक्षा उत्तीर्ण करी बल्कि उस परीक्षा में उन्होंने जो अंक हासिल किये वो आज तक भी डिफेन्स स्टाफ की परीक्षा में एक रिकॉर्ड है।

5-आजादी से पूर्व ही वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होते हुए भी उन्होंने “आजाद हिंद फौज’ के सैनिकों पर मुकदमा चलाने की भर्त्सना की……एक बार मुकदमे के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उन्हें प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया जिससे उन्होंने साफ़ मना कर दिया। उन्होंने कई बार गोली चलाने के आदेश का पालन करने से मना किया। इससे उनसे जलने वाले अँगरेज़ अधिकारी बहुत खुश हुए। उन्हें लगा की अब नाथू सिंह फसे है क्योकि अब उनका कोर्ट मार्शल होना पक्का है। लेकिन उनकी काबिलियत और रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें मुक्त कर दिया गया।

6-सन्‌ 1948 में नेहरु ने तय किया कि भारत का सैन्यबल 25 लाख से घटा कर 15 लाख कर दिया जाये। सैन्य बजट भी तीन वर्षों के लिये मात्र 45 करोड़ रु.प्रति वर्ष कर दिया गया। जनरल नाथू सिंह ने तुरंत सेना-मुख्यालय को पत्र लिखा- “” हमें अपने सैन्य-बल की संख्या बजट के हिसाब से नहीं, बल्कि जरूरत के हिसाब से तय करनी चाहिये।” दो वर्ष बाद उन्होंने फिर गुहार लगाई कि चीन भारत के लिये बड़ा खतरा है और हमें हमारी सुरक्षा को मजबूत करना चाहिये, लेकिन सपनों के संसार में रहने वाले तत्कालीन भारतीय नेतृत्व ने कोई ध्यान नहीं दिया। परिणाम यह हुआ कि हमें 1962 में चीन के हाथों अपमानजनक पराजय झेलनी पड़ी ।

7-दक्षिण कमान का सेनापति रहते हुए हैदराबाद के निजाम पर सैनिक कार्रवाई की योजना ठाकुर साहब ने ही बनाई थी.

8-जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण किया, नाथू सिंह मेजर जनरल थे तथा दक्षिणी कमान के सेनापति थे।पाक का हमला होते ही उन्हें दिल्ली बुलाया गया। दिल्ली में वे प्रधानमंत्री से भी मिलने गये। वहॉं उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान से निपटने की रणनीति कैसी होनी चाहिये। जनरल नाथू सिंह ने उत्तर दिया- “” कुछ फौजों को दर्रों की रक्षा करने के लिये छोड़ कर पूरी ताकत से लाहौर पर हमला कर वहॉं अधिकार कर लेना चाहिये। इससे पाकिस्तान कश्मीर खाली करने तथा पीछे हटने को बाध्य होगा।” पं. नेहरु ने यह सुना तो वे आग-बबूला हो गये। जनरल को भला-बुरा सुनाते हुए उन्होंने कहा- “” तुम्हें कुछ समझ भी है, इससे तो अन्तर्राष्ट्रीय समस्याएँ खड़ी हो जायेंगी।”

यह जानना रोचक होगा कि 1965 के भारत-पाक युद्ध में शास्त्री जी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने उक्त रणनीति ही अपनाई और लाहौर पर हमला किया जिससे पाकिस्तान को युद्ध-विराम करना पड़ा था।

9- इस तरह वो स्वतंत्रता के बाद भी अपने सेवा काल में निरंतर नेहरू सरकार की गलत रक्षा नीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाते रहे जबकि उन्हें पता था की इसके परिणाम उनके लिए ठीक नही होंगे। इसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा और 51 साल की कम उम्र में ही इस प्रतिभाशाली अधिकारी को रिटायर्ड कर दिया गया। अगर उन्हें सेवा विस्तार दिया गया होता तो वो भारत के तीसरे सेनाध्यक्ष होते और फिर चीन युद्ध में भारतीय सेना में अनुभवी नेतृत्व की कमी नही होती जिसकी वजह से ही भारत को शर्मनाक हार झेलनी पड़ी। लेकिन उनकी स्पष्टवादिता और निडरता नेहरू सरकार को चुभ रही थी और ऐसे व्यक्ति को वो सेना अध्यक्ष बनाने का जोखिम नही उठाना चाहते थे।

रिटायर्ड होने के बाद भी ठाकुर नाथू सिंह सक्रिय रहे और भारतीय सेना के हितों के मुद्दे जोरो से उठाते रहे। ऊनको एक बार चुनाव भी लड़वाया गया लेकिन वो राजनीती में भी इतने ईमानदार थे की अपना प्रतिद्वंदी पसन्द आने पर वो प्रतिद्वन्दी की सभा में जाकर उसका प्रचार कर दिया करते थे।

देश के इस महान सपूत का निधन 5 नवंबर 1994 को हृदयगति रुकने से हो गया। लेकिन दुःख की बात है की भारत की सेना के निर्माणकर्ता होने और अपनी पूरी जिंदगी सेना को समर्पित करने के बाद भी सरकार द्वारा उनको पूरे सैनिक सम्मान के साथ आखिरी विदाई नही दी जा सकी।

इस निर्भीक और आदर्शवादी, रणबांके राजपूत को हमारा नमन_/\_

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Posted in काश्मीर - Kashmir

कश्मीरी पंडित.


कश्मीरी पंडित… एक ऐसी कहानी जो देश के अधिकतर लोगो को पता नहीं है।
आप सभी ने सुना होगा कश्मीरी पंडितो के बारे में। हम सभी ने सुना है की हाँ कुछ तो हुआ था कश्मीरी पंडितो के साथ। लेकिन क्या हुआ था क्यों हुआ था ……यह ठीक से पता नहीं है।
यहाँ यह बताया जा रहा है कि क्या हुआ था कश्मीर में और क्या हुआ था कश्मीरी पंडितो के साथ।

पार्ट 1: कश्मीर का खुनी इतिहास
कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर पड़ा था। कश्मीर के मूल निवासी सारे हिन्दू थे।
कश्मीरी पंडितो की संस्कृति 5000 साल पुरानी है और वो कश्मीर के मूल निवासी हैं। इसलिए अगर कोई कहता है की भारत ने कश्मीर पर कब्ज़ा कर लिया है यह बिलकुल गलत है।
14वीं शताब्दी में तुर्किस्तान से आये एक क्रूर आतंकी मुस्लिम दुलुचा ने 60,000 लोगो की सेना के साथ कश्मीर में आक्रमण किया और कश्मीर में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की। दुलुचा ने नगरों और गाँव को नष्ट कर दिया और हजारों हिन्दुओ का नरसंघार किया। बहुत सारे हिन्दुओ को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया। बहुत सारे हिन्दुओ ने जो इस्लाम नहीं कबूल करना चाहते थे, उन्होंने जहर खाकर
आत्महत्या कर ली और बाकि भाग गए या क़त्ल कर दिए गए
या इस्लाम कबूल करवा लिए गए। आज जो भी कश्मीरी मुस्लिम है उन सभी के पूर्वजो को इन अत्याचारों के कारण
जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया था।
भारत पर मुस्लिम आक्रमण अतिक्रमण – विश्व इतिहास का सबसे ज्यादा खुनी कहानी:
http://www.youtube.com/watch?v=TMY2YV9WucY
भारत के खुनी विभाजन के बारे में जानने के लिए यह विडियो देखे:
http://www.youtube.com/watch?v=jGiTaQ60Je0
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को देखे:
http://kasmiripandits.blogspot.com/…/tragic-history-of-kasm…
http://en.wikipedia.org/wiki/Kashmir#Muslim_rule

पार्ट 2: 1947 के समय कश्मीर
1947 में ब्रिटिश संसद के “इंडियन इंडीपेनडेंस इ एक्ट” के अनुसार ब्रिटेन ने तय किया की मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को पाकिस्तान बनाया जायेगा। 150 राजाओं ने पाकिस्तान चुना और बाकी 450 राजाओ ने भारत। केवल एक जम्मू और कश्मीर के राजा बच गए थे जो फैसला नहीं कर पा रहे थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज भेजकर कश्मीर पर आक्रमण किया तो कश्मीर के
राजा ने भी हिंदुस्तान में कश्मीर के विलय के लिए दस्तख़त कर दिए। ब्रिटिशो ने यह कहा था की राजा अगर एक बार दस्तखत कर दिया तो वो बदल नहीं सकता और जनता की आम राय पूछने की जरुरत नहीं है। तो जिन कानूनों के आधार पर भारत और पाकिस्तान बने थे
उन नियमो के अनुसार कश्मीर पूरी तरह से भारत का अंग बन गया था। इसलिए कोई भी कहता है की कश्मीर पर भारत ने जबरदस्ती कब्ज़ा कर रहे है वो बिलकुल झूठ है।
अधिक जानकारी के लिए यह विडियो आप देख सकते है:
http://www.youtube.com/watch?v=gxhVDKRFh28

पार्ट 3: सितम्बर 14, 1989
बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य और जाने माने वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल तप्लू का JKLF ने क़त्ल कर दिया। उसके बाद जस्टिस नील कान्त गंजू को गोली मार दिया गया। सारे कश्मीरी नेताओ की हत्या एक एक करके कर दी गयी। उसके बाद 300 से ज्यादा हिन्दू महिलाओ और पुरुषो की निर्संश हत्या की गयी।
कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी। यह खुनी खेल चलता रहा और अपने सेकुलर राज्य और केंद्र सरकार, मीडिया ने
कुछ भी नहीं किया।

पार्ट ४: जनवरी 4, 1990
आफताब, एक स्थानीय उर्दू अखबार ने हिज्ब -उल -मुजाहिदीन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, सभी हिन्दू अपना सामन पैक करें और कश्मीर छोड़ कर चले जाएँ। एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा ने इस निष्कासन आदेश को दोहराया। मस्जिदों में भारत और हिन्दू विरोधी भाषण दिए जाने लगे।
सभी कश्मीरी हिन्दू/मुस्लिमो को कहा गया की इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाये। सिनेमा और विडियो पार्लर वगैरह बंद कर दिए गए। लोगो को मजबूर किया गया की वो अपनी घड़ी पाकिस्तान के समय के अनुसार करे लें।
अधिक जानकारी के लिए यह लिंक और ब्लॉग आप देख सकते है:
http://kasmiripandits.blogspot.com/2012/04/when-kashmiri
pandits-fled-islamic.html

http://www.rediff.com/news/2005/jan/19kanch.htm
[19/01/90: When Kashmiri Pandits fled Islamic terror]

पार्ट 5: जनवरी 19, 1990
सारे कश्मीरी पंडितो के घर के दरवाजो पर नोट लगा दिया जिसमे लिखा था “या तो मुस्लिम बन जाओ या कश्मीर छोड़ कर भाग जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ”। पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने टीवी पर कश्मीरी मुस्लिमो को भारत से आजादी के लिए भड़काना शुरू कर दिया। सारे कश्मीर के मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमे मुस्लिमो को कहा गया की वो हिन्दुओ को

Islamic conquest of India. Bloodiest in the history of World
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Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

सर्दी का प्रकोप


आजकल देश में तीव्र सर्दी का प्रकोप चल रहा है और इस मौसम में कफ और खाँसी के प्रकोप से अधिकतर जवान, बुजुर्ग, महिलायें और बच्चे पीड़ित हो जाते है, दिव्य श्वासारि प्रवाही आयुर्वेदिक उत्पाद के प्रयोग से आप कफ और खाँसी के प्रकोप से बच सकते हैं.…

आजकल देश में तीव्र सर्दी का प्रकोप चल रहा है और इस मौसम में कफ और खाँसी के प्रकोप से अधिकतर जवान, बुजुर्ग, महिलायें और बच्चे पीड़ित हो जाते है, दिव्य श्वासारि प्रवाही आयुर्वेदिक उत्पाद के प्रयोग से आप कफ और खाँसी के प्रकोप से बच सकते हैं.…

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

Shiv Mandir, Auckland, New Zealand


Shiv Mandir, Auckland, New Zealand

Shiv Mandir, Auckland, New Zealand
Posted in काश्मीर - Kashmir

Avantipur Ruins Kashmir – 1915


So sad very bad

Avantipur Ruins Kashmir - 1915

Avantipur Ruins Kashmir – 1915

Posted in काश्मीर - Kashmir

5 years ago, on 19 Jan 1990, loudspeakers atop mosques all over Kashmir ordered Hindus to leave kashmir


25 years ago, on 19 Jan 1990, loudspeakers atop mosques all over Kashmir ordered Hindus to leave kashmir….. They were given three options, “Ralive, Tsaliv ya Galive (convert to Islam, leave the place or perish)”…… Slogans like “we want kashmir with kashmiri pandit women but without their menfolk” could be heard everywhere…….. In next two days, 500 temples were demolished, 700 Kashmiri pandits were killed, thousands were raped, 5 lakh forced to leave their homeland….. After 25 years, now, they are still living in exile in their own country…… Our candle-light brigade of secular liberals does not even condemn this genocide/ ethnic cleansing out of fear that they might be branded ‘communal’…..

25 years ago, on 19 Jan 1990, loudspeakers atop mosques all over Kashmir ordered Hindus to leave kashmir..... They were given three options, "Ralive, Tsaliv ya Galive (convert to Islam, leave the place or perish)"...... Slogans like "we want kashmir with kashmiri pandit women but without their menfolk" could be heard everywhere........ In next two days, 500 temples were demolished, 700 Kashmiri pandits were killed, thousands were raped, 5 lakh forced to leave their homeland..... After 25 years, now, they are still living in exile in their own country...... Our candle-light brigade of secular liberals does not even condemn this genocide/ ethnic cleansing out of fear that they might be branded 'communal'.....
Posted in गौ माता - Gau maata

क्या आप भी गौ हत्यारे हैं ? ?


क्या आप भी गौ हत्यारे हैं ? ?

मनुस्मृति के आधार पर 6 प्रकार के व्यक्ति गोहत्या के दोषी होते है-!

1. गाय को काटने वाला !

2. गाय को बेचने वाला !

3.गोमांस को खरीदने वाला !

4. उस राज्य का राजा !

5.उस राज्य की प्रजा !

—–ओर—–
LINK – http://goo.gl/srvEkW

6.इस बारे मे जान करकेभी मौन धारण करने वाला

क्या आप भी गौ हत्यारे हैं ? ?

मनुस्मृति के आधार पर 6 प्रकार  के व्यक्ति गोहत्या के दोषी होते है-!

1. गाय को काटने वाला !

2. गाय को बेचने वाला !

3.गोमांस को खरीदने वाला !

4. उस राज्य का राजा !

5.उस राज्य की प्रजा ! 

-----ओर-----
LINK -  http://goo.gl/srvEkW

6.इस बारे मे जान करकेभी मौन धारण करने वाला
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करोड़ो रुपये की हेरा फेरि , दुनिया के इकलौते ईमानदार अरविद केजरीवाल की पार्टी चंदे के सहारे कर रही है


करोड़ो रुपये की हेरा फेरि , दुनिया के इकलौते ईमानदार अरविद केजरीवाल की पार्टी चंदे के सहारे कर रही है