Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

यह चित्र नाथ संप्रदाय के गुरु बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर का चित्र है।


सुमंगल स्वागत स्वजनों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

यह चित्र नाथ संप्रदाय के गुरु बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर का चित्र है।

यह विश्वप्रसिद्ध मंदिर है.इसका परिसर कई एकड़ में फैला हुआ है।

मकर संक्रांति के दिन दूर दूर से तीर्थ यात्री यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
बाबा का भोग खिचड़ी चढ़ाया जाता है.

एक विशाल मेला मकर संक्रांति के पावन दिन को प्रारंभ होता है जो
एक माह तक चलता है।
पंजाब से लेकर असम तक के व्यापारी इस मेले में भाग लेते हैं।

इस मंदिर में निर्द्वन्द्ध होकर लोग आते हैं तथा दर्शन करने के बाद
भी घंटों बैठे रहते हैं।

बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर के साथ साथ समस्त देवी देवताओं के भी
मंदिर अलग अलग बने हैं।

गणेश जी,शंकर भगवान,महाकाली,काल भैरव,हनुमान जी,राधा कृष्ण,
सूर्य देव,छठी मैया,नवग्रह,विष्णु भगवान,माता दुर्गा,शीतला माता,
भैरव नाथ,शिवलिंग,माता के सातों रूप एवं महाबली भीम आदि का
मंदिर अलग अलग बना हुआ है।

अब आप कल्पना कर सकते हैं कि मंदिर का परिसर कितना विशाल है।
इस मंदिर में किसी भी धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित नहीं है।

यहाँ के महंत नेपाल के राजगुरु हैं।

नेपाल में गोरखनाथ के अनुयायियों को गोरखा कहा जाता है।
इस मंदिर में भिखमंगे नहीं आते।

मंदिर का परिसर फूलों की क्यारियों एवं बृक्षों से भरा बड़ा ही
सुरम्य स्थल है।
इसी परिसर में एक सरोवर है जिसे भीम सरोवर कहा जाता है।

कहा जाता है कि युद्धिष्ठिर ने राजसूय यग्य में प्रभु श्री कृष्ण के
कहने पर बाबा गोरखनाथ को आमंत्रित किया था।
महाबली भीम बाबा गोरखनाथ को लेने आये थे

बाबा के समाधि में होने के कारण भीम निकट ही विश्राम करने लगे।

भीम के शारीर के भार से विश्राम स्थल की भूमि धंस गयी और
सरोवर बन गया।
बाबा गोरखनाथ ने उन्हें उठाया और कहा कि शीघ्र यग्य में उपस्थित
होने के लिए जाओ तथा भीम को यह भी बताया वे यग्य में उपस्थित
होकर वापस आ चुके हैं।
भीम की निद्रा पूरी होने तक बाबा गोरखनाथ जाकर वापस आ चुके थे।

उस सरोवर मे नौकायन का आनंद लिया जाता है।

मंदिर के महंत पूज्य श्री आदित्यनाथ जी महाराज,गोरखपुर के भाजपा
के सांसद हैं,

बड़ा ही सुरम्य स्थल है मंदिर परिसर।
मेले के समय इसकी भव्यता और बढ़ जाती है।

अवसर निकल कर आप भी गोरखपुर अवश्य आयें और इस अलौकिक
स्थान का आनंद अवश्य लें।

बाबा गोरख नाथ की जय,
सदा सुमंगल,,,
हर हर महादेव,,,
जय श्री राम

सुमंगल स्वागत स्वजनों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
यह चित्र नाथ संप्रदाय के गुरु बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर का चित्र है।
यह विश्वप्रसिद्ध मंदिर है.इसका परिसर कई एकड़ में फैला हुआ है।
मकर संक्रांति के दिन दूर दूर से तीर्थ यात्री यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
बाबा का भोग खिचड़ी चढ़ाया जाता है.
एक विशाल मेला मकर संक्रांति के पावन दिन को प्रारंभ होता है जो 
एक माह तक चलता है।
पंजाब से लेकर असम तक के व्यापारी इस मेले में भाग लेते हैं।
इस मंदिर में निर्द्वन्द्ध होकर लोग आते हैं तथा दर्शन करने के बाद 
भी घंटों बैठे रहते हैं।
बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर के साथ साथ समस्त देवी देवताओं के भी 
मंदिर अलग अलग बने हैं।
गणेश जी,शंकर भगवान,महाकाली,काल भैरव,हनुमान जी,राधा कृष्ण,
सूर्य देव,छठी मैया,नवग्रह,विष्णु भगवान,माता दुर्गा,शीतला माता,
भैरव नाथ,शिवलिंग,माता के सातों रूप एवं महाबली भीम आदि का 
मंदिर अलग अलग बना हुआ है।
अब आप कल्पना कर सकते हैं कि मंदिर का परिसर कितना विशाल है।
इस मंदिर में किसी भी धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित नहीं है।
यहाँ के महंत नेपाल के राजगुरु हैं।
नेपाल में गोरखनाथ के अनुयायियों को गोरखा कहा जाता है।
इस मंदिर में भिखमंगे नहीं आते।
मंदिर का परिसर फूलों की क्यारियों एवं बृक्षों से भरा बड़ा ही 
सुरम्य स्थल है।
इसी परिसर में एक सरोवर है जिसे भीम सरोवर कहा जाता है।
कहा जाता है कि युद्धिष्ठिर ने राजसूय यग्य में प्रभु श्री कृष्ण के 
कहने पर बाबा गोरखनाथ को आमंत्रित किया था।
महाबली भीम बाबा गोरखनाथ को लेने आये थे
बाबा के समाधि में होने के कारण भीम निकट ही विश्राम करने लगे।
भीम के शारीर के भार से विश्राम स्थल की भूमि धंस गयी और 
सरोवर बन गया।
बाबा गोरखनाथ ने उन्हें उठाया और कहा कि शीघ्र यग्य में उपस्थित 
होने के लिए जाओ तथा भीम को यह भी बताया वे यग्य में उपस्थित 
होकर वापस आ चुके हैं।
भीम की निद्रा पूरी होने तक बाबा गोरखनाथ जाकर वापस आ चुके थे।
उस सरोवर मे नौकायन का आनंद लिया जाता है।
मंदिर के महंत पूज्य श्री आदित्यनाथ जी महाराज,गोरखपुर के भाजपा 
के सांसद हैं,
बड़ा ही सुरम्य स्थल है मंदिर परिसर।
मेले के समय इसकी भव्यता और बढ़ जाती है।
अवसर निकल कर आप भी गोरखपुर अवश्य आयें और इस अलौकिक 
स्थान का आनंद अवश्य लें।
बाबा गोरख नाथ की जय,
सदा सुमंगल,,,
हर हर महादेव,,,
जय श्री राम
सुमंगल स्वागत स्वजनों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
यह चित्र नाथ संप्रदाय के गुरु बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर का चित्र है।
यह विश्वप्रसिद्ध मंदिर है.इसका परिसर कई एकड़ में फैला हुआ है।
मकर संक्रांति के दिन दूर दूर से तीर्थ यात्री यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
बाबा का भोग खिचड़ी चढ़ाया जाता है.
एक विशाल मेला मकर संक्रांति के पावन दिन को प्रारंभ होता है जो 
एक माह तक चलता है।
पंजाब से लेकर असम तक के व्यापारी इस मेले में भाग लेते हैं।
इस मंदिर में निर्द्वन्द्ध होकर लोग आते हैं तथा दर्शन करने के बाद 
भी घंटों बैठे रहते हैं।
बाबा गोरक्षनाथ के मंदिर के साथ साथ समस्त देवी देवताओं के भी 
मंदिर अलग अलग बने हैं।
गणेश जी,शंकर भगवान,महाकाली,काल भैरव,हनुमान जी,राधा कृष्ण,
सूर्य देव,छठी मैया,नवग्रह,विष्णु भगवान,माता दुर्गा,शीतला माता,
भैरव नाथ,शिवलिंग,माता के सातों रूप एवं महाबली भीम आदि का 
मंदिर अलग अलग बना हुआ है।
अब आप कल्पना कर सकते हैं कि मंदिर का परिसर कितना विशाल है।
इस मंदिर में किसी भी धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित नहीं है।
यहाँ के महंत नेपाल के राजगुरु हैं।
नेपाल में गोरखनाथ के अनुयायियों को गोरखा कहा जाता है।
इस मंदिर में भिखमंगे नहीं आते।
मंदिर का परिसर फूलों की क्यारियों एवं बृक्षों से भरा बड़ा ही 
सुरम्य स्थल है।
इसी परिसर में एक सरोवर है जिसे भीम सरोवर कहा जाता है।
कहा जाता है कि युद्धिष्ठिर ने राजसूय यग्य में प्रभु श्री कृष्ण के 
कहने पर बाबा गोरखनाथ को आमंत्रित किया था।
महाबली भीम बाबा गोरखनाथ को लेने आये थे
बाबा के समाधि में होने के कारण भीम निकट ही विश्राम करने लगे।
भीम के शारीर के भार से विश्राम स्थल की भूमि धंस गयी और 
सरोवर बन गया।
बाबा गोरखनाथ ने उन्हें उठाया और कहा कि शीघ्र यग्य में उपस्थित 
होने के लिए जाओ तथा भीम को यह भी बताया वे यग्य में उपस्थित 
होकर वापस आ चुके हैं।
भीम की निद्रा पूरी होने तक बाबा गोरखनाथ जाकर वापस आ चुके थे।
उस सरोवर मे नौकायन का आनंद लिया जाता है।
मंदिर के महंत पूज्य श्री आदित्यनाथ जी महाराज,गोरखपुर के भाजपा 
के सांसद हैं,
बड़ा ही सुरम्य स्थल है मंदिर परिसर।
मेले के समय इसकी भव्यता और बढ़ जाती है।
अवसर निकल कर आप भी गोरखपुर अवश्य आयें और इस अलौकिक 
स्थान का आनंद अवश्य लें।
बाबा गोरख नाथ की जय,
सदा सुमंगल,,,
हर हर महादेव,,,
जय श्री राम

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