Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

आयुर्वेदिक घरगुती उपाय

भाई राजीव दिक्षीत
1) गुलकंद कफनाशक है I
2) बाजार में मिलनेवाला त्रीफला चूर्ण न खायें तो आंवला, बेहडा, हरडे लाकर त्रीफला चूर्ण बनाकर खायें I
3) त्रीफला सुबह नाष्टे के 40 मिनट पहेले लेना चाहीए I
4) 18 सुक्ष्म पोषण तत्व सब एक साथ खेत की मिट्टी मे है और गाय के गोमूत्र में है I
5) महिने में एक या दो बार देसी गाय के गोमूत्र से बाल धोने से बाल झडना, टुटना बंद होता है I
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आयुर्वेदिक घरगुती उपाय
1) पेट की तकलीफ, अपचन, पित्त, होनेपर जीरे का पानी पीजीए या जीरा चबाकर खाइये बाद में गरम पाणी पीजीए I
2) अनार दाने का रस मिश्री डालकर सेवन करने से निम्न रक्तदाब में लाभ मिलता है I
3) कान दुखने पर हलदी और तुरटी मिलाकर औटाकर ४ बुंद कान में डालने से आराम मिलता है I
4) हल्दी दो प्रकार की होती है सुखी और ताजी अदरक जैसी, ताजी हल्दी का सेवन करने से कँन्सर में आराम मिलता है I
5) गाजर के रस में शक्कर और काली मिरी मिलाकर खाने से खांसी में आराम मिलता है I
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पंचगव्य का उपयोग
1) पाणी में गोबर और गोमूत्र मिलाकर पिनेसे कॉलरा रोग ठिक होता है I
2) कांजण्या होनेपर देसी गाय के दूध में घी मिलाकर सेवन करें I
3) कुष्ठरोग होनेपर गोबर और दूध के उबटन से स्नान करें I
4) छोटे बच्चों के छाती में कफ जम गया हो तो देसी गायी का घी छाती पर मलें आराम मिलेगा I
5) देसी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग खाज – खुजली के जगह करें आराम मिलेगा I
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गायीचे महत्त्व
1) देसी गायी के घी को सर्वश्रेष्ठ रसायन कहते है I
2) देसी गाय का दूध और घी मेंदू के लिए उत्तम टॉनीक है I
3) भारत मे की एक गाय 1 साल में 750 पौंड दूध देती है I
4) देसी गाय का गोमूत्र विष नाशक है I
5) देसी गाय के गोमूत्र में 24 प्रकार के रसायन है I
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शेतीचे महत्त्व ::–
बीज रहीत फळे येण्यासाठी :-
मोहाची फुले, बुंजा, साखर, पिकलेले उंबरे, तूप व मध यांचा कल्प करुन तो कोणत्याही फळे येणा-या झाडाची मुळे थोडी थोडी खरडुन त्यावर लेप करावा आणी बोकडाच्या लेंडया मूळाशी टाकाव्यात.
गाढवाच्या व घोडयाच्या लेंडया विस्तवात लोखंडी सळी तापवून लाल करावी व केळीत खुपसावीत. हत्तीच्या सोंडेसारखी मोठी केळी लागतात.
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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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