Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

एक अत्यंत आश्चर्यजनक तथ्य. कृपया अवश्य पढ़ें :



एक अत्यंत आश्चर्यजनक तथ्य. कृपया अवश्य पढ़ें :

आज से लगभग छः सौ वर्ष पूर्व सन्त रविदास (1388-1508) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूज्य श्री माधवराव सदाशिवराव गोळवळकर उपाख्य ‘गुरुजी’ (1906-1973) के द्वारा राष्ट्रकार्य की भविष्यवाणी की थी :

‘यह विधि बीते काल कुछ, प्रगटें माधवराय ।
ऊँच-नीच बिसराय कर सबको देय मिलाय ।।
‘गुरु’ नाम से सब जग जानै, इनको ‘परम पूज्य’ अति मानै ।
सत्यपंथ का कर उद्धारा, देश धर्म का कर विस्तारा ।।
करै संगठन बन ब्रह्मचारी, उन समान कौउन उपकारी ।
ये कह मौन भये रविदासा, विनयपूर्ण मुनि प्रेम प्रकासा ।।’
-रविदास रामायण, २०७-२०९

संत रविदास ने कहा है कि कुछ काल बीतने के बाद देश में “माधवराय” नाम से एक संत प्रकट होंगे जो ऊँच-नीच का भेद भुलाकर सभी को गले लगाएंगे. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में किसी से भी उसकी जाति नहीं पूछी जाती है. “माधवराय” अथवा “माधवराव” को कालांतर में “गुरूजी” के नाम से जाना गया– यह तो सभी जानते हैं. इन्हें “परम पूज्य” भी कहा गया क्योंकि श्री गुरुजी संघ के द्वितीय सरसंघचालक थे और सरसंघचालक को “परम पूज्य” सम्बोधन प्राप्त है. गुरु जी के समय में संघकार्य का चतुर्दिक विस्तार हुआ था और संघ के अंतर्गत अनेकानेक अनुषांगिक संगठन स्थापित हुए. गुरूजी ने विवाह नहीं किया और ब्रह्मचारी बनकर देश-धर्म का कार्य करते रहे. ३३ वर्षों तक सरसंघचालक रहकर भारतमाता की ६६ बार प्रदक्षिणा की.

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2 thoughts on “एक अत्यंत आश्चर्यजनक तथ्य. कृपया अवश्य पढ़ें :

  1. संत रविदास जी के इस बचन का अपने मन से अर्थ ना लगाएं । ये वचन परम पूज्य संत बाबा जगुरूदेव के लिए है।

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