Posted in संस्कृत साहित्य

हनुमान चालीसा में एक श्लोक है:-


हनुमान चालीसा में एक श्लोक है:-
जुग (युग) सहस्त्र जोजन (योजन) पर भानु |
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||
अर्थात हनुमानजी ने एक युग सहस्त्र योजन दूरी पर स्थित भानु अर्थात सूर्य को मीठा फल समझ के खा लिया था |
1 युग = 12000 वर्ष
1 सहस्त्र = 1000
1 योजन = 8 मील
युग x सहस्त्र x योजन = पर भानु
12000 x 1000 x 8 मील = 96000000 मील
1 मील = 1.6 किमी
96000000 x 1.6 = 1536000000 किमी
अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार सूर्य पृथ्वी से 1536000000 किमी की दूरी पर है |
NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है|
इससे पता चलता है कि हमारा पौराणिक साहित्य कितना सटीक एवं वैज्ञानिक है , इसके बावजूद इनको बहुत कम महत्व दिया जाता है |
भारत के प्राचीन साहित्य की सत्यता को प्रमाणित करने वाली ये जानकारी अवश्य शेयर करें | ….
‪#‎जयमाँभारती‬

मयंक कुमार's photo.
Posted in Tejomahal

तेजोमहालय ‘ शिवालय ‘ मंदिर


मित्रो , में इस विषय पर आगे दो पोस्ट लिख चुका हूँ लेकिन आज एक नई मांग खड़ी हुई है ! तथाकथित ताज महल अर्थात तेजोमहालय ‘ शिवालय ‘ मंदिर पर अब शिया संप्रदाय के लोग अपना हक जता रहे हैं।हाल ही में अखिलेश सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर आजम खान ने मांग की थी कि ताजमहल को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाना चाहिए। अब शिया संप्रदाय के लोगों ने मांग की है कि ताज को शिया वक्फ बोर्ड को दिया जाना चाहिए। लखनऊ के इमाम-ए-रजा कमिटी के प्रेजिडेंट फय्यर हैदर ने दलील दी कि मुमताज शिया थीं, इसलिए ताजमल को शिया वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाना चाहिए।

मित्रो , में इस विषय पर आगे दो पोस्ट लिख चुका हूँ लेकिन आज एक नई मांग खड़ी हुई है ! तथाकथित ताज महल अर्थात तेजोमहालय ' शिवालय ' मंदिर  पर अब शिया संप्रदाय के लोग अपना हक जता रहे हैं।हाल ही में अखिलेश सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर आजम खान ने मांग की थी कि ताजमहल को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाना चाहिए। अब शिया संप्रदाय के लोगों ने मांग की है कि ताज को शिया वक्फ बोर्ड को दिया जाना चाहिए। लखनऊ के इमाम-ए-रजा कमिटी के प्रेजिडेंट फय्यर हैदर ने दलील दी कि मुमताज शिया थीं, इसलिए ताजमल को शिया वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाना चाहिए।

हैदर ने कहा कि ताजमहल एक 'शिया इमारत' है। पढ़िए क्या है पूरी खबर... http://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/mathura/agra/now-shias-demand-for-taj-mahal/articleshow/45248591.cms

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10203401613744971&set=pb.1350822074.-2207520000.1416767956.&type=3&src=https%3A%2F%2Ffbcdn-sphotos-f-a.akamaihd.net%2Fhphotos-ak-xpa1%2Fv%2Ft1.0-9%2F1621938_10203401613744971_2936289705005155558_n.jpg%3Foh%3D5bf156dc7bcaac711b281a320ef90991%26oe%3D552076CD%26__gda__%3D1423090087_b6b5ac2ad5370e35e1fc21610038f0c1&size=960%2C720#

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10203358464386264&set=pb.1350822074.-2207520000.1416576121.&type=3&src=https%3A%2F%2Ffbcdn-sphotos-f-a.akamaihd.net%2Fhphotos-ak-xap1%2Fv%2Ft1.0-9%2F1911747_10203358464386264_6434273000875120394_n.jpg%3Foh%3D6beb531459eedcf4ffc9e0c2928573b8%26oe%3D54D82F19%26__gda__%3D1428053280_6f90df50dee29950beaddcdadee00995&size=960%2C720#

https://www.facebook.com/media/set/?set=a.2864585817681.2120494.1350822074&type=3

https://www.facebook.com/lens.on.news/photos/a.329997770400705.75137.329961983737617/330028287064320/?type=1

http://htcedws.blogspot.in/2012/05/blog-post_18.html

वंदे मातरम् .......
ॐ नम: शिवाय ........ 

 (--}>
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

दोस्तों अंतिम हिन्दू सम्राट “पृथ्वीराज चौहान”


दोस्तों अंतिम हिन्दू सम्राट “पृथ्वीराज
चौहान”
जिन्हें शायद ही कोई हो ,जो न जानता हो ,
जिन्होंने अपने
देश के सम्मान के लिए अपने राज्य और अपने
प्राणों की आहूति दे दी ,
17 बार मुहम्मद गोरी को हराने के बाद उसे माफ़
करते रहे और
अनन्तता धोखे और विश्वासघाती दुश्मन के
शिकार
हो गये ।
उनकी वीरता और शब्दभेदी होने
की चर्चा आज भी लोकगीतों और किताबो में
मौजूद है

दोस्तों उपरोक्त
कहानी को किसी मामूली राजा की नही उस
महान
सम्राट की है जिसने मरते – मरते भी इस
मिट्टी का कर्ज
चुका दिया ,
उन्होंने मरते वक्त भी उस धोखेवाज और
एहसान फरामोश गोरी को अपने शब्दभेदी बाण
से मार
दिया ।
दोस्तों अब आते हैं मुद्दे पर ,महान सम्राट
पृथ्वीराज
चौहान की अस्थियाँ अपनी पहिचान ढूंढ
रही हैं
उन्हें
वो सम्मान भी नही मिला जो एक
मामूली राजा की समाधी को मिल जाता है
आज
स्थिति यह है जो इन तस्वीरों में व्यक्त है
जिसे देखकर
हर हिन्दू को एक बार अवश्य सोचना चाहिए
कि उसे
शर्म का एहसास हो रहा है या नही ,जिसे
किसी प्रकार
का अनुभव नही हो रहा वो इस पोस्ट को न पढ़े
तो ज्यादा अच्छा है और जिसे कुछ भी अनुभव
हो रहा है उसे सोचना चाहिए कि हमारे पूर्वज
सम्राट
पृथ्वीराज चौहान उनकी पहिचान दोबारा कैसे
प्रदान
की जाये
मैं सभी हिन्दू भाइयों से अपील कर रहा हूँ
सम्राट
को उनकी पहिचान दिलाने में सहयोग करे ।
शेर सिंह राणा जैसे वीर योद्धा अपने सम्मान
के लिए
सम्राट की अस्थियों को गोरी की मजार से
यहाँ तक
ले आये ( मैं उस वीर सपूत को नमन करता हूँ )
मगर अब
उन्ही अस्थियो की यह हालत क्या हम
मजारो पर सर
रगड़ते रगड़ते अपने पूर्वजों को भूलते
तो नही जा रहे ,
सम्राट आज नही है सबको पता है मगर
हमारा एहसास
है उनकी यादगार के साथ जो हमारे लिए बहुत
जरूरी है
हमारे बच्चो को बताने के लिए ,
हम
बच्चो को उनकी बहादुरी का किस्सा सुनाते
है मगर जब
उनकी समाधी की बात आएगी तब हम
क्या बताएँगे
यही कि वहां अब पतेल उग गई है वहाँ अब घास के
जंगल
है और सबसे बड़ी बात कि यह स्थिति हमारे देश
के एक जिले मैनपुरी
की ही है जहाँ सबसे अधिक वंशज रहते हैं ।
तो दोस्तों एक बार अपने ह्रदय को आवाज
दो और इस
स्थिति से निपटने में अपना सहयोग दो समाज
के
कर्ता धर्ता व्यक्तियों तक यह बात
पहुँचाओ ,इस स्टेट्स
को सभी मैनपुरी के नागरिक और उनके कथित
वंशजो तक पहुँचाने में मदद करो ,
और अगर इस पर कुछ
नही हो पाता है तो हम सब मिलकर करेंगे यह आप
सभी अपने सहयोग के लिए तैयार रहे ।
क्या मैनपुरी के हिन्दू इतने सम्मवेदन हीन
हो गये है ।।

दोस्तों अंतिम हिन्दू सम्राट "पृथ्वीराज
चौहान"
जिन्हें शायद ही कोई हो ,जो न जानता हो ,
जिन्होंने अपने
देश के सम्मान के लिए अपने राज्य और अपने
प्राणों की आहूति दे दी ,
17 बार मुहम्मद गोरी को हराने के बाद उसे माफ़
करते रहे और
अनन्तता धोखे और विश्वासघाती दुश्मन के
शिकार
हो गये ।
उनकी वीरता और शब्दभेदी होने
की चर्चा आज भी लोकगीतों और किताबो में
मौजूद है
।
दोस्तों उपरोक्त
कहानी को किसी मामूली राजा की नही उस
महान
सम्राट की है जिसने मरते - मरते भी इस
मिट्टी का कर्ज
चुका दिया ,
उन्होंने मरते वक्त भी उस धोखेवाज और
एहसान फरामोश गोरी को अपने शब्दभेदी बाण
से मार
दिया ।
दोस्तों अब आते हैं मुद्दे पर ,महान सम्राट
पृथ्वीराज
चौहान की अस्थियाँ अपनी पहिचान ढूंढ
रही हैं
उन्हें
वो सम्मान भी नही मिला जो एक
मामूली राजा की समाधी को मिल जाता है
आज
स्थिति यह है जो इन तस्वीरों में व्यक्त है
जिसे देखकर
हर हिन्दू को एक बार अवश्य सोचना चाहिए
कि उसे
शर्म का एहसास हो रहा है या नही ,जिसे
किसी प्रकार
का अनुभव नही हो रहा वो इस पोस्ट को न पढ़े
तो ज्यादा अच्छा है और जिसे कुछ भी अनुभव
हो रहा है उसे सोचना चाहिए कि हमारे पूर्वज
सम्राट
पृथ्वीराज चौहान उनकी पहिचान दोबारा कैसे
प्रदान
की जाये
मैं सभी हिन्दू भाइयों से अपील कर रहा हूँ
सम्राट
को उनकी पहिचान दिलाने में सहयोग करे ।
शेर सिंह राणा जैसे वीर योद्धा अपने सम्मान
के लिए
सम्राट की अस्थियों को गोरी की मजार से
यहाँ तक
ले आये ( मैं उस वीर सपूत को नमन करता हूँ )
मगर अब
उन्ही अस्थियो की यह हालत क्या हम
मजारो पर सर
रगड़ते रगड़ते अपने पूर्वजों को भूलते
तो नही जा रहे ,
सम्राट आज नही है सबको पता है मगर
हमारा एहसास
है उनकी यादगार के साथ जो हमारे लिए बहुत
जरूरी है
हमारे बच्चो को बताने के लिए ,
हम
बच्चो को उनकी बहादुरी का किस्सा सुनाते
है मगर जब
उनकी समाधी की बात आएगी तब हम
क्या बताएँगे
यही कि वहां अब पतेल उग गई है वहाँ अब घास के
जंगल
है और सबसे बड़ी बात कि यह स्थिति हमारे देश
के एक जिले मैनपुरी
की ही है जहाँ सबसे अधिक वंशज रहते हैं ।
तो दोस्तों एक बार अपने ह्रदय को आवाज
दो और इस
स्थिति से निपटने में अपना सहयोग दो समाज
के
कर्ता धर्ता व्यक्तियों तक यह बात
पहुँचाओ ,इस स्टेट्स
को सभी मैनपुरी के नागरिक और उनके कथित
वंशजो तक पहुँचाने में मदद करो ,
और अगर इस पर कुछ
नही हो पाता है तो हम सब मिलकर करेंगे यह आप
सभी अपने सहयोग के लिए तैयार रहे ।
क्या मैनपुरी के हिन्दू इतने सम्मवेदन हीन
हो गये है ।।
Posted in संस्कृत साहित्य

Importance of Guru


Importance of Guru
The word Guru comes from Sanskrit and its root words are gu, meaning darkness, and ru, dispeller. A Guru is an awakened man or woman who has personally, through the help and invaluable transfer of consciousness from a Guru before, become able to transmit higher consciousness to the aspirant.
Mother gives the first birth to a child. We come into the world through the mother. But second birth is through the Guru. The master delivers you the knowledge and skill.We all play the role of teacher, guide, guru, but when the spiritual knowledge is so total, that one is called Sathguru. An Acharya (teacher) gives knowledge and Guru gives height of awareness and makes you alive. Acharya gives information; Guru gives intelligence, an awakened intelligence.
Guru is a tatva — an element, a quality inside you. It is not limited to a body or a form. Guru is too big for you to make. Guru comes in your life in spite of your refusing or rebelliousness. Don’t struggle to make a Guru. Just relax. Wake up and see. Feel grateful. Give all your garbage to the Guru and be free. Guru makes gold out of garbage. It is easy to make that change because everyone is made up of that one thing.
When your life is full, you get a feeling of gratitude then you start with the Guru and end up adoring everything in life. Guru is just a beginning. Whenever you praise, the praise goes to the divine. When you praise someone, your own consciousness is expanding. So for your own sake, adore and venerate others.
That is why we celebrate Guru Poornima. Guru Poornima is the day to feel grateful for the great knowledge you have received from your Master. There is a definite change inside you. Gratitude and humility together blossom a genuine prayer inside you!

How to find guru:
You do not need to find your guru, just create the will from inside, it will automatically happen, guru will come to you.
Still basic rule to check the person is your guru are:

If you know what to do in his presence then he is not guru.
If you do not know in his presence then he is guru.
If you do not know in his presence but everything automatically happens then definitely he is guru.

Importance of Guru
The word Guru comes from Sanskrit and its root words are gu, meaning darkness, and ru, dispeller. A Guru is an awakened man or woman who has personally, through the help and invaluable transfer of consciousness from a Guru before, become able to transmit higher consciousness to the aspirant.
Mother gives the first birth to a child. We come into the world through the mother. But second birth is through the Guru. The master delivers you the knowledge and skill.We all play the role of teacher, guide, guru, but when the spiritual knowledge is so total, that one is called Sathguru. An Acharya (teacher) gives knowledge and Guru gives height of awareness and makes you alive. Acharya gives information; Guru gives intelligence, an awakened intelligence.
Guru is a tatva — an element, a quality inside you. It is not limited to a body or a form. Guru is too big for you to make. Guru comes in your life in spite of your refusing or rebelliousness. Don't struggle to make a Guru. Just relax. Wake up and see. Feel grateful. Give all your garbage to the Guru and be free. Guru makes gold out of garbage. It is easy to make that change because everyone is made up of that one thing.
When your life is full, you get a feeling of gratitude then you start with the Guru and end up adoring everything in life. Guru is just a beginning. Whenever you praise, the praise goes to the divine. When you praise someone, your own consciousness is expanding. So for your own sake, adore and venerate others.
That is why we celebrate Guru Poornima. Guru Poornima is the day to feel grateful for the great knowledge you have received from your Master. There is a definite change inside you. Gratitude and humility together blossom a genuine prayer inside you!

How to find guru:
You do not need to find your guru, just create the will from inside, it will automatically happen, guru will come to you.
Still basic rule to check the person is your guru are:

    If you know what to do in his presence then he is not guru.
    If you do not know in his presence then he is guru.
    If you do not know in his presence but everything automatically happens then definitely he is guru.
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

some ancestral kshatriya history…


Vikram Vixx shared his post.

some ancestral kshatriya history…

Vikram Vixx's photo.
Vikram Vixx's photo.
Vikram Vixx's photo.

Maharaja of Samthar (HH RADHA CHARAN SINGH Ju Deo Bahadur) – of Gurjar Khattan dynasty (ruled northern Afghanistan till late 9th century – attached to Pratiharas i.e. the greatest/unbeaten defence of Bharata during India’s past 1000 year invasion history). Samthar State’s Fort (near Jhansi) photos.

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

राजपूत भाइयों गर्व से लाइक करें और कमेन्ट में “जय क्षत्राणी” जरुर लिख्ज्यो सा। चुण्डावत मांगी सेनाणी सर काट दे दियोक्षत्राणी।


राजपूत भाइयों गर्व से लाइक करें और कमेन्ट में “जय क्षत्राणी” जरुर लिख्ज्यो सा।

चुण्डावत मांगी सेनाणी सर काट दे दियोक्षत्राणी।

यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के चुण्डावत की रानी|
जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति चुण्डावतसा को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह (1653-1681) का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्धका फरमान मिला |
नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर कुँवर चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नही हो रहा था यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत कुँवर जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद लडने को कहा।

तो हे राजपुत वीरो ओर वीराँगनाओ आप जबाब दो की हाडा रानी का पतिदेव का नाम क्या था।

अगर जबाब है तो अन्यथा गल्त जबाब ना दे..!

एडमिन टीम की तरफ से।

जय माता जी की सा।
जय राजपुताना।

राजपूत भाइयों गर्व से लाइक (y) करें और कमेन्ट में "जय क्षत्राणी" जरुर लिख्ज्यो सा।

चुण्डावत मांगी सेनाणी सर काट दे दियोक्षत्राणी।

यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के चुण्डावत की रानी|
जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति चुण्डावतसा को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह (1653-1681) का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्धका फरमान मिला |
नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर कुँवर चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नही हो रहा था यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत कुँवर जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद लडने को कहा।

तो हे राजपुत वीरो ओर वीराँगनाओ आप जबाब दो की हाडा रानी का पतिदेव का नाम क्या था।

अगर जबाब है तो अन्यथा गल्त जबाब ना दे..!

एडमिन टीम की तरफ से।

जय माता जी की सा।
जय राजपुताना।
Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

कितना कुछ छुपाया गया है , इतिहास पर कितने पर्दे डाले गए हैं ,


कितना कुछ छुपाया गया है , इतिहास पर कितने पर्दे डाले गए हैं , भारत के गौरवशाली इतिहास को छुपा कर विश्व के समक्ष एक ऐसा इतिहास प्रस्तुत किया गया है जिसको पढ़ कर स्वयम् भारतवासियो को अपने इतिहास और अपने भारतीय होने से घृणा हो जाए । आज जो इतिहास पढ़ाया जा रहा है उसमे भारतीयो को कायर और डरपोक दिखाया गया है । बहुत सी साच्चीयो पर पर्दा डाल कर सिर्फ और सिर्फ मुसलमानो को महान दिखाया गया है । एक ऐसा इतिहास बनाया गया है कि आज की युवा पीढ़ी को अपने भारतीय होने कोई गर्व महसूस नही होता । यही कारण है कि आज चन्द रुपयो के लिए भारतीय वैग्यानिक , भारतीय इंजीनियर्स , भारतीय डॉक्टर्स अपने देश की महानता न जानते हुए ना समझते हुए विदेशो में उनके तलवे चाटने के लिए चले जाते हैं ।
भारत वास्तव में विश्व गुरु है । सारी सम्पप्ति भारत की है।
ये हैं वो सम्पत्ति जो भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व को दिया ।
– गुरुत्वाकर्षण का गूढ उजागर करनेवाले भास्कराचार्य !
– परमाणु शास्त्र के जनक आचार्य कणाद !
– कर्करोग प्रतिबंधित करनेवाला पतंजलीऋषिका योगशास्त्र !
– औषधि-निर्मिति के पितामह : आचार्य चरक !
– शल्यकर्म में निपुण महर्षि सुश्रुत !
– नागार्जुन, ७वीं शताब्दी के आरंभ के रसायन शास्त्र के जनक हैं।
– राइट बंधुओंसे २५०० वर्ष पूर्व वायुयान की खोज करनेवाले भारद्वाज ऋषि !
– कौरव-पांडव काल में तारों के जगत के विशेषज्ञ गर्ग मुनि जी ने नक्षत्रों की खोज की।
ये है वो भारत के महान वैग्यानिक जिन्होंने विश्व् को मार्ग दिखाया । जिन्होंने विश्व् का स्वरूप् ही बदल कर रख दिया
और आज हम भारतीयो को ही अपने भारतीय होने पर गर्व नही ।
हमे आज हिंदी बोलने में शर्म आती है और हन्ग्रेजी बोलने में गर्व महसूस होता है वो हन्ग्रेजी जो हिंदी और संस्कृत से ही बनी है।
तो भाइयो और बहनो , अपने बच्चो को ये सच्चाई बताइये ताकि भारत की आने वाली पीढ़ी को भारतीय होने पर गर्व महसूस हो ।
मित्रो अधिक से अधिक इस पोस्ट को शेयर या कॉपी करे और लोगो तक इन बातो को पहुचाइए ।
जय सनातन
जय हो भगवा राज
धन्यवाद

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

महाराष्ट्र में औरंगाबाद के नजदीक दौलताबाद से 11 किलोमीटर दूर घृष्‍णेश्‍वर महादेव का मंदिर स्थित है


 

10405632_667603770026705_7086579966215814018_n. यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. कुछ लोग इसे घुश्मेश्वर के नाम से भी पुकारते हैं. बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप ही स्थित हैं. इस मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसे अंतिम ज्योतिर्लिंग कहते हैं. इसे घुश्मेश्वर, घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहा जाता है. घुश्मेश्वर महादेव के दर्शन करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा उसी प्रकार सुख-समृद्धि होती है, जिस प्रकार शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा की.
दक्षिण देश के देवगिरि पर्वत के निकट नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेश के साथ रहता था. वे दोनों शिव भक्त थे किंतु सन्तान न होने से चिंतित रहते थे. सुकर्मा ने पत्नी के आग्रह पर उसकी बहन घुश्मा के साथ विवहा किया जो परम शिव भक्त थी. शिव कृपा से उसे एक पुत्र धन की प्राप्ति हुई. इससे सुदेश को ईष्या होने लगी और उसने अवसर पा कर सौत के बेटे की हत्या कर दी. लेकिन घुश्मा ने भगवान् शिव की आराधना करना नहीं छोड़ा. अगले दिन शिवजी की कृपा से ही बालक जी उठा. उसी समय भगवान् शिव प्रकट हुए और घुश्मा से वर मांगने को कहने लगे. घुश्मा ने हाथ जोड़कर भगवान् शिव से कहा- “प्रभो! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरी उस अभागिन बहन को क्षमा कर दें. निश्चित ही उसने अत्यंत जघन्य पाप किया है किंतु आपकी दया से मुझे मेरा पुत्र वापस मिल गया. अब आप उसे क्षमा करें और प्रभो! मेरी एक प्रार्थना और है, लोक-कल्याण के लिए आप इस स्थान पर सर्वदा के लिए निवास करें. भगवान् शिव ने उसकी ये दोनों बातें स्वीकार कर लीं. ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर वह वहीं निवास करने लगे. उस तालाब का नाम भी तबसे शिवालय हो गया. सती शिवभक्त घुश्मा के आराध्य होने के कारण वे यहां घुश्मेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए. कहते हैं घुश्मेश्वर-ज्योतिर्लिंग का दर्शन लोक-परलोक दोनों के लिए अमोघ फलदाई है.

 

Posted in हिन्दू पतन

Great resistance of Hinduism.


Great resistance of Hinduism.

Can’t mind wash Hindus
Our ancestors rather die being an Hindu but not getting converted forcefully.
Proud of our ancestors

1.Within 77 years of death of its prophet in AD 632. Palestine and Syria fell to ISLAM after a six months campaign in AD 636-637.
2.Next came the turn of the Sassanid empire of Persia which included Iraq, Iran, and Khorasan.
3.The Persians were defeated decisively in AD 637, and their entire empire was overrun in the next few years.
4.The Turkish speaking territories of Inner Mongolia, Bukhara, Tashkand, and Samarkand, etc. were annexed by AD 650.
5.Meanwhile, in the west, Egypt had fallen in AD 640-641.
6 The Arab armies marched over North Africa till they reached the Atlantic and crossed over into Spain in AD 709.

7.The same Islamic armies, however, had to struggle for 69 long years to make their first effective breach in the borders of India. In the next three centuries, they pushed forward in several provinces of Northern and Western India. But at the end of it all, India was far from being conquered militarily or assimilated culturally.
The Arab invasion of India ended in a more or less total failure.

Photo: Great resistance of Hinduism.

Can't mind wash Hindus
 Our ancestors  rather die being an Hindu but not getting converted forcefully.
                        Proud of our ancestors

1.Within 77 years of death of its prophet in AD 632. Palestine and Syria fell to ISLAM after a six months campaign in AD 636-637. 
2.Next came the turn of the Sassanid empire of Persia which included Iraq, Iran, and Khorasan. 
3.The Persians were defeated decisively in AD 637, and their entire empire was overrun in the next few years. 
4.The Turkish speaking territories of Inner Mongolia, Bukhara, Tashkand, and Samarkand, etc. were annexed by AD 650. 
5.Meanwhile, in the west, Egypt had fallen in AD 640-641.
6 The Arab armies marched over North Africa till they reached the Atlantic and crossed over into Spain in AD 709. 

7.The same Islamic armies, however, had to struggle for 69 long years to make their first effective breach in the borders of India. In the next three centuries, they pushed forward in several provinces of Northern and Western India. But at the end of it all, India was far from being conquered militarily or assimilated culturally.
 The Arab invasion of India ended in a more or less total failure.
Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

CERN AND SHIVA


Super photo week photo-3
CERN AND SHIVA
Photo: Super photo week photo-3
CERN AND SHIVA