Posted in हिन्दू पतन

मेरे प्रिय भाइयों, एक जनवरी को नववर्ष की वधाई क्यों ?


मेरे प्रिय भाइयों, एक जनवरी को नववर्ष की वधाई क्यों ? एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलिंडर पर आधारित है। एक जनवरी हिंदुओं का नववर्षारंभ नहीं’। एक जनवरी हिंदू नव वर्ष या भारतीय नव वर्ष के नए साल की शुरुआत नहीं है। 31 दिसंबर की रात ईसाई नववर्ष मनाने की प्रथा हिंदुओं ने अपनाई है।

बडे दुख: का विषय है कि आज भारतीय हिंदू नववर्ष से एकदम अनभिज्ञ है और कुछ लोग एक जनवरी को नये साल 2015 की बधाई दे रहे हैं जबकि हिंदू नव वर्ष या भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ 21 मार्च 2015 से चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाताहै।

आईये भारतीय नववर्ष के बारे में जाने:-

हिंदू संस्कृति के अनुसार प्रतिवर्ष हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा मनाई जाती है, जिसके पीछे मान्यता है कि इस दिन ब्रम्ह्म देव ने सृष्टि की रचना की थी। वहीं ग्रंथों के अनुसार उज्जयिनी (उज्जैन) के राजा विक्रमादित्य ने इसी तिथि से कालगणना के लिए विक्रम संवत् प्रारंभ किया था, जो आज भी हिंदू कालगणना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है और तभी से गुड़ी पड़वा पर्व मनाया जाता है।

इस विक्रम संवत में नववर्ष की शुरुआत चंद्रमास के चैत्र माह के उस दिन से होती है जिस दिन ब्रह्म पुराण अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि रचना की शुरुआत की थी। इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसी दिन से नवरात्र की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन को भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था और पूरे अयोध्या नगर में विजय पताका फहराई गई थी।

मुझे डॅा.वीरप्रतापसिंह सिसोदिया का कहना है कि 1835 में, थामस मैकाले ने बहुत बढ़िया ढंग से ब्रिटिश उपनिवेशिक साम्राज्यवाद के उद्देशों को स्पष्ट कियाः ’’हमें एक ऐसे वर्ग को बनाने की भरसक कोशिश करना चाहिए जो हमारे और जिन पर हम शासन करते हैं, उन लाखों लोगों के बीच दुभाषिया हो सके, एक वर्ग जो खून और रंग में भारतीय हो परंतु स्वाद में, राय में, भाषा और बुद्धिमानी में, अंग्रेज हो।’ Lord Macaulay “let us create a class of people, Indians in their origin and blood but English in their tastes and manners”

मित्रो, 21 मार्च 2015 से भारतीय नववर्ष एवं विक्रम शक संवत्सर का आरंभ होगा ! हिंदू संस्कृति के के अनुसार हमारा नव वर्ष चैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, तदनुसार आँग्ल तिथि 21 मार्च 2015 को पड़ता है।

जागो भारतीय जागो ! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!

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