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इंडियन नेशनल कांग्रेस के राष्ट्रद्रोह का मुखर विरोध करनेवाले बड़े-बड़े भाजपा-नेता दुनिया से हमेशा के लिए उठा दिए गए हैं.



इंडियन नेशनल कांग्रेस के राष्ट्रद्रोह का मुखर विरोध करनेवाले बड़े-बड़े भाजपा-नेता दुनिया से हमेशा के लिए उठा दिए गए हैं.
जिस भारतीय जनसंघ की नीव पर भाजपा आज खड़ी है, उस जनसंघ के ३-३ राष्ट्रीय अध्यक्ष- १९५३ में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, १९६३ में प्रख्यात प्राच्यविद डा. आचार्य रघुवीर और १९६८ में प्रख्यात चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय मौत के घाट उतार दिए गए.
डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रीनगर जेल की एक छोटी कोठरी में ठूंसकर मार दिया गया; डा. आचार्य रघुवीर को सड़क-एक्सीडेंट में उड़ा दिया गया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तो बड़ी नृशंस हत्या हुई. उनके तो हाथ-पैर मरोड़कर तोड़ डाले गए थे और चेहरे को भी विकृत कर दिया गया था ताकि उनकी पहचान न हो सके. यहाँ तक कि उनका मृत शरीर मुगलसराय रेलवे स्टेशन के यार्ड में लावारिस पड़ा मिला था. बड़ी मुश्किल से (नानाजी देशमुख की घड़ी से) उनकी पहचान हो पाई. परम पूज्यनीय श्री गुरुजी दीनदयाल जी की मृत्यु पर रो पड़े थे.
उक्त तीनों महान विभूतियों में से किसी की भी हत्या का रहस्य आज तक नहीं खुल पाया है.
श्री नरेन्द्र मोदी से अपेक्षा है कि उनके कार्यकाल में इन नेताओं की मृत्यु के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए सार्थक प्रयास किया जाएगा.

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