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आयुर्वेदिक घरगुती उपाय


आयुर्वेदिक घरगुती उपाय
1) गोबी खाने से पचनक्रीया व्यवस्थीत रहेती है I
2) ताजी हल्दी का सेवन करने से कॅन्सर में आराम मिलता है I
3) क्षयरोग होनेपर कच्चे लहसुन की कली सेवन करें I
4) जखम होनेपर कच्चे गाजर खायें जखम जल्दी भरेंगे I
5) निंबू का रस पिनेसे ह्रदय निरोगी रहेता है I
देसी गायीचे महत्त्व
1) देसी गायी में रोगों से बचानेवाली रोग प्रतीकार शक्ती रहेती है I
2) एक गाय अपने जीवन में 40 लाख रुपये का उत्पन्न देती है I
3) गायी के हंबरणे से हवा शुध्द होती है I
4) जानवरों के संख्या में भारत पहिले स्थानपर है I
5) गायी का गोबर यह किरणोत्सारी 100% रोधन करता है I
पंचगव्य का उपयोग
1) जीस रोगी को मूत्र रुक रुक आता है उसे देसी गाय का गोमूत्र लाभकारी है I
2) देसी गाय के कच्चे दूध से शरीरपर मालीश करने से त्वचा सतेज होती है I
3) अर्जुन घृत के नियमीत सेवन से ह्रदयक्रिया व्यवस्थीत रुप से होने लगती है I
4) गोबर-गोमूत्र के व्दारा भूमी को शुध्द कर जल को प्रदुषीत होने से बचाया जा सकता है I
5) दस्त होनेपर गोमय रस पिने से लाभ मिलता है I
भाई राजीव दिक्षीत
1) लोणी और खडीशक्कर नियमीत रुप से खाये I
2) तील, मुग और मसुर की दाल नियमीत रुप से खाये I
3) पीलीया एंव लीवर में पुनर्नवा का प्रयोग करें I
4) उत्तर दिशा सोने के लिए वर्जीत है I
5) भारत की मिट्टी में 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व है जो दुनिया के कोई भी मिट्टी में नहीं है I
शेतीचे महत्त्व ::–
शेती संबंधीत काही महत्त्वाच्या बाबी ::-
1) प्लाट व शेतीच्या बाबतीत नैऋत्य भागाची जमीन पातळी, ईशान्य, अग्नेय व वायव्य या भागापेक्षा उंच असावी त्यामुळे सुख, समृध्दी लाभते.
2) नैऋत्य कोप-यात बांधा वा प्लॉट हा ९० अंश काटकोनात असावा. कुंपन केल्यास तेही ९० अंश असावे. शक्यतो दगडी भींतीचे कुंपन असावे.
3) उंच झाडे नैऋत्य कोप-यात लावावी. शक्यतो कडुनिंबाचे, वडाचे, उंबराचे झाड लावावे.
4) नैऋत्य दिशेप्रमाणे पश्चीम दिशाही ईशान्य पूर्वेकडे जड असावी, उंच नसावी, त्यामूळे किर्ती व बल वाढते.
5) पश्चीम दिशेला सरळ बांध घालावा व कुंपन करावे किंवा सरळ रेषेत उंच वाढणारी झाडे लावावीत.
आपको कोई शारीरिक प्रोब्लेम हो तो Whats app पर कॉन्टॉक्ट करें 9922144444
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“आम आदमी धरना कुमार” वाले Joke भी अच्छे ही है।धरना का मज़ाक तो बनना ही चाहिए।


“आम आदमी धरना कुमार” वाले Joke भी अच्छे ही है।धरना का मज़ाक तो बनना ही चाहिए।अरविंद धरना करते हैं, उसका मज़ाक तो बनना ही चाहिए।”अरविंद का धरना एक लड़की को इंसाफ़ दिलाने के लिए था”….. तो क्या? धरना का मज़ाकतो बनना ही चाहिए।
अरविंद के धरने से पूरा देश रेप जैसे घटिया Crime के खिलाफ एक साथ खड़ा हो गया था, तो क्या धरना का मज़ाकतो बनना ही चाहिए।अरविंद का धरना जनलोकपाल के लिए था, लाठियाँ खाई, भूखे प्यासे रहे, तो क्या? धरना का मज़ाकतो बनना ही चाहिए।
अरविंद का धरना Coal Block Allocation Scam के खिलाफ था और आप के प्रशांत भूषणकी PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए कोयले ब्लॉक के आवंटन… BJP कॉंग्रेसदोनो दोषी पाए गये और भारत के प्राकृतिक संसाधानो की लूट रुकी…. तो येक्या कोई बड़ी बात है?? धरना का मज़ाक तो बनना ही चाहिए।
💥 हाँ…. वो अलग बात है की ड्रामा का मज़ाक नही बनना चाहिए।क्योंकि वो तो खुद ही ड्रामा है…. एक ड्रामा को और क्या ड्रामा बनाए?BJP का ड्रामा FDI के खिलाफ था, सत्ता मे आते ही U Turn ले ली….. तो क्या? इसपर मज़ाक थोड़ी बन सकता है।BJP का ड्रामा ब्लॅक मनी के खिलाफ था, सत्ता मे आकरबड़ी पलटी मारी और Black money Holders के नाम बताने से मना करदिया, मगर इस पर मज़ाक थोड़ी बन सकता है।BJP का ड्रामा भ्रष्टाचार के खिलाफ था और सत्ता मे आते ही संजीवचतुर्वेदी का Transfer, तो क्या? इस पर मज़ाक थोड़ी बन सकता है।BJP का ड्रामा प्याज के बढ़े दाम के खिलाफ था और BJP के सत्ता मे आते ही टमाटर के rate बढ़गए उपर से कहते हैं की टमाटर तो बस अमीर आदमी, जिनके लाल लाल गालहोते हैं वो ही खाते हैं, तो क्या? कुछ गलत कहा है क्या? इस पर मज़ाक थोड़ी बनसकता है।क्यों? सही कहा ना? धरना का मज़ाक बनाने मे मज़ा आता है, ड्रामा का मज़ाक कैसे बन सकता है। 💥
अरविंद शांतिपुर्ण धरना देते है, उस पर जोक तो बनने ही चाहिए।हाँ अगर दूसरे Train को रोक कर ड्रामा करते हैं, इस पर जोक कैसे बन सकते हैं?अरविंद रात भर इतनी सर्दी मे सड़क पर सोते हैं, इस से बड़ा मज़ाक औरक्या हो सकता है, इसका मज़ाक तो बनना ही चाहिए।

हाँ अगर दूसरे लोग 3-4 घंटे का धरना करके, ड्रामा करके भाग जाते हैं, इसपर जोक कैसे बन सकता है?और धरना ही क्यों…ASS… Audit, Swaraj, Scamसभी का मज़ाक बनना चाहिए।देश मे बड़े बड़े Scam होते हैं, उसका मज़ाक कैसे बन सकता है?
हाँ अगर अरविंद कह दे Scam हो गया, उसका मज़ाक ज़रूर बनेगा।दूसरे लोग जनता का पैसा खा जाते हैं और किसी को पता भी नही चलता,इसका मज़ाक कैसे बन सकता है? ये तो खुद ही एक मज़ाक है जो जनता के साथ हो रहा है?हाँ मगर, अगर अरविंद कह दे हम स्वराज लाएंगे, Participatory Democracy लाएंगे, इसका मज़ाक ज़रूरबनना चाहिए।अरविंद कह दे हम जनता से पूछ कर काम करेंगे, इसका मज़ाक ज़रूर बनेगा।लोगों के 20 20 साल से अटके काम 2 दिन मे हो जाए, तो क्या? स्वराज का मज़ाक तो बनना ही चाहिए।मफ्लर पर भी जोक बनने चाहिए। उसमे क्यों पीछे रहे?अब तो सर्दियां भी आ गयी हैं, बढ़िया चलेंगे तेरे jokes…भाई तेरा काम ही यही है, तेरा खर्चा इसी से चलता हैये सब नही करेगा तो कौन सुनेगा तुझे?
I wish you good Luck for your Future….I’m sure…

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एकादशी व्रत खोलने की विधि :→


एकादशी व्रत खोलने की विधि :→

द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके

अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए ।

‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ – यह भावना

करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।

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Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

जिसने 2600 वर्ष भारत का नेतृत्व किया—!


जिसने 2600 वर्ष भारत का नेतृत्व किया—!

आखिर बिहार की पहचान क्या है ? लालू प्रसाद यादव, नितीश कुमार, राजेंद्र बाबू अथवा और कुछ-! आज यह हमे विचार करने की आवस्यकता है जब पूरे भारत मे जाते हैं तो लोग लालू का बिहार कहकर मज़ाक उड़ाते हैं क्या यही बिहार है ? या भ्रष्ट्राचार मे डूबा, अहंकारी नितीश आखिर बिहार की पहचान क्या है! जिस बिहार ने 3500 वर्ष तक भारतवर्ष पर शासन किया उत्कर्ष पर पहुचाया अथवा आर्यावर्त के केंद्र मे रहा उसकी राजधानी राजगिरि, पटलिपुत्र रहा वह बिहार कहाँ है ! पुरातात्विक अनुसन्धानों के अनुसार पटना का इतिहास 490 वर्ष ईशा पूर्व शुरू होता है जब हर्षक वंश के शासक अजातुशत्रु ने अपनी राजधानी राजगृह से बदलकर यहाँ स्थापित की, मौर्यवंश के उत्कर्ष के पश्चात पाटिलीपुत्र सत्ता का केंद्र बन गया चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य ब्रह्मदेश से अफगानिस्तान तक फ़ेल गया था।

बिहार के ऐतिहासिक योगदान का सबसे प्रभावशाली पक्ष है, छठी शताब्दी ईशा पूर्व से छठी सदी अर्थात बारह सौ वर्ष तक भारतीय राजनीति अग्रगनी भूमिका का निर्वाह किया, इस कल खंड मे बिहार ने चन्द्रगुप्त मौर्य, बिंबिसर, अशोक, अजातशत्रु, पुष्यमित्र शुंग, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य और स्कंदगुप्त जैसे यशस्वी शासक ही नहीं दिये आपित असेतु हिमाचल अर्थात समुद्र से हिमालय तक शासन की अखंड भारत की आधारशिला रखी यह बारह सौ का समय भारतीय संस्कृति के पुष्पित,पल्लवित होने का समय है, महर्षि पतंजलि का महाभाष्य, पाणिनी का अष्टाध्यायी और कौटिल्य का अर्थशास्त्र जैसे अपूर्व ग्रंथ इसी काल के हैं, महान खगोल शास्त्री, गणितज्ञ आचार्य आर्यभट्ट की प्रयोग शाला खगोल तथा तारेगना भी यहीं, विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्व बिद्यालय, विक्रमशिला यहीं था ।

वास्तविक बिहार का परिचाय ऐतिहासिक श्रोत और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के वर्णन से मिलता है यही है असली बिहार—-! लेकिन दुर्भाग्य ऐसा है कि किसी भी सत्ता का उत्थान और पतन भी निश्चित है लेकिन इस प्रकार होगा यह नहीं पता था कि जहां -जिस राजधानी मे चन्द्रगुप्त मौर्य और पुष्यमित्र शुंग जैसे सम्राटों, चक्रवर्तियों ने शासन किया, वहीं पर उनके उत्तराधिकारी लालू, नितीश के रूप मे आएगे यह कल्पना से बाहर था कैसा दुर्भाग्य है की आज वह बिहार विशेष दर्जा की मांग कर स्वाभिमानी बिहारियों का अपमान कर रहा है, क्या पुनः इतिहास दुहराएगा और अपने वैभव को प्राप्त करेगा —–!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक डॉक्टर बड़ी ही तेजी से हॉस्पिटल में घुसा


एक डॉक्टर बड़ी ही तेजी से हॉस्पिटल में घुसा , उसे किसी एक्सीडेंट के मामले में तुरंत बुलाया गया था। अंदर घुसते ही उसने देखा कि जिस लड़के का एक्सीडेंट हुआ है उसके परिजन बड़ी बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे हैं।
डॉक्टर को देखते ही लड़के का पिता बोला , ” आप लोग अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं करते , आपने आने में इतनी देर क्यों लगा दी ….अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार आप होंगे …”
डॉक्टर ने विनम्रता कहा , ” आई ऍम सॉरी , मैं हॉस्पिटल में नहीं था , और कॉल आने के बाद जितना तेजी से हो सका मैं यहाँ आया हूँ। कृपया अब आप लोग शांत हो जाइये ताकि मैं इलाज कर सकूँ….”
“शांत हो जाइये !!!” , लड़के का पिता गुस्से में बोला , ” क्या इस समय अगर आपका बेटा होता तो आप शांत रहते ? अगर किसी की लापरवाही की वजह से आपका अपना बेटा मर जाए तो आप क्या करेंगे ?” ; पिता बोले ही जा रहा था।
” भगवान चाहेगा तो सब ठीक हो जाएगा , आप लोग दुआ कीजिये मैं इलाज के लिए जा रहा हूँ। ” , और ऐसा कहते हुए डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश कर गया।
बाहर लड़के का पिता अभी भी बुदबुदा रहा था , ” सलाह देना आसान होता है , जिस पर बीतती है वही जानता है…”
करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और मुस्कुराते हुए बोला , ” भगवान् का शुक्र है आपका बेटा अब खतरे से बाहर है। “
यह सुनते ही लड़के के परिजन खुश हो गए और डॉक्टर से सवाल पर सवाल पूछने लगे , ” वो कब तक पूरी तरह से ठीक हो जायेगा…… उसे डिस्चार्ज कब करेंगे….?…”
पर डॉक्टर जिस तेजी से आया था उसी तेजी से वापस जाने लगा और लोगों से अपने सवाल नर्स से पूछने को कहा।
” ये डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है , ऐसी क्या जल्दी है कि वो दो मिनट हमारे सवालों का जवाब नहीं दे सकता ?” लड़के के पिता ने नर्स से कहा।
नर्स लगभग रुंआसी होती हुई बोली , ” आज सुबह डॉक्टर साहब के लड़के की एक भयानक एक्सीडेंट में मौत हो गयी , और जब हमने उन्हें फ़ोन किया था तब वे उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे थे। और बेचारे अब आपके बच्चे की जान बचाने के बाद अपने लाडले का अंतिम संस्कार करने के लिए वापस लौट रहे हैं। “
यह सुन लड़के के परिजन और पिता स्तब्ध रह गए और उन्हें अपनी गलती का ऐहसास हो गया।
फ्रेंड्स, बहुत बार हम किसी सिचुएशन के बारे में अच्छी तरह जाने बिना ही उसपर रियेक्ट कर देते हैं। पर हमें चाहिए कि हम खुद पर नियंत्रण रखें और पूरी स्थिति को समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। वर्ना अनजाने में हम उसे ही ठेस पहुंचा सकते हैं जो हमारा ही भला सोच रहा हो।……..s.r.meena

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किताब की चोरी कैसे होती है?


digital_library_cvria imagesकिताब की चोरी कैसे होती है?

एक समय था जब कोम्पुटर नहीं था। तब भी किताब चोरी होती थी। मुजे बरोबर याद है मई कालेज मे पढ़ता था तब हमारी किताब बड़ी महेंगी आती थी और वो भी कही से बेनामी प्रिंटिंग प्रेस मे छाप कर सस्ते मे बिकती थी। उसके बाद कंप्यूटर का जमाना आया किताब कंप्यूटर मे आने लगी लेकिन इसमे एक दिक्कत थी की पढ़ना मुस्किल था। हम सोफा पे बैठ के या सयन कक्ष मे लेते लेते पढ़ नहीं सकते। जमाना और तेज आ गया की आज १२।२ इंच का tab आ गया। आप drop box नामक app मे १५००० किताब रख सकते है और वो आपकी मोबाइल लाइब्ररी बन जायेगी। है ना मजेकी बात। आप कोई भी देस मे जाओ भारत के कोई भी सहर मे जाओ आप कोई भी किताब पढ़ सकते हो। यदि आप लेखक हो तो ये भी बता दु की कोई एक विषय पे जब लिखना चाहते हो तो word सर्च कर सकते हो। जैसे “भारत “—- tab आप को बता देगा १५००० किताब मे भारत नाम वाली कितनी किताब है। और आप का कीमती समय बच गया। १५००० किताब खरीदी का डेढ़ लाख रुपिया बच गया. इतनी सारी किताब रख ने के लिये २००० वर्ग मीटर की जगह बच गई। कीड़ो से बचाने की महेनत बच गई।
अब रही बात चोरी की। तो वो इस प्रकार होती है।
१) कोई भी किताब का नाम गूगले पे इस तरह लिखे …..भारत का इतिहास download वो किताब आप के नजर के सामने आ जायेगी उसे download कर लो.
२) कई सेवाधारी लोग उसके टॉरेंट बना कर कंप्यूटर मे छोड़ देते है और उसके जरिये आप किताब download कर सकते है। वापस आप गूगले मे लिखिये  भारत का इतिहास torrent उसका torrent आप के सामने आ जायेगा और किताब आप के हाथ मे।
अब प्रश्ना ये है की किताब का torrent बना के लोग इंटरनेट पे रख देते है तो चोर को पकड़ना मुस्किल है। उनका एक ही हल है किताब को एकदम सस्ता कर दो १० रुपिया एक किताब का. पब्लिशर या लेखक को कोई नुकसान नहीं क्योकि हार्ड कॉपी यदि ५००० ५ साल मे बिकेगी तो ये कंप्यूटर वाली pdf ५ लाख एक दिन मे बिकेगी। और १० रुपय की कोई चोरी नहीं करेगा।
आज दुनिया की सब लाइब्ररी सारी किताब की pdf फाइल बना रही है और ये सब आप ऑनलाइन पढ़ सकते है वो भी ५०००० किताबे। अब ये सारी लाइब्ररी एक दूसरे के साथ जुड़ रही है। इसका मतलब ये की एक दिन सारी दुनियाकि लाइब्ररी एक दूसरे के साथ जुड़ जायेगी। स्कूल और collage का हर लड़का १ करोड़ से ज्यादा किताब पसंद कर के पढ़ सकता है। वो भी आपने tab मे मामूली कीमत अदा कर के।
तो प्रशना है की लेखक और पब्लिशर नामसेष हो जायेंगे दिनोसॉर की तरह। बिल्कुल नहीं। वो सारे लेखक आपना ब्लॉग बनायेंगे और उसमे कहानी नवलकता और कई साहित्य हर माह लिखेंगे जिस को वो पढ़ना हो वो उन्हे छोटी सी कीमत नेट बॅंकिंग द्वारा दे कर पढ़ सकता है। 
लेखक को आब पब्लिशर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दूसरा वो आप ने ब्लॉग पे अड्वर्टाइज़िंग के पैसे भी बटोर सकता है।
एक नया इतिहास सॅरू होने जा रहा है। 
Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

धनत्रयोदशीका महत्त्व एवं यमदीपदान कैसे करे ?


धनत्रयोदशीका महत्त्व एवं यमदीपदान कैसे करे ?

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सारिणी


१. धनत्रयोदशी दिनविशेष

शक संवत अनुसार आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तथा विक्रम संवत अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी अर्थात ‘धनत्रयोदशी’ । इसीको साधारण बोलचालकी भाषामें ‘धनतेरस’ कहते हैं । इस दिनके विशेष महत्त्वका कारण है, धनत्रयोदशी देवताओंके वैद्य धन्वंतरिकी जयंतीका दिन है ।

२. धन्वंतरि जयंती

समुद्रमंथनके समय धनत्रयोदशीके दिन अमृतकलश हाथमें लेकर देवताओंके वैद्य भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए । इसीलिए यह दिन भगवान धन्वंतरिके जन्मोत्सवके रूपमें मनाया जाता है । आयुर्वेदके विद्वान एवं वैद्य मंडली इस दिन भगवान धन्वंतरिका पूजन करते हैं तथा लोगोंके दीर्घ जीवन तथा आरोग्यलाभके लिए मंगलकामना करते हैं । इस दिन नीमके पत्तोंसे बना प्रसाद ग्रहण करनेका महत्त्व है । माना जाता है, कि नीमकी उत्पत्ति अमृतसे हुई है तथा धन्वंतरि अमृतके दाता हैं । अतः इसके प्रतीकस्वरूप धन्वंतरि जयंतीके दिन नीमके पत्तोंसे बना प्रसाद बांटते हैं ।

३. धनत्रयोदशी व्रतके रूपमें भी मनाई जाती है

धनत्रयोदशी मृत्युके देवता यमदेवसे संबंधित व्रत है । यह व्रत दिनभर रखते हैं । व्रत रखना संभव न हो, तो सायंकालके समय यमदेवके लिए दीपदान अवश्य करते हैं ।

४. यमदीपदान

 

दीपावलीके कालमें धनत्रयोदशी, नरकचतुर्दशी एवं यमद्वितीया, इन तीन दिनोंपर यमदेवके लिए दीपदान करते हैं । इनमें धनत्रयोदशीके दिन यमदीपदानका विशेष महत्त्व है, जो स्कंद-पुराणके इस श्लोकसे स्पष्ट होता है,

कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे ।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनिश्यति ।।

– स्कंदपुराण

इसका अर्थ है, कार्तिक मासके कृष्णपक्षकी त्रयोदशीके दिन सायंकालमें घरके बाहर यमदेवके उद्देश्यसे दीप रखनेसे अपमृत्युका निवारण होता है ।

४.१ इस संदर्भमें एक कथा है, कि यमदेवने अपने दूतोंको आश्वासन दिया कि धनत्रयोदशीके दिन यमदेवके लिए दीपदान करनेवालेकी अकाल मृत्यु नहीं होगी ।

५. धनत्रयोदशीके दिन यमदीपदान करनेका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व

दीप प्राणशक्ति एवं तेजस्वरूप शक्ति प्रदान करता है । दीपदान करनेसे व्यक्तिको तेजकी प्राप्ति होती है । इससे उसकी प्राणशक्तिमें वृद्धि होती है तथा उसे दीर्घ आयुकी प्राप्ति होती है ।

६. यमदेवके आशीर्वाद प्राप्त करना

धनत्रयोदशीके दिन ब्रह्मांडमें यमतरंगोंके प्रवाह कार्यरत रहते हैं । इसलिए इस दिन यमदेवतासे संबंधित सर्व विधियोंके फलित होनेकी मात्रा अन्य दिनोंकी तुलनामें ३० प्रतिशत अधिक होती है । धनत्रयोदशीके दिन संकल्प कर यमदेवके लिए दीपका दान करते हैं तथा उनके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

७. यमदेवके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना

यमदेव मृत्युलोकके अधिपति हैं । धनत्रयोदशीके दिन यमदेवका नरकपर आधिपत्य होता है । साथही विविध लोकोंमें होनेवाली अनिष्ट शक्तियोंके संचारपर भी उनका नियंत्रण रहता है । धनत्रयोदशीके दिन यमदेवसे प्रक्षेपित तरंगें विविध नरकोंतक पहुंचती हैं । इसी कारण धनत्रयोदशीके दिन नरकमें विद्यमान अनिष्ट शक्तियोंद्वारा प्रक्षेपित तरंगें संयमित रहती हैं । परिणामस्वरूप पृथ्वीपर भी नरकतरंगोंकी मात्रा घटती है । इसीलिए धनत्रयोदशीके दिन यमदेवके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए उनका भावसहित पूजन एवं दीपदान करते हैं । दीपदानसे यमदेव प्रसन्न होते हैं । संक्षेपमें कहें, तो यमदीपदान करना अर्थात दीपके माध्यमसे यमदेवको प्रसन्न कर अपमृत्युके लिए कारणभूत कष्टदायक तरंगोंसे रक्षाके लिए उनसे प्रार्थना करना ।

८. यमदीपदान विधिके लिए आवश्यक पूजासामग्री

यमदीपदान विधिमें नित्य पूजाकी थालीमें घिसा हुआ चंदन, पुष्प, हलदी, कुमकुम, अक्षत अर्थात अखंड चावल इत्यादि पूजासामग्री होनी चाहिए । साथ ही आचमनके लिए ताम्रपात्र, पंच-पात्र, आचमनी ये वस्तुएं भी आवश्यक होती हैं । यमदीपदान करनेके लिए हलदी मिलाकर गुंथे हुए गेहूंके आटेसे बने विशेष दीपका उपयोग करते हैं ।

९. गेहूंके आटेसे बने दीपका महत्त्व

धनत्रयोदशीके दिन कालकी सूक्ष्म कक्षाएं यमतरंगोंके आगमन एवं प्रक्षेपणके लिए खुली होती हैं । इस दिन तमोगुणी ऊर्जातरंगें एवं आपतत्त्वात्मक तमोगुणी तरंगें अधिक मात्रामें कार्यरत रहती हैं । इन तरंगोंमें जडता होती है । ये तरंगें पृथ्वीकी कक्षाके समीप होती हैं । व्यक्तिकी अपमृत्युके लिए ये तरंगें कारणभूत होती हैं । गेहूंके आटेसे बने दीपमें इन तरंगोंको शांत करनेकी क्षमता रहती है । इसलिए यमदीपदान हेतु गेहूंके आटेसे बने दीपका उपयोग किया जाता है ।

१०. यमदीपदानके समय दीप रखनेके लिए कृष्णतत्त्वसे संबंधित रंगोली बनानेका शास्त्रीय आधार

दीपकी पूजनविधिसे पूर्व श्रीविष्णुके २४ नामोंसे उनका आवाहन कर विधिका संकल्प करते हैं  । ‘श्रीकृष्ण’ श्रीविष्णुके पूर्णावतार हैं । यमदेवमें भी श्रीकृष्णजीका तत्त्व होता है । इस कारण पूजनके पूर्व किए जानेवाले आवाहनद्वारा विधिके स्थानपर अल्प समयमें ही यमदेवका आगमन तत्त्वरूपमें होता है । मृत्युसे संबंधित जडत्वदर्शक तरंगोंसे व्यक्तिको होनेवाला कष्ट,  श्रीकृष्णजीके तथा यमदेवके अधिष्ठानके फलस्वरूप घट जाता है । यही कारण है, कि धनत्रयोदशीके दिन श्रीकृष्णजीका तत्त्व आकृष्ट करनेवाली रंगोली बनाते हैं । यमदेवमें शिवतत्त्व भी होता है । इस कारण शिवतत्त्वसे संबंधित रंगोली भी बना सकते हैं । इसका लाभ श्रीकृष्ण तत्त्वकी रंगोलीसे प्राप्त लाभ समानही होता है ।

(संदर्भ : सनातनका ग्रंथ ‘त्यौहार, धार्मिक उत्सव व व्रत’)

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बलिप्रतिपदा एवं यमद्वितीया मनानेका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व


बलिप्रतिपदा एवं यमद्वितीया मनानेका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व

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सारिणी


 

१. बलिप्रतिपदा

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, बलिप्रतिपदाके रूपमें मनाई जाती है । इस दिन भगवान श्री विष्णुने दैत्यराज बलिको पातालमें भेजकर बलिकी अतिदानशीलताके कारण होनेवाली सृष्टिकी हानि रोकी । बलिराजाकी अतिउदारताके परिणामस्वरूप अपात्र लोगोंके हाथोंमें संपत्ति जानेसे सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गई । तब वामन अवतार लेकर भगवान श्रीविष्णुने बलिराजासे त्रिपाद भूमिका दान मांगा । उपरांत वामनदेवने विराट रूप धारण कर दो पगमेंही संपूर्ण पृथ्वी एवं अंतरिक्ष व्याप लिया । तब तीसरा पग रखनेके लिए बलिराजाने उन्हें अपना सिर दिया । वामनदेवने बलिको पातालमें भेजते समय वर मांगनेके लिए कहा । उस समय बलिने वर्षमें तीन दिन पृथ्वीपर बलिराज्य होनेका वर मांगा । वे तीन दिन हैं – नरक चतुर्दशी, दीपावलीकी अमावस्या एवं बलिप्रतिपदा । तबसे इन तीन दिनोंको ‘बलिराज्य’ कहते हैं ।

२. बलिराज्य

धर्मशास्त्र कहता है, कि बलिराज्यमें ‘शास्त्रद्वारा बताए निषिद्ध कर्म छोड़कर, लोगोंको अपने मनानुसार आचरण करना चाहिए । शास्त्रकी दृष्टिसे अभक्ष्यभक्षण अर्थात मांसाहार सेवन, अपेयपान अर्थात निषिद्ध पेयका सेवन एवं अगम्यागमन अर्थात गमन न करनेयोग्य स्त्रीके साथ सहवास; ये निषिद्ध कर्म हैं । इसका योग्य भावार्थ समझकर हमें बलिप्रतिपदा मनानी चाहिए । इसीलिए पूर्वकालमें इन दिनों लोग मदिरा नहीं पीते थे ! शास्त्रोंसे स्वीकृति प्राप्त होनेके कारण परंपरानुसार लोग मनोरंजनमें समय बिताते  हैं । परंतु आज इसका अतिरेक होता हुआ दिखाई देता है । लोग इन दिनोंको स्वैराचारके दिन मानकर मनमानी करते हैं । बडे मात्रामें पटाखे जलाकर राष्ट्रकी संपत्तिकी हानि करते हैं । कुछ लोग जुआ खेलकर पैसा उडाते हैं ।

३. बलिप्रतिपदा मनानेकी पद्धति

बलिप्रतिपदाके दिन प्रातः अभ्यंगस्नानके उपरांत सुहागिनें अपने पतिका औक्षण करती हैं । दोपहरको भोजनमें विविध पकवान बनाए जाते हैं । इस दिन लोग नए वस्त्र धारण करते हैं एवं संपूर्ण दिन आनंदमें बिताते हैं । कुछ लोग इस दिन बलिराजाकी पत्नी विंध्यावलि सहित प्रतिमा बनाकर उनका पूजन करते हैं । इसके लिए गद्दीपर चावलसे बलिकी प्रतिमा बनाते हैं । इस पूजाका उद्देश्य है, कि बलिराजा वर्षभर अपनी शक्तिसे पृथ्वीके जीवोंको कष्ट न पहुंचाएं तथा अन्य अनिष्ट शक्तियोंको शांत रखें । इस दिन रात्रिमें खेल, गायन इत्यादि कार्यक्रम कर जागरण करते हैं । अब तक हमने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदाका महत्व तथा इस दिन करनेयोग्य विधियोंकी जानकारी प्राप्त की । बलिप्रतिपदाके उपरांत आती है यमद्वितीया अर्थात भाईदूज ।

४. यमद्वितीया अर्थात भाईदूज

असामायिक अर्थात अकालमृत्यु न आए, इसलिए यमदेवताका पूजन करनेके तीन दिनोंमेंसे कार्तिक शुक्ल द्वितीया एक है । यह दीपोत्सव पर्वका समापन दिन है । ‘यमद्वितीया’ एवं ‘भैयादूज’के नामसे भी यह पर्व परिचित है ।

५. कार्तिक शुक्ल द्वितीयाको ‘यमद्वितीया’ एवं ‘भैयादूज’ कहनेके कारण

कार्तिक शुक्ल द्वितीयाकी तिथिपर वायुमंडलमें यमतरंगोंके संचारके कारण वातावरण तप्त ऊर्जासे संचारित रहता है । ये तरंगें नीचेकी दिशामें प्रवाहित होती हैं । इन तरंगोंके कारण विविध कष्ट हो सकते हैं, जैसे अपमृत्यु होना, दुर्घटना होना, स्मृतिभ्रंश होनेसे अचानक पागलपनका दौरा पडना, मिरगी समान दौरे पडना अर्थात फिटस् आना अथवा हाथमें लिए हुए कार्यमें अनेक बाधाएं आना । भूलोकमें संचार करनेवाली यमतरंगोंको प्रतिबंधित करनेके लिए यमादि देवताओंका पूजन करते हैं । पृथ्वी यमकी बहनका रूप है । इस दिन यमतरंगें पृथ्वीकी कक्षामें आती हैं । इसलिए पृथ्वीकी कक्षामें यमतरंगोंके प्रवेशके संबंधमें कहते हैं, कि कार्तिक शुक्ल द्वितीयाकी तिथिपर यम अपने घरसे बहनके घर अर्थात पृथ्वीरूपी भूलोकमें प्रवेश करते हैं । इसलिए इस दिनको यमद्वितीयाके नामसे जानते हैं । यमदेवताके अपनी बहनके घर जानेके प्रतीकस्वरूप प्रत्येक घरका पुरुष अपनेही घरपर पत्नीद्वारा बनाए गए  भोजनका न सेवन कर बहनके घर जाकर भोजन करता है  । बहनद्वारा यमदेवताका सम्मान करनेके प्रतीक स्वरूप यह दिन ‘भैयादूज’के नामसे भी प्रचलित है ।

६. यमद्वितीयाकी तिथिपर करनेयोग्य धार्मिक विधियां

६.१ भाई-बहनद्वारा यमादि देवताओंका पूजन
६.२ बहनद्वारा भाईका औक्षण अर्थात आरती एवं सम्मान करना
६.३ भाईका बहनको उपहार दिया जाना

शास्त्रकी जानकारी हो, तो कोई भी धार्मिक कृत्य मनःपूर्वक एवं श्रद्धापूर्वक किया जाता है । परिणामतः उससे लाभ भी अधिक प्राप्त होता है ।

७. भाई-बहनद्वारा यमादि देवताओंका पूजन करनेका शास्त्रीय कारण

दीपावलीकी कालावधिमें अकालमृत्युसे रक्षा हेतु यमदेवताके उद्देश्यसे तीन दिनोंपर धार्मिक विधि करनेका विधान है । इन तीन दिनोंमें एक दिन यह है । इन दिनों भूलोकमें यम तरंगें अधिक मात्रामें आती हैं । इन दिनों यमादि देवताओंके निमित्त किया गया कोई भी कर्म अल्प समयमें फलित होता है । इसलिए कार्तिक शुक्ल द्वितीयाकी तिथिपर यमदेवका पूजन करते हैं ।

आइए देखते हैं, यह पूजनविधि एक दृश्यपटद्वारा,


चौपाईपर रखे चावलके तीन पुंजोंपर तीन सुपारियां रखते हैं । भाई प्रथम आचमन करता है उपरांत प्राणायाम, देशकालकथन एवं संकल्प करता है । यमादि देवताओंका  पूजन करनेके लिए अपनी दांयी ओरसे पहली सुपारीपर  यम देवताको  दूसरी सुपारीपर  चित्रगुप्त देवताको  एवं तीसरी सुपारीपर  यमदूतको  अक्षत अर्पित कर आवाहन किया जाता है । उपरांत आसन पाद्य अर्घ्य इत्यादि उपचार अर्पित किए जाते हैं। तदुपरांत कपासके वस्त्र, चंदन, हलदी कुमकुम इत्यादि उपचार अर्पित कर पूजन किया जाता है । उपरांत धूप दीप दिखाकर नवैद्य समर्पित किया जाता है । तदुपरांत बहन आचमन करती है । उपरांत इन देवताओं का पूजन करती है ।(संदर्भ : सनातनका ग्रंथ ‘त्यौहार, धार्मिक उत्सव व व्रत’)

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दीपावलीके कालमें आनेवाली अमावस्याका महत्त्व


१. दीपावलीके कालमें आनेवाली अमावस्याका महत्त्व

शक संवत अनुसार आश्विन अमावस्या तथा विक्रम संवत अनुसार कार्तिक अमावस्याका दिन दीपावलीका एक महत्त्वपूर्ण दिन है । सामान्यतः अमावस्याको अशुभ मानते हैं; परंतु दीपावली कालकी अमावस्या शरदपूर्णिमा अर्थात कोजागिरी पूर्णिमाके समान ही कल्याणकारी एवं समृद्धिदर्शक है । इस दिन करनेयोग्य धार्मिक विधियां हैं… श्री लक्ष्मीपूजन, अलक्ष्मी निःसारण

 

२. श्री लक्ष्मीपूजन


दीपावलीके इस दिन धन-संपत्तिकी अधिष्ठात्रि देवी श्री महालक्ष्मीजीका पूजन करनेका विधान है । दीपवालीकी अमावस्याको अर्धरात्रिके समय श्री लक्ष्मीजीका आगमन सदगृहस्थोंके घर होता है । घरको पूर्णतः स्वच्छ, शुद्ध एवं सुशोभित कर दीपावली मनानेसे देवी श्री लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं तथा वहां स्थायी रूपसे निवास करती हैं । इसीलिए इस दिन श्री लक्ष्मीजीका पूजन करते हैं एवं दीप जलाते हैं । यथा संभव श्री लक्ष्मीपूजनकी विधि सपत्नीक करते हैं ।

अब एक दृश्यपटद्वारा समझ लेते हैं,

 

श्री लक्ष्मीपूजनके लिए इसप्रकार विशेष सिद्धता की जाती है।  पूजाके आरंभमें आचमन किया जाता है । उपरांत प्राणायाम एवं देशकालकथन किया जाता है। तदुपरांत लक्ष्मीपूजन एवं उसके अंतर्गत आनेवाली अन्य विधियोंके लिए संकल्प करते  हैं। संकल्पके उपरांत श्रीमहागणपतिपूजनके लिए ताम्रपात्रमें रखे नारियलमें शोडषोपचार पूजनके लिए महागणपतिका आवाहन किया जाता है ।

तदुपरांत कपासके वस्त्र, चंदन, पुष्प एवं दूर्वा, हलदी, कुमकुम,धूप,दीप, नैवेद्य इत्यादि उपचार अर्पित कर पूजन करते हैं    । श्री गणपति दिशाओंके स्वामी हैं । इसलिए प्रथम श्री महागणपति पूजन करनेसे सर्व दिशाएं खुल जाती हैं। परिणामस्वरूप सर्व देवतातत्त्वोंकी तरंगोंको बिना किसी अवरोध पूजनविधिके स्थानपर आना सुलभ होता है । श्री महागणपतिपूजनके उपरांत करते हैं,

 

३. वरुण तथा अन्य देवताओंका आवाहन एवं पूजन

श्री महागणपति पूजनके उपरांत कलश, शंख, घंटा दीप आदि पूजाके उपकरणोंका पूजन किया जाता है । तत्पश्चात जल प्रोक्षण कर पूजासामग्रीकी शुद्धि की जाती है। इसके पश्चात वरुण देवताकी स्थापनाके लिए चौपाएपर अखंड चावल फैलाए जाते हैं। चावलपर कलश रखा जाता है । कलशमें जल डाला जाता है। उपरांत कलशमें भरे जलमें चंदन, आम्रपल्लव, सुपारी एवं सिक्का रखा जाता है । कलशको वस्त्र अर्पित किया जाता है। तदुपरांत कलशपर अखंड चावलसे भरा पूर्णपात्र रखा जाता है । इस पूर्णपात्रमें रखे चावलपर कुमकुमसे अष्टदल कमल बनाते  हैं ।

कलशको अक्षत समर्पित कर उसमें वरुण देवताका आवाहन किया जाता है। उपरांत चंदन, हलदी, कुमकुम, अक्षत, एवं पुष्प अर्पित कर पूजन किया जाता है । पूजन करनेके उपरांत चावलसे भरे पूर्णपात्रपर अक्षत अर्पित कर सर्व देवताओंका आवाहन किया जाता है ।

अष्टदल कमलके कारण उस स्थानपर शक्तिके स्पंदनोंकी उत्पत्ति होती है ।  शक्तिके ये स्पंदन सर्व दिशाओंमें प्रक्षेपित होते हैं । इस प्रकार पूर्णपात्रमें बना अष्टदल कमल यंत्रके समान कार्य करता है ।

 

४. श्री लक्ष्मी तथा कुबेरका  आवाहन एवं पूजन

 

कलशपर रखे पूर्णपात्रमें श्रीलक्ष्मीकी मूर्ति रखी जाती है । उसके निकट द्रव्यनिधि रखी जाती है । उपरांत अक्षत अर्पित कर ध्यानमंत्र बोलते हुए, मूर्तिमें श्रीलक्ष्मी तथा द्रव्यनिधिपर कुबेर का आ-वाहन किया जाता है । अक्षत अर्पित कर देवताओंको आसन दिया जाता है । उपरांत श्री लक्ष्मीकी मूर्ति एवं द्रव्यनिधिस्वरूप कुबेरको अभिषेक करने हेतु ताम्रपात्रमें रखा जाता है ।

अब श्रीलक्ष्मी एवं कुबेरको  आचमनीसे जल छोडकर पाद्य, अर्घ्य, स्नान आदि उपचार किए जाते हैं । तत्पश्चात दूध, दही, घी , मधु , एवं शर्करासे अर्थात पंचामृत स्नानका उपचार किया जाता है। उपरांत गंधोदक एवं उष्णोदक स्नानका उपचार किया जाता है । पुष्प अर्पित किए जाते हैं । श्रीलक्ष्मी एवं कुबेरका अभिषेक किया जाता है ।

अभिषेकके उपरांत श्री लक्ष्मी एवं कुबेर देवताको स्वच्छ वस्त्रसे  पोंछकर पुन: पूर्व स्थानपर रखा जाता है । उपरांत वस्त्र, गंध, हल्दी कुमकुम, कंकणादि, सौभाग्य अलंकार, पुष्पमाला अर्पित की जाती है । उपरांत श्री लक्ष्मीके प्रत्येक अंगका उच्चारण कर अक्षत अर्पित किया जाता है । इसे अंग पूजा कहते हैं । तदुपरांत श्री लक्ष्मीकी पत्रपूजा की जाती है । इसमें सोलह विभिन्न वृक्षोंके  पत्र अर्पित किए जाते हैं ।

(संदर्भ : सनातनका ग्रंथ ‘त्यौहार, धार्मिक उत्सव व व्रत’)

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सोनिया गांधी के पास राज रहेंगे जवाहरलाल नेहरू के निजी कागजात


सोनिया गांधी के पास राज रहेंगे जवाहरलाल नेहरू के निजी कागजात

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मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६


नई दिल्ली
– सोनिया गांधी द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू के कागजात नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी(NMML) को दिए जाने से शुरू में उत्साहित दिख रहे स्कॉलर्स को निराशा हाथ लगी है। सोनिया ने पंडित नेहरू के निजी कागजातों को उपलब्ध करवाने से इनकार कर दिया है। ये वे पेपर है, जिनसे नेहरू के उनके परिजनों और अन्य लोगों से रिश्तों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

साल 1947 से लेकर मई 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु तक के उनके ऑफिशल पेपर्स, चिट्ठियां, भाषण और दूसरी चीज़ें ही लाइब्रेरी को दी गई हैं। स्कॉलर्स और स्टूडेट्स चाहते हैं कि उनके निजी कागजात भी छापे जाएं, ताकि उन्हें और अच्छी तरह समझा जा सके।

जवाहरलाल नेहरू ने जो लेटर अपने पिता मोतीलाल नेहरू, मां स्वरूप रानी, पत्नी कमला नेहरू, बेटी इंदिरा, बहनों विजयलक्ष्मी पंडित, कृष्णा हठीसिंह और भतीजियों चंद्रलेखा, नयनतारा और रीता को लिखे थे, वे स्कॉलर्स की पहुंच से बाहर रहेंगे। इसके साथ ही नेहरू और पद्मजा नायडू के बीच व इंदिरा गांधी और नायडू के बीच हुआ पत्राचार भी कोई पढ़ नहीं सकेगा।

इसके अलावा नेहरू और एडविना माउंटबैटन के बीच भेजी गई चिट्ठियां भी लोगों की पहुंच से बाहर रहेंगी। पद्मजा के घर पर नेहरू की फाइलें, कमला नेहरू और सैयद महमूद के बीच का पत्राचार भी पर्सनल पेपर्स की कैटिगरी में आएगा।

नेहरू के ऑफिशल रेकॉर्ड्स को सबके सामने लाने का मुद्दा इस साल जून में उठा था, जब यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के इतिहासकार सुसैन डाबनी पेनीबैकर ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी से 1947 के बाद के कागजात मांगे थे। इसके बाद नेहरू के पेपर्स के बारे में सोनिया गांधी को रिक्वेस्ट भेजी गई, जो कि उनके कागजातों की संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि पेनीबैकर ने सरकारी कागजात मांगे हैं, इसिलए उनकी क्लियरेंस की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वह पर्सनल पेपर चाहते हैं तो परमिशन लेनी होगी।

NMML को मिले नेहरू के इन पेपर्स का नियंत्रण प्रधानमंत्री कार्यालय के बजाय संस्कृति मंत्रालय के पास है। सिर्फ कृष्ण मेनन के कागजात देखने के लिए ही पीएमओ से क्लियरेंस लेनी होगी। मेनन ने इंदिरा गांधी को अपने पेपर्स का संरक्षक बनाया था और उनके बाद यह अधिकार पीएमओ के पास आ गया। था।

बाकी कई अहम कागजात के लिए शख्सियतों के फैमिली मेंबर्स की क्लियरेंस लेनी होती है। विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी लेखिका नयतारा सहगल के पेपर जनता के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसी तरह महात्मा गांधी के करीबी प्यारेलाल के पेपर भी उनके परिवार द्वारा क्लोज कर दिए गए हैं।