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Lord Rama Had Many Wives, Valmiki?


I read apiece by Ambedkar on Hinduism ,especially on Lord Rama and Krishna, where he has ridiculed and slung mud at Rama and Krishna.

Ramani's blog

Lord Rama as we know has one wife and he is cited as an example of loyalty in marriage.

I read apiece by Ambedkar on Hinduism ,especially on Lord Rama and Krishna, where he has ridiculed and slung mud at Rama and Krishna.

In my research to answer him on some points, I came across information that the Valmiki Ramayana we are following now is not by Valmiki but the Ramacharita Manas by Tulsidas.

Lord Rama's Coronation.jp Rama Pattabishekam

This Tulsidas Ramayana, we have been misquoting as Valmiki Ramayana.

Can some one clarify with references?

To my knowledge Rama had only one wife and he had been loyal to Sita.

This issue , in my opinion, is a classic case of taking things out of context.

This sloka is about what Manthara speaks about Rama to Kaikeyi just before Lord Rama’s Coronation, Pattabhisheka.

In her effort to poison Kaikeyi’s mind against Rama, Manthara…

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Posted in काश्मीर - Kashmir

5000 साल से पुरानी संस्कृति का हिस्सा : कश्मीर जो कश्यप ऋषि द्वारा बसाया गया था ,


5000 साल से पुरानी संस्कृति का हिस्सा : कश्मीर
जो कश्यप ऋषि द्वारा बसाया गया था ,
जहा 100 %
साक्षरता वाले कश्मीरी पंडित थे ।
एक दिन 1990 मेँ
मुस्लिमोँ द्वारा कश्मीरी पंडितों को भाग जाने
की धमकियाँ मिलने लगीं , और
मस्जिदों से निकल निकल कर इन पंडितों पे हमला करने लगे और
पंडितोँ के घर जला दिए गए । सिर्फ इतना ही नहीँ भाइयोँ , उनकी बहू
बेटियोँ और औरतों का बलात्कार किया गया , उनके मासूम
बच्चोँ को घर से निकाल दिया गया , जिससे कितनोँ की मौत हो गई
और जो बचे उनकी जिन्दगी जानवरोँ से भी बद्तर हो गई ।

भारत
सरकार
(congress ki sarkar)
चुप चाप ये सब देखती रही
और 3,50,000
पंडितों को अपना घर छोड़ना पड़ा
20,000 जगह बदलने से ही मर गये ,
और
90% आज भी अस्थमा के शिकार हो गये ।

ये है हमारा भारत , जो कि बस नाम का हिन्दुस्थान है ,

क्या हम लोग
इतिहास के वीरोँ की गाथा गाकर ही अपनी वीरता को प्रदर्शित
करते रहेँगे ?

क्या आज हम इतने कमजोर हो चुके है कि अपने धर्म
का विस्तार नही तो रक्षा भी नहीँ कर सकते ?

यदि आपको अब
भी यकीन नहीँ आता तो ये देखेँ ;

आप सब जानते हैँ कि आज भी काश्मीर के हिन्दुओँ
की क्या दुर्दशा है ,

पिछले गणतन्त्र दिवस पर एक विद्यालय मेँ
अध्यापक द्वारा वन्देमातरम्
और
भारत माता की जय कहने पर वहाँ के
मुस्लिम युवकोँ ने उनको धक्का मारकर मंच से नीचे कर दिया

और
पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये ।

दुर्भाग्य बस उस समय
भी मौनी बाबा का सत्ता था ।
और
आज भी बंगाल , काश्मीर और
उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानो पर हिन्दू अमानवीय स्तिथियों में रह रहे हैं ।

इसका जिम्मेदार सिर्फ सरकार नहीँ बल्की हम खुद हैँ ।

आखिर कब तक
हम अपनी जिन्दगी सरकारी रक्षा की चादर से ढक कर जीयेँगे ?
कब
तक कानून हमेँ सुरक्षा करेगा और हमारे बहू बेटियोँ की इज्जत
बचायेगा ।

एक दिन इसका सामना हमेँ खुद करना ही होगा ,
लेकिन
ऐसा ना हो कि तब तक हमारी हालत काश्मीर के
पंडितो जैसी ना हो जाय ,
इसलिए अभी से भी कुछ नहीँ बिगड़ा है ।

इसका हल एक मात्र है हिन्दू एकता

यदि अभी भी हम सब हिन्दू एकता नहीँ
बनाये तो आने वाले समय मेँ हम

चाहकर भी कुछ नहीँ कर पायेँगे ।
और
हमारी भावी पीढ़ियाँ हमेँ
धिक्कारेँगी ।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक आदमी ने गांववालों से कहा की वो 100 रु .में एक बन्दर खरीदेगा ,


एक बार एक आदमी ने गांववालों से कहा की वो 100 रु .में एक बन्दर खरीदेगा ,
ये सुनकर सभी गांववाले नजदीकी जंगल की और दौड़ पड़े और वहां से बन्दर पकड़ पकड़ कर 100 रु .में उस आदमी को बेचने लगे …….

कुछ दिन बाद ये सिलसिला कम हो गया और लोगों की इस बात में दिलचस्पी कम हो गयी .

फिर उस आदमी ने कहा की वो एक एक बन्दर के लिए 200 रु .देगा , ये सुनकर लोग फिर बन्दर पकड़ने में लग गये ,
लेकिन कुछ दिन बाद मामला फिर ठंडा हो गया ….

अब उस आदमी ने कहा की वो बंदरों के लिए 1000 रु . देगा ,
लेकिन क्यूंकि उसे शहर जाना था उसने इस काम के लिए एक असिस्टेंट नियुक्त कर दिया ……..

1000 रु .सुनकर गांववाले बदहवास हो गए ,लेकिन पहले ही लगभग सारे बन्दर पकडे जा चुके थे इसलिए उन्हें कोई हाथ नही लगा …..
तब उस आदमी का असिस्टेंट उनसे आकर कहता है …..

” आप लोग चाहें तो सर के पिंजरे में से 700 -700 रु . में बन्दर खरीद सकते हैं , जब सर आ जाएँ तो 1000 -1000 में बेच दीजियेगा “..
.गांववालों को ये प्रस्ताव भा गया और उन्होंने सारे बन्दर 700 -700 रु .में खरीद लिए …..

अगले दिन न वहां कोई असिस्टेंट था और न ही कोई सर …….
बस बन्दर ही बन्दर
………..
Its called Stock Market

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

घमंड के एवज में ये क्या कर बैठे चंद्रमा… पढ़िये पुराणों में गणेश के क्रोध को दर्शाती एक सत्य घटना…


घमंड के एवज में ये क्या कर बैठे चंद्रमा… पढ़िये पुराणों में गणेश के क्रोध को दर्शाती एक सत्य घटना……

नाटा कद…. मोटा पेट… गज का सिर व एक दंत टूटा हुआ… यह है भगवान शिव व पार्वती के छोटे व नटखट पुत्र भगवान गणेश जी जो अपनी बुद्धिमानी एवं कुशलता के बल पर विश्वभर में जाने जाते हैं. परंतु गणेश को एक और विषय से भी याद किया जाता है और वो है उनका क्रोध जिसके एक बार बाहर आने पर उसे शांत करना कुछ असंभव सा हो जाता था. इसी क्रोध का सामना एक बार चंद्रमा को भी करना पड़ा जिसकी सजा वे आज तक भुगत रहे हैं… पुराणों में विख्यात एक कथा के अनुसार एक बार गणेश एक परिजन के बुलावे पर मिठाई का सेवन करने गए. बचपन से ही गणेश को मिठाईयां खाने का इतना शौक था कि उन्हें इसके सामने कुछ भी नजर नहीं आता था और जब बात हो उनकी पसंदिदा मिठाई ‘मोदक’ की तो फिर वे सारे संसार को भूल जाते थे…..उस रात वे मिठाईयों का सेवन कर वापस अपने घर को लौट रहे थे लेकिन अभी भी उनके पास कुछ मिठाईयां शेष थीं जिन्हें वे संभालते हुए आ रहे थे. गणेश ने दिन भर इतनी मिठाई खाई थी कि उनका पेट काफी भारी हो गया था जिस कारण वे धीरे चल रहे थे. अचानक वे किसी चीज से टकराए व धरती पर गिर गए. उनके गिरने से उनके हाथ से सारी मिठाईयां इधर-उधर फैल गईं….उस सुनसान रात में गणेश को लगा कि शायद इस तरह से गिरते हुए उन्हें किसी ने नहीं देखा और वे जल्दी से अपनी मिठाईयों को एकत्रित करने में जुट गए लेकिन दूसरी ओर चंद्रमा उन्हें ऐसा करते हुए देख रहे थे. गणेश के भारी व मोटे पेट और साथ में हाथी की भांति सिर वाले बच्चे को देख चंद्रमा अपनी हंसी संभाल ना सके और गणेश का मजाक बनाते हुए जोर-जोर से हंसने लगे…..ऐसा देख गणेश बेहद शर्मिंदा हुए लेकिन दूसरे ही पल उन्हें यह आभास हुआ कि उनकी मदद करने के स्थान पर चंद्रमा उनका मजाक बना रहे थे. वे तुरंत खड़े हुए व चंद्रमा को चेतावनी देते हुए कहा, “चंद्र! तुम ने इस कदर मेरा मजाक बनाया. तुम क्या सोचते हो कि तुम बहुत बुद्धिमान हो? आज मैं तुम्हे श्राप देता हूं कि आज के बाद तुम इस विशाल गगन पर राज नहीं कर सकोगे. तुम अपनी रोशनी यूं सारे जगत में फैला नहीं सकोगे. आज के बाद कोई भी तुम्हें देख ना सकेगा.”….यह सुन चंद्रमा भयभीत हो गए और सोचने लगे कि यदि ऐसा हुआ तो कोई भी मुझे देख ना सकेगा और मैं अपना उज्जवल प्रकाश सारे संसार पर बरसा ना सकूंगा. वे तुरंत आसमान से उतर गणेश के चरणों में आ गए और कहने लगे, “हे गणेश, मुझे क्षमा कीजिये. मैं अत्यंत घमंड से भर गया था और जान ना सका कि कितनी बड़ी भूल कर रहा हूं. कृप्या मुझे क्षमा कर अपने इस क्रोध से मुक्त कीजिये.”….चंद्रमा को यूं लाचार व उनके घमंड को टूटता देखा गणेश समझ गए कि चंद्रमा को अपनी गलती का आभास हो गया है. भगवान गणेश मुस्कुराए और उन्होंने चंद्र देवता को माफ किया परंतु उन्होंने कहा, “चंद्र, मैं तुम्हारे प्रति कहे गए अपने शब्दों को वापस तो नहीं ले सकता लेकिन इसके स्थान पर एक वरदान जरूर देता हूं. तुम्हारा आकार धीरे-धीरे आव्शय कम होगा लेकिन केवल एक बार ही ऐसा होगा जब कोई भी तुम्हे देख ना सकेगा. इसके बाद तुम फिर से समय के साथ वापस बढ़ते जाओगे और फिर 15 दिनों के अंतराल में अपने सम्पूर्ण भेष में नजर आओगे.”…यह सुन चंद्रमा को कुछ प्रसन्नता हुई और उन्होंने भगवान गणेश का आभार प्रकट किया. चंद्रमा को कुछ खुश देख गणेश बोले, “लेकिन मैं एक और बात कहना चाहूंगा.” यह सुन चंद्रमा फिर से चौकन्ने हो गए…गणेश मुस्कुराए व बोले, “डरने वाली बात नहीं है. तुमने चतुर्थी वाले दिन मेरा मजाक बनाया इसलिए भविष्य में यदि किसी ने भी चतुर्थी के दिन भूल से भी तुम्हारे दर्शन किये तो वो संकट में पड़ जाएगा.”…यह सुन चंद्रमा कुछ मायूस हो गए. यह देख गणेश बोले, “लेकिन इसमें चिंता का विषय नहीं है. यदि किसी ने इस दिन तुम्हारे दर्शन कर भी लिये तो वे ‘कृष्ण एवं श्यामन्तक रत्न की कथा सुन इस कठिनाई से बाहर आ सकेंगे.”…गणेश जी के इन्हीं उपदेशों के बाद तब से आज तक चंद्रमा अपनी उसी सजा का पालन कर रहा है. अपनी उपस्थिति पूर्ण रूप से खोने से पहले चंद्रमा धीरे-धीरे आकार में कम होने लगता है लेकिन बाद में फिर से बढ़ता हुआ अपने पूर्ण आकार में प्रकट होता है जिसे ‘पूर्णमासी’ भी कहा जाता है.

Posted in AAP, राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

अरविंद केजरीवाल के समर्थक आज शर्मिंदा हैं….


Dr. Manish Kumar :

अरविंद केजरीवाल के समर्थक आज शर्मिंदा हैं….

देश की ईमानदार पार्टी शुरू के ओवर में ही लड़खड़ा गई. आज आम आदमी पार्टी ने अपने चुनाव अभियान की पहली रणनीति का पटाक्षेप किया था. पार्टी ने मोदी फॉर पीएम एंड केजरीवाल फॉर सीएम का नारा दिया. बनारस के अनुभव के बाद केजरीवाल एंड कंपनी को यह बात भली भांति समझ में आ गई है कि जितना भी ड्रामा कर लो,, जितना भी झूठ बोल लो.. जितना भी अपने चेहेते पत्रकारों से टीवी पर प्रोग्राम करवा लो.. अखबार में लिखवा लो.. इस मोदी नामक सुनामी से नहीं लड़ा जा सकता है… लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी डर गई है.. शायद योगेंद्र यादव ने दिल्ली में लोकसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण किया होगा और वो इस निर्णय पर पहुंचे कि मोदी के खिलाफ बोलकर आप चुनाव नहीं जीत सकते… तो केजरीवाल के सामने सवाल खड़ा हो गया कि तो इस माहौल में क्या रणनीति होनी चाहिए.
किसी महान रणनीतिकार ने ही यह सुझाव दिया होगा कि मोदी पर हमला नहीं करते हैं.. सिर्फ बीजेपी को निशाने पर लेते हैं.. जनता को यह कह कर बेवकूफ बनाते हैं कि केजरीवाल का मुकाबला मोदी से है ही नहीं.. मोदी तो प्रधानमंत्री बन गए है.. ये तो दिल्ली का चुनाव है…. वाह .. वाह.. केजरीवाल को लगा कि हां यही सबसे सटीक रणनीति है.. मुख्यमंत्री और सत्ता का लालच किस तरह लोगों को अंधा बना देता है उसी का यह एक उदाहरण है. रणनीति तय हुई.. वीडियो बनाने का हुक्म जारी किया गया.. पिछले तीन दिनों से हर मित्र चैनलों पर इंटर्व्यू हुआ. सभी ने इस प्रायोजित सवाल को जरूर पूछा कि क्या दिल्ली में मोदी vs केजरीवाल होने वाला है. और हर बार केजरीवाल ने यही कहा कि दिल्ली के लोग कह रहें जी.. कि मोदी फार पीएम एंड केजरीवाल फार सीएम.. इतना ही नहीं सत्ता की भूख और मुख्यमंत्री बनने के लिए आतुर केजरीवाल ये भी घोषणा करने लगे कि बीजेपी का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बार बिना जनता से पूछे खुद को तो मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया ही साथ ही जगदीश मुखी को भी बीजेपी का उम्मीदवार बना दिया.
दरअसल, पिछले तीन दिनों से इस रणनीति के लिए जमीन तैयार की गई. और आज आम आदमी पार्टी की वेबसाइट पर इस कैंपेन को लॉन्च किया गया.. वेबसाइट पर इसे प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया .. साथ में उस वीडियो को भी अपलोड किया गया.. जिसे इस कैपेंन के लिए विशेष रूप से बनाया गया था. वेबसाइट पर आते ही खेल उल्टा हो गया. सोशल मीडिया में यह प्रचारित होने लगा कि आम आदमी पार्टी मोदी के सामने नतमस्तक हो गई.. चुनाव से पहले ही हार मान ली है.. फिर कुछ टीवी चैनलों पर खबर चलने लगी.. जैसे ही पता चला कि ये कैंपेन बैकफायर कर गया.. लोग थू थू कर रहे हैं तो इस बैनर को वेबसाइट से फौरन हटा दिया गया.. वीडियो को डिलीट कर दिया गया..
इस खबर का खंडन पहले सोशल मीडिया पर किया गया. वो भी झूठ.. सफेद झूठ.. आम आदमी पार्टी के वेतनभोगी सोशल मीडिया गैंग ने यह फैलाया कि ये बीजेपी के लोगों ने मिथ्या प्रचार किया है.. लेकिन टीवी पर जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता ने गलती स्वीकार की.. लेकिन इसमें भी झूठ बोल दिया.. दिलीप पांडे ने कहा कि किसी वोलेंटियर ने वेबसाइट पर गलती से अपलोड कर दिया. वेबसाइट क्या फेसबुक है? जो चाहे वो पार्टी की वेबसाइट पर कुछ भी अपलोड कर दे… क्या सभी वोलेंटियर के पास पासवर्ड है.. नहीं.. यह दलील देश की जनता को मूर्ख बनाने के लिए दी गई जिन्हें ये पता नहीं होता कि वेबसाइट पर कैसे अपलोड किया जाता है.
दरअसल, आम आदमी पार्टी एक अत्यंत अपरिवक्व, सत्तालोलुप व महत्वाकांक्षी पार्टी है जो बिना सत्ता के अस्तित्वविहीन होने की कगार पर है. खबर ये है कि कई विधायक पार्टी की टिकट से लडना नहीं चाहते हैं.. पार्टी में अंदरुनी कलह और विरोधाभास संकट बिंदू तक पहुंच गए है.. पार्टी में कब विस्फोट होगा ये किसी को पता नहीं है लेकिन अरविंद केजरीवाल को पता है 2013 के चुनाव और 2014 के चुनाव में परिस्थितियां बिल्कुल बदल गई है.. अगर अबतक उन्हें पता नहीं है तो बहुत ही जल्द उन्हें पता चलने वाला है.. फिलहाल, मोदी के सामने नतमस्तक होकर केजरीवाल ने पार्टी के उन समर्थकों को शर्मिंदा किया है जो वाममोर्चा, नक्सली संगठन व कांग्रेस को छोड़ कर मोदी को हराने केजरीवाल के साथ आए थे.