Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

द्रोणाचार्य ने एकलव्य


जो लोग तीरंदाजी का अभ्यास करते हैं , वे यह बात भलीभाँति जानते हैं कि  बाण चलाने में दाहिने हाथ के अँगूठे का उपयोग नहीं किया जाता । यदि  अँगूठे और अँगुली की सहायता से  बाण पर पकड़ बनाकर छोड़ा जाये तो बाण कभी भी सही निशाने पर नहीं लगेगा ।
चित्र में भी यह बात साफ साफ देखी जा सकती है ।
एक कथा के अनुसार  द्रोणाचार्य ने एकलव्य से दाहिने हाथ का अँगूठा  दक्षिणा में माँगा था ।
इस कथानक को न समझने वाले और धनुर्विद्या से पूर्णतः अनभिज्ञ लोग  कहते हैं कि  द्रोणाचार्य ने एकलव्य के साथ  ऐसा न किया होता तो वह अर्जुन से भी श्रेष्ठ धनुर्धर हो जाता । ऐसे मूढजन  भारतीय संस्कारों और गुरु-शिष्य परम्परा की पवित्रता व महत्ता  को नहीं जानते ।
गुरु द्रोणाचार्य ने जब यह देखा कि एकलव्य जिसने उन्हें अपना मानस गुरु बना रखा है , और सही विधि को न जानकर धनुष बाण चला रहा है , जिस कारण वह श्रेष्ठ धनुर्धर नहीं बन पायेगा  और गुरु का नाम खराब करेगा . इसलिये गुरु द्रोणाचार्य ने दक्षिणा में उसके अँगूठे को माँगा अर्थात्  दाहिने हाथ के अँगूठे के उपयोग को धनुष बाण संचलन में वर्जित किया.
भारत में अनेक आदिवासी स्थान हैं , वहाँ पहुँचकर  कोई भी देख और सीख सकता है कि धनुष बाण कैसे चलाया जाता है ।

जो लोग तीरंदाजी का अभ्यास करते हैं , वे यह बात भलीभाँति जानते हैं कि बाण चलाने में दाहिने हाथ के अँगूठे का उपयोग नहीं किया जाता । यदि अँगूठे और अँगुली की सहायता से बाण पर पकड़ बनाकर छोड़ा जाये तो बाण कभी भी सही निशाने पर नहीं लगेगा ।
चित्र में भी यह बात साफ साफ देखी जा सकती है ।
एक कथा के अनुसार द्रोणाचार्य ने एकलव्य से दाहिने हाथ का अँगूठा दक्षिणा में माँगा था ।
इस कथानक को न समझने वाले और धनुर्विद्या से पूर्णतः अनभिज्ञ लोग कहते हैं कि द्रोणाचार्य ने एकलव्य के साथ ऐसा न किया होता तो वह अर्जुन से भी श्रेष्ठ धनुर्धर हो जाता । ऐसे मूढजन भारतीय संस्कारों और गुरु-शिष्य परम्परा की पवित्रता व महत्ता को नहीं जानते ।
गुरु द्रोणाचार्य ने जब यह देखा कि एकलव्य जिसने उन्हें अपना मानस गुरु बना रखा है , और सही विधि को न जानकर धनुष बाण चला रहा है , जिस कारण वह श्रेष्ठ धनुर्धर नहीं बन पायेगा और गुरु का नाम खराब करेगा . इसलिये गुरु द्रोणाचार्य ने दक्षिणा में उसके अँगूठे को माँगा अर्थात् दाहिने हाथ के अँगूठे के उपयोग को धनुष बाण संचलन में वर्जित किया.
भारत में अनेक आदिवासी स्थान हैं , वहाँ पहुँचकर कोई भी देख और सीख सकता है कि धनुष बाण कैसे चलाया जाता है ।

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