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मर चुकी कुख्यात देशद्रोही पार्टी AMIM (ओवैसी) को जिवित किया था इंदिरा गाँधी ने []


[]मर चुकी कुख्यात देशद्रोही पार्टी AMIM
(ओवैसी) को जिवित किया था इंदिरा गाँधी ने []
=======================
देश के अंखडता को ताक पर कुर्सी का खेल
खेलना ऐसे भी नेहरू परिवार का पुराना आदत
रहा है।वह AMIM(ओवैसी की पार्टी) जो अपने
राष्ट्रद्रोही गतिविधियो के कारण पुरी तरह
समाप्त हो चुका था,उसे फिर से जिवीत कर दी नेहरू
की बेटी इंदिरा गाँधी ने।और यह सब हुआ मात्र
आन्ध्र में सत्ता हथिंयाने के लक्ष्य को लेकर।
AIMIM के तत्कालीन अध्यक्ष सलाहुद्दीन
ओबैसी (अकबरउद्दीन के बाप) और इंदिरा गाँधी में
बहुत ही ज्यादा निकटता थी,आप FBपर
UPLOADतस्वीर में देख सकते है इंदिरा इस
पार्टी के जलसे में है।और दुसरी तस्वीर
COMMENT BOXमें है जिसमें ओवैसी के बाप
“सलाउद्दीन ओवैसी के साथ है।खैर इस
निकटता के पीछे भी बहुत रोचक कहानी है –
इंदिरा गाँधी ने सलाहुद्दीन ओबैसी को हर तरह से
मदद दिया उसे खूब पैसा भी दिया गया मकसद एक
ही था की किसी भी कीमत पर आंध्रप्रदेश में
तेजी से लोकप्रिय नेता के तौर पर उभर रहे फिल्म
अभिनेता एनटी रामाराव को रोका जाये। एन
टी रामा राव को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी ने देश
को ताक पर रखकर बहुत ही गंदा खेल
खेला जिसकी कीमत देश आज
भी चूका रहा है।इंदिरा गाँधी ने MIM से गठबन्धन
करके उसे तीन लोकसभा और आठ विधानसभा सीट
पर जीत दिलाकर एक बड़ी राजनितिक ताकत दे
दी और साथ ही आजाद भारत में सांप्रदायिक
विद्वेष के लिये मशहूर
अलगाववादी हत्यारा ताकतों को केंद्र तक
का सीधा रास्ता प्रदान कर भारत में मुस्लिम
अलगाववाद को फिर से हवा दी।
अब आइये जरा इस AIMIM का बहुत ही संक्षेप में
काला इतिहास जान लें-:AIMIM (आल
इंडिया मजलिसें इत्तेहादुल
मुसलमीन) पार्टी हैदराबाद रियासत के दिनों की है।
इसकी स्थापना हैदराबाद के गद्दार निजाम नवाब
मीर उस्मान अली खान की सलाह से निजाम
समर्थक पार्टी के रूप मे 1927 में ULMA -E-
Mashaeqeen की उपस्थिति में हैदराबाद राज्य
के महमूद नवाज खान किलेदार द्वारा हुई थी और
तब यह केवल मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन
(एमआईएम) थी। इसकी पहली बैठक 12 नवंबर
1927 को नवाब महमूद नवाज खान के घर में
आयोजित की गयी थी ।
MIM भारत के साथ एकीकरण
की विरोधी थी इसका उद्देश्य स्वतंत्र मुस्लिम
राज्य स्थापित करना था।1938 मे बहादूर यार जंग
इसके अध्यक्ष चुने गये।बाद मे ब्रिटीश भारत मे
इसका मुस्लिम लीग (जो शुरू से धार्मिक आधार पर
अलग पाकिस्तान की माँग कर रही थी ) के साथ
इसका गठबंधन
हो गया ।भारत के साथ विलय का विरोध करने के
उद्देश्य
से एक मुस्लिम अलगाववादी संगठन (The
Razakars ) को MIM के साथ जोड़ा गया ।
तक़रीबन 150000-200000 सशस्त्र मुस्लिम
अलगाववादीयो को भारतीय सेना के साथ लड़ाई
और स्वतंत्र हैदराबाद बनाने के लिये तैयार
किया गया था।
लेकिन सरदार पटेल की सुझबूझ और त्वरित
निर्णय से गद्दारो के मंसुबो पर पानी फिर गया।
पटेल जी बदौलत भारत हैदराबाद का विलय करने में
सफल रहे । हैदराबाद के भारत मे विलय के साथ
ही 1948 मे इस नापाक संगठन पर प्रतिबंध
लगा दिया गया ।इसके तत्कालीन नेता कासिम
रिजवी को जेल मे डाल दिया गया ।1957 मे कासिम
रिजवी भारत सरकार के सामने रिहाई के लिये
गिड़गिड़ाया लेकिन पटेल जी ने उसे तुरंत भारत
छोड़कर पाकिस्तान जाने की शर्त रख दी।और वह
मान भी गया।कासीम रिजवी जो बहादुर यार जंग के
बाद अध्यक्ष बना था उसने यह शर्त मान ली।तब
1957 मे इसे रिहा किया गया
लेकिन जाते-जाते वह अपनी AIMIM
पार्टी को जिवित रखना चाहता था इसलिये उसने
इसके लिये कुख्यात भारत विरोधी और हिंदू
विरोधी नेता को ढ़ुँढ़ने लगा।क्योंकी उसका मुस्लिम
राष्ट्र का सपना अधुरा था और उसकी खोज
अब्दुल वाहिद ओवैसी के रूप में पुरी हुई।
उसको अध्यक्ष बनाकर वह पाक चला गया।इस
अब्दुल वाहिद ओवैसी को देशद्रोह के अपराध में
14 मार्च 1958 को जेल में डाल दिया गया।
जो 11माह तक जेल में रहा।इसे 5अक्टुबर,12,23,
24 अक्टुबर 1957 ,15नव, 9जनवरी 1958के
देशद्रोही भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार
किया गया था।यहाँ एक बात मै भुल गया की जिस
MIM को पटेल जी ने प्रतिबंधीत कर
दिया था उसी MIM पर से नेहरू ने प्रतिबंध
हटा लिया।और बाद में 1976में इस MIM के नाम
बदलकर ओवैसी ने AIMIM कर दिया।इसके बाद
उसने अपने बेटा सलाउद्दीन ओवैसी को अध्यक्ष
बना दिया जो अपने बाप की तरह कुख्यात हिंदू
विरोधी था।सलाउद्दीन ओवैसी के तीन बेटे
-1.असुद्दीन ओवैसी,2.अकबरउद्दीन
ओवैसी 3.बुराहुद्दीन ओवैसी।2008 में सलाउद्दीन
ओवैसी ने अपने बड़े बेटे असुद्दीन
ओवैसी को अध्यक्ष बनाया।एक अकबरउद्दीन
ओवैसी है जो 15 मिनट में भारत को बर्बाद करने
की खुलेआम धमको दे चूका है।एक बात और
NOTEकर ले जो MIM पुरी तरह समाप्त
हो चुका था।तमाम प्रयास करने के बाद अब्दुल
वाहिद ओवैसी अपनी पार्टी को विस्तार नही कर
पाया उसे इंदिरा गाँधी ने बेटे सलाउद्दीन ओवैसी के
साथ मिलकर केवल कुर्सी के लिये फिर से जिवित
कर दिया।नेहरू ने जहाँ MIMपर से प्रतिबंध
हटाया उसके बेटी इंदिरा ने विस्तार किया।और यह
सब खेल हुआ सिर्फ कुर्सी के लिये।
मित्रो,जिस पार्टी के लिये देश की अखंडता से
बढ़कर कुर्सी रही है,क्या उस पार्टी को वजुद में
रहना देशहित में हो सकता है? कदापि नही!
अतः आपको देश के अखंडता के लिये काँग्रेस
को भारत-भूमि से पुरी तरह समाप्त
करना ही होगा,क्योंकी काँग्रेस को रहते हुए देश के
उपर विभाजन का बादल सदा मंडराता ही रहेगा।
इसलिये भारत से जबतक काँग्रेस का नामोनिशान
न मिट जाये तबतक हम भारतभक्तो को चुप
नही बैठना चाहिए!!

[]मर चुकी कुख्यात देशद्रोही पार्टी AMIM
(ओवैसी) को जिवित किया था इंदिरा गाँधी ने []
=======================
देश के अंखडता को ताक पर कुर्सी का खेल
खेलना ऐसे भी नेहरू परिवार का पुराना आदत
रहा है।वह AMIM(ओवैसी की पार्टी) जो अपने
राष्ट्रद्रोही गतिविधियो के कारण पुरी तरह
समाप्त हो चुका था,उसे फिर से जिवीत कर दी नेहरू
की बेटी इंदिरा गाँधी ने।और यह सब हुआ मात्र
आन्ध्र में सत्ता हथिंयाने के लक्ष्य को लेकर।
AIMIM के तत्कालीन अध्यक्ष सलाहुद्दीन
ओबैसी (अकबरउद्दीन के बाप) और इंदिरा गाँधी में
बहुत ही ज्यादा निकटता थी,आप FBपर
UPLOADतस्वीर में देख सकते है इंदिरा इस
पार्टी के जलसे में है।और दुसरी तस्वीर
COMMENT BOXमें है जिसमें ओवैसी के बाप
"सलाउद्दीन ओवैसी के साथ है।खैर इस
निकटता के पीछे भी बहुत रोचक कहानी है –
इंदिरा गाँधी ने सलाहुद्दीन ओबैसी को हर तरह से
मदद दिया उसे खूब पैसा भी दिया गया मकसद एक
ही था की किसी भी कीमत पर आंध्रप्रदेश में
तेजी से लोकप्रिय नेता के तौर पर उभर रहे फिल्म
अभिनेता एनटी रामाराव को रोका जाये। एन
टी रामा राव को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी ने देश
को ताक पर रखकर बहुत ही गंदा खेल
खेला जिसकी कीमत देश आज
भी चूका रहा है।इंदिरा गाँधी ने MIM से गठबन्धन
करके उसे तीन लोकसभा और आठ विधानसभा सीट
पर जीत दिलाकर एक बड़ी राजनितिक ताकत दे
दी और साथ ही आजाद भारत में सांप्रदायिक
विद्वेष के लिये मशहूर
अलगाववादी हत्यारा ताकतों को केंद्र तक
का सीधा रास्ता प्रदान कर भारत में मुस्लिम
अलगाववाद को फिर से हवा दी।
अब आइये जरा इस AIMIM का बहुत ही संक्षेप में
काला इतिहास जान लें-:AIMIM (आल
इंडिया मजलिसें इत्तेहादुल
मुसलमीन) पार्टी हैदराबाद रियासत के दिनों की है।
इसकी स्थापना हैदराबाद के गद्दार निजाम नवाब
मीर उस्मान अली खान की सलाह से निजाम
समर्थक पार्टी के रूप मे 1927 में ULMA -E-
Mashaeqeen की उपस्थिति में हैदराबाद राज्य
के महमूद नवाज खान किलेदार द्वारा हुई थी और
तब यह केवल मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन
(एमआईएम) थी। इसकी पहली बैठक 12 नवंबर
1927 को नवाब महमूद नवाज खान के घर में
आयोजित की गयी थी ।
MIM भारत के साथ एकीकरण
की विरोधी थी इसका उद्देश्य स्वतंत्र मुस्लिम
राज्य स्थापित करना था।1938 मे बहादूर यार जंग
इसके अध्यक्ष चुने गये।बाद मे ब्रिटीश भारत मे
इसका मुस्लिम लीग (जो शुरू से धार्मिक आधार पर
अलग पाकिस्तान की माँग कर रही थी ) के साथ
इसका गठबंधन
हो गया ।भारत के साथ विलय का विरोध करने के
उद्देश्य
से एक मुस्लिम अलगाववादी संगठन (The
Razakars ) को MIM के साथ जोड़ा गया ।
तक़रीबन 150000-200000 सशस्त्र मुस्लिम
अलगाववादीयो को भारतीय सेना के साथ लड़ाई
और स्वतंत्र हैदराबाद बनाने के लिये तैयार
किया गया था।
लेकिन सरदार पटेल की सुझबूझ और त्वरित
निर्णय से गद्दारो के मंसुबो पर पानी फिर गया।
पटेल जी बदौलत भारत हैदराबाद का विलय करने में
सफल रहे । हैदराबाद के भारत मे विलय के साथ
ही 1948 मे इस नापाक संगठन पर प्रतिबंध
लगा दिया गया ।इसके तत्कालीन नेता कासिम
रिजवी को जेल मे डाल दिया गया ।1957 मे कासिम
रिजवी भारत सरकार के सामने रिहाई के लिये
गिड़गिड़ाया लेकिन पटेल जी ने उसे तुरंत भारत
छोड़कर पाकिस्तान जाने की शर्त रख दी।और वह
मान भी गया।कासीम रिजवी जो बहादुर यार जंग के
बाद अध्यक्ष बना था उसने यह शर्त मान ली।तब
1957 मे इसे रिहा किया गया
लेकिन जाते-जाते वह अपनी AIMIM
पार्टी को जिवित रखना चाहता था इसलिये उसने
इसके लिये कुख्यात भारत विरोधी और हिंदू
विरोधी नेता को ढ़ुँढ़ने लगा।क्योंकी उसका मुस्लिम
राष्ट्र का सपना अधुरा था और उसकी खोज
अब्दुल वाहिद ओवैसी के रूप में पुरी हुई।
उसको अध्यक्ष बनाकर वह पाक चला गया।इस
अब्दुल वाहिद ओवैसी को देशद्रोह के अपराध में
14 मार्च 1958 को जेल में डाल दिया गया।
जो 11माह तक जेल में रहा।इसे 5अक्टुबर,12,23,
24 अक्टुबर 1957 ,15नव, 9जनवरी 1958के
देशद्रोही भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार
किया गया था।यहाँ एक बात मै भुल गया की जिस
MIM को पटेल जी ने प्रतिबंधीत कर
दिया था उसी MIM पर से नेहरू ने प्रतिबंध
हटा लिया।और बाद में 1976में इस MIM के नाम
बदलकर ओवैसी ने AIMIM कर दिया।इसके बाद
उसने अपने बेटा सलाउद्दीन ओवैसी को अध्यक्ष
बना दिया जो अपने बाप की तरह कुख्यात हिंदू
विरोधी था।सलाउद्दीन ओवैसी के तीन बेटे
-1.असुद्दीन ओवैसी,2.अकबरउद्दीन
ओवैसी 3.बुराहुद्दीन ओवैसी।2008 में सलाउद्दीन
ओवैसी ने अपने बड़े बेटे असुद्दीन
ओवैसी को अध्यक्ष बनाया।एक अकबरउद्दीन
ओवैसी है जो 15 मिनट में भारत को बर्बाद करने
की खुलेआम धमको दे चूका है।एक बात और
NOTEकर ले जो MIM पुरी तरह समाप्त
हो चुका था।तमाम प्रयास करने के बाद अब्दुल
वाहिद ओवैसी अपनी पार्टी को विस्तार नही कर
पाया उसे इंदिरा गाँधी ने बेटे सलाउद्दीन ओवैसी के
साथ मिलकर केवल कुर्सी के लिये फिर से जिवित
कर दिया।नेहरू ने जहाँ MIMपर से प्रतिबंध
हटाया उसके बेटी इंदिरा ने विस्तार किया।और यह
सब खेल हुआ सिर्फ कुर्सी के लिये।
मित्रो,जिस पार्टी के लिये देश की अखंडता से
बढ़कर कुर्सी रही है,क्या उस पार्टी को वजुद में
रहना देशहित में हो सकता है? कदापि नही!
अतः आपको देश के अखंडता के लिये काँग्रेस
को भारत-भूमि से पुरी तरह समाप्त
करना ही होगा,क्योंकी काँग्रेस को रहते हुए देश के
उपर विभाजन का बादल सदा मंडराता ही रहेगा।
इसलिये भारत से जबतक काँग्रेस का नामोनिशान
न मिट जाये तबतक हम भारतभक्तो को चुप
नही बैठना चाहिए!!

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