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बुध्द ओर मांसाहार


बुध्द ओर मांसाहार

बुध्द ओर सूअर का मास
मित्रो महाभारत के युध्द के बाद धर्म मे ओर धर्म ग्रंथो कर्मकांडो मे
कई तरह की अशुध्दिया आ गई ओर जो यञ
प्राणी मात्र के जीवन रछा ओर सुख
की कामना के लिए किया जाता था उनमे पशु बलि का प्रचलन
हो गया,,,
ऐसे मै गौतम बुध्द ने कई बार अपने प्राणो की परवाह
किए बिना यञ से पशु को बलि होने से बचाया लेकिन जिन बुध्द ने पशु
रछा मे अपना जीवन दिया आज कल उनके
ही अनुयायी ओर बौध्द देश मास भछण करते
है|
यहा तक नवनिर्मित
अम्बेडकरवादी भी कहते है कि बुध्द
भी मासाहारी थे ओर अम्बेडकर
वादी भी फुल मास भछण करते है|
इसके अलावा विदेशी मत के लोग जैसे इसाई ओर मुस्लिम
भी ये प्रचार करते है कि बुध्द की मृत्यु
सूअर का मास खाने से हुई|
असल मे बोध्द धर्म मे बुध्द के बाद भिछुको ने
अपनी सुविधानुसार परिवर्तन किए थे
इसी तरह एक बौध्द भिछु ने
किसी चील के मुह से गिरे हुए मास
का टुकडा खा लिया ओर ये प्रचार फैला दिया कि पशु को मारना पाप है
जबकि मास खाना नही वास्तव मे बुध्द ने
कभी मासाहार नही किया ओर न
कभी इसका समर्थन किया लेकिन विरोध अवश्य किया है|
अब हम आप को बताते है सूअर के मास के पीछै
का रहस्य-
“चुदस्स भत्त मुजित्वा कम्मारस्साति ये सुतं|
आबाधं सम्फुसो धीरो पबाव्ठे मारणान्तिकं|
भत्तस्स च सूकर मद्दवेन,व्याधि पवाह उदपादि सत्थुनो|
विरेचमानो मगवा आबोच गच्छामहं कुसिनारं नगरंति|{दीर्घ
निकाय}
इसका भावार्थ है कि चुन्नासा भट्ट ने महात्मा बुध्द को सूकर
का मद्दव खिला दिया|उससे उनके पेट मे अति पीडा हुई
और उनहे अतिसार हौ गया|तब उनहोने कहा ,”मै
कुसीनगर को जाउगा ”
यहा सूकर मद्दव को लोग सूअर का मास समझते है विशेषकर
श्रीलंकाई बोध्दो ने इसे सुअर का मास बताया लेकिन ये सच
नही है
वास्तव मै यहा सूकर मद्दव पाली शब्द है जिसे
हिन्दी करे तो होगा सूकर कन्द ओर संस्कृत मे बराह
कन्द यदि आम भाषा मे देखे तो सकरकन्द चुकि ये दो प्रकार
का होता है १ घरेलु मीठा२ जंगली कडवा इस
पर छोटे सूकर जैसे बाल आते है इस लिए इसे बराह कन्द
या शकरकन्द कहते है|ये एक कन्द होता है जिसका साग
बनाया जाता है |इसके गुण यह है कि यह चेपदार मधुर और गरिष्ठ
होता है तथा अतिसार उत्पादक जिस जगह भगवान बुध्द ने यह
खाया ओर उनहे अतिसार हुआ उस गौरखपुर
देवरिया की तराई मे उस समय ओर आज
भी सकर कन्द
की खेती की जाती है|
वास्तव मै उसका अर्थ सूअर का मास
करना मुर्खता ही है
इस तरह अन्य चीजे भी है
जैसे एक औषधी अश्वशाल होती है
जिसका शाब्दिक अर्थ घौडे के बाल लेकिन वास्तव मे यै औषधिय
पौधा होता है
इसी तरह अंग्रेजी मे lady finger
जिसका अर्थ करे तो औरत की उंगली लेकिन
वास्तव मे यह भिंडी के लिए है
इसी तरह कुकरमुत्ता जिसका शाब्दिक अर्थ कुत्ते
का मूत्र लेकिन ये वास्तव मे एक साग होता है
इसी तरह अश्वगंधा जिसका घौडे की गंध
लेकिन वास्तव मे ये औषधिए पौधा होता है|
अत: सूकर मद्दव एक कन्द है न कि सूकर का मास|
इस लिंक को पढे अधिक जानकारी हैतु
https://vedictruth.blogspot.in/2013/12/blog-post_14.html?
m=1

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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