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देश की राजधानी दिल्ली में ईसाई संगठनों द्वारा इसके खिलाफ जिस मार्च का आयोजन किया गया था उसका नेतृत्व मदर टेरेसा ने किया था।


देश की राजधानी दिल्ली में ईसाई संगठनों द्वारा इसके खिलाफ जिस मार्च का आयोजन किया गया था उसका नेतृत्व मदर टेरेसा ने किया था।

પ્રહલાદ પ્રજાપતિ

1978 में जब लोकसभा में जनता दल के एक सांसद ओमप्रकाश पुरुषार्थी ने एक निजी विधेयक लाकर देश में धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी तो मुस्लिम और ईसाई नेता इसको रोकने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। देश की राजधानी दिल्ली में ईसाई संगठनों द्वारा इसके खिलाफ जिस मार्च का आयोजन किया गया था उसका नेतृत्व मदर टेरेसा ने किया था।

उधर ‘इस्लाम को बचाने’ के नाम पर जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना असद मदनी भी मैदान में कूद पड़े थे।इन दोनों अल्पसंख्यक नेताओं का जोर इस बात पर था कि धर्मांतरण पर पाबंदी लगाना भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा जिसकी धारा 25 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई है। वह किसी भी धर्म को मान सकता है और उसके अनुसार आचरण कर सकता है।

हिन्दू धर्म का आधार धर्मांतरण नहीं बल्कि जन्म है जबकि…

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