Posted in Tejomahal

ताज महल मूल रूप से एक शिव मंदिर “तेजो महालय” था.


मित्रों कई बार सुनने में आया है की ताज महल मूल रूप से एक शिव मंदिर “तेजो महालय” था.. इस सन्दर्भ में कई साक्ष्य उपलब्ध है।। मैंने सोचा क्यों न इन साक्ष्यों की प्रमाणिकता जाँची जाये.. इसी क्रम में मैंने ताजमहल भ्रमण किया. ताजमहल में मुमताज की तथाकथित कब्र(??) पर जाने के बाद मैंने पास की दिवारों का अवलोकन किया। वहां मुझे कई जगह “ॐ” लिखा हुआ मिला..हालाँकि वहां पर फोटो लेना वर्जित था परन्तु मैंने जैसे तैसे कुछ प्रबंध करके एक दो तस्वीरें ली जिसमे से कुछ एक आप सब से साझा कर रहा हूँ।अगर ताजमहल वास्तव में मुगलकाल में मुग़ल शासको द्वारा बनवाया गया था तो उनकी मान्यता के विपरीत 108 ॐ शब्द दीवारों पर क्या कर रहे हैं? अब ये सोचना बेवकूफी है की “जजिया कर” लगाने वाले मुग़ल शासक इतने सहृदय हो गए की इश्लाम की मान्यता के विपरीत जा के ॐ शब्द दीवारों पर उकेरने की अनुमति दे दें।और ये भी संभव नहीं की कोई मजदूर इश्लामिक राजा के शासन काल में इश्लाम विरोधी निर्माण इश्लामिक राजा की बेगम के मकबरे में लगा दे…
तो एक संभावना ये भी है की शिव मंदिर में स्वाभाविक रूप से ॐ लिखा रहता है अतः वहां भी लिखा हो.. उस मंदिर के बाहरी ढांचे में कुछ परिवर्तन किया गया हो और आंतरिक दीवारों के पास जहाँ शिव लिंग रहा हो वहाँ मकबरा बना दिया हो।। क्यूकी मकबरे में मैंने ये भी देखा की ऊपर एक लम्बी सी जंजीर लटक रही थी।। ऐसा दुनिया के किसी अन्य मकबरे में नहीं है मगर सामन्यतया किसी भी शिवलिंग के ऊपर एक रस्सी या जंजीर में लटका कलश दिख जायेगा जिससे जल शिवलिंग पर गिरता रहता है..
आप सभी से अनुरोध है इस सन्देश को सब तक पहुचाएं और ताजमहल जब कभी भी जाएँ इन तथ्यों का अपने स्तर से अन्वेषण करने का जरुर प्रयास करें।
ॐ नमः शिवाय

मित्रों कई बार सुनने में आया है की ताज महल मूल रूप से एक शिव मंदिर "तेजो महालय" था.. इस सन्दर्भ में कई साक्ष्य उपलब्ध है।। मैंने सोचा क्यों न इन साक्ष्यों की प्रमाणिकता जाँची जाये.. इसी क्रम में मैंने ताजमहल भ्रमण किया. ताजमहल में मुमताज की तथाकथित कब्र(??) पर जाने के बाद मैंने पास की दिवारों का अवलोकन किया। वहां मुझे कई जगह "ॐ" लिखा हुआ मिला..हालाँकि वहां पर फोटो लेना वर्जित था परन्तु मैंने जैसे तैसे कुछ प्रबंध करके एक दो तस्वीरें ली जिसमे से कुछ एक आप सब से साझा कर रहा हूँ। अगर ताजमहल वास्तव में मुगलकाल में मुग़ल शासको द्वारा बनवाया गया था तो उनकी मान्यता के विपरीत 108 ॐ शब्द दीवारों पर क्या कर रहे हैं? अब ये सोचना बेवकूफी है की "जजिया कर" लगाने वाले मुग़ल शासक इतने सहृदय हो गए की इश्लाम की मान्यता के विपरीत जा के ॐ शब्द दीवारों पर उकेरने की अनुमति दे दें।और ये भी संभव नहीं की कोई मजदूर इश्लामिक राजा के शासन काल में इश्लाम विरोधी निर्माण इश्लामिक राजा की बेगम के मकबरे में लगा दे...
तो एक संभावना ये भी है की शिव मंदिर में स्वाभाविक रूप से ॐ लिखा रहता है अतः वहां भी लिखा हो.. उस मंदिर के बाहरी ढांचे में कुछ परिवर्तन किया गया हो और आंतरिक दीवारों के पास जहाँ शिव लिंग रहा हो वहाँ मकबरा बना दिया हो।। क्यूकी मकबरे में मैंने ये भी देखा की ऊपर एक लम्बी सी जंजीर लटक रही थी।। ऐसा दुनिया के किसी अन्य मकबरे में नहीं है मगर सामन्यतया किसी भी शिवलिंग के ऊपर एक रस्सी या जंजीर में लटका कलश दिख जायेगा जिससे जल शिवलिंग पर गिरता रहता है.. 
आप सभी से अनुरोध है इस सन्देश को सब तक पहुचाएं और ताजमहल जब कभी भी जाएँ इन तथ्यों का अपने स्तर से अन्वेषण करने का जरुर प्रयास करें।
ॐ नमः शिवाय

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